मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                                               द्वितीय सत्र

 

 

फरवरी, 2024 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 9 फरवरी, 2024

 

(20 माघ, शक संवत्‌ 1945)

 

 

[खण्ड-  2]                                                                                                              [अंक- 3]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनांक 9 फरवरी, 2024

 

(20 माघ, शक संवत्‌ 1945 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत् हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)--  अध्‍यक्ष महोदय, कल आपने एक बहुत बड़ा निर्णय लिया और हमारा ध्‍यान चूक गया था, आज मैंने देखा तो मुझे लगा कि सदन में अगर आपको धन्‍यवाद नहीं दिया जायेगा तो शायद यह आपके साथ ज्‍यादती हो जायेगी. कल आपने जो निर्णय लिया है 805 प्रश्‍न जिनका कि अस्तित्‍व समाप्‍त हो गया था और आपने फिर से उनके उत्‍तर की अपेक्षा सरकार से की है और निर्देश भी दिये हैं कि उन 800 प्रश्‍नों के उत्‍तर आयेंगे, शायद मेरे ख्‍याल से मेरी जानकारी में इस प्रकार पहली बार कभी विधान सभा ने किया है कि जो प्रश्‍न करीब-करीब मृत हो गये थे उनको आपने फिर से जिंदा करके सरकार से जवाब मांगा है अध्‍यक्ष जी, मैं सदन की ओर से आपको धन्‍यवाद देता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह--  अध्‍यक्ष महोदय, यह अमृतकाल भी तो चल रहा है, अमृत सर्वत्र बंट रहा है.

 

 

 

 

 

 

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

        प्रश्‍न संख्‍या-1         -       (अनुपस्थित)

 

थाने को अपवर्जित किया जाना

[गृह]

2. ( *क्र. 767 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन गृह विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन के आदेश क्र./01/1770880/2023/वी-3/दो भोपाल, दिनांक 02.01.2024 के अनुसार पुलिस थानों/चौकियों की सीमा निर्धारण किये जाने का प्रावधान है, जिसमें प्रश्‍नकर्ता के खरगापुर विधान सभा-47 के ग्राम-गुड़ा नज. पाली, मोररमन्‍ना, मगरई, पाली, फूलपुर, भटगोरा आदि ग्राम थाना खरगापुर से अपवर्जित (बदलकर) थाना जतारा में पूर्व की भाँति किये जाने हेतु ग्रामीणों के आवेदन पत्रों सहित प्रश्‍नकर्ता के पत्र क्र. 044, दिनांक 04.01.2024 को जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ को प्रस्ताव पत्र दिया है? क्या वर्णित ग्रामों को थाना जतारा में जोड़े जाने के आदेश जारी करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (ख) क्या थाना जतारा में इन ग्रामों को जोड़े जाने से आम जनता की सुविधा अनुसार अनुविभागीय कार्यालय के कार्य, न्यायालय के कार्य, जेल के कार्य, स्वास्थ्य विभाग के कार्यों का लाभ आम जनता को प्राप्त होगा? क्योंकि थाना खरगापुर की दूरी अधिक है, जबकि जतारा थाना की दूरी कम है और वर्णित सभी शासकीय कार्यालयों से आम जनता के कार्य रहते हैं, इसलिये आम जनता के हितों को दृष्टिगत रखते हुये थाना खरगापुर से इन ग्रामों को अपवर्जित (बदलकर) थाना जतारा में जोड़े जाने का आदेश जारी कर आम जनता के कार्यों को सुगम कब तक कर   दिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ। वर्ष 2021-2022 में सीमाओं के अधिकार क्षेत्र परिवर्तन हेतु प्रस्ताव/सुझाव जनप्रतिनिधियों एवं आमजन से प्राप्त हुए। तत्पश्‍चात ग्रामवासियों के पंचनामा/सुझाव प्राप्त कर जिला स्तरीय विचारण समिति के विचारण में रखा गया। जनता/जनप्रतिनिधियों की मांग ग्रामवासियों के पंचनामा प्रशासकीय भौगोलिक सुविधा क्षेत्र में गठित अपराधों में कानून व्यवस्था की स्थिति एवं कुशल पुलिस प्रबंधन को दृष्टिगत रखते हुए उक्त ग्रामों को दिनांक 11.05.2022 को थाना खरगापुर में जोड़ा गया। इसके विरूद्ध याचिकाकर्ता श्रीमती आशा सिंह गौर द्वारा म.प्र. राज्य व अन्य के विरूद्ध याचिका क्रमांक 12224/2022 वर्तमान में लंबित होकर मान. उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रश्‍नकर्ता का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। वर्णित ग्रामों को थाना खरगापुर में अपवर्जित कर थाना जतारा में जोड़े जाने के संबंध में मान. उच्च न्यायालय, जबलपुर के निर्णय के उपरान्त ही आवेदन पत्र पर कार्यवाही की जा सकेगी। (ख) उत्तरांश '''' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न जनता के हितों से जुड़ा हुआ है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा खरगापुर के 6 गांव फूलपुर, भटगोरा, मगरई, गुड़ा नज, पाली, मोररमन्‍ना को थाना खरगापुर से जोड़ दिया गया है. खरगापुर थाने की दूरी 30 से 35 किलोमीटर है, जतारा थाने की दूरी 5 से 10 किलोमीटर है, इसलिये इन गांवों को खरगापुर थाने से बदलकर जतारा थाने में जोड़ा जाये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं इस महान सदन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं तो मैं अपने राष्‍ट्र का अपनी पार्टी संगठन का और अपने पूर्वजों का स्‍मरण करता हूं और आपको भी धन्‍यवाद देता हूं कि आपने मुझे सदन में बोलने का अवसर प्रदान किया और आपके अध्‍यक्ष बनने का मेरा भी बड़ा ताल्‍लुकात है वह भी बताना चाह रहा हूं कि जब आप युवा मोर्चा के अध्‍यक्ष थे तो मैं भी युवा मोर्चा में था, आप जब भाजपा के अध्‍यक्ष बने ...

          उप नेता प्रतिपक्ष (श्री हेमंत कटारे)--  माननीय प्रश्‍नकाल का समय है कृपया कर आप इस महत्‍वपूर्ण समय को बाधित न करें, उनका उत्‍तर दीजिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल--  आप जब इस विधान सभा के अध्‍यक्ष बने हैं तो मैं प्रार्थना करता हूं कि आप बड़े-बड़े सदनों के अध्‍यक्ष बनते रहें.

          अध्‍यक्ष महोदय--  उत्‍तर पर आ जायें मंत्री जी.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल--  हमारी सम्‍मानीय सदस्‍या ने जो प्रश्‍न किया उसमें उनकी जानकारी के लिये बताना चाहता हूं कि जो 6 गांव हैं उन गांवों में गुड़ा की दूरी 10 किलोमीटर कम हुई है, पाली गांव की 17 किलोमीटर कम हुई है, मगरई गांव की 12 किलोमीटर कम हुई है, मोररमन्‍ना की 15 किलोमीटर कम हुई है और फूलपुर की यथावत है और यह निर्णय तत्‍कालीन जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर लिया गया है. धन्‍यवाद.         

          श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह असत्य है. 5 से 10 कि.मी. की दूरी पर खरगापुर थाना लगता है और अगर उनको  अगर न्यायालय जाना है तो टीकमगढ़ जाना पड़ता है अगर एसडीओडी से काम पड़ता है तो टीकमगढ़ जाना पड़ता है तो टीकमगढ़ जाएंगे तो कहां से जाएंगे तो जतारा होते हुए जबकि जतारा में थाना,न्यायालय,एसडीओपी सभी काम उनका होता था इसीलिये जबर्दस्ती में यह गांव खरगापुर में जोड़े गये हैं. मेरा मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि थानों की बात आई थी इसीलिये मैंने अपना प्रश्न पूछा है और उन गांवों को जतारा थाना में  जोड़ा जाए. उनको बहुत परेशानी है. मैं जब भी क्षेत्र में जाती हूं तो लोग मेरे सामने रोते हैं और कहते हैं कि हम पूरे जिले का भ्रमण करते हुए अपना काम करवा पाते हैं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य अपने विधान सभा क्षेत्र के गांव निकालकर दूसरे विधान सभा क्षेत्र में भेजना चाहती हैं. अब यह उनका अपना सोच है परन्तु जो उन्होंने बात कही है तो मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इसी विषय को लेकर श्रीमती आशा सिंह गौर द्वारा एक याचिका उच्च न्यायालय में लगाई गई है चूंकि उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामला है इसीलिये इसमें अभी कोई भी टिप्पणी किया जाना उचित नहीं होगा.

          श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सहमत हूं कि आशा सिंह द्वारा हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी लेकिन याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लिये जाने का सहमति पत्र मुझे,एस.पी.साहब,कलेक्टर साहब को दिया गया है इसलिये माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने जो निर्णय लिया है तो मेरे क्षेत्र के इन 6 गांवों को थाना खरगापुर से बदलकर थाना जतारा में जोड़े जाने का अनुरोध है आपसे.

          अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.

          उप नेता प्रतिपक्ष(श्री हेमंत कटारे) - (नेता प्रतिपक्ष के आसन से बोलते हुए) अध्यक्ष महोदय,आपका संरक्षण चाहूंगा.

          सहकारिता मंत्री(श्री विश्वास सारंग) - अध्यक्ष महोदय,मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. यह नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से बो रहे हैं इनको समझा तो दीजिये.  यह नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से नहीं बोल सकते. अपनी कुर्सी से बोलिये. इनका प्रबोधन तो करवा दीजिये.

          अध्यक्ष महोदय - हेमंत जी, नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री की कुर्सी नियत रहती है इसका ध्यान रखना चाहिये.

          श्री हेमंत कटारे - (अपने आसन से बोलते हुए) अध्यक्ष महोदय,मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. जो माननीय विधायक ने प्रश्न उठाया है उसमें न्यायालय की आड़ में माननीय मंत्री जी पूरे प्रश्न का सही उत्तर नहीं दे रहे हैं. पहली चीज यह कि जनता के हित में क्या है चूंकि जनता ने उनको चुनकर यहां प्रतिनिधि बनाकर भेजा है कि वे जनहित के कार्य करेंगी और जब वे चाह रही हैं तो न ही वहां के जो पुलिस अधिकारी हैं उनको इतना ज्ञान नहीं है जितना कि हमारी आदरणीय विधायक को होगा. एक तरफ न्यायालय वह अलग दिशा में है कलेक्ट्रेट अलग दिशा में है थाना अलग दिशा में है. इसीलिये मैं चाहूंगा कि आदरणीय विधायक से प्रस्ताव तो लिया जाना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय - हेमंत जी, आपके मन में कोई पूरक प्रश्न है तो करो.

          श्री हेमंत कटारे - अध्यक्ष महोदय,हमारी आदरणीय विधायक का प्रस्ताव लिये बिना उनके विधान सभा क्षेत्र में  गांवों को बदला जाए यह गलत है.

          अध्यक्ष महोदय - सम्माननीय विधायक ने प्रश्न किया. उसके बाद पूरक प्रश्न किया और फिर तीसरी बार भी वे बोलीं तो  मैंने रोका नहीं क्योंकि महिला विधायक हैं उनकी अपनी पीड़ा सामने आनी चाहिये लेकिन सरकार जो उत्तर दे रही है उस उत्तर पर भी हमको ध्यान देना चाहिये. कोर्ट का निर्णय उन्होंने बताया. जो माननीय सदस्य के पास जानकारी है शायद वह सरकार के पास नहीं पहुंची हो.

          श्री हेमंत कटारे - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी यह कह रहे हैं कि कोर्ट का निर्णय आने तक रुकें.अब आप एक चीज समझिए. ऐसे तो हर व्यक्ति एक पिटीशन किसी भी विषय पर लगा देगा और हर मंत्री जवाब दे देगा कि वह कोर्ट में विचाराधीन है तो कभी कोई निर्णय ही नहीं होगा.

          अध्यक्ष महोदय - हेमंत जी, प्रश्नकाल में हमको प्रश्नकाल की मर्यादा तक सीमित रहना पड़ेगा. प्रश्न करो, मंत्री का उत्तर सुनो. मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं उप नेता प्रतिपक्ष से सहमत हूं कि जनप्रतिनिधि की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिये. यह जो निर्णय हुआ है. यह तत्कालीन विधायक माननीय राहुल लोधी जी के सुझाव पर तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर ही कलेक्टर समिति ने लिया है. अब जो नयी विधायक वहां से बनी हैं उनका प्रस्ताव आया है. उससे पहले चूंकि न्यायालय में विचाराधीन है तो उस पर कोई निर्णय नहीं कर सकता.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, याचिकाकर्ता ने अगर याचिका वापस लेने का प्रस्‍ताव दिया है तो इस पर केवल इतना कर दें कि जब वे याचिका कोर्ट से वापस ले लेंगी, तब आप ये 6 गांव जतारा में जोड़ेंगे क्‍या, इतना प्रश्‍न है महोदय आपसे.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- हमारे जिले का मामला है. वर्तमान में पूरे प्रदेश में युक्‍तियुक्‍तकरण का काम चल रहा है. आपके निर्देश पर चल रहा है, मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर चल रहा है. अगर माननीय विधायक जी ने प्रस्‍ताव दिया है तो उसे मान लेने में आपको क्‍या दिक्‍कत है, आप पूर्व विधायक की बात कर रहे हैं, वर्तमान विधायक के प्रस्‍ताव को क्‍यों नहीं मान लेते आप ?

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- मामला कोर्ट में है.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, कोर्ट में नहीं है. जिस दिन आप निर्णय ले लेंगे, वह कोर्ट से वापस ले लेंगी.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- कोर्ट से वापस लेने के लिए तैयार हैं.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- कोर्ट ने उस पर स्‍टे भी नहीं किया है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- मुझे लगता है कि माननीय मंत्री जी ने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है कि मामला सब-ज्‍यूडिश है, वह अगर वापस ले लें, उसके बाद विचार किया जा सकता है.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यह आश्‍वासन आप दे दें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- हो गया ना.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- कोर्ट से वापस ले लेंगे तो आप कर देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- वापस लेना तो चाहिए भई.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- वापस लेने के लिए तैयार हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- पहले वापस ले लें, उसके बाद सरकार विचार करेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय -- संसदीय कार्यमंत्री जी का वक्‍तव्‍य मंत्रि-मण्‍डल की सामूहिक जिम्‍मेवारी के अंतर्गत आता है. संसदीय कार्यमंत्री ने कहा है तो हमें संतुष्‍ट होना चाहिए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- वापस ले लें, उसके बाद सरकार विचार करेगी.

उद्योगों की स्‍थापना

[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]

3. ( *क्र. 885 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले के जतारा विधानसभा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा उद्योग खोले जाने बाबत् प्रश्‍नकर्ता द्वारा कब-कब विधानसभा में प्रश्‍न किए गए हैं? कृपया सम्पूर्ण जानकारी दें एवं यह भी बताएं कि विभाग द्वारा उद्योग लगाने/खोले जाने हेतु शासन ने क्या-क्या मापदण्ड बनाए हैं? कृपया ऐसे समस्त आदेशों की छायाप्रतियां प्रदाय करें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के आधार पर यह बताएं कि इस विभाग के द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक कोई उद्योग लगा हुआ है कि नहीं? अगर नहीं लगे हैं, तो क्या-क्या कारण हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के आधार पर बताएं कि जनवरी 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब, कहां-कहां इन्‍वेस्टर्स मीट्स हुई हैं और किस-किस कार्य का किस उद्योगपति द्वारा कितनी-कितनी राशि का इन्वेस्ट किया गया है? कहां-कहां के उद्योग लगाने हेतु प्रश्‍न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही हो चुकी है और क्या-क्या शेष है? कृपया प्रत्येक की अद्यतन जानकारी से अवगत कराएं। (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (घ) के आधार पर बताएं कि टीकमगढ़ जिले के जतारा विधानसभा क्षेत्र में जहां धसान नदी, सुखनई नदी, सपरार नदी एवं उर नदी बहती है, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस क्षेत्र में विभाग द्वारा शासन द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक उद्योग लगाने हेतु क्या-क्या पहल की जा चुकी है? निश्चित समय-सीमा सहित बताएं, कब तक जतारा विधानसभा क्षेत्र में बेरोज़गार को रोज़गार प्रदाय हेतु शासन उद्योग खोलने की स्वीकृति देगा?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) टीकमगढ़ जिले के जतारा विधानसभा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग द्वारा उद्योग खोले जाने बाबत् प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रश्‍न क्रमांक 560 (सत्र फरवरी, 2019), 982 (सत्र फरवरी, 2022), 672 (सत्र दिसम्‍बर, 2022) एवं 2246 (सत्र फरवरी, 2023) विधानसभा में प्रश्‍न किए गए हैं। उद्योगों की स्‍थापना उद्यमियों/निवेशकों द्वारा की जाती है तथा राज्‍य शासन द्वारा नीति अंतर्गत भूमि एवं अन्‍य सुविधाएं उपलब्‍ध करायी जाती हैं। (ख) जी नहीं। विधानसभा क्षेत्र जतारा, जिला-टीकमगढ़ में विभाग के अधीन एम.पी. इण्‍डस्‍ट्रि‍यल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कोई औद्योगिक क्षेत्र स्‍थापित नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के आधार पर जनवरी 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग के अंतर्गत इन्‍वेस्‍टर मीट का आयोजन नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्‍नांश की जानकारी निरंक है। (घ) विभाग द्वारा उद्योग स्‍थापित नहीं किया जाता है, अपितु निवेशकों को औद्योगिक इकाई स्‍थापित करने हेतु प्रोत्‍साहित किया जाता है।

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सबसे पहले अपने मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहते हैं. उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश के प्रत्‍येक जिले में उद्योग स्‍थापित करने के लिए संभागीय बैठकें जो हुई हैं, उनमें बहुत अच्‍छी पहल की है कि हम हर जिला मुख्‍यालयों के माध्‍यम से वहां पर उद्योग लगाने के लिए पहल करेंगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी जो हम आपसे प्रश्‍न करना चाहते हैं, वह यह है कि टीकमगढ़ जिले का चाहे टीकमगढ़ रेलवे स्‍टेशन हो, चाहे झांसी रेलवे स्‍टेशन हो, चाहे हरपालपुर रेलवे स्‍टेशन हो, जब भी हम यात्रा करने के लिए कहीं भी जाते हैं तो वहां पर रेलवे स्‍टेशनों पर हमारे टीकमगढ़ जिले के लोग बाहर पलायन करने के लिए जाते हैं. जबकि हमारे टीकमगढ़ जिले में खनिज का अपार भण्‍डार है और खनिज के उद्योग न होने के कारण हमारे जिले के लोग अपना पेट पालने के लिए बाहर जाते हैं. सबसे पहले हमारा प्रश्‍न माननीय मंत्री जी से यह है कि जिस प्रकार से मध्‍यप्रदेश के हर जिले में जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र स्‍थापित हैं तो उसी प्रकार से औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग के कार्यालय क्‍या हर जिले में खोले जाएंगे, यह हम माननीय मंत्री से पूछना चाहते हैं.

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले तो मैं सदन में पहली बार बोल रहा हूँ तो माननीय अपने मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद करना चाहूँगा. अध्‍यक्ष महोदय, आपका भी धन्‍यवाद कि मुझे बोलने का अवसर मिला है. माननीय विधायक जी, यह बात सही है कि टीकमगढ़ में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग का औद्योगिक केन्‍द्र  नहीं है. हम लोग इसका प्रयास कर रहे हैं. यह बात भी सही है कि बुंदेलखण्‍ड में खनिज का भण्‍डार है और पलायन हो रहा है, इस पर हम विचार कर रहे हैं. निश्‍चित रूप से इस पर विचार करके हम औद्योगिक केन्‍द्र खोलने का प्रयास करेंगे.    

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह प्रश्‍न था कि जैसे जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र जो हर जिले में हैं, वैसे औद्योगिक नीति एवं निवेश वाले जो केन्‍द्र हैं, वृहद उद्योग लगाने के लिए, क्‍या वह कार्यालय खोले जाएंगे, यह हमारा प्रश्‍न था.

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय सदस्‍य महोदय जी, हमारी जो इन्‍वेस्‍टर्स मीट सम्‍मिट होती है, उसमें भी हम ये उद्योग खोलने का विषय रखेंगे और निश्‍चित रूप से प्रयास करेंगे कि टीकमगढ़ में उद्योग खुलें.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय...

          अध्‍यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, दोनों सप्‍लीमेंट्री हो गए हैं और मुझे लगता है कि मंत्री जी ने संतोषजनक उत्‍तर दिया है. आप व्‍यक्‍तिगत भी मिल सकते हैं.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह तो बात आई नहीं कि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग का जो कार्यालय है, वह हर जिले में खुलेगा या नहीं खुलेगा, यह बात तो आई नहीं. लेकिन उनकी बात से हम संतुष्‍ट हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा यह है कि हमारे प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया गया कि ....

          अध्‍यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, आप पुराने सदस्‍य हैं. प्रश्‍न पर पहला और दूसरा, दो ही सप्‍लीमेंट्री किए जा सकते हैं. यह भाषण वाला सत्र नहीं है.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह प्रश्‍न बहुत महत्‍वपूर्ण है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, अब रहने दीजिए.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है. आपको और मंत्री जी को धन्‍यवाद.

 

आंगनवाड़ी भवनों की स्थिति व योजनाओं का क्रियान्‍वयन

[महिला एवं बाल विकास]

        4. ( *क्र. 898 ) श्री देवेन्द्र पटेल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) रायसेन जिले में वर्तमान में परियोजनावार कितने आंगनवाड़ी केन्‍द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं? क्‍या इन आंगनवाड़ी भवनों में स्‍वच्‍छ पेयजल व्‍यवस्‍था व‍ विद्युत कनेक्‍शन हैं? किन-किन में हैं, किन-किन में नहीं? पेयजल व्‍यवस्‍था व विद्युत व्‍यवस्‍था हेतु क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं व कब तक उक्‍त सुविधायें उपलब्ध करा दी जावेंगी? (ख) रायसेन जिले में बच्‍चों को कुपोषण मुक्‍त करने के लिए राष्‍ट्रीय पोषण मिशन व अन्‍य विभागीय योजनाओं के अंतर्गत गत दो वर्षों में क्‍या-क्‍या प्रयास किये गये? क्‍या इन प्रयासों के फलस्‍वरूप जिले में कुपोषित बच्‍चों की संख्‍या में कमी हुई है? यदि नहीं, तो क्‍यों? कुपोषण मुक्ति के लिये जिले में गत दो वर्षों में किस-किस कार्य में कितनी राशि व्‍यय की गई? (ग) क्‍या रायसेन जिला मीजल्‍स मुक्‍त है? यदि नहीं, तो डी.पी.टी./मीजल्‍स बूस्‍टर लगाये जाने हेतु क्‍या योजना है? इस हेतु क्‍या कार्यवाही प्रचलित है?

        महिला एवं बाल विकास मंत्री ( सुश्री निर्मला भूरिया ) : (क) रायसेन जिले में वर्तमान में परियोजनाओं में 1141 आंगनवाड़ी केन्द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं। इन केन्द्रों में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था व 419 आंगनवाड़ी भवनों में विद्युत कनेक्‍शन हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विद्युत व्यवस्था हेतु विद्युत वितरण कम्पनी से कनेक्‍शन हेतु निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में निश्चित समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है। (ख) पूरे प्रदेश के अनुरूप रायसेन जिले में भी कुपोषण निवारण हेतु मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम (M.M.B.A.S.K.) का क्रियान्वयन किया जा रहा है, साथ ही राष्ट्रीय पोषण मिशन अंतर्गत पोषण माह एवं पोषण पखवाड़े के आयोजन किये गये हैं। जी हाँ। कुपोषण मुक्ति हेतु मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम (M.M.B.A.S.K.) अंतर्गत राशि का आवंटन/व्यय नहीं किया गया है। राष्ट्रीय पोषण मिशन अंतर्गत उल्लेखित गतिविधियों हेतु व्यय राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ। रायसेन जिले में डी.पी.टी. मीजल्स टीकाकरण, नियमित टीकाकरण के रूप में किया जाता है एवं समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण किया जाता है।

          श्री देवेन्‍द्र पटेल  - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे रायसेन जिले में 2,000 आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं, जिसमें से मात्र 1,141  में भवन हैं और 1,141 भवन में मात्र 419 में विद्युत कनेक्‍शन हुए हैं, साथ ही जो विभाग के द्वारा जवाब आया है कि प्रत्‍येक आंगनवाड़ी केन्‍द्र में पानी की समुचित व्‍यवस्‍था है जबकि हमारे यहां सिलवानी विधान सभा क्षेत्र में करीब 15 गांव ऐसे हैं, जहां पर डेढ़-दो किलोमीटर दूर से बैलगाड़ी से पानी की टंकी से आज भी गांव के लोग जनवरी के बाद पीने का पानी लाते हैं, तो फिर उन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पानी की समुचित व्‍यवस्‍था कैसे हो पाती है ? माननीय मंत्री जी बताएं.  

          उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रायसेन जिले में कुल 1,858 केन्‍द्र स्‍वीकृत हैं, उसमें 1,462 आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं और 396 मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं, इनमें से 1,141 आंगनवाड़ी केन्‍द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं, बाकि कुछ अन्‍य शासकीय भवनों को हमने लिया है और कुछ किराये में संचालित हैं. पानी का यह विषय महत्‍वपूर्ण है, जहां पर हैंडपंप लगे हुए हैं, जहां अपनी बिल्डिंग हैं, वहां व्‍यवस्‍था की गई है, कुछ जगह पर कुएं से पानी की व्‍यवस्‍था की गई है लेकिन कुछ जगह पर पानी दूर से भी लाकर, आंगनवाडि़यों में जो बच्‍चे आते हैं, उनके लिए पानी की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था की गई है. इसलिए उत्‍तर में जो लिखा गया है, वह सही लिखा है कि मैनुअल व्‍यवस्‍था करके बच्‍चों तक पानी बुलवाने की व्‍यवस्‍था की गई है.

          श्री देवेन्‍द्र पटेल  - अध्‍यक्ष महोदय, जहां गांव के लोग बैलगाड़ी से पानी लाते हैं, वहां आंगनवाड़ी वालों ने किस चीज से पानी लाने की व्‍यवस्‍था की है. मंत्री जी यह बताने का कष्‍ट करेंगे.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - अध्‍यक्ष महोदय, जैसे गांव के लोग दूर से पानी लाते हैं, वैसे आंगनवाड़ी के लिए भी व्‍यवस्‍था करनी पड़ती है तो टैंकरों से वहां पानी बुलवाने की व्‍यवस्‍था की जाती है.

          श्री देवेन्‍द्र पटेल  -  अध्‍यक्ष महोदय, उसके लिए क्‍या शासन ने कुछ आवंटन किया है, जिससे वह पानी ला सकें क्‍योंकि ऐसी व्‍यवस्‍था है नहीं.  

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - यहां से निर्देश हैं. सभी आंगनवाड़ी केन्‍द्र में पर्याप्‍त पानी की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए और वहां जिला कलेक्‍टर और आंगनवाड़ी के अधिकारी को मिलकर वैकल्पिक व्‍यवस्‍था करनी पड़ती है, तो वह व्‍यवस्‍था वहां पर करते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, आप कलेक्‍टर को अवगत करा दें. अगर कोई दिक्‍कत आ रही है, तो  उसको दूर करें.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - जी, अध्‍यक्ष जी. ऐसी जगह यदि कोई हो तो बता दीजिये. हम कलेक्‍टर को एक बार बोल देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - देवेन्‍द्र जी, आप आंगनवाड़ी का नाम मंत्री जी को बता दीजिये.

          श्री देवेन्‍द्र पटेल  - जी हां.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य का जो प्रश्‍न है, वह बहुत गंभीर है. आधे से ज्‍यादा ऐसी आंगनवाडि़यां हैं, जहां पर आज भी कलेक्‍टर से बोलें कि आप साधन उपलब्‍ध करवाइये, वह कहते हैं कि हमारे पास इसके लिए फण्‍ड नहीं है, इसके लिए कोई पैसा नहीं दिया गया है. आदरणीय मंत्री जी, जब तक इसके लिए कोई राशि सुनिश्चित नहीं की जायेगी और कलेक्‍टर को इसके आदेश नहीं दिए जाएंगे, गांव के अन्‍दर आंगनवाडि़यों में बहुत बुरी स्थिति होने वाली है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पेयजल के निर्देश हैं, हम समय-समय पर वहां बोर भी करते हैं, लेकिन क्‍योंकि गर्मी के समय पर जल स्‍त्रोत सूख जाते हैं और उस समय जो दिक्‍कत आती है, उसकी वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की जाती है. मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि जिस प्रकार से आंगनवाड़ी के भवनों की जो कमी थी, अभी हमको प्रधानमंत्री जनमन योजना में 194 भवनों को भारत सरकार द्वारा 12 लाख रुपये प्रति आंगनवाड़ी के मान से स्‍वीकृत किए गए हैं, भविष्‍य में उन सबको, क्‍योंकि भविष्‍य में आंगनवाड़ी शिक्षा का केन्‍द्र बनने वाली है, इसलिए स्‍कूलों के पास जगह देखकर उनका भी निर्माण करने के विभाग ने निर्देश दिए हैं, आगे जाकर पानी की जो व्‍यवस्‍था है, वह भी पूर्ण रूप से इन केन्‍द्रों में की जायेगी.

 

11.19 बजे                                  स्‍वागत उल्‍लेख

डॉ. गौरीशंकर शेजवार, पूर्व मंत्री के सदन में उपस्थिति पर स्‍वागत

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दर्शक दीर्घा में डॉ. गौरीशंकर शेजवार जी यहां उपस्थित हैं. सदन उनकी उपस्थिति को रिकॉग्‍नाइज करता है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय - डॉ. गौरीशंकर शेजवार जी, इस सदन के बहुत ही वरिष्‍ठ सदस्‍य रहे हैं एवं वर्षों तक सरकार में एक सफलतम मंत्री के रूप में काम उनके द्वारा किया गया है. मैं सदन की ओर से उनका बहुत स्‍वागत करता हूँ और अभिनन्‍दन करता हूँ. (मेजों की थपथपाहट)  

 

 

 

 

 

11.20 बजे

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

अवैध रूप से रेत उत्खनन

[खनिज साधन]

        5. ( *क्र. 132 ) श्री सुरेश राजे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला ग्वालियर में किस-किस स्थान की रेत खदानें स्वीकृत हैं? इनमें से किस-किस स्थान की रेत खदान किस ठेकेदार/फर्म को कब से कब तक के लिए कितनी राशि में दी गई? प्रत्येक रेत खदान का सर्वे नंबर एवं रकबा बतावें एवं अनुबंध पश्चात ठेकेदार/फर्म को प्रतिमाह कितनी-कितनी राशि जमा की जानी है? दिनांक 31 जनवरी, 2024 तक प्रत्येक रेत खदान से प्रतिमाह कितनी-कितनी राशि प्राप्त हुई? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्या नदी में पनडुब्बी डालकर रेत खनन करने एवं कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत परिवहन का प्रावधान है? यदि नहीं, तो रेत परिवहन कर रहे ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली के फिटनेस, बीमा, ड्राईवर लाइसेंस की जांच कब-कब की गयी? वर्ष 2022-23 में प्रश्‍न दिनांक तक दोषी पाए गए किस व्यक्ति के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई? (ग) जिला ग्वालियर में सिंध नदी से रेत परिवहन ट्रक/डंपर/ट्रैक्टर द्वारा कितना-कितना घन मीटर तथा कितनी-कितनी रॉयल्टी ली जा रही है? नियम आदेश की सत्यापित प्रति सहित बतावें।

          मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, खनिज साधन (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) प्रश्‍नांश अनुसार ग्‍वालियर जिले में रेत खदानों के संबंध में वांछित विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। अनुबंध निष्‍पादन उपरांत ठेकेदार/फर्म द्वारा प्रतिमाह जमा की जाने वाली राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) मध्‍यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्‍डारण तथा व्‍यापार) नियम, 2019 के तहत नदी में पनडुब्‍बी डालकर रेत खनन करने का नियमों में प्रावधान नहीं है। कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत परिवहन नियमान्‍तर्गत प्रतिबंधित नहीं है। रेत परिवहन कर रहे ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली की फिटनेस, बीमा, ड्रायवर लायसेंस की जांच का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। वर्ष 2022-23 में प्रश्‍न दिनांक तक दोषी पाए गए व्‍यक्तियों के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश अनुसार वाहनों के परिवहन क्षमता के अनुरूप ई-खनिज पोर्टल पर वाहनों के पंजीयन अनुसार प्रति घनमीटर रूपए 307.67/- की दर से देय राशि ली जा रही है। मध्‍यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्‍डारण तथा व्‍यापार) नियम, 2019 के नियम 17 (9) की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

          श्री सुरेश राजे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न सरकार के साथ ही जनता के हितों से जुड़ा प्रश्‍न है. वैसे तो पूरे प्रदेश का मामला है लेकिन मैंने प्रश्‍न अपनी डबरा- भितरवार विधान सभा को लेकर पूछा है. वहां बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्‍खनन जारी है. कई बार शासन स्‍तर पर, स्‍थानीय शासन स्‍तर पर, मेरे द्वारा लगातार शिकायत की गई है लेकिन कार्यवाही के नाम पर कोई पनडुब्‍बी या बहुत हुआ तो किसी ऐसी ट्रैक्‍टर-ट्रॉली को पकड़कर थाने में रख लिया जाता है, जिसकी कोई सिफारिश नहीं होती है. मेरा निवेदन है कि मेरे प्रश्‍न के जवाब में मंत्री महोदय ने बताया है कि इतनी वैध खदानें हैं. मैं, मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि कितनी वैध खदानें चल रही हैं और कितनी अवैध खदानें वहां संचालित हैं ?

          श्री दिलीप अहिरवार- माननीय सदस्‍य महोदय जी, मैं, आपको बताना चाहता हूं कि जिस प्रकार आपने खनिज को लेकर प्रश्‍न किया है. हमारी सरकार द्वारा निश्चित रूप से जहां-जहां भी चाहे आपके जिले में हो, विधान सभा में हो या प्रदेश में कहीं भी हो, जहां भी ऐसा मामला आता है चाहे पनडुब्‍बी का मामला आता है या कोई अन्‍य, जो खनिज के उत्‍खनन को लेकर प्रकरण आते हैं तो निश्चित रूप से हमने उस पर कार्यवाही की है और उसका पूरा विवरण भी हमने आपके पास व्‍यक्तिगत रूप से भी पहुंचाने का प्रयास किया है. मैं व्‍यक्तिगत रूप से पूरे जिलेवार और आपके क्षेत्र की जानकारी, आपके पास पहुंचा दूंगा कि कितने प्रकरण हमने वहां दर्ज किए है और कितने उत्‍खनन चल रहे हैं. यह पूरी जानकारी मैं आपको उपलब्‍ध करवा दूंगा.

          श्री सुरेश राजेमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने मुझे, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जो जानकारी दी है, इन्‍होंने कहा है कि लिदौराखान खदान वैध है जबकि वास्‍तव में इस खदान से कोई रेत नहीं उठाई जा रही है बल्कि इसके एवज़ में इसे छोड़कर, किसी अन्‍य जगह से, जिसकी कोई लीज़ नहीं है, जिसका कोई सर्वे नंबर नहीं है, वहां से अवैध रूप से रेत उठाई जा रही है.

          इसके अतिरिक्‍त मंत्री जी ने कहा है कि गजापुर खदान वैध है लेकिन आप मौके पर जाकर देखिये, गजापुर से कोई बालू नहीं उठाई जा रही है. इसके स्‍थान पर किसी अन्‍य जगह से जिसका कोई सर्वे नंबर नहीं है, वहां से लगातार बालू उठाई जा रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न, मंत्री जी से यह है कि मैं, आपकी जानकारी में यह बात ला दूं कि यह केवल अवैध उत्‍खनन का मामला नहीं है, इसके कारण करोड़ों रुपये की सड़कें, जो सरकार मुश्किल से एक बार किस्‍मत से ग्रामीण सड़कों का निर्माण करवाती है, वे करोड़ों रुपयों की सड़कें इस अवैध उत्‍खनन के कारण खराब हो रही है.

          चाहे पुट्टी की सड़क हो, चाहे रायपुर सड़क हो, चाहे भीरमराना सड़क हो, चाहे देवगढ़-भारकरी की सड़क हो, चाहे सेमरी-सुखलियारी की सड़क हो.

          यह है कि जितनी अवैध खदानें चल रही हैं उन्‍हें तत्‍काल बंद करवाया जाये.

          दूसरा कहीं भी पनडुब्‍बी डालकर रेत खनन का कोई नियम नहीं है, वहां पोकलेन डाली जा रही है और अगर कोई इनकी शिकायत करता है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप क्‍या पूछना चाह रहे हैं, कृपया वह बतायें.

          श्री सुरेश राजेअध्‍यक्ष महोदय, मैं, यह पूछना चाह रहा हूं कि मंत्री जी ने  जवाब दिया है कि अवैध खदानें नहीं चल रही है. मेरा निवेदन है कि मेरे सामने यह शिकायतकर्ता का पत्र है, जो देवगढ़ का सरपंच भी है. जब इसने शिकायत की तो अवैध खनन करने वालों ने उसके घर जाकर धौंस दी, उससे कहा कि इस रिपोर्ट को वापस लें. यह स्थिति पूरे जिले में है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  माननीय मंत्री जी.

          श्री दिलीप अहिरवार-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं और सदस्‍य महोदय को भी बताना चाहता हूं कि ग्‍वालियर जिले के अंदर हमारे पास लगभग 45 शिकायतें आयीं और इनमें से हमने लगभग 28 शिकायतों पर पंजीकृत प्रकरण दर्ज किये. निश्चित रूप से आप सही कह रहे हैं कि पनडुब्‍बी से बालू निकालना सही नहीं है. हम लोग भी कहते हैं, मगर जहां भी हम लोगों को शिकायत मिलती है हम उसका प्रकरण दर्ज करते हैं, मुकदमा बनाते हैं और मैं एक बात और जानकारी में लाना चाहता हूं कि हमारी सरकार का एक और कदम है इसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि अवैध उत्‍खनन रोकने के लिए हम लोग जहां मध्‍यप्रदेश में ज्‍यादा खनिज है वहां ऐसे 40 इलेक्‍ट्रानिक बैरियर बना रहे हैं जहां पर कैमरे लगे रहेंगे और वहां पर उसकी एक-एक जानकारी कि कौन सी बालू अवैध है सब उस इलेक्‍ट्रानिक बैरियर में आ जाएगा. इसके लिए मैं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि खजिन की रोकथाम के लिए उन्‍होंने बहुत ही अच्‍छा कदम उठाया है.

          श्री सुरेश राजे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- सुरेश जी सप्‍लीमेंट्री हो गया, सेकेण्‍ड सप्‍लीमेंट्री हो गया और अब थर्ड सप्‍लीमेंट्री भी हो गया. आप कृपया बैठ जाएं.

          श्री सुरेश राजे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल एक मिनट का समय चाहता हूं. मेरे सामने कागज है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आपको सदन की मर्यादा बनाकर रखना पड़ेगी.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी ने जवाब जरूर दिया है, लेकिन वास्‍तविकता यह है कि आप जो कार्यवाही करते हो, कहते हो कि वह कार्यवाही शिकायत के ऊपर करते हैं. आपका पूरा अमला आपके पास में है. आपको शिकायत करने या करवाने की जरूरत नहीं पड़ती है, आपको कार्यवाही करना चाहिए. कल मैंने राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में यह बात बोली कि जहां जो रेत खदानों की नीलामी हुई उस सीमा से हटकर अवैध रूप से रेत उठाई जा रही है और एक रॉयल्‍टी में चार-चार ट्रिप चार-चार डम्‍पर निकाले जा रहे हैं इस पर रोक कौन लगाएगा? मंत्री जी कह रहे हैं कि मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद देता हूं कि आगे जाकर टोल नाके लगेंगे यह तो बाद की बात है वर्तमान की स्थिति में जितने अवैध उत्‍खनन हो रहे हैं आप भी समझ रहे हैं, मैं भी समझ रहा हूं कि इस पर रोक नहीं लग रही है. मंत्री जो यथार्थ सच्‍चाई है, उसे आप स्‍वीकारें और इस अवैध उत्‍खनन को आप रोकें.

          श्री दिलीप अहिरवार-- माननीय सदस्‍य महोदय जी मैंने आपको पहले भी बताया कि ग्‍वालियर जिले में जहां-जहां शिकायत आई है 28 प्रकरण बने हैं और जहां-जहां शिकायत होगी वहां प्रकरण बनाएंगे और मैं आपको फिर कहना चाहता हूं कि जो कदम हमारे उठाए जा रहे हैं वर्ष 2003 के पहले आपकी स्थिति क्‍या थी?

            श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- कोई शिकायत करेगा तब आप कार्यवाही करेंगे यह कौन सी बात है. (व्‍यवधान)

          श्री दिलीप अहिरवार-- हम तो कार्यवाही कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

          श्री रजनीश हरवंश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अवैध उत्‍खनन हो रहा है और कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. पोकलेन चल रही हैं कोई सख्‍ती नहीं हो रही है. (व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश की स्थिति खराब है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- शेखावत जी अपनी बात कहें.

          श्री भवंर सिंह शेखावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश की दृष्टि से यह विषय बहुत ही गंभीर है. रेत माफिया, खनन माफिया लगातार इस प्रदेश के अंदर अवैध खुदाई और अवैध खनन के अंदर लिप्‍त हैं. हमारे कई अधिकारी उनको रोकने जाते हैं तो उन पर बुल्‍डोजर, जेसीबी और जीपों के नीचे दबाकर उनकी हत्‍या कर दी गई है. ऐसे कई गंभीर प्रकरण हैं. रेत माफिया और खनन माफिया की हालत यह है कि वह न तो शासन को मानता है और न ही प्रशासन को मानता है. मैं आपको धार जिले के मेरे विधान सभा क्षेत्र की बात बताता हूं चार करोड़ रुपए की अवैध उत्‍खनन की राशि न रॉयल्‍टी दी गई, न पंचायत को पैसा दिया गया, न राज्‍य शासन के अंदर और आपके यहां का पूर्व मंत्री अवैध खनन करता रहा यह मैं कलेक्‍टर के संज्ञान में लाया हूं. आपके विभाग के अधिकारियों को लिखकर दिया है कि धार जिले की बदनावर विधान सभा के अंदर पुराने मंत्री ने कम से कम चार करोड़ रुपए की रॉयल्‍टी चोरी की है.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- जो इस सदन में नहीं है उसका उल्‍लेख क्‍यों कर रहे हैं.

          श्री भवंर सिंह शेखावत-- माननीय श्रीमान आप जरा बैठ जाइए. वह आपका पुराना मित्र है. मेरा यह कहना है कि यह केवल एक विधान सभा क्षेत्र का झगड़ा नहीं  है. रेत माफिया पूरे प्रदेश के अंदर हैं. नर्मदा को तो पूरा खोदकर रख दिया है. कौन माई का लाल बोल रहा है मुझे बताएं. जो अधिकारी जाते हैं उनको बुल्‍डोजर के नीचे और जीपों से घसीटकर मार दिया गया है. आज तक आपने कौन सी कार्यवाही की है. पूरा प्रदेश लुट रहा है और मंत्री जी मेरी आपसे मांग है कि आप पूरे प्रदेश के अंदर जो शिकायतें आईं हैं उनकी जांच करवाइए. चाहें तो आप अलग से एक कमेटी बना दीजिए. कांग्रेस और भाजपा की संयुक्‍त कमेटी बनाइए. कोई सुन नहीं रहा है. अधिकारी तो जाते हैं. अधिकारियों को क्‍या दोष देना. अधिकारियों का मर्डर हो रहा है. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय--शेखावत जी आप मंत्री जी को बोलने तो दीजिए.

            श्री सोहनलाल बाल्मीक -- मंत्री जी यह जवाब दें कि कार्यवाही करेंगे. मेरा अवैध उत्खनन को लेकर आवेदन लगा हुआ है. आज तक उस पर कार्यवाही नहीं की है. (व्यवधान)

          श्री महेश परमार -- मेरे विधान सभा क्षेत्र में 50 करोड़ की बात है, इनके विधान सभा क्षेत्र में तो 4 करोड़ की बात है. (व्यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -- यह विभाग माननीय मुख्यमंत्री जी के पास है उनको इसका जवाब देना चाहिए.

            श्री महेश परमार -- पूरे मध्यप्रदेश का लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ रखा है. माननीय मुख्यमंत्री जी को इस बात जवाब देना चाहिए. यह पहली बार के मंत्री क्या जवाब देंगे. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय -- प्लीज एक मिनट सुन लीजिए. कुल मिलाकर सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है. राज्यमंत्री जी को मुख्यमंत्री जी ने अधिकृत किया है. वे मुख्यमंत्री जी द्वारा अधिकृत होने के कारण जवाब दे रहे हैं. अब यदि हम सब लोग एक साथ बोलेंगे तो न तो प्रश्न और न ही जवाब समझ में आएगा. मुझे इतनी देर की बहस से यह समझ में आ रहा है कि कुल मिलाकर पक्ष भी चिंतित है और विपक्ष भी चिंतित है. दोनों ही गंभीर हैं फिर भी हल क्यों नहीं निकल रहा है. कैलाश जी आप बोलें.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष जी, मंत्री जी ने अपने उत्तर में बहुत स्पष्ट किया है कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने इलेक्ट्रानिक कैमरे लगाकर 40 स्थानों पर इस प्रकार टोल नाके लगाने की व्यवस्था की है. मैं सरकार की ओर से सदन को विश्वास दिलाता हूँ कि अवैध खनन के खिलाफ सरकार कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेगी किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति हो उसको छोड़ा नहीं जाएगा.

          श्री दिनेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा इस विषय में ध्यानाकर्षण भी है और प्रश्न भी लगाया है.

          अध्यक्ष महोदय -- संसदीय कार्यमंत्री ने इतनी जिम्मेदारी से जवाब दे दिया है अब इसके बाद कुछ नहीं बचता है.

          श्री दिनेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा इस विषय में ध्यानाकर्षण भी है और प्रश्न भी लगाया है. अध्यक्ष महोदय, खनिज ठेकेदार हमारे खिलाफ एफआईआर करवा रहा है. निरीक्षण करने जाते हैं तो वह हमें खरीदने की बात करते हैं, कहते हैं 1 करोड़ 5 करोड़ दे देंगे.. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय -- मेरा कहना यह है कि इस प्रश्न पर पर्याप्त सदस्यों को बोलने का अवसर दिया गया है. बात आई है, सरकार ने संज्ञान लिया है. संसदीय कार्य मंत्री ने आश्वस्त किया है. मैं समझता हूँ कि आगे के सदस्यों के भी महत्वपूर्ण प्रश्न हैं.

          श्री हेमंत कटारे -- आगे चर्चा का आश्वासन दे दीजिए. बाद में चर्चा कर लेंगे. इसमें आधे घंटे की चर्चा का आश्वासन दे दीजिए.

          अध्यक्ष महोदय -- कार्यवाही आगे बढ़ गई है.

          श्री अभय कुमार मिश्रा -- देख लीजिएगा कुछ दिनों में डिटोनेटर वाला एक ब्लास्ट आएगा सामने.

          अध्यक्ष महोदय -- अभय जी आपके सदस्य बोल रहे हैं उन्हें बोलने दीजिए.

         

पुलिस विभाग में भर्ती के संबंध में

[गृह]

6. ( *क्र. 4 ) श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रदेश में कब से एस.आई. के पदों की भर्ती नहीं हुई है? भर्ती नहीं होने के क्‍या कारण हैं? कब तक उक्‍त पदों पर भर्ती की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग भर्ती वर्ष 2018 आयोजित कराने हेतु प्रस्‍ताव पुलिस मुख्‍यालय के पत्र दिनांक 10.08.2018 के माध्‍यम से कर्मचारी चयन मण्‍डल (पी.ई.बी.) भोपाल को भेजा गया था, किंतु पी.ई.बी. भोपाल द्वारा परीक्षा का आयोजन नहीं किया गया। वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव थे एवं वर्ष 20202021 में को‍वि‍ड-19 के कारण भर्ती आयोजित नहीं की जा सकी। सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग की भर्ती हेतु जारी म.प्र. कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम 1997 में संशोधन की कार्यवाही प्रचलन में है।

          श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर -- सबसे पहले तो मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ कि प्रथम बार मैं इस सत्र में बोल रहा हूँ. मैंने प्रश्न के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी से गृह विभाग से संबंधित जानकारी चाही थी. जिसका जवाब तो मुझे मिला है किन्तु संतोषजनक नहीं मिला है. वर्ष 2016 में 863 पदों पर सब-इंसपेक्टर के लिए भर्ती निकाली गई थी. वर्ष 2017 में 611 पदों पर सब-इंसपेक्टर के लिए भर्ती निकाली गई थी. इसके पश्चात् लगभग 7 वर्ष हो गए हैं तब से कोई भर्ती नहीं निकाली गई है. जो युवा नौकरी की तलाश में थे वे आज ओवरएज हो गए हैं. पिछले तीन वर्षों से समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी निकलती है, नौजवान तैयारी करते हैं लेकिन भर्ती नहीं निकलती है. नौजवानों की परेशानी निरंतर बढ़ती जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. किसी के माता-पिता जमा पूंजी तोड़ते हैं, अपना मकान गिरवी रखते हैं, जमीन गिरवी रखते हैं कि उनके बेटे या बेटी की नौकरी पुलिस में लग जाए. सरकार से आग्रह है कि यदि भर्ती नहीं कर सकते हैं तो स्पष्ट मना कर दें असत्य घोषणाओं के माध्यम से युवाओं को छलने का कार्य न करें. अध्‍यक्ष महोदय, आप यकीन नहीं करेंगे कि 3 दिसम्‍बर से लगातार हमारे नौजवान साथी कहीं ट्व्टिर के माध्‍यम से, कहीं फोन के माध्‍यम से यह चाहते हैं कि इस बात को व्‍यक्तिगत रूप से सदन में उठाया जाए. क्‍या यह सच नहीं है कि प्रदेश में अपराध बढने की वजह कहीं न कहीं गृह विभाग में पुलिस आरक्षी और एस.आई. के पद जरूरत से ज्‍यादा खाली हैं ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- नितेन्‍द्र जी, थोडा प्रश्‍न पर आइये, प्‍लीज.

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही पूछ रहा हूं. क्‍या यह सच नहीं है कि प्रदेश में अपराध बढने की वजह गृह विभाग में पुलिस आरक्षी और एस.आई. के पद जरूरत से ज्‍यादा खाली हैं ? माननीय मुख्‍यमंत्री जी से मेरा यह आग्रह है कि यह कब भरे जाएंगे ?  

 

 

 

11.36 बजे                                      स्‍वागत उल्‍लेख

                                सदन में उपस्थित विद्यालय के छात्रों का स्‍वागत

          अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी बोलें उसके पूर्व आज सदन की दर्शक दीर्घा में विद्यालय के छात्र भी उपस्थित हैं, यह स‍ब भारत का भविष्‍य हैं, यह सदन उनका स्‍वागत करता है.

                                      तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा सम्‍मानीय सदस्‍य ने प्रश्‍न किया है उन्‍होंने स्‍वयं ने माना है कि वर्ष 2016 और 2017 में भर्ती हुई है. चूंकि वर्ष 2018-2019 में चुनावी वर्ष रहे हैं, बाद में दो वर्ष कोविड में हो गये इसलिये भर्ती में थोडा विलंब हुआ है, लेकिन प्रक्रिया प्रारंभ है. प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिये सरकार प्रयास कर रही है. पहले केवल एक 200 अंकों का सामान्‍य ज्ञान और भाषायी बोध पर आधारित परीक्षा होती थी और 10 अंक साक्षात्‍कार के लिये थे, अब उसमें थोडा परिवर्तन करते हुये सरकार उसको पारदर्शी बनाना चाहती है. उसमें एक प्रिलिमिनरी एग्‍जाम लेगी, जो विज्ञापित पद हैं उसके अगेंस्‍ट 10 गुने अभ्‍यर्थियों को बुलाया जाएगा, उनकी मुख्‍य परीक्षा होगी. उसके बाद जो शारीरिक रूप से परीक्षण होते थे उनके अंक नहीं जोडे जाते थे, लेकिन वह जोडना चाहिये ऐसा सरकार का विचार है. यह विचाराधीन है और शीघ्र प्रचलन में यह सारी व्‍यवस्‍था है. जहां तक सम्‍माननीय सदस्‍य ने चिंता व्‍यक्‍त की है उसके लिये मैं उन्‍हें बताना चाहता हूं कि 1,599 सहायक उपनिरीक्षक, कार्यवाहक उपनिरीक्षक के रूप में काम कर रहे हैं. अत: किसी भी तरह से पुलिस का काम प्रभावित नहीं हो रहा है. धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं अभी नहीं, सदस्‍य का दूसरा पूरक प्रश्‍न है. (श्री सोहनलाल बाल्‍मीक, सदस्‍य के खडे होने पर).

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं. इंडियन जस्टिस रिपोर्ट के अनुसार राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 835 लोगों पर एक पुलिस आरक्षी है, वहीं मध्‍यप्रदेश में 1,051 है. क्‍या यह आम आदमी के जीवन के साथ खिलवाड नहीं है ? मैं बुंदेलखंड से आता हूं, पृथ्‍वीपुर मेरी विधान सभा है. पृथ्‍वीपुर में कल ही खुलेआम लूट का प्रयास किया गया क्‍योंकि वहां पर सब इंस्‍पेक्‍टर नहीं हैं, मैं अपने यहां की स्थिति आपको बयां कर रहा हूं, यही स्थिति हर जगह की है. आज लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और पढ-लिखकर लोग बेरोजगार हैं. मेरा आपसे केवल इतना ही सवाल है कि आप यह बताएं कि कब तक उक्‍त पदों पर भर्ती की जाएगी ? यह जवाब मैं आपसे चाहता हूं.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैं पूर्व में ही प्रक्रिया का बता चुका हूं कि पारदर्शी प्रक्रिया करने के लिये पूरी व्‍यवस्‍था प्रचलन में है और जैसे ही यह तय होगा उसके बाद प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ होगी. पिछले वर्ष भी हमने लगभग 6,000 आरक्षकों की भर्ती की है और लगातार जो भी हमारे चूंकि पदोन्‍नति पर न्‍यायालय से रोक है इसके कारण कार्यवाहक के रूप में पदोन्‍नत करके समस्‍त पदों पर हमारे पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और किसी भी तरह की कमी महसूस नहीं हो रही है. मैं समझता हूं कि माननीय सदस्‍य इससे संतुष्‍ट होंगे.

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- तब तक जो लोग ओवरएज हो रहे हैं और जो बिगडती कानून व्‍यवस्‍था है उसका जिम्‍मेदार कौन है ?  

          अध्‍यक्ष महोदय -- नितेन्‍द्र जी, आपका सेकेंड सप्‍लीमेंट्री हो गया है. प्‍लीज.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी यह बता दें जो माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न था कि यह जो बैकलॉग चल रहा है वह कब तक किया जाएगा, कब तक भर्ती की जाएगी यह बता दें. यह प्रक्रिया जो हो रही है वह हो रही है, अपनी जगह पर है, सारी प्रक्रिया आप कर लें, लेकिन एक तिथि बता दीजिये कि 4 महीने में, 6 महीने में यह सारे जो बैकलॉग हैं, जो खाली स्‍थान पडे हैं वह कब तक भरेंगे ?  

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- यह तिथि आप बता दीजिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी बता दिया है चूंकि चयन में पारदर्शिता बनी रहे इसके लिये प्रक्रिया प्रचलन में है. जैसे ही तय होगा इनकी भर्ती करने की प्रक्रिया भी कर ली जाएगी.

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- निश्चित समय. निश्चित समय बताइये कि 1 साल, 2 साल, 3 साल कितना समय लगेगा आप तो निश्चित बता दीजिये.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 7, श्री दिव्‍यराज सिंह जी.

 

         

         

 


 

पुलिस अभिरक्षा में हुई संदिग्ध मृत्यु की निष्पक्ष जाँच

[गृह]

7. ( *क्र. 290 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                       (क) क्या रीवा जिले के थाना सिविल लाइन अंतर्गत घटित चोरी की घटना में अभियुक्त के तौर पर राजकली केवट की गिरफ्तारी की गई थी? यदि हाँ, तो पुलिस अभिरक्षा में क्या उक्त आरोपित महिला की मृत्यु हो गई थी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुक्रम में पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु में चोरी की घटना से पीड़ित दम्‍पत्ति श्री यशोवर्धन सिंह एवं उनकी पत्नी श्रीमती प्रतीक्षा सिंह को आरोपी बनाने का क्या कारण है? (ग) क्या विषयांकित घटना की जाँच पृथक एजेंसी से कराई जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक जाँच संबंधी आदेश जारी किये जा सकेंगे?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ, गिरफ्तारी की गई थी। पुलिस अभिरक्षा में आरोपी महिला राजकली केवट का स्वास्थ खराब होने पर इलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ इलाज के दौरान डाक्टरों द्वारा आरोपी महिला को मृत घोषित कर दिया गया। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) विषयांकित घटना की न्यायिक जांच, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, रीवा द्वारा की जा रही है।

          श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय,  मेरे प्रश्न में एक बहुत  ही सेंसेटिव्ह मेटर  हमारे रीवा में हुआ है.  एक गरीब परिवार  केवट वर्ग  की महिला का देहांत थाने के अन्दर हो गया और  इसमें पहली बात तो यह है कि  28 तारीख को इसमें  चोरी हुई है,  30 तारीख को उसको थाने में लाया गया  और फिर उसको  रीवा, सीधी पता नहीं  कहां कहां घुमाया गया और फिर 31 तारीख को  उसकी थाने के बाद   मौत हो गई है.  तो इसमें पहली बात तो यह है कि दो पीड़ित परिवार हैं.  एक तो जिसके घर में  चोरी हुई और दूसरा जो  महिला, जिसकी मृत्यु  हो गई.  पहली बात तो   इसमें मैंने  जो देखा,  जवाब में  यह दिया गया है कि  केवल आरक्षकों के ऊपर कार्यवाही  की गई है.  तो इतनी बड़ी घटना थाने के अन्दर हो गई,  बाकी  किसी के ऊपर  कोई  कार्यवाही  की गई है थाने के अन्दर.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल--  अध्यक्ष महोदय,  जिस तरह की माननीय सदस्य ने  चिंता व्यक्त  की है, निश्चित  रुप से उनकी चिंता होना चाहिये.  इसमें प्रधान आरक्षक के खिलाफ भी  कार्यवाही हुई है और  दो आरक्षकों के  खिलाफ भी कार्यवाही हुई है.  एक सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ भी कार्यवाही हुई है.

          श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय,  वहां के टी.आई., एस.पी. क्या कर रहे थे.          

            अध्यक्ष महोदय-- दिव्यराज सिंह जी, पहले पूरा जवाब  आ  जाने दें,  फिर उसके बाद दूसरा पूरक प्रश्न कर लें.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल--  अध्यक्ष महोदय,   एक सहायक  उप निरीक्षक, एक प्रधान आरक्षक  तथा  महिला आरक्षक के खिलाफ भी  एफआईआर की गई है और  विवेचना जारी है.

          श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय,   मेरे इसमें जैसे दो विषय थे.   एक तो जिसके घर में चोरी हुई है, उनके ऊपर आरोप लगा दिया गया कि  इनके कारण  इसकी मृत्यु हुई  है.  तो पहले तो इसमें क्योंकि  थाना भी इन्वॉल्व  है,  सीसी टीव्ही कैमरा में भी  दिखाया जा रहा है कि   आरक्षक  लोगों ने  उसको मारा.  उसके बाद उसकी मृत्यु हुई है. तो इसमें  पहली बात तो  इसकी बाहर से जांच  कराई जाये. रीवा  की पुलिस से इसकी जांच नहीं कराई जाये.  एसआईटी  इसमें बैठाकर  के उसकी जांच कराई जाये और इसमें अगर  कोई बड़े अधिकारियों  को  भी इसके बारे में जानकारी है, तो उनके खिलाफ भी  कार्यवाही की जाये.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल--  अध्यक्ष महोदय,   इसमें न्यायिक जांच   जारी है श्रीमती पद्मिनी  इसमें मुख्य मजिस्ट्रेट  के द्वारा  आदेशित किया गया है   और उनकी न्यायिक जांच जारी है.

          श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय,   इसमें एसआईटी  की जांच  कराई जाये,  भोपाल से जांच कराई जाये.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल--  ठीक है.

          श्री आरिफ मसूद -- अध्यक्ष महोदय,  पूर्व में भी ऐसी घटना  गुना में भी हुई थी.  माननीय सदस्य ने बहुत अच्छा ध्यान आकर्षित किया है.  मैं चाहता हूं कि एक  बार  दोषियों पर  बजाय स्थानातरण  करने के इनके खिलाफ  कार्यवाही होने लगे,  मुकदमे दर्ज होने लगे,  तो इससे आम जनता को सहयोग  मिलेगा. मैं चाहता हूं कि आसंदी  से ऐसा निर्देश होना चाहिये.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल--  अध्यक्ष महोदय,   जैसा माननीय सदस्य ने चिंता व्यक्त  की है,  इस केस में पुलिस के अधिकारियों, कर्मचारियों पर केस दायर किया गया है और न्यायिक जांच चल रही है.

 

 

 

आंगनवाड़ी भवन का संचालन

[महिला एवं बाल विकास]

8. ( *क्र. 25 ) श्री कुँवर सिंह टेकाम : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सीधी एवं सिंगरौली जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड मझौली, कुसमी, जिला सीधी एवं विकासखण्ड देवसर, जिला सिंगरौली में कितने आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं? नाम सहित जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में संचालित कितने आंगनवाड़ी केन्द्र भवन विहीन एवं कितने पेयजल विहीन हैं? आंगनवाड़ीवार नाम सहित जानकारी उपलब्ध करायें।               (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्द्रों में भवन का निर्माण कब तक करा दिया जावेगा? (घ) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में पेयजल विहीन आंगनवाड़ी केन्द्रों में हेण्डपम्प उत्खनन कराकर पेयजल कब तक उपलब्ध करायेंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( सुश्री निर्मला भूरिया ) : (क) सीधी जिले के अंतर्गत विकासखण्ड कुसमी में 233 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं विकासखण्‍ड मझौली में 324 आंगनवाड़ी केन्‍द्र संचालित हैं एवं सिंगरौली जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड देवसर में 490 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं। नाम सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '1' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में सीधी जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड कुसमी में 06 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं विकासखण्‍ड मझौली में 03 आंगनवाड़ी केन्द्र भवन विहीन हैं। सिंगरौली जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड देवसर के 49 भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के भवन निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान की गई है, जो वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। विकासखण्ड मझौली, कुसमी एवं देवसर में कोई भी आंगनवाड़ी केन्‍द्र पेयजल विहीन नहीं हैं। आंगनवाड़ीवार नाम सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '2' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर है। अतः समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (घ) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री कुंवर सिंह टेकाम-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो सिंगरौली के हिस्से में 49  आंगनवाड़ी भवन विहीन थे,  उनकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है.  इसके लिये मैं उनको धन्यवाद देता हूं.  दूसरा,  हमारे  सीधी  जिले के पार्ट मे  कुसमी  और मझौली   विकास खण्ड में  9 आंगनवाड़ी केंद्र  भवन विहीन हैं.  आपने जानकारी दी है कि  कुसमी विकास खण्ड में  6 में से  4 को  आपने विस्थापित होने के कारण  भवन विहान दर्शाया है, जबकि यह  ग्राम  कमछ का  तुराटोला,  जूरी   का चपाटोला,ददरी का ददरीडोल  ये विस्थापित  नहीं हैं, न विस्थापित होने  वाले  ये ग्राम  में सम्मिलित हैं.  केवल  एक दुबरीकला  जरुर इसमें  विस्थापित  वाले गांव में  जुड़ा हुआ है.  मेरा आग्रह है कि यह जो विस्थापित वाले  गांव में  आपने दर्शाया है, इसका पुनः परीक्षण करा लें. ये विस्थापित ग्राम की श्रेणी में नहीं हैं  और इसमें से 8 भवन विहीन हैं,  सीधी जिले के हिस्से में,  तो इनकी आंगनवाड़ी   भवनों की  स्वीकृति प्रदान कर देंगे, तो बड़ी कृपा होगी.

          उच्च शिक्षा मंत्री (श्री इन्दर सिंह परमार)-- अध्यक्ष महोदय,  पूरी जानकारी माननीय सदस्य को  मिली है.  हमारे पास जितने विभाग के भवन हैं,  उसकी संख्या  भी है. साथ ही  कितने अन्य शासकीय  भवनों में  आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं. कुछ आंगनवाड़ी केंद्र और सीधी में 317 आंगनवाड़ी केन्‍द्र किराये के भवन में संचालित हैं, सिंगरौली में 97 हैं, मझौली ब्‍लाक में 3 हैं, सीधी का जो कुसमी ब्‍लॉक है उसमें 6 हैं और देवसर में कोई भी आंगनवाड़ी केन्‍द्र किराए के मकान में संचालित नहीं है. जहां पर अन्‍य शासकीय भवन में संचालित हैं, देवसर में ऐसे 49 भवनों पर काम चल रहा है और आगे जो हमारे 4000 के लगभग पुराने भवन या तो पूरे मध्‍यप्रदेश में अधूरे हैं, उन पर प्रक्रिया चल रही है. उनको पूरा एक साथ देकर के, क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार से जो पैसा आता था प्‍लस राज्‍य सरकार का. इस कारण वह अधूरी रह गयी है उनको पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है और जो ऐसे गांव हैं, जिसमें सीधी में भी जो चार भवन है, उनके लिये सीधे भारत सरकार उनको 12-12 लाख रूपये में स्‍वीकृत कर रहे हैं. ऐसे 194 भवन केन्‍द्रों के लिये राशि दे रहे हैं, उसमें चार भवन वहां भी मिलने वाले हैं. तो मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि आने वाले समय में सभी भवन, यदि कहीं स्‍कूल का भवन खाली होगा, क्‍योंकि स्‍कूल के भवन काफी जगह खाली हैं तो उनका परीक्ष्‍ाण करके आंगनवाड़ी केन्‍द्रों को वहां स्‍थानांतरित देंगे. ताकि किराए की स्थिति पूरी समाप्‍त हो जाये.

          श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- मेरा इसमें यह आग्रह था कि आपने जो विस्‍थापित गांव दर्शा दिये हैं. यह विस्‍थापित गांव में नहीं हैं. वह किराए में भवनों में चल रहे हैं.

          श्री इंदर सिंह परमार:- अध्‍यक्ष महोदय, उनका परीक्षण कर लेंगे.         

          श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- मंत्री जी, वहां आपको केवल 8 आंगनवाड़ी केन्‍द्र बनाने हैं.

          श्री इंदर सिंह परमार:- अध्‍यक्ष महोदय, उनका परीक्षण करा लेंगे. यदि विस्‍थापित नहीं है तो तो उचित कार्यवाही करेंगे.

          श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- विस्‍थापित नहीं है, मुझे जानकारी है. वह केवल 8 आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं, आप आशवस्‍त 8 आंगनवाड़ी भवन हम स्‍वीकृत कर देंगे ? .

          श्री इंदर सिंह परमार:- हम उनको दिखाकर के प्राथमिकता के साथ में भवन की उपलब्‍धता करा देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय:- मंत्री जी ने कह दिया है.

          श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- धन्‍यवाद.

प्रदेश में महिलाओं पर घटित अपराधों की जानकारी

[गृह]

9. ( *क्र. 750 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिला में महिलाओं के विरूद्ध घटित अपराधों की शीर्षवार सूची वर्ष 2015 से दिसम्बर 2023 तक की वर्षवार, विधान सभावार देवें तथा बतावें कि 2019 की तुलना में 2023 में किस-किस शीर्ष में कितने प्रतिशत वृद्धि तथा कितने प्रतिशत कमी हुई? (ख) जौरा विधानसभा क्षेत्र में कितने थाने हैं? प्रत्येक थाने का क्षेत्र एरिया कितना है तथा कितनी आबादी शामिल है? उक्त थानों में स्वीकृत पद किस-किस प्रकार के कितने हैं तथा नियुक्ति कितनी है तथा खाली पद कितने हैं? दिसम्बर 2023 अनुसार बतावें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के थानों के अनुसार महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध घटित अपराधों की शीर्षवार वर्ष 2015 से 2023 तक की जानकारी देवें तथा बतावें कि वर्ष 2019 से 2023 तक प्रतिवर्ष किस-किस शीर्ष में कितने प्रतिशत वृद्धि तथा कमी हुई? (घ) जौरा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2015 से 2023 तक में महिलाओं, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध घटित अपराधों में शीर्षवार, वर्षवार, थाने अनुसार बतावें कि सजायाबी की दर कितने प्रतिशत है? (ड.) जौरा विधानसभा क्षेत्र में 2018 से दिसम्बर 2023 तक नाबालिग बालक-बालिका तथा महिलाओं के गुम होने के कितने प्रकरण हुए तथा कितने नाबालिग बालक-बालिका तथा महिलाएं दस्तयाब की गईं?

        राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) एवं (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

          श्री पंकज उपाध्‍याय:- धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष जी पहली बार ही सदन में आया हूं और पहली बार ही बोलने का मौका मिला है. आप जब अध्‍यक्ष बने थे, जब भी मैंने सोचा था कि बोला जाये, परंतु पता नहीं था कि सदन में किस तरह से बोला जाता है. आप जब अध्‍यक्ष बने थे तो हमें बड़ी प्रसन्‍नता हुई थी कि आप हमारे क्षेत्र के हैं और बड़ा गौरव है कि आप इस स्‍थान पर विराजित हैं बड़ा गरिमामय सदन है और उच्‍चकोटि के ज्ञानी यहां पर बैठे हुए हैं. श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी हैं, हमारे संसदीय कार्य मंत्री आदरणीय कैलाश जी यहां पर हैं. पहली बार सदन में आया हूं, समझता हूं कुछ सीखने के लिये मिलेगा, कुछ गलती करूं तो आप मुझे क्षमा करियेगा.

          मैंने प्रश्‍न उठाया था उसका कोई यथोचित उत्‍तर नहीं दिया गया है, मेरा प्रश्‍न था कि प्रत्‍येक थाने में क्षेत्र में कितनी आबादी होनी चाहिये ? जब थाना बनता है और कितनी आबादी पर कितना पुलिस बल होना चाहिये. इसको कोई उचित जानकारी नहीं दी गयी है.

          मैंने खण्‍ड(ग) में पूछा था कि एससीएसटी महिला अपराधों की संख्‍या कितनी हुई है और अपराधों में किन-किन लोगों को सजा दी गयी है. उसकी भी अधूरी जानकारी दी गयी है. मैं जानकारी चाहता हूं.

          राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल):- आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य जानकारी चाहते थे, वह जानकारी उपलब्‍ध करायी गयी है. यदि वह कुछ अतिरिक्‍त जानकारी चाहते हैं तो मैं उनको व्‍यक्तिगत रूप से उपलब्‍ध करा दूंगा.    

        श्री पंकज उपाध्याय :- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैंने जानकारी चाही थी कि 7 थानों में वर्ष 2015 से 2023 तक कितनी एससीएसटी महिलाओं के खिलाफ अपराध दर्ज हुए और कितने लोग बरी हुए, यह तो साधारण सी जानकारी है, जिसको आप दे सकते थे.

दूसरा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत 7 थाने हैं. एक थाना 90 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में आता है और दूसरा 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आता है. बागचीनी में 2 एसआई, 4 थाना प्रभारी और 14 आरक्षक हैं. जबकि निरार थाने में जो 500 स्‍क्‍वेयर मीटर में मात्र 1 एसआई, 3 प्रधान आरक्षक और 11 आरक्षक हैं और कोई अपराधों की जानकारी भी नहीं दी गयी है. महिला स्‍टॉफ की भी जानकारी नहीं दी गयी है. सम्‍पूर्ण विधान सभा क्षेत्र में स्‍टॉफ की मात्रा बहुत कम है. जैसा कि इन्‍होंने जो जानकारी दी है, उसमें देवगड़ में 14 आरक्षक होना चाहिये, लेकिन 4 हैं. चिन्‍नौनी में 22 आरक्षण होना चाहिये, परंतु वहां 11 आरक्षण हैं. हमारे जौरा में 22 आरक्षक होना चाहिये, लेकिन 20 हैं. लगभग आधा स्‍टॉफ है हम अपेक्षा करते हैं कि आप सुशासन लेकर आयेंगे. तो इस आधे स्‍टॉफ से तो हम सुशासन नहीं ला सकते हैं. क्‍योंकि हमारा क्षेत्र बड़ा अपराधों का क्षेत्र है, वहां पर बड़े अपराध होते हैं.

ऐसी ही महिलाओं के प्रति अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, बलात्कार हो रहे हैं, वर्ष 2021 में इसमें 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वर्ष 2023 में तो इन्होंने जानकारी देना भी उचित नहीं समझा तो जो लूट हो रही हैं. मैंने एक चीज और पूछी थी कि चेन स्नेचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. हमारे विधान सभा क्षेत्र में पिछले 3 दिन में 2-3 घटनाएं हो गईं. एक एफआईआर हुई है. श्रीमती पुष्पा गोयल नाम की हमारी चाची लगती हैं, श्री केशव गोयल जी की पत्नी हैं, उनकी सरेआम दिन दहाड़े चेन लूट ली गई, लेकिन उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. ऐसी कई सारी घटनाएं हैं जो चर्चा में भी नहीं आ पाती हैं. एफआईआर भी थानों में लिखाने में लोग हिचकिचाते हैं.

अध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्य चाहते हैं कि बढ़ते हुए अपराधों पर सरकार क्या कर रही है?

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - अध्यक्ष महोदय, जैसा उन्होंने चिंता भी व्यक्त की है और जो क्षेत्रफल की बात की थी कि एरिया के हिसाब से बात की तो एरिया के हिसाब से बल नहीं रखा जाता है क्योंकि उसमें पहाड़ी एरिया, बंजर एरिया शामिल है, इसलिए वहां का एरिया ज्यादा आपको दिख रहा है. सरकार बहुत सजग है और पुलिस फोर्स तत्परता से काम कर रहा है. यदि केस पंजीकृत हो रहे हैं तो यह स्पष्ट दिखाता है कि कार्यवाही हो रही है.

श्री पंकज उपाध्याय - मैंने जो बात कही है.

अध्यक्ष महोदय - पंकज जी, उन्होंने दोनों चीजों का जवाब दिया, जो जानकारी आपको अतिरिक्त चाहिए वह भी आपके पास पहुंचा देंगे. आपका प्रश्न हो गया, उसके बाद दूसरा पूरक प्रश्न हो गया. अभी दूसरे और तमाम सारे हैड हैं, जिन पर आप बोल सकते हैं.

 

डोलोमाइट खदानों का संचालन

[खनिज साधन]

10. ( *क्र. 628 ) श्री नारायण सिंह पट्टा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मण्डला जिला अंतर्गत कौन-कौन सी डोलोमाइट खदानें कब से संचालित हैं? ग्राम का नाम खसरा नंबर सहित खदान मालिक के नाम व संपर्क नम्बरों की जानकारी उपलब्ध करवाएं। वर्ष 2020 के बाद स्वीकृत खदानों की जानकारी भी उपलब्ध करवाएं। (ख) डोलोमाइट उत्खनन हेतु शासन के क्या नियम हैं? नियमों की प्रति उपलब्ध करावें। तत्कालीन मण्डला कलेक्टर श्रीमती स्वाति मीना के कार्यकाल में खदान संचालकों को जुर्माना हेतु नोटिस कब-कब जारी किए गए? नोटिसों की छायाप्रति उपलब्ध करावें। क्या जुर्माना राशि जमा हुई? यदि नहीं, तो क्यों?                               (ग) उक्त समस्त खदानों की लीज़ एवं एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की जानकारी प्रदान करें। सितंबर 2023 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन खदानों की एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की समय-सीमा समाप्त हुई थी? क्या समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी खदानों में उत्खनन जारी रहा? क्या खदानों से डोलोमाइट का परिवहन करने वाले वाहन ओवरलोड परिवहन कर रहे हैं? (घ) प्रत्येक खदान में कार्यरत मजदूरों के नाम, नम्बर व किये जाने वाले मजदूरी भुगतान की जानकारी प्रदान करें। क्या सभी मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीयन कराया गया है? क्या मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित समस्त सुविधाओं व योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, खनिज साधन (श्री दिलीप अहिरवार) :               (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। जिला मंडला अंतर्गत वर्ष 2020 के बाद डोलोमाईट खदान स्वीकृत नहीं की गई है। (ख) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 अधिसूचित है। शेष भाग की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। शेष नोटिसों की छायाप्रति एवं उनमें की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "स" अनुसार है। (ग) समस्त खदानों के एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। सितम्‍बर 2023 से जिला स्‍तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (डिया) से प्राप्‍त पर्यावरणीय अनुमति को स्‍थगित किया गया था। माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की सिविल अपील क्रमांक 49608/2023 में पारित आदेश दिनांक 13.12.2023 से ऐसी समस्‍त खदानों का पुन: संचालन प्रारंभ हो गया है। शेष भाग अनुसार डोलोमाईट खनिज का ओवरलोड परिवहन पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। (घ) प्रश्‍नांश अनुसार खदानों में कार्यरत मजदूरों को भारत सरकार श्रम और रोजगार मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 28.07.2017 अनुसार मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। शेष प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "द" एवं "इ" अनुसार है।

श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय, बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है और आपका संरक्षण चाहिए, पर्यावरण को प्रभावित करने वाला यह प्रश्न डोलोमाइट की खदानों को लेकर है. मैं माननीय मंत्री जी से सीधे-सीधे प्रश्न पूछना चाहता हूं कि डोलोमाइट की खदानें वन भूमि से लगी हुई हैं. इसमें कान्हा पार्क का क्षेत्र भी आता है, उसके बाद भी नई खदानों की स्वीकृति  के लिए शासन स्तर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था. हमने इसके विरोध में आन्दोलन भी किया था, तब जाकर इसमें रोक लगी थी, किन्तु हाई कोर्ट में खदान मालिकों के द्वारा रिट दायर करने के बाद अनुमति मिली है और मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि  क्या इसमें नई खदानों की स्वीकृति दी जाएगी और यदि दी जाएगी तो इसमें पर्यावरण कितना प्रभावित होगा, माननीय मंत्री जी यह बताने का  कष्ट करेंगे?

श्री दिलीप अहिरवार - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2020 के बाद डोलोमाइट खदान की स्वीकृति नहीं की गई. अब जो नीति अभी लागू होगी उसके बाद से इस विषय की जो जानकारी होगी वह मैं आपको उपलब्ध करा दूंगा. इसके बाद अभी कोई ऐसी जानकारी नहीं है, डोलोमाइट खदान वर्ष 2020 के बाद से स्वीकृत हुई नहीं हैं.

श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी असत्य जवाब दे रहे हैं. निरंतर डोलोमाइट की खदानें चालू हैं मैंने यह पूछा है. अभी नई खदानों की अनुमति देने के लिए शासन ने नोटिफिकेशन जारी किया है तो नई खदानों की स्वीकृति शासन स्तर से  या सरकार की तरफ से दी जाएगी क्या? दूसरा मेरा प्रश्न है कि तत्कालीन कलेक्टर  महोदय के कार्यकाल में डोलोमाइट की इन सभी खदानों की संयुक्त जांच दल बनाकर जांच की गई थी  और इस जांच के आधार पर खदान संचालकों के विरुद्ध लगभग 20 करोड़ रुपये के जुर्माने के नोटिस जारी किये गये थे, लेकिन खदान संचालकों ने कमिश्नर कार्यालय से जुर्माना नोटिस पर स्टे ले लिया और जांच प्रक्रिया को गलत बताकर प्रकरण ही समाप्त कर दिया गया. जब विभाग ने खुद जांच की तो जांच प्रक्रिया गलत कैसे हुई? उस जांच में कोई त्रुटि थी तो त्रुटि सुधार करते हुए जांच क्यों नहीं कराई गई? क्या अब फिर से जांच कराई जाएगी, यह मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं?

श्री दिलीप अहिरवार - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को यह बता दूं कि जो कलेक्टर द्वारा किये गये नोटिस आदेश पर संबंधित पट्टेधारियों पर संचालक आयुक्त के समक्ष जो प्रकरण चल रहा है, वह कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण चल रहा है, इसलिए इसका जब निराकरण हो जाएगा तो इस विषय के लिए बाद में आपके पास व्यक्तिगत रूप से जानकारी दे दूंगा.

श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय, कमिश्नर कार्यालय से स्टे ले लिया गया. जब विभाग ने जांच की थी. अगर विभाग के द्वारा कोई गलत जांच हुई थी तो त्रुटि सुधार किया जाना था. क्‍या यह सही है कि ओसीएल की खदान वर्ष 2006 से बंद है क्‍या बंद खदान से उत्‍खनन किया जा सकता है. यदि नहीं, तो क्‍या बंद खदान से उत्‍खनन करने पर वर्ष 2012 में तात्‍कालिक कलेक्‍टर ओसीएल खदान पर जुर्माना लगाया गया. उनको नोटिस जारी किया गया और जबकि मंत्री जी के उत्‍तर में दिया गया है कि 2006 से यह खदान बंद है. जब खदान बंद है तो तात्‍कालिक कलेक्‍टर को वर्ष 2012 में नोटिस दिया जाता है, उनको रिकवरी की राशि जारी की जाती है और उसी रकबे से निरंतर दूसरे खदान मालिकों ने डोलोमाइट निकालकर के जो अवैध परिवहन होते हैं...

          अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, आपकी चिन्‍ता वाजि़ब हो सकती है लेकिन मेरा आग्रह सिर्फ इतना है कि कुल मिलाकर जो जवाब आया है उसमें से हम प्रश्‍न क्‍या चाहते हैं जिसका जवाब मंत्री जी दें, तो वह प्रश्‍न आप उनसे करेंगे तो उनसे जवाब की उम्‍मीद हम कर सकते हैं.

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- जी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से सिर्फ यही तो पूछना चाह रहा हॅूं कि जब ओसीएल की खदान 2006 से बंद है और तात्‍कालिक कलेक्‍टर के द्वारा 2012 में जांच दल के द्वारा जांच करके उनको नोटिस दिया जाता है, रिकवरी राशि का नोटिस दिया जाता है और उसी खदान से फिर जांच किया जाता है तो वहां का डोलोमाइट निकालकर के ओवरलोडिंग बेची जाती है, जो विभाग खुद उसको पकड़ता है तो क्‍या उन पर कार्यवाही की जाएगी. या उसको पुन: जांच किया जाएगा.

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदस्‍य महोदय को बताना चाहता हॅूं कि मैंने यह बताया है कि वर्ष 2020 के बाद कोई खदानें स्‍वीकृत नहीं हुईं. उसके पहले 41 खदानें स्‍वीकृत हैं और मैं आपको बता दूँ कि माननीय न्‍यायालय में यह प्रकरण चल रहा है इसलिए उसकी बात करना उचित नहीं है.

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हॅूं...

          अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, प्‍लीज. थर्ड सप्‍लीमेंट्री भी हो गई है. बाकी आप व्‍यक्‍तिगत रूप से मिलकर मंत्री जी को बताओ.

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ मजदूरों से जुड़ा प्रश्‍न है...

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री बाला बच्‍चन जी.

          श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न यह है कि ऐसा विधानसभा में कभी नहीं देखा कि एक-एक मंत्री को दो-दो आसन उपलब्‍ध कराया गया हो. क्‍या वे दो-दो सीट से जवाब दे सकते हैं. आज श्री इन्‍दर सिंह परमार जी अपनी सीट को छोड़कर महिला एवं बाल विकास विभाग की सीट से जवाब दे रहे हैं.

          श्री विश्‍वास सारंग -- अरे, भईया, उनकी सीट चेंज हो गई है. वे अपनी ओरिजनल सीट से बोल रहे हैं.

          श्री बाला बच्‍चन -- कल वे वहां से बोल रहे थे, इसलिए मेरी जानकारी के लिए भी मुझे पता होना चाहिए.

          श्री विश्‍वास सारंग -- अरे भईया, उनकी सीट चेंज हो गई है. बाला बच्‍चन जी, यहां लिखा हुआ आता है, वह देख लिया करो.

          श्री बाला बच्‍चन -- मैं भी मेरी जानकारी के लिये चाह रहा था कि ऐसी कहीं व्‍यवस्‍था में परिवर्तन तो नहीं हो गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बाला बच्‍चन जी, परमार साहब ठीक स्‍थान पर बैठे हैं.

          श्री बाला बच्‍चन -- धन्‍यवाद माननीय अध्‍यक्ष महोदय. क्‍योंकि कल वे वहां से जवाब दे रहे थे. आज अभी यहां से जवाब दे रहे हैं. इसलिए मैंने प्रश्‍न किया.

          श्री विश्‍वास सारंग -- बाला भाई, यहां नीचे लिखा हुआ आता है.

          श्री राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इनका गोलपोस्‍ट है इनके पास है, वे बदल देते हैं यहां से बॉल आती है वहीं खड़ा कर देते हैं, गोल हो ही जाता है.

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, मजदूरों से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है. मजदूरों के पंजीयन के बारे में है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, प्‍लीज.

थाना अम्‍बाह एवं पोरसा में अपराधों में वृद्धि

[गृह]

11. ( *क्र. 877 ) श्री देवेन्द्र रामनारायन सखवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिले के थाना अम्बाह एवं पोरसा में वर्तमान में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी कब-कब से पदस्थ हैं? सभी के नाम एवं पदस्थापना दिनांक सहित सूची दें। (ख) अम्बाह एवं पोरसा थाना क्षेत्र अन्तर्गत विगत तीन माह में कौन-कौन से अपराध पंजीबद्ध किस-किस दिनांक को किये गये हैं? इन पंजीबद्ध अपराधों में से चोरी के कितने मामले पंजीबद्ध हुए? इन पंजीबद्ध मामलों में किन-किन मामलों में चोरी की सामग्री जप्ती की गई है? कृपया सभी प्रकरणों के पंजीबद्ध अपराध क्रमांक सहित सूची दें। (ग) क्या लंबे समय से इन दोनों थानों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों की सांठ-गांठ अपराधियों से होने के कारण अपराधों में वृद्धि हो रही है? यदि नहीं, तो ऐसे क्या कारण हैं, जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) थाना अम्बाह एवं पोरसा में पदस्थ पुलिस अधिकारियों की अपराधियों से सांठ-गांठ नहीं हैं, अतः सांठ-गांठ के कारण अपराधों में वृद्धि होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। विगत विधानसभा चुनाव 2023 के आलोक में चलाये गये अभियान (अवैध शराब, जुआ, सट्टा आदि) के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के कारण अपराधों की कायमी में आंशिक बढोत्तरी हुई है।

          श्री देवेन्‍द्र रामनारायण सखवार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपको धन्‍यवाद कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया. मैं बता देना चाहता हॅूं कि मैं आपके ही गृह क्षेत्र से विधायक हॅूं. मैंने गृह विभाग से प्रश्‍न किया है. उन दो प्रश्‍नों के जवाब तो मुझे सही मिले, लेकिन मेरा जो खंड-ग का सवाल है, उसका जवाब सही नहीं मिला है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हॅूं कि क्‍या लंबे समय से इन दोनों थानों में पदस्‍थ पुलिस अधिकारियों की सांठगांठ अपराधियों से होने के कारण अपराधों में वृद्धि हो रही है. यदि नहीं, तो ऐेसे क्‍या कारण हैं जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं. हमारी अम्‍बाह विधानसभा में आए दिन चोरियां हो रही हैं. 25-25 लाख रूपए तक की चोरियां हो रही हैं.  

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जी ने जो प्रश्न किया है. ऐसा कोई कारण नहीं है ना ही उनके पास में ऐसा उदाहरण है कि ऐसी कोई सांठ-गांठ कदापि नहीं है. जहां तक अपराधों में वृद्धि का सवाल है. मैं नहीं समझता हूं कि वह कहां से अपराधों में वृद्धि का दावा कर रहे हैं, ऐसा कोई भी दावा उनका उचित नहीं है इसमें कोई भी ऐसा तथ्य नहीं है. यदि प्रकरण पंजीकृत हो रहा है. तो यह स्पष्ट दिखाता है कि पुलिस कार्यवाही हो रही है.

          श्री देवेन्द्र रामनारायण सखवारअध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि अभी कम से कम तीन प्रकरण ऐसे हैं जिनमें चोरियां हुई हैं उसमें कम से कम 25 से 30 लाख तक की चोरियां हुई हैं. आज तक उनकी कोई जप्ती नहीं हुई, ना ही कोई उसमें कोई कार्यवाही हुई है.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल अध्यक्ष महोदय, थाना पोरसा के तहत 2 चोरियां हुई थीं जिनमें 1 लाख 75 हजार की सम्पत्ति की चोरी होना बताई गई थी. एक चोरी की पकड़ हो गई है उसमें 1 लाख 21 हजार रूपये की रिकव्हरी भी हो गई है. थाना अम्बाह में 20 चोरियों की शिकायत थी जिसमें से 12 चोरियां रिकव्हरी कर ली गई हैं. 7 लाख 28 हजार रूपये की कुल सम्पत्ति का मूल्य की चोरी होना बताया गया था जिसमें से 6 लाख 24 हजार की रिकव्हरी हो गई है. अभी एक लूट हुई थी जिसमें चूंकि उनका ड्राईवर ही चोरी में शामिल था, इसलिये यह लूट हुई थी. लेकिन पुलिस से बहुत तत्परता से काम करते हुए उसकी रिकव्हरी की है उसमें ड्राईवर को पकड़ लिया है उसमें लगभग 600 ग्राम गोल्ड की रिकव्हरी हुई है.

          अध्यक्ष महोदयप्रश्नकाल समाप्त

                                               (प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

समय 12.02                                अध्यक्षीय घोषणा

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय, मैं तो आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने शून्यकाल में नये विधायकों को अवसर देने का काम किया है मैं समझता हूं कि उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है. आपके इस नये सदस्यों को अवसर देने का जो आप बहुत अच्छा मौका हमारे माननीय सदस्यों को दे रहे हैं. एक बार चाहता हूं कि जोरदार लगना चाहिये कि वास्तव में यह बहुत ही प्रजातांत्रिक काम आपने किया है, यह प्रजातंत्र को मजबूत करने वाला काम है. एक बार फिर से सदन की ओर से आपको धन्यवाद देता हूं.

  श्री रामनिवास रावतअध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विजयवर्गीय जी की बात से सहमत होते हुए पहले भी मैंने पिछली विधान सभा में बात उठाई थी जो आपने नियम बनाया था वह भी आपने निरस्त करके सदस्यों के प्रश्नों को इस विधान सभा को बहुत महत्व प्रदान किया है. इसके लिये हम पूरे सदन के समवेत सदस्य आपको धन्यवाद देते हैं और भी सुधार की हम अपेक्षा रखेंगे. ,

          अध्यक्ष महोदयआप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.04         बजे

 नियम 267-क के अधीन विषय

          अध्यक्ष महोदय--       

निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जायेंगी

 

                                                                                               


 

 12.06 बजे                  पत्रों का पटल पर रखा जाना.

(1) मध्‍यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

 (2) (क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य लघु वनोपज (व्‍यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023

(ख) मध्‍यप्रदेश राज्‍य पावरलूम बुनकर सहकारी संघ मर्यादित, बुरहानपुर (म.प्र.) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(ग) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी आवास संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(घ) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (म.प्र.) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(ङ) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी उपभोक्‍ता संघ मर्यादित, भोपाल (म.प्र.) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023, एवं

(च) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी बैंक मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023

 

  (3) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013)  की धारा 395 की उपधारा (1) (ख)

(i) मध्‍यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर का इक्‍कीसवां वार्षिक प्रतिवेदन  वर्ष 2022-2023, 

(ii) मध्‍यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का इक्‍कीसवां वार्षिक प्रतिवेदन वित्‍तीय वर्ष 2022-2023, तथा

 

(iii) एम.पी.पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड का 16 वां वार्षिक प्रतिवेदन  वर्ष 2021-2022 

 

 

(4) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013)  की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) मध्‍यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड का 39 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021


(5) विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 

 

(6) एन.एच.डी.सी. लिमिटेड का 23 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 

 

(7)   (i)   म.प्र.प्‍लास्टिक पार्क डेव्‍हपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अन्तिम लेखे वर्ष 2022-        2023,

(ii)  डी.एम.आई.सी. पीथमपुर जल प्रबंधन लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020, तथा

(iii) डी.एम.आई.सी. विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-       2022

 

 

  12.10 बजे                                

                    तहसीलदार को निलंबित करने के संबंध में राजस्‍व मंत्री द्वारा घोषणा    

          राजस्‍व मंत्री(श्री करण सिंह वर्मा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रार्थना थी कि मेरे विभाग से एक तहसीलदार एक आदिवासी को थप्‍पड़ मारते हुए वायरल हो रहा है. मैं उसको चूंकि एक किसान हमारा मालिक है, मैं उसको थप्‍पड़ मारने के उसमें, उसको निलंबित करने की घोषणा करता हूं. (मेजों की थपथपाहट)

 

12.11 बजे                                    ध्‍यानाकर्षण

(1) सागर जिले में पाला एवं तुषार से फसल नष्ट होने से उत्पन्न स्थिति.

इंजी. प्रदीप लारिया (नरयावली) -- अनुपस्थित

(2) प्रदेश में स्थापित जल गुणवत्ता एवं निगरानी प्रयोगशालाओं में अनियमितता.

श्री महेश परमार (तराना) -- अनुपस्थित.

 

 

 

12.12 बजे                                     आवेदनों की प्रस्‍तुति.

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी आवेदन प्रस्‍तुत हुए माने जाएंगे.

            मुझे लगता है कि इसमें याचिकाओं को आवेदन लिखा जाता है तो इस शब्‍दावली को अगले सत्र से बदल दें, चूंकि याचिका शब्‍द का अपना भी एक महत्‍व है, इसलिये अगले सत्र से इसको याचिका के रूप में ही अगर सदन सहमत है, तो हम लोग करेंगे.                                                    

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले याचिका ही होती थी और आपने सही कहा कि याचिका का एक अपना महत्‍व होता है.

                                                                            (सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)


 

12.13 बजे

 

                                                                                   


 

12.15 बजे                              अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होना

          अध्‍यक्ष महोदय--  आज चूंकि सदन को निरंतरित रखेंगे, भोजनावकाश नहीं होगा, लॉबी में भोजन की व्‍यवस्‍था रहेगी हम आते जाते भोजन ग्रहण कर सकते हैं, सभी सदस्‍य सूचित हों. प्रेस के लिये भी उसी प्रकार की व्‍यवस्‍था रहेगी.          

 

12.16 बजे           वर्ष 2023-24 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान की

                                   मांगों पर मतदान (क्रमश:)

 

          श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा अनुपूरक वैसे तो रेग्‍यूलर बजट प्रस्‍तुत किया जाना था, लेकिन आने वाले लोक सभा चुनावों की वजह से सप्‍लीमेंट्री बजट प्रस्‍तुत किया है. माननीय वित्‍त मंत्री जी द्वारा जो बजट प्रस्‍तुत किया गया है यह तो एक सामान्‍य प्रक्रिया है कि आप बजट प्रस्‍तुत करेंगे, राज्‍य का खर्चा चलायेंगे, विधान सभा से अनुमोदित होगा, ले‍किन मैं इसके संबंध में यही कहना चाहूंगा कि आपकी जो वित्‍तीय स्थिति है वह किस तरह की है, इस तरह का विवरण जरूर प्रस्‍तुत किया जाना चाहिये. हम चाहते हैं कि इस पर पूरी तरह से सरकार एक श्‍वेतपत्र जारी करे कि सरकार की इनकम कितनी है, सरकार पर कर्जा कितना है और सरकार की स्थिति क्‍या है और जो आरबीआई के तहत कर्ज लेने की सीमा है उसके आप कितने नजदीक हो, अभी तो हो फिर आगे कैसे चलाओगे कितने नजदीक हो यह भी माननीय वित्‍तमंत्री जी स्‍पष्‍ट करें. आज की तारीख में मध्‍यप्रदेश सरकार पर 3.85 लाख करोड़ रूपये का कर्ज है. (श्री बालाबच्‍चन जी द्वारा बैठे-बैठे कुछ कहने पर)

          अध्‍यक्ष महोदय--  बाला बच्‍चन जी समर्थन नहीं कर रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत--  नहीं वह समर्थन से आगे जा रहे हैं कि लगभग 4 लाख करोड़ और शायद पहुंच गया हो 4 लाख करोड़ कोई आश्‍चर्य नहीं है, क्‍योंकि वह एक कहावत है कि कर्ज से पूरी सरकार चल रही है, धीरे धीरे वह संस्‍कृत का श्‍लोक तो मुझे याद नहीं लेकिन, वह कर्ज लेकर घी पीना वह स्थिति इस सरकार की है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार की आय कितनी है जो केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त नहीं होती उसके अलावा स्‍थानीय आपकी आय वाणिज्यिक और इन विभागों से लगभग 2.25 लाख करोड़ यह आपके राज्‍य की आय से ब्‍याज और ऋण की अदायगी जो होती है वह आपकी 54 हजार करोड़ रूपये अधिक है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुल बजट का वेतन भत्‍तों और ब्‍याज भुगतान पर आपका खर्च हो जाता है जीएसडीपी का बजट का 26.2 प्रतिशत आपका पूरा व्‍यय होता है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ आर्डर है. माननीय रावत जी बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, अनुपूरक मांगों में सिर्फ उन्‍हीं बातों पर चर्चा की जा सकती है, जो उसमें प्रस्‍तुत की गई हों. माननीय रावत जी आम बजट जैसा भाषण दे रहे हैं, मेरा अनुरोध है वह सीनियर मेम्‍बर हैं, अनुपूरक पर आयें.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आपने ध्‍यान दिलाया, वह जरूर इस मामले में अपने को करेक्‍ट करेंगे, वह बहुत संजीता सदस्‍य हैं.

          श्री रामनिवास रावत--  अगर कर्ज लेकर राशि का प्रावधान नहीं किया हो तो मैं कर्ज की बात नहीं करूंगा, यह स्‍पष्‍ट कर दें. अगर कर्ज लेकर सरकार ने राशि का प्रावधान नहीं किया हो तो स्‍पष्‍ट कर दें तो मैं कर्ज के बारे में चर्चा नहीं करूंगा. जब इस अनुपूरक अनुदान में कर्ज की राशि समाहित है तो मैं समझता हूं कि कर्ज पर चर्चा से...

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप इधर आसन की तरफ देखकर बोलो. ...(हंसी)...           

            श्री रामनिवास रावत - जी अध्यक्ष महोदय. माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में प्रति  व्यक्ति पर लगभग 50 हजार रुपये कर्ज इस समय पहुंच गया है और जो मैं समझता हूं कि वेतन,भत्ते,पेंशन और ऋण चुकाने के बाद विकास के लिये बड़ा भटकना पड़ता है. विकास के लिये राशि बची नहीं है. कर्ज लेकर हम राशि कार्यों पर लगा रहे हैं. ब्याज पर हम 24 हजार करोड़ रुपये दे रहे हैं. पेंशन पर हम 18636 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष दे रहे हैं और वेतन,भत्तों पर 56314 करोड़ रुपये हम दे रहे हैं जो कि बजट का टोटल 26.2 प्रतिशत है और वेतन पर 18.64 करोड़,पेंशन पर 6.16 और ब्याज और ऋण पर 8.29 करोड़, इस तरह से हमारे बजट की राशि खर्च हो रही है. आपने बजट प्रस्तुत किया है और बजट में मांगें भी की हैं. कल केग की रिपोर्ट भी आई है. बजट में कुछ चीजें जो आपके लिये जरूरी थीं आवश्यक थीं नहीं तो आपको आगे के लिये कर्ज नहीं मिलता. मुख्य शीर्ष 2049 इसमें आपने बाजार के ऋणों के भुगतान के लिये राशि ली है. मद क्रमांक 12 में भी प्राप्त ऋणों पर ब्याज के भुगतान के लिये राशि ली है. मद क्रमांक 13 में भी ब्याज और भुगतान के लिये राशि ली है.मद क्रमांक 14 में भी ब्याज और भुगतान के लिये राशि ली है और मुख्य शीर्ष 6003 में ऋणों के पुनर्भुगतान के लिये राशि ली है. ज्यादातर राशि तो ऋण भुगतान और ब्याज भुगतान पर खर्च करने के लिये आपने राशि ली है और मुख्यमंत्री के लिये विवेकाधीन राशि भी 19 करोड़ 40 लाख 9 हजार  664 रुपये ली है. मैं समझता हूं कि यह राशि मुख्यमंत्री इस सदन के नेता हैं. सरकार के मुखिया हैं. राशि ली है इसमें हमें आपत्ति नहीं है लेकिन हमें आपत्ति है कि इस राशि का वंटन वे कैसे करेंगे. हमें संदेह है. माननीय सभापति महोदया, यह राशि हम चाहते हैं कि आप विधान सभा से यह राशि लेंगे लेकिन इस राशि का आवंटन सबके लिये हो और सबकी आवश्यकतानुसार हो क्योंकि हमें संदेह है. मैं आगे आऊँगा कैलाश जी.

समय 12.22 बजे     सभापति महोदया (श्रीमती झूमा ध्यान सिंह सोलंकी) पीठासीन हुईं.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) -  हमारे प्रधानमंत्री जी का नारा है सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास और उसी के  अनुसार हम काम करते हैं. इसलिये आप चिंता मत करिये आवंटन बिल्कुल बराबर होगा.

          श्री आरिफ मसूद- कैलाश जी, हम अपना भी मान लें ना.

          श्री रामनिवास रावत - मैं चाहूंगा कि आपने जो सूत्र बोला है सबका साथ,सबका विकास सबका विश्वास तो इस पर भी मैं आऊंगा. यह भरोसा इस इस सरकार ने तोड़ दिया है. इस बजट में ही तोड़ दिया है. सरकार पूरे प्रदेश की होती है भले आप भारतीय जनता पार्टी की सरकार है लेकिन आप मंत्री पूरे प्रदेश के हो भारतीय जनता पार्टी के व्यक्तियों के लिये नहीं हो. यह सरकार पूरे प्रदेश की है लेकिन जिस तरह से भेदभाव किया जा रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है.  अभी इसमें कुछ जो गारंटियों की बात कही गई है उनके लिये तो राशि ली गई है लेकिन कुछ के लिये राशि का प्रावधान नहीं किया गया है. आपने प्रदेश की लाड़ली बहनाओं का विश्वास जीतने के लिये आपने 3 हजार रुपये देने का वायदा किया था कि नहीं. गारंटी दी थी कि नहीं दी थीत लेकिन इस बजट में कहां है आप बता दो. आप 1250 रुपये के हिसाब से राशि दे रहे हो और वह भी आपका जो आंकड़ा है, वह प्रतिमाह बदलता जा रहा है, क्‍यों. सभापति महोदया, यह बहुत गंभीर मामला है. इसे आप भी देखें कि जो लाड़ली बहनाओं को राशि दी जा रही है, 1250 रुपये, हर महीने लाड़ली बहनाओं की संख्‍या बदलती जा रही है. जून में 1 करोड़ 19 लाख 83 हजार बहनाओं को राशि दी जा रही है. जुलाई में 1 करोड़ 24 लाख 15 हजार 581 बहनाओं को राशि दी गई. अगस्‍त में 1 करोड़ 23 लाख 85 हजार 605 बहनाओं को राशि दी गई. यहां आपकी संख्‍या बदल गई. सितंबर में 1 करोड़ 29 लाख लाड़ली बहनाएं हो गईं. यहां आपकी संख्‍या फिर बदल गई. दिसम्‍बर में 1 करोड़ 28 लाख 40 हजार 920 लाड़ली बहनाएं थीं और जनवरी में 1 करोड़ 28 लाख, यह संख्‍या क्‍यों बदलती जा रही है. माननीय वित्‍त मंत्री जी, इसमें कहीं न कहीं जबरदस्‍त गंभीर वित्‍तीय अनियमितता है. स्‍पष्‍ट करें कि जब दिसम्‍बर में आप लाभान्‍वित हितग्राहियों की संख्‍या 1 करोड़ 28 लाख 40 हजार 920 लाड़ली बहनाएं बता रहे हैं तो दूसरे महीनों में अलग बता रहे हैं, लाखों में आपने लाड़ली बहनाएं गायब कर दीं. किस तरह से आप प्रदेश को चलाना चाहते हैं. आप राशि क्‍यों मांग रहे हैं. पहले तो आप न्‍याय करें कि 3 हजार रुपये का आपने वायदा किया था कि नहीं किया था. अगर 3 हजार रुपये का वायदा किया था तो आप प्रदेश की उन लाड़ली बहनाओं के लिए 3 हजार रुपये का प्रावधान इसमें करते, हम खुलकर समर्थन करते. आप उनके खिलाफ वायदा खिलाफी कर रहे हैं. आप उनको धोखा दे रहे हैं. माननीय सभापति महोदया, इस तरह से ये कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं. यह इनकी स्‍थिति है.

          माननीय सभापति महोदया, आप राशि का कैसे उपयोग कर रहे हैं, यह भी स्‍पष्‍ट करें. पहले आपके वित्‍तीय लेखे साल भर के आने चाहिए थे कि वर्ष 2023-24 का कितना बजट प्रावधान था, कितनी राशि व्‍यय की गई और कितनी राशि आपने सरेण्‍डर की. किन-किन विभागों ने सरेण्‍डर की. वित्‍तीय लेखें प्रस्‍तुत किए जाते हैं, मैं समझता हूँ कि वित्‍तीय लेखा पटल पर नहीं आया है शायद. वित्‍तीय लेखें प्रस्‍तुत किए हैं क्‍या, नहीं किए हैं. जबकि वर्ष के अंत में चालू वर्ष के वित्‍तीय लेखे प्रस्‍तुत किए जाते हैं. आपने किस-किस मद की राशि का परिवर्तन करके बिना अनुमति के, बिना विधान सभा की स्‍वीकृति के कहां-कहां व्‍यय किए, यह भी गंभीर वित्‍तीय अनियमितता में आता है. कैग की रिपोर्ट में उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया है, उन्‍होंने आपत्‍ति ली है कि आपने गलत तरीके से राशि व्‍यय की है, उसमें भ्रष्‍टाचार प्रथम दृष्‍टया परिलक्षित होता है.

          माननीय सभापति महोदया, एक आदेश है, मध्‍यप्रदेश शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, मंत्रालय, वल्‍लभ भवन. राज्‍य शासन द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सामान्‍य श्रेणी के लंबित मानदेय के भुगतान के लिए विशेष प्रकरण मानते हुए अनुसूचित जनजाति उपयोजना 0658070831004 में उपलब्‍ध शेष राशि 207 करोड़ की राशि को सामान्‍य योजना में पुर्नवियोजन किया जाना स्‍वीकृत किया जाता है. उपरोक्‍त स्‍वीकृति वित्‍त विभाग के जावक क्रमांक, दिनांक द्वारा प्रदान की गई. क्‍या महिला एवं बाल विकास विभाग इस तरह से कर सकता है. क्‍या वित्‍त विभाग इस तरह से स्‍वीकृति दे सकता है. यह कौन सी राशि है. अगर यह राज्‍य शासन की राशि है तो यह वह राशि है जो केन्‍द्र, ज्‍यादातर अनुसूचित जनजाति उपयोजना की जितनी भी योजनाएं हैं, जहां तक मेरी जानकारी में है, केन्‍द्र प्रवर्तित योजना है और केन्‍द्र प्रवर्तित योजनाओं में आपको अपनी राशि मिलानी पड़ती है. शायद या तो वह राशि है या केन्‍द्र से प्राप्‍त हुई राशि है, किस तरह से आपने इस राशि को महिला एवं बाल विकास विभाग के मद में परिवर्तित कर दिया.

क्‍या यह वित्‍तीय अनियमितता नहीं है. आप आज राशि किसी चीज के लिए मांग रहे हो और उपयोग किसी चीज में करोगे. आपका कैसे भरोसा करें ? आप राशि का उपयोग कैसे करोगे ? आप मध्‍यप्रदेश के उन अनुसूचित जनजाति वर्ग एवं प्रदेश के आदिवासियों के साथ भी धोखा कर रहे हो, छलावा कर रहे हो, उनके लिए प्रस्‍तावित की गई विकास की राशि को आप सामान्‍य योजना में परिवर्तित कर रहे हो.

          माननीय सभापति महोदया, यह बहुत महत्‍वपूर्ण और आपत्ति लेने वाली बात है. यह दुर्भाग्‍य की बात है कि आप आदिवासी उपयोजना की राशि को किस तरह से व्‍यय कर रहे हो ? यह आपको स्‍पष्‍ट करना चाहिए कि आपने ऐसा क्‍यों किया ?  यह तो एक विषय संज्ञान में आ गया था. आपके बजट की पूरी स्थिति की जानकारी मिलना चाहिए, हम तो यह चाहते हैं. इस बजट में आपने जनसम्‍पर्क के लिए राशि मांगी है, जब आप खर्च की सीमा के लगभग आरबीआई के जो निर्देश ऋण लेने की सीमा के नजदीक पहुँच रहे हो, तो आप अपव्‍यय को कम करते जाइये, व्‍यय को आप कम करते जाइये, आप फिजूलखर्ची रोकते जाइये. पहले भी ऐसा हुआ है कि राज्‍य सरकारें जिन व्‍ययों को कम कर सकती हैं, कम करें. आप जनसम्‍पर्क के अंतर्गत इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के प्रचार हेतु 120 करोड़ रुपये का प्रावधान कर रहे हो. आप केवल प्रचार-प्रसार की सरकार हैं, यह सरकार केवल विज्ञापन की सरकार है, विज्ञापनों में आप चाहे जितना देते रहें. प्रदेश के हर कोने में विज्ञापन लगे हैं कि हम लाड़ली बहनाओं को 3,000 रुपये देंगे. आज भी प्रदेश के हर कोने में विज्ञापन लग रहे हैं कि हम 450 रुपये में बहनाओं को सिलेण्‍डर देंगे, लेकिन आपने सिलेण्‍डर नहीं दिये हैं. आप दे भी रहे हैं, तो उनका अता-पता नहीं है, आप संख्‍या दे रहे हैं. वह राशि कहां जा रही है ? जिन बहनाओं को आप सिलेण्‍डर का अनुदान दे रहे हैं, हम तो चाहते हैं कि आप उनकी क्षेत्रवाइज़ सूची सबको उपलब्‍ध कराएं. जिससे क्षेत्र में हम देख सकें कि यह पैसा कहीं कोई और तो नहीं निकाल रहा है, इसमें वित्‍तीय अनियमितता तो नहीं हो रही है, इसमें भ्रष्‍टाचार तो नहीं हो रहा है. आप केवल असत्‍य आंकड़े प्रस्‍तुत कर रहे हो. मैं तो यह मानता हूँ कि आपने बहनाओं को वायदा किया है और आपके होर्डिंग्‍स भी लगे हैं, आपके प्रचार-प्रसार के बड़े-बड़े पोस्‍टर्स और बैनर लगे हुए हैं. आप इन बहनाओं को 450 रुपये में सिलेण्‍डर दें, आप अपना वायदा निभाएं. आप इसके लिए राशि ले लें, हम समर्थन करेंगे. आप उनको 3,000 रुपये देने के लिए राशि दें, हम समर्थन करेंगे. हमने कब मना किया है ? आपने किसानों से वायदा किया था और किसानों के लिए वचन दिया था, आप जिस मोदी की गारंटी की बात करते हो, क्‍या मोदी की गारंटी में नहीं है 2,700 रुपये क्विंटल गेहूँ देना, आप 2,700 रुपये क्विंटल गेहूँ खरीदने के लिए आप इसमें राशि का प्रावधान करो, आप वचन दो. हम आपके बजट को सर्वसम्‍मति से पारित करवाएंगे. आप 3,100 रुपये क्विंटल धान के दो, हम बजट को सर्वसम्‍मति से पारित करवाएंगे, लेकिन आप पूरे प्रदेश की जनता के साथ वादाखिलाफी कर रहे हो, आप बहनाओं के साथ वादाखिलाफी कर रहे हो, आप किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रहे हो, आप पदों को स्‍वीकृत करने के लिए इसमें व्‍यवस्‍था करते, पदों की आवश्‍यकता होती है, आप जानते हैं कि जो एनसीईआरटी के नियम हैं, उसके अनुसार शिक्षा विभाग में बच्‍चों की संख्‍या बढ़ती जा रही है, आपके पद उतने के उतने ही हैं. मैं आपकी तरफ इसलिए इशारा कर रहा हूँ.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटैल)  - आप आसन्‍दी का सम्‍मान नहीं कर रहे हैं, आपको आसन्‍दी की तरफ देखकर बोलना चाहिए.

          श्री रामनिवास रावत - मैं सभापति महोदया बराबर बीच में कहता जा रहा हूँ, मैं बहुत सम्‍मान करता हूँ. प्रहलाद जी, मैं आपकी तरफ इसलिए देख रहा हूँ कि मैं जो कह रहा हूँ, उसे आप समझ रहे हो बाकि का कोई भरोसा नहीं है. (हंसी)

          डॉ. सीतासरन शर्मा - हम भी समझ रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत - आप तो मेरी पीठ के पीछे हैं. आपका तो सम्‍मान करता हूँ, आपको तो प्रणाम करता हूँ.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा - आपकी पीठ के पीछे बैठे हैं, उधर कोई नहीं समझ रहा है आपकी बात.

          श्री रामनिवास रावत - वह सब समझ रहे हैं.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा - आप ही तो कह रहे हैं. (हंसी)

          श्री रामनिवास रावत - माननीय सभापति महोदया, 3,100 रुपये भी मोदी की गारंटी है. क्‍यों रामेश्‍वर भाई है कि नहीं.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा - है.

          श्री रामनिवास रावत - फिर वह पूरी क्‍यों नहीं करा रहे हो ? (हंसी)  आप मानोगे न कि नहीं हो रही है.

          डॉ. रामकिशोर दोगने - जैसे 15 लाख रुपये खाते में आएंगे, वैसे ही यह भी गारंटी.    

          श्री राम निवास रावत-  माननीय सभापति महोदया, इसमें जो प्रावधान किए गए हैं, उन प्रावधानों की ओर, मैं और आगे जाता हूं.  वित्‍त मंत्री जी मैं, आपका ध्‍यान  अनुपूरक अनुमान की बजट पुस्‍तक की ओर दिलाना चाहूंगा. आपने पृष्‍ठ संख्‍या 116 में परीक्षित मद के अंतर्गत काफी कुछ व्‍यवस्‍था, सिंचाई सुविधाओं में सुधार हेतु की है. आप कृपया मुझे बतायें कि ये परीक्षित मद कौन सी हैं, इसमें आपने राशि की व्‍यवस्‍था कहां से की है, यह स्‍पष्‍ट करें. आपने परीक्षित मद के पीछे-पीछे सारे पृष्‍ठ जोड़े हैं और इसी तरह से पृष्‍ठ क्रमांक 120 पर लोक निर्माण विभाग के लिए व्‍यवस्‍था की है, यह अपरीक्षित मद है. यह अपरीक्षित मद कौन सी है, आप स्‍पष्‍ट करें कि अपरीक्षित मद और परीक्षित मद, कौन सी हैं और स्‍पष्‍ट करने के साथ-साथ अपरीक्षित मद और परीक्षित मद में आपने किन-किन विधान सभाओं के लिए, कामों की व्‍यवस्‍था की है और उन विधान सभाओं से किस-किस पार्टी के विधायक हैं. आपकी पूरी आधी किताब में किए गए बजट प्रावधानों के विषय में, मैं जानना चाहता हूं कि ये किन-किन के लिए है.

          माननीय सभापति महोदया, मैंने मुख्‍यमंत्री जी के विवेकाधीन कोटे की राशि की बात कही थी, आपने इसमें जितने भी विधायक रखे हैं, सारे के सारे भारतीय जनता पार्टी के हैं. केवल एक पार्टी के लोगों के लिए आपने व्‍यवस्‍था की है. आपने जिस दिन शपथ ली थी, उस दिन शपथ में कहा गया था कि मैं संविधान के अंतर्गत किसी के साथ भेदभाव नहीं करूंगा.

12.37 बजे

{ सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए.}

 

        श्री राम निवास रावत-  माननीय सभापति महोदय, इन्‍होंने ईश्‍वर की शपथ ली थी कि मैं, राज्‍य की जनता के लिए न्‍याय करूंगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं करूंगा. आपने अपनी शपथ को भी भंग किया है. माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी आपसे हमें ऐसी उम्‍मीद नहीं थी. भाजपा के विधायकों से आपने 15 करोड़ रुपये के प्रस्‍ताव लिए हैं.

          श्री अभय कुमार मिश्रा-  आपने कहा था दलगत भावना से ऊपर उठकर काम करेंगे, प्रारंभ से ही चावल का दाना समझ आ रहा है.

          श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)-  15 करोड़ रुपये के प्रावधान भी कुछ लोगों से मांगे गए हैं, कुछ लोगों से नहीं मांगे गए हैं.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे-  केवल भाजपा वालों से मांगे गए हैं.

          श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)-  ये भाजपा-कांग्रेस क्‍या होता है ? यदि आप 15 करोड़ रुपये की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं तो सभी के लिए कीजिए.

          श्री अभय कुमार मिश्रा-  आपको सभी को यह राशि देनी चाहिए. पूरे प्रदेश की जनता के लिए सरकार है. आप जनता का विकास रोक रहे हैं, हमारा क्‍या है, हम अपने लिए नहीं मांग रहे हैं, क्षेत्र की जनता के लिए मांग रहे हैं.

          हमने 24 जनवरी को मुख्‍यमंत्री जी को पत्र भी लिखा था कि मुझे आपकी योग्‍यता पर संदेह नहीं, किंतु कार्य प्रणाली गरिमा के अनुरूप नहीं है.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे-  आप यदि कांग्रेस वालों को भी 15 करोड़ रुपये दे देते तो हम भी आपकी प्रशंसा करते. 15 नहीं तो कम से कम 10 करोड़ रुपये ही दे देते.

          श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)-  ये सबका विकास, सबको साथ लेकर चलने की परिकल्‍पना, आदरणीय मोदी जी इसे बार-बार दोहराते हैं लेकिन व्‍यवहार में क्‍या हो रहा है.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)-  माननीय सभापति महोदय, मुझे लगता है कि रावत जी वरिष्‍ठ विधायक हैं. हम सभी उनसे सीखेंगे लेकिन उनके विधायक ही उनका समय ले रहे हैं. वे अपनी बात रखने में समर्थ हैं.

          श्री राम निवास रावत-  ये केवल हमारे साथियों की पीड़ा है.

          श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)-  पटेल जी, यहां रावत जी की समर्थता पर कोई प्रश्‍न चिन्‍ह नहीं है.

          सभापति महोदय-  शेखावत जी, आप रावत जी को अपनी बात कहने दें.

          श्री राम निवास रावत-  माननीय सभापति महोदय, आप भी सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, राज्‍य सरकार में मंत्री भी रहे हैं, आपने भी मंत्रालय चलाया है, क्‍या आपने कभी ऐसा किया है कि भाजपा या कांग्रेस का विधायक है. विधायक, विधायक होता है, आपने हमेशा सम्‍मान दिया है. यह पहली बार प्रदेश की विधान सभा में हो रहा है, यह पहली बार इस सरकार के सामने हो रहा है, ऐसा भेदभाव हो रहा है.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा-  रावत जी, आप नहीं थे, कमल नाथ जी ने ऐसा ही किया है.

          सभापति महोदय-- रावत जी आप अपनी बात को जारी रखें.

          श्री रामनिवास रावत-- माननीय सभापति महोदय, यह अपरीक्षित मद कौन सा है इसे स्‍पष्‍ट करें और साथ ही यह स्‍पष्‍ट करें कि विधान सभा की जो प्राक्‍कलन  समिति बनी हुई है. प्राक्‍कलन समिति की बजट प्रस्‍तुत करने के लिए क्‍या-क्‍या अनुशंसाएं हैं, प्राक्‍कलन समिति ने क्‍या-क्‍या रिपोर्ट दी है, उसका क्‍या पालन किया गया है  इसमें एक-एक करोड़ रुपए से कम के कामों का प्रावधान किया गया है. बजट में प्राक्‍कलन समिति की रिपोर्ट में है कि 1 करोड़ रुपए से कम के कामों का बजट के किसी मद में उल्‍लेख नहीं किया जाएगा यह कौन सी मद है? आप ऐसा क्‍यों कर रहे हैं? यह द्वितीय अनुपूरक अनुमान आप केवल अपने सदस्‍यों को काम देने के लिए वह भी ऐसे काम हैं न जिनका प्राक्‍कलन है, न जिनका प्रस्‍ताव है. लिखकर दे गए, आपने काम दे दिया. न आपने स्‍पॉट देखा, न आपके विभाग से कुछ आया है और आपने काम शुरू कर दिये. यह कैसे, क्‍यों? मैं समझता हूं कि इनमें बहुत सारे काम तो ऐसे होंगे जिनमें भारी भरकम भ्रष्‍टाचार की स्थिति पैदा होगी. किस तरह से काम स्‍वीकृत होते हैं इसकी जानकारी भी मुझे है, चूंकि सदन में कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्‍हें कहना ठीक नहीं है, लेकिन आप उन्‍हें सुधारें.

          सभापति‍ महोदय, यह अपरीक्षित मद हैं लागत और अनुपूरक 100 रुपए का प्रावधान किया गया है. यह बांटेंगे यह मद क्रमांक 18 में लगभग 29 हजार 190 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 49 में 13 हजार 758 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 10 में 26 हजार 533 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 20 में 8 हजार 227 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 17 में 2 लाख 92 हजार 992 करोड़ रुपए के हैं. यह पूरे के पूरे इन्‍हें यदि पूरा जोड़ें तो यह काम 1 करोड़ से कम लागत के हैं जिन्‍हें बजट में लाने की आवश्‍यकता नहीं थी जो अन्‍य मद होता है जिनमें मंत्रियों को विवेकाधिकार होता है. प्रहलाद जी आपके विभाग की भी राशि ले ली गई है. जिन कामों को स्‍वीकृत करने का अधिकार आपका था उन कामों को भी वहां से स्‍वीकृत कर रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, यह मांग संख्‍या 24 और मद क्रमांक 10 योजना क्रमांक 41 में 23 कार्यों को अपरीक्षित मद के रूप में शामिल किया गया है. इसी तरह से परीक्षित मद के रूप में शामिल किया गया है. कुछ एक करोड़ रुपए से कम के भी बहुत सारे काम है. यह सारे के सारे काम इनमें पूरा चंबल संभाग ही गायब है. एक किसी को पहुंच गया हो तो पहुंच गया हो. कोई ज्‍यादा ताकतवर भाजपा का एमएलए बनकर नहीं आया केवल एक मंत्री जी बैठे हैं इनके क्षेत्र में जरूर काम स्‍वीकृत हैं. आप इसको दिखवा लें मैंने पूरी किताब देखी है.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- आप सही लाईन चलो.

          श्री रामनिवास रावत-- हम सही लाईन चल रहे हैं. हम संविधान का आदर करते हैं, प्रजातंत्र का आदर करते हैं और प्रजातंत्र का सम्‍मान करते हैं.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय सभापति महोदय, रावत जी विद्वान सदस्‍य हैं.       

          श्री बाला बच्‍चन-- माननीय मंत्री जी आप ही बता दो कि किस मद में दिया है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- बाला बच्‍चन जी आप मिल लेना जब बोलो मैं जानकारी दे दूंगा.

          श्री रामनिवास रावत-- माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी को भी मैं बता दूं कि परीक्षित मद योजना का नाम सेठारी बैराज, इंदौर, उज्‍जैन, कटनी, खण्‍डवा, छतरपुर, देवास, नर्मदापुरम, नीमच, पन्‍ना, धार, मंदसौर, रतलाम, शाजापुर, सागर, सीहोर, सिंचाई मंत्री जी सुन लीजिए.

            श्री अभय कुमार मिश्रा -- माननीय सभापति महोदय, रीवा में सिर्फ सेमरिया को छोड़कर, संकीर्ण मानसिकता आप देखिए. सिर्फ एक विधान सभा क्षेत्र को छोड़कर क्योंकि वहां पर यह 800 वोट से हार गए थे तो वहां की जनता से बदला ले रहे हैं. इससे ज्यादा संकुचित मानसिकता क्या हो सकती है.

          सभापति महोदय - अभय जी जब आपका नाम और आपका समय आएगा तब बोलिएगा.

          श्री रामनिवास रावत -- मंत्री जी आप केवल मालवांचल के मंत्री नहीं हैं, पूरे प्रदेश के मंत्री हैं.

          सभापति महोदय -- रावत जी आपका भाषण हो गया हो तो मैं आपके ही दल के सदस्य को बुला रहा हूँ. श्री अभय कुमार मिश्रा जी बोलें.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटैल) -- माननीय सभापति महोदय, मैं सोच रहा था कि रामनिवास जी का भाषण पूरा हो जाएगा तब मैं अपनी बात कहूंगा. आपने उल्लेख किया कि मेरे विभाग का पैसा भी बदल दिया गया है. मुझे लगता है कि तथ्यात्मक बातें करना चाहिए. जो बजट में है वह चीजें सामने हैं. आप जैसे माननीय सदस्य जो इतने वरिष्ठ हैं, मैं मानता हूँ कि चुटकी लेने के लिए तो ठीक है, तथ्य के हिसाब से ठीक नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत -- सभापति महोदय, मैं समझता हूँ कि मंत्री जी बहुत विद्वान व्यक्ति हैं. मंत्रालय से आपकी पहचान नहीं है बल्कि आपकी वजह से मंत्रालय का सम्मान बढ़ेगा, ऐसा मैं मानता हूँ. लेकिन आपके यहां मुद्रांक शुल्क भी आता है, आप पता कर लेना की मुद्रांक शुल्क भी इसमें समाहित कर लिया गया है. स्टाम्प कर भी आता है वह भी इसमें समाहित कर लिया गया है. खनिज विभाग से भी पंचायत कर आता है वह भी इसमें समाहित कर लिया गया है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल -- आपके सामने अनुदान की मांगें आ रही हैं, जैसा डॉक्टर साहब ने हस्तक्षेप किया था. हम जब अनुदान की मांगें लेकर आए तो जो स्थिति है उस परिस्थिति में आपके पास जो उपलब्ध राशि है उसका कैसे सदुपयोग करेंगे यही सदन के सामने रखा है.

          श्री रामनिवास रावत -- बिलकुल है, लेकिन मेरा कहना था जो एक करोड़ से कम के कार्य हैं प्राक्कलन समिति की अनुशंसा के अनुसार उनका उल्लेख इसमें नहीं होना चाहिए लेकिन किया गया है. आपने केवल भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों से 15-15 करोड़ रुपए के प्रस्ताव मांगकर केवल उन्हीं के विधान सभा क्षेत्र में काम स्वीकृत किए हैं. इस तरह आप केवल भेदभाव ही नहीं कर रहे हैं आपने सदन में जो शपथ ली थी. ईश्वर की शपथ खाकर कहा था कि प्रदेश के लोगों के साथ भेदभाव नहीं करूंगा. आपने उस शपथ को भंग करने का काम किया है. यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

          डॉ. योगेश पंडाग्रे (आमला) -- माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य महोदय यहां पर बात कर रहे हैं तो फिर 15 महीने की सरकार पर भी यह बात उठनी चाहिए. बैतूल जिले में पांच विधान सभा क्षेत्र में से एक विधान सभा आमला की थी. उन डेढ़ वर्षों में जो सदस्य थे उनके साथ भेदभाव किया ही गया था, कोई विकास कार्य वहां पर स्वीकृत नहीं किए गए थे. इन्होंने भी जो शपथ ली थी उस पर भी बात करें. साथ ही किसानों के कर्ज माफी की बात की गई थी कि दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ करेंगे. बाकी जगह पर तो शायद कुछ राशि दी गई थी आमला में तो किसानों के साथ भी भेदभाव किया गया था.

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय सदस्य जब आपका नंबर आएगा तब आप बोलिएगा.

          सभापति महोदय -- माननीय सदस्य आपका विषय आ गया है, रावत जी आपका विषय भी आ गया है, मेरा अनुरोध है कि अब आप समाप्त कर दें.

          श्री रामनिवास रावत -- सभापति महोदय, मैं माननीय डिप्टी सीएम साहब से 2-3 बातें कहना चाहता हूँ. एक तो यह स्पष्ट कर दें कि आपने जिन कार्यों का प्रावधान किया है वह कौन कौन से विधान सभा क्षेत्र के हैं और केवल भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के क्षेत्र में काम स्वीकृत किए हैं, मेरा यह आरोप है. आरबीआई के निर्देशों के अनुसार आपकी ऋण लेने की जो सीमा है वह कितनी है और आप कितनी सीमा तक पहुंच गए हैं वह स्पष्ट कर दें.

          श्री दिलीप सिंह परिहार --रावत जी, जिन जिन विधायकों ने काम दिए हैं उनके स्वीकृत हो रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय सभापति महोदय, हम चाहते हैं कि यह भेदभाव न करें. सभी सदस्यों को एक दृष्टि से देखें. आदरणीय विजयवर्गीय जी आप कह रहे थे सबका साथ सबका विकास. अभी तक की सरकारों में ऐसा पहली बार हुआ है अभी तक के मेरे राजनीतिक जीवन में इस सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के व्यक्ति और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि में भेदभाव किया है. सबको एक दृष्टि से नहीं देखा है. इस सरकार ने जो शपथ ली थी उसको भी भंग करने का काम किया है. केवल भारतीय जनता पार्टी के लोगों से 15-15 करोड रुपये के प्रस्‍ताव लेकर ...

          सभापति महोदय -- रावत जी, वही विषय दोहराया जा रहा है. मेरा अनुरोध है कि अब समाप्‍त करें और अपने दूसरे दल के सदस्‍यों को मौका दें.

          श्री रामनिवास रावत -- सभापति जी, यह गंभीर विषय है.

          सभापति महोदय -- आप इस विषय को कई बार कह चुके हैं. आपकी बात आ गई है.

          श्री रामनिवास रावत -- यह गंभीर विषय है और कर्ज लेने की सीमा है. आप किस तरह से खर्च करेंगे और हम चाहते हैं कि आप अनुपूरक भी लाएं और बहुत महत्‍वपूर्ण बात है कि हरदा में इतनी बडी घटना हुई. हरदा में लोगों को कैसे पुनर्स्‍थापित करेंगे ?

          सभापति महोदय -- हरदा की बात कल बहुत विस्‍तार से आपने ही स्‍टार्ट की थी और रख चुके हैं.

          श्री रामनिवास रावत -- विस्‍तार से नहीं. उनको पुनर्स्‍थापित करने के लिये राशि की व्‍यवस्‍था करते तो हमें अच्‍छा लगता. हम उसका समर्थन करते. आप उनके पुनर्स्‍थापन के लिये राशि की व्‍यवस्‍था तो कर नहीं रहे, आप अपने-अपने लोगों को कौन बांटे रेवडी, चीन्‍ह-चीन्‍ह के दे, वह बात हो रही है. वहां कितना बडा नुकसान हुआ है, कितने लोगों को पुनर्स्‍थापन करने की आवश्‍यकता पडेगी उसके लिये राशि की व्‍यवस्‍था का कोई उल्‍लेख नहीं किया गया. उसके लिये राशि लम्‍पसम्‍प डाल देते तो हम समर्थन करते. जो अनुपूरक अनुमान आया है सरकार को चलाने के लिये जरूरी है, पारित होगा, हम कम हैं आप ज्‍यादा हैं, वह तो व्‍यय के लिये पारित कराना ही पडता है, लेकिन जो ग्‍यारंटी-ग्‍यारंटी रोज-रोज चिल्‍लाते हैं, मोदी की ग्‍यारंटी, मोदी की ग्‍यारंटी उन ग्‍यारंटियों को पूरा करने के लिये इस बजट में व्‍यवस्‍था करते तो हम इसका समर्थन करते. हम इसका इसलिये विरोध करते हैं क्‍योंकि यह इस प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है. प्रदेश के युवा, प्रदेश के किसान, प्रदेश की लाडली बहना सबके साथ भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार ने धोखा किया है और वायदा खिलाफी की है हम इसलिये इसका विरोध करते हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- सभापति महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ इन्‍फॉर्मेशन है. सबका साथ, सबका विकास का एक और उदाहरण बता देता हूं. अभी भारत सरकार ने तीन वरिष्‍ठ नेताओं को भारत रत्‍न से नवाजा है. चौधरी चरण सिंह जी जो कि लोकदल पार्टी से आते थे, नरसिंहराव जी जो कि इनकी पार्टी से आते थे जिनका सम्‍मान इन लोगों ने नहीं किया है, परंतु उनको भारत रत्‍न देने का काम मोदी जी ने किया है. उसी प्रकार वैज्ञानिक स्‍वामीनाथन जी को भी भारत रत्‍न से सम्‍मानित किया है मैं चाहता हूं मोदी जी का और भारत सरकार का इस बात के लिये अभिनंदन करना चाहिये.

          सभापति महोदय -- सबका साथ सबका विकास के साथ सबका सम्‍मान भी शामिल किया है, उसके लिये मोदी जी का वाकई में धन्‍यवाद है.

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय सभापति जी, माननीय विजयवर्गीय जी ने जो बोला माननीय नरसिंहराव जी को तो हम लोगों ने देश का प्रधानमंत्री बनाया था कैसे सम्‍मान नहीं किया ?

          सभापति महोदय -- देखिये, प्रधानमंत्री तो अटल जी भी रहे थे, परंतु भारत रत्‍न एक अपने आप में अलग चीज होती है.

          श्री बाला बच्‍चन -- नरसिंहराव जी की बात आई तो हम लोगों ने कांग्रेस पार्टी ने तो उनको देश का प्रधानमंत्री बनाया था और उन्‍होंने शानदार सरकार चलायी.

          सभापति महोदय -- अभय कुमार मिश्रा जी को अपनी बात करने दें. अभय जी, अपनी बात प्रारंभ करें.  ..(व्‍यवधान)..

          श्री सिद्धार्थ तिवारी -- जग जाहिर है कि कांग्रेस पार्टी ने नरसिंहराव जी के साथ क्‍या व्‍यवहार किया था.

          श्री अभय कुमार मिश्रा -- सभापति जी, वर्तमान में 28,655 करोड का ..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अब बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी, नरसिंहराव जी का जब निधन हुआ, उनकी शव यात्रा को जब कांग्रेस कार्यालय में ले जाया जा रहा था तब इनके एक जनरल सेक्रेट्री ने मना कर दिया और उनके शव को कांग्रेस कार्यालय में वह सम्‍मान नहीं मिला जो मिलना चाहिये था.

          श्री रामनिवास रावत -- यह गलत बयानी है.

          श्री बाला बच्‍चन -- ऐसा बिल्‍कुल नहीं हुआ है. ..(व्‍यवधान)..             

          श्री विश्‍वास सारंग -- बात तो इन्‍होंने निकाली ना.

          श्री रामनिवास रावत -- केन्‍द्र सरकार ने जिन व्‍यक्तियों को भारत रत्‍न से सम्‍मानित करने का काम किया है, हम केन्‍द्र सरकार का धन्‍यवाद करते हैं.

          श्री विश्‍वास सारंग -- इनको बोलिये ना. बाला भाई क्‍यों इतने उद्वेलित हो रहे हैं ?

          श्री रामनिवास रावत -- हम गलत बयानी सुनना कतई पसंद नहीं करेंगे. वह इस देश के प्रधानमंत्री थे.

          श्री बाला बच्‍चन -- उनको देश का पी.एम. बनाया था. शानदार परफॉर्मेंस उनका था.

          श्री विश्‍वास सारंग -- इतने उद्वेलित क्‍यों हो रहे हैं इसके लिये मोदी जी को धन्‍यवाद दीजिये.

          श्री रामकिशोर दोगने-- आडवाणी जी का क्‍या हाल है 10 साल बाद आडवाणी जी की याद आयी ? 10 साल बाद भारत रत्‍न दिया. प्रधानमंत्री मोदी जी सरकार में तो 10 साल से हैं, आखिरी में क्‍यों याद आयी ?

          सभापति महोदय -- समय हो गया है. अभय कुमार मिश्रा जी, आप बोलिये.

          श्री रामकिशोर दोगने -- मुरली मनोहर जोशी कहां हैं ? यशवंत सिन्‍हा कहां   हैं ? इनको तो ढूढ लो .

          श्री रामनिवास रावत -- सभापति जी, इस बात को कार्यवाही से निकाल दें.

          सभापति महोदय -- बात तथ्‍यात्‍मक है इसलिये उसको बाहर निकालने की आवश्‍यकता नहीं है. अभय कुमार मिश्रा जी, आप बोलिये.

          श्री सिद्धार्थ तिवारी -- शिवराज जी की फोटो गायब हो गई उसका तो पता करो सम्‍मान देने की बात करते हैं.

          श्री रामनिवास रावत -- क्‍या प्रमाण है और क्‍या तथ्‍यात्‍मक है ? आप तथ्‍यात्‍मक कह रहे हैं. कौन सा तथ्‍य है कौन सा प्रमाण है ?

          सभापति महोदय -- उस पर अलग से चर्चा कर लेंगे. अभी तो विषय आगे आने दीजिये.

          श्री रामनिवास रावत -- आप भी वहां बैठकर, आप सभापति हैं. इस सदन के सभापति हैं. यह गलत बयानी है इसको कैसे कह रहे हैं तथ्‍यात्‍मक है ? 

          श्री बाला बच्‍चन -- सभापति महोदय, यह बिल्‍कुल असत्‍य है. उनको सम्‍मान दिया है उनको देश का प्रधानमंत्री बनाया है.

          सभापति महोदय -- क्‍या विलोपित करना है, क्‍या नहीं करना है यह सभापति का अधिकार है.

          श्री रामनिवास रावत -- हम कुछ भी कह दें अब वह तथ्‍यात्‍मक हो जाएगा.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा -- आप सभापति पर उंगली मत उठाइये. ...

          सभापति महोदय -- क्‍या विलोपित करना है यह आप निश्चित नहीं कर सकते.

..(व्यवधान)..

          श्री विश्वास सारंग-- यह दबाव मत चलाइये रावत जी.

          श्री रामनिवास रावत-- सभापति महोदय, चेयर का सम्मान करना चाहिये.

          सभापति महोदय-- कोई दबाव में आ भी नहीं रहा है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल--सभापति महोदय,  आपको नहीं,  मैं रावत जी आपसे प्रार्थना करता हूं कि   आप सभापति  जी पर  क्यों टिप्पणी कर रहे हैं. मतलब मुझे लगता है कि  यह तो और भी खराब है.  तथ्यात्मक नहीं है,  विषय आपने निकाला. मुझे लगता है कि  आप नहीं कहते तो कैलाश जी को  कहने की जरुरत नहीं पड़ती. लेकिन हम सभापति जी को कहें. जब चर्चा दोनों तरफ से कर रहे हैं,  तो  वे कैसे तय करेंगे कि  यह तथ्य से  कैसे परे  है.  मुझे  लगता है,  मेरा निवेदन है कि  आपको आसंदी पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिये.

          श्री रामनिवास रावत-- सभापति महोदय, हमने विलोपन का निवेदन किया है.

          श्री रामेश्वर शर्मा-- सभापति जी,  अगर लगता है कि नरसिंहाराव  जी को जो भारत रत्न  मिला है, इससे ये सहमत हैं तो  पूरी कांग्रेस पार्टी  विधायक दल जो है, प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद  दे ना यहां.

          श्री रामनिवास रावत-- दे दिया,  सुना नहीं क्या आपने.  आपको क्या सुनाई नहीं देता.  इसके लिये मोदी जी की सरकार को धन्यवाद दिया है.

          श्री विश्वास सारंग-- सभापति महोदय, समय कम है, अब  अभय जी से शुरु करवाइये.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक-- सभापति महोदय, विजयवर्गीय  जी ने   जो बात रखी  है, इन्फर्मेशन देने की लिये की थी,  किसी की आलोचना करने के लिये  नहीं थी.  3  लोगों को भारत रत्न  मिला है, यह बोल देते.  आपने नरसिंहाराव  जी के बारे  में  क्यों आलोचना की.  यह शुरुआत तो यहां से हुई है ना.  आलोचना करने की क्या जरुरत थी.

          सभापति महोदय-- अननुपूरक  बजट पर  चर्चा चलने दें.  समय आज कम है,  अशासकीय कार्य भी अपने को लेना है.

          श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, वे इस लायक थे,  इस काबिल थे,  तब तो उनको भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

          सभापति महोदय--काबिल थे, इसी लिये दिया गया है भाई.  यह कोई नहीं कह रहा है कि नाकाबिल  लोगों को  दे दिया गया है.

          श्री बाला बच्चन -- हम इसके लिये धन्यवाद दे रहे हैं.

          सभापति महोदय--बात यह रखी गई कि  काबिलियत को भारतीय जनता पार्टी    की सरकार ने स्वीकारा.

          श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, उसके आगे जो  विजयवर्गीय जी ने बोला,  वह बिलकुल असत्य है.  उसको कार्यवाही से निकालना चाहिये.

          श्री अभय कुमार मिश्रा (सेमरिया)-- सभापति महोदय,  मैं सदन को  प्रणाम करता हूं.  मैं वर्ष 2013 के बाद 2023  में इस सदन में आया हूं, 10 वर्ष के अन्तराल के बाद.  मेरे मन मस्तिष्क में  यह परिकल्पना थी कि  सदन में  जायेंगे, तो एक एक  मुद्दे पर क्या हम बेहतर कर सकते हैं,  सब लोग मिलकर  चीजों को और अच्छा  करेंगे. जैसे कि राज्यपाल महोदय के  अभिभाषण में था कि  भारत की आत्मा गांवों में बसती है.  80 प्रतिशत गांवों में है. तो गांवों में एग्रीकल्चर  एकॉनॉमी को  बढ़ाने के लिये चाहे स्माल स्केल इण्डस्ट्रीज हो,  इस दुनियादारी की संकल्पन, कल्पना को लेकर के  हम यहां आये थे.  हम टू द पाइंट बात करेंगे, हम 3 दिन से देख रहे हैं कि  अजीब सा है.  हां की जीत हुई, ना की हार हुई,  मेरा ये, तेरा ये.  हर बात पर राम राज्य, हर बात पर उसकी आलोचना कर रहे हैं.  यह हो क्या रहा है.  2013  से 2023,  इन 10 वर्षों के  पहले यहां  कुछ ज्यादा बेहतर स्थिति थी.  उस समय का जब सदन था,  तब इतना नहीं था.  मैं थोड़ा नया जरुर हूं,  हमसे  बहुत वरिष्ठ विधायक हैं,  मैं बोलने लायक नहीं हूं. पर मुझे अजीब सा लग  रहा है, कुछ अच्छा हो. आज हम अनुपूरक  बजट पर बात कर रहे हैं.  28650  करोड़  रुपये का अनुपूरक बजट हम  लेकर आ रहे हैं.  जिसमें एफआरबीएम एक्ट में  जीडीपी का,  जीडीपी हमारा कितना है. इसमें हम सकल घरेलू उत्पाद  जीडीपी  का   साढ़े 3 परसेंट   कर्ज उठा सकते हैं. हम इसको क्रास कर चुके हैं.  हम इससे  ऊपर जा  रहे हैं.  3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये  पिछली सरकार तक था,  आज हम लगभग  3 लाख 85 हजार करोड़ रुपये  पर आ गये हैं.  भरना हम ही को है. यह सब हम ही को  इसकी भरपाई करनी है या हमारी आने वाली जनरेशन को. अब हम इसमें बात करेंगे  कि  इसमें महत्वपूर्ण क्या है.  हम बहुत आपके सामने जूनियर हैं, पर  जो हम यह देख  रहे हैं,  इस द्वितीय अनुपूरक  बजट से ज्यादा  महत्वपूर्ण पुस्तक   यह कैग  की रिपोर्ट है.  मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि  इसको जरुर पढ़ लें.  इसको पढ़ने के बाद शायद हमें  थोड़ी सी लज्जा  अनुभव होगी कि हम वेस्टेज ऑफ मनी कैसे कर रहे हैं.

          सभापति महोदय--मिश्रा जी,  एक मिनट के लिये आपको रोक रहा हूं,थोड़ी सी देर के लिये.  वर्ष 2023-24 के द्वितीय अनुपूरक  अनुमान पर चर्चा हेतु  2 घण्टे का समय नियत है. तद्नुसार   दल संख्यावार चर्चा हेतु भाजपा  के लिये  1 घण्टा 24 मिनट,  इण्डियन नेशनल कांग्रेस  के लिये 34 मिनट  एवं भारत आदिवासी पार्टी  के लिये 2 मिनट का समय आवंटित है.  इस समय में  माननीय मंत्री जी का उत्तर भी  सम्मिलित है. सूची में बोलने हेतु  बहुत से माननीय सदस्यों  के नाम हैं.  अतः मेरा अनुरोध है कि  बोलने वाले सदस्य कृपया समय सीमा का   ध्यान रखें. धन्यवाद.

          श्री अभय कुमार मिश्रा-- इसमें आप यह कैग की रिपोर्ट में  आप देखें.  एक लाइन हम बतायेंगे.  पैराग्राफ बना हुआ है.   312241 करोड़  रुपये  का ऋण सकल घरेलु उत्पाद   वर्ष 2021-22  की गणना की गई थी. हम किस स्थिति में हैं ? आगे चलकर क्‍या होगा तुरन्‍त का तो ठीक है. हमें इसके बाद आगे पांच साल और आपको सरकार चलाना है. आपकी सरकार भगवान करे और भी रहे. हमें उससे कोई दिक्‍कत नहीं है, लेकिन हम सब मिलकर प्रदेश को अच्‍छा करें. प्रदेश की जनता में आपको 160 से ऊपर सीट दी हैं, पूरे के पूरे तो देंगे नहीं कोई न कोई सीट तो जायेगी. अब आप उसमें प्रदेश की जनता से बदला लेंगे. मैंने 24 जनवरी को 26 जनवरी के पूर्व माननीय मुख्‍यमंत्री जी के यहां एक उप सचिव हैं, सोलंकी साहब. उनका सभी भारतीय जनता पार्टी के पास फोन आता था, सब हम लोग आपस में मित्र हैं. वह बताते थे कि आपको फोन नहीं आया क्‍या. हम अपना टी.एस बनाकर लेकर गये, एक तो वह रिसीव नहीं कर रहे थे. बड़े मुश्किल से उन्‍होंने रिसीव किया. रिसीव की कापी हमारे पास है. हमने मुख्‍यमंत्री जी को पत्र भी लिखा कि आपकी योग्‍यता पर मुझको संदेह नहीं, किन्‍तु कार्यप्रणाली पद के अनुरूप हमारे मुख्‍यमंत्री जी महाकाल के भक्‍त हैं, कुश्‍ती के चेंपियन हैं, मुक्‍केबाजी में गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं, तलवार बाजी में भी हैं और वह हृदय से साफ हैं और आप जानते हैं कि उनकी बुद्धि अपने आप अद्वितीय होगी और उसका लाभ हमको जरूर मिलेगा. हमने यह उम्‍मीद की थी कि हमारे प्रदेश का विकास एक निर्मल मन के व्‍यक्ति के हाथ में पहुंच चुका है तो हम सबको उसका बराबर का लाभ मिलेगा. किन्‍तु जिस तरह से यह बजट में छोटा सा पक्षपातपूर्वक काम किया गया. आपका कितना चला जाता, हमारे पक्ष के करीब 60 विधायक हैं तो 15 छक्‍के 90 करोड़, क्‍या फर्क पड़ जाता नियत जरूर आपने दिखा दी. अब इससे पांच वर्षों के लिये प्रदेश की जनता में, आप जनता से न बदला ले रहे हैं. हम अपने घर के लिये थोड़े ही काम करवा रहे हैं.

          दूसरा, आपने पुलिस के लिये कुछ नहीं दिया, सिर्फ 200 करोड़, नयी भर्ती करने की आपकी मंशा नहीं है. मैं एक और निवेदन करूंगा, इतने वर्ष हो गये हम इंसान हैं, हमने जेल कभी अंदर से नहीं देखा है. पर जो लोग जेल से छूटकर आते हैं और वह जेलों के अंदर की स्थिति बताते हैं, जो अंग्रेजों के बने रूल्‍स और एक्‍ट हैं, उन्‍हीं में सब कुछ चल रहा है. उसके लिये आप मात्र 200 करोड़ रूपये दे रहे हैं. बिजली में पुराने अनुबंधों का भुगतान उसमें हमारा पैसा जायेगा. सबसे ज्‍यादा जैसा कि हमारे नेता रावत जी ने बताया हम पुराने ही कर्ज को पटाने में, हम चूंकि गलत दिशा अख्तियार कर चुके हैं, केवल सड़क, रोड और कांक्रीट की एक-एक किलोमीटर की रोड ही सब कुछ नहीं है. सबसे बड़ी है, एग्रीकल्‍चर इकॉनामी , उसके लिये हम कितना पैसा दे रहे हैं. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण के लिये हमने क्‍या किया. जब तक हम हल्‍दी की खेती नहीं करेंगे, मक्‍का, गन्‍ना की खेती नहीं करेंगे और शुगर मिल नहीं लगायेंगे और आलू की ग्रेडिंग नहीं करेंगे उनमें वेल्‍यू एडिशन नहीं करेंगे, तो किसानों को उनके उत्‍पाद का सही लाभ कैसे मिलेगा, एक किसान को 20 प्रतिशत आलू का मिलता है और एक आलू से एक पैकेट बनी चिप्‍स 12 रूपये की बिकती है, इस दिशा में इस बजट में ज्‍यादा फोकस किया जाना चाहिए. यह कुछ भी नहीं हुआ. फिर इसके बाद जनसम्‍पर्क की बात करता हूं..

          सभापति महोदय:- अभय जी, यह अनुपूरक का विषय है, आप अनुपूरक के विषय पर बात करेंगे तो ज्‍यादा अच्‍छा होगा.

          श्री अभय कुमार मिश्रा:- जी हां, मैं समझता हूं. 324 करोड़ रूपये जनसम्‍पर्क में डालने की क्‍या जरूरत है. यह वेस्‍टेज आफ मनी है, अभी आपने चुनाव के पहले किया, अभी हम फिर कर रहे हैं. दूसरी तरफ हम आर.आर.सी मतलब जो हमारी लोगों से वसूली है, जैसे विभागों में वसूली है, लोगों की तहसीलदार के यहां से कहते हैं कि आर.आर.सी कटती है, उसकी हम वसूली नहीं कर रहे हैं, हम मिनरल्‍स की वसूली नहीं कर रहे हैं. हम बहुत सारी चीजों से अपनी आय को बढ़ा सकते हैं, उधर हमारा ध्‍यान नहीं जा रहा है. अभी रामेश्‍वर शर्मा जी बैठे हैं उनकी मुझे चिंता है. मंदिर में पुजारी एवं भगवान में भोग के लिये आपने कुछ भी नहीं सोचा. राम राज्‍य की कल्‍पना हमारी है और उन्‍हीं के आर्शीवाद से हम कहां से कहां पहुंचे. परंतु उनकी सेवा करने वाले पुजारी की चिंता की होती, यदि उनकी सहायता राशि इक्‍यावन हजार से एक लाख बढ़ाये जाने का उल्‍लेख नहीं है और उस राशि को सीधे खाते में देना चाहिये. ग्राम पंचायतों के पंचों के मानदेय का क्‍या होगा. आज 1500 रूपये भी नहीं मिलता था, शायद साढ़े सात सौ रूपये जिला पंचायत के अध्‍यक्ष को मिलता था. मैं जिला पंचायत अध्‍यक्ष रहा हूं. अब 65 हजार रूपये वेतन मिलता है. पंच को 100 रूपये एक्‍ट में है. अभी उस राशि को 150 रूपये की, 30 वर्ष के बाद, गलत है ना ? गलत है, 50 वोट का मालिक पंच होता है. पंच परमेश्‍वर की कल्‍पना हम छोटे में अलगु चौधरी और जुम्‍मन खान की कहानी सुनते थे. आज उस पंच के लिये हमने कुछ सोचा ही नहीं है. मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी न बढ़ाए जाने की स्थिति है. इसमें कोई भी उल्लेख नहीं है कि उसको बढ़ाएंगे. विवाह सहायता राशि, प्रधानमंत्री आवास में राशि नहीं बढ़ाई गई है.

          सभापति महोदय - आपके दल को आवंटित समय खत्म हो गया है और अभी आपके यहां से 16 सदस्य बाकी हैं.

श्री अभय कुमार मिश्रा - सभापति महोदय, शहरों में आप 2.50 लाख रुपया दे रहे हो. गांव में 1.20 लाख रुपये दे रहे हैं. वास्तव में इससे काम नहीं हो पा रहा है. मजदूर इससे नहीं कर पा रहे हैं, उसमें सरपंच को बेमतलब परेशानी होती है. इसमें चिंता की जरूरत थी. आपने अपनी रिपोर्ट में कल जो दिया है कि आंगनवाड़ी भवन, पंचायत भवन ये सब आज भी 20 वर्षों की सरकार में भवन विहीन हैं. इसको पूरा कराएं. अधूरे भवन हमारे पड़े हुए हैं. कहीं पर अस्पताल हैं, कहीं पर स्कूल हैं, किसी ने काम छोड़ दिया है, लाखों लाख रुपये फंसे हैं. कम से कम इनको पूरा कराने के लिए काम करना चाहिए. नये आईटीआई के लिए प्रावधान करना चाहिए, स्कूलों का उन्नयन करना चाहिए. इन सबके लिए इसमें कोई प्रावधान नहीं दिया हुआ है.

सभापति महोदय - अभय जी, यह सामान्य बजट नहीं है, अनुपूरक बजट है.

श्री अभय कुमार मिश्रा - सभापति महोदय, आयुष्मान में जो आप पैसा डाल रहे हैं, आपके तो पास तो प्राइवेट नर्सिंग होम का अनुभव है. आप खुद जान रहे हैं कि इसका क्या खेल होता है. पूरा का पूरा पैसा किस तरह से इसमें लूटपाट होती है. इसका सही तरीका अख्तियार कर लिया जाय कि कम से कम इसका दुरुपयोग न हो. मेरा यही सब निवेदन है. सभापति महोदय, मैं यह चाह रहा हूं कि मुश्किल से हम 60-62 विधायक हैं, आप ऐसा न करें आपको यह शोभा नहीं देता है. आपको बिल्कुल शोभा नहीं देता है, प्रदेश की जनता देख रही है. हमारे यहां पर एनवीडीए की एक नहर है. जो हम चाहते हैं कि एनवीडीए नहर की प्रतापपुर माइनर सतना जिले से रीवा जिले के सेमरिया विधान सभा क्षेत्र में स्थित परमोहरा बांध में सबमाइनर के माध्यम से पानी पहुंचाने का कष्ट करें.

श्री फून्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) - सभापति महोदय, मां नर्मदा को मैं प्रणाम करते हुए अपने बात रखूंगा. अपनी बात रखने के पूर्व तत्कालीन हमारे केन्द्रीय मंत्री रहे हैं आदरणीय श्री प्रहलाद पटेल जी, मां नर्मदा के सर्वांगीण विकास के लिए सौन्दर्यीकरण के लिए प्रसाद योजनान्तर्गत आपने 50 करोड़ रुपये अमरकंटक को दिये, जिससे उसके दोनों तटों का विकास हो सका है. वहां हरेभरे पौधे और सौन्दर्यीकरण के काम कराए जा रहे हैं, इसके लिए मैं आपको बहुत बहुत बधाई देता हूं.

माननीय सभापति महोदय, यह अनुपूरक बजट है. बजट पास होते हैं और विभाग काम करते हैं. प्रदेश की 8 करोड़ की जनसंख्या और वह जनसंख्या जहां जंगल और पहाड़ों में भी लोग निवास करते हैं. साढ़े 22 परसेंट हमारे जनजातीय समुदाय की जनसंख्या भी इसमें समाहित है और 140 करोड़ के देश में जहां केन्द्र और राज्य के बजट से विभिन्न विकास कार्य किये जा रहे हो, हमने वर्ष 2018 में एक ध्यानाकर्षण लाया कि जनजातीय सबप्लान का पैसा 251 का पैसा, 275 (1) के पैसे को सीधे कृषि विभाग को दे दिया गया और उसको देने का मुख्य उद्देश्य था कि सहरिया, भारिया और बैगा जनजाति के लोग परम्परागत जो खेती करते हैं, उनकी खेती में वृद्धि हो, फिर उनको पैकेजिंग करना, मार्केटिंग करना और कोई एक उत्पाद को ब्रांड नेम देने का भी, राशि देने का भी उसमें उद्देश्य रहा है. जब कृषि विभाग को वह राशि दी गई तो जिस उद्देश्य से राशि कृषि विभाग को दी, उसका अर्थ ही बदल गया, उसका उद्देश्य ही बदल गया. जहां सहरिया, भारिया, बैगों की बात खत्म और दूसरे कार्य में उसको खर्च कर लिया गया. मैं इस सरकार से अनुरोध करता हूं. अच्‍छा है आपको लगातार सफलताएं मिल रही हैं. सरकार बन गई, अब आप काम करिए न, आप क्‍यों बान्‍डिंग में लगे हैं. अभी 3 तारीख को हमारे माननीय वरिष्‍ठ सदस्‍य ने ध्‍याना आकर्षित करके जनजातीय समुदायों की चिन्‍ता व्‍यक्‍त की कि महिला बाल विकास विभाग ने पत्र जारी किया और 207 करोड़ राशि उन गरीबों के घर में जिसके यहां बल्‍ब लगता, पीने का पानी नहीं है, सड़क नहीं है, बिजली नहीं है वे भी शहर की ओर देखते हैं कि यदि इस देश-प्रदेश में स्‍मार्ट सिटी बन रही है तो मेरा गांव भी स्‍मार्ट विलेज बन जाए. चूंकि मैं भी इस देश का नागरिक हॅूं, प्रदेश का नागरिक हूँ और हमने भी इस प्रदेश के विकास के लिए यदि वह किसान है तो वह भी लगान देता है. कर्मचारी है तो वह टैक्‍स देता है. व्‍यापारी टैक्‍स देता है और टैक्‍स, लगान का पैसा जब वही गरीब के घर और गांव में जब मांग करते हैं तो वहां तक आज भी नहीं पहुंच पा रहा है. चुनाव लड़कर हम यहां आते हैं. हम लोग धरातल पर जाते हैं और वहां पर जो समस्‍याएं हमें देखने को मिलती हैं उन समस्‍याओं को हम सदन में रखते हैं. जहां इस प्रदेश की जनता के सर्वांगीण विकास के लिए बातें होती हैं हम भी चाहते हैं कि हमें अपनी बात रखने का अवसर मिले. माननीय विधायकों ने अपने क्षेत्र के और इस प्रदेश के विकास के लिए चिन्‍ता की. मेरा आपसे इतना निवेदन है कि एक अच्‍छे सोच के साथ मध्‍यप्रदेश में मुख्‍यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना बनी इस योजना के अंतर्गत जिन बच्‍चों के माता-पिता नहीं हैं उनके भरण-पोषण के लिये 4 हजार रूपए प्रतिमाह दिये जाने का इसमें प्रावधान है. वर्ष 2022 में यह योजना लागू हुई और 5-6 माह से पूरे प्रदेश में यह राशि उन बच्‍चों को नहीं मिल पा रही है. यदि हम मात्र एक नगर की बात करें तो जबलपुर में 270 अनाथ बालक-बालिकाएं हैं. 270X4 हजार आप अनुमान लगा लें, लगभग 10 लाख 80 हजार रूपए प्रतिमाह का उनको भुगतान करना था, लेकिन यह सरकार उन गरीबों तक यह लाभ नहीं पहुंचा. मेरा आपसे अनुरोध है कि बजट पास हो, लेकिन जो अंतिम पंक्‍ति का व्‍यक्‍ति है आपकी तरफ जो निहार रहा है उनकी ओर वह राशि जानी चाहिए और प्रदेश में हो रहे भ्रष्‍टाचार और आपने जनता से जो वादा किया कि हम 2700 रूपया प्रति क्‍विंटल गेहूं खरीदेंगे. 3 हजार रूपए हम लाड़ली बहनों को देंगे. 3100 रूपया प्रति क्‍विंटल धान खरीदेंगे. साढे़ चार सौ रूपए का सिलेंडर देंगे, तो आपको देना चाहिए. आपको इस बजट में प्रावधान करना चाहिए. आपने यह क्‍यों नहीं किया.

          मेरा सरकार से अनुरोध है कि पिछले वर्ष 2011-12 में तथा जनवरी, 2023 में इन्दौर में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट हुई उसमें बॉडिंग अच्छी हुई इसमें प्रचार-प्रसार हुए. लाखों करोड़ों रूपये खर्च किये गये. उसके बाद हुआ क्या ? खोदा पहाड़ निकली चुहिया. कुछ इन्वेस्टरों ने प्रस्ताव भी रखे. हमें भी अच्छा लगा कि प्रदेश में 30-35 लाख युवाओं का भला होने जा रहा है. पढ़े-लिखे बच्चे जो आज चोराहों में भटक रहे हैं उनके माता-पिता दुखित हैं. रोजगार के अवसर खुल जाने से बच्चों को काम मिलता है, हमारे प्रदेश की बेरोजगारी कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मैं अंत में यह कहना चाहूंगा कि जब पेपर में प्रकाशित हुआ मैंने सोचा कि इतना जल्दी माननीय मुख्यमंत्री जी दूसरे का अनुसरण तो नहीं करेंगे. पेपर में प्रकाशित हुआ कि 15-15 करोड़ रूपया सभी विधायकों को दिया गया तो मैं भी बनाने में लग गया.

          सभापति महोदययह बात पहले आ चुकी है. आप अनुपूरक बजट पर बोलिये. सदन के समय को जाया मत करिये.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्कोसभापति महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि आपके द्वारा रेवड़ी चीन चीन के बांटी जा रही है, उसको बंद करें. हम भी इस प्रदेश की जनता से चुनकर के आये हैं. आप जितना भी भेदभाव करेंगे उसका संदेश भी उस क्षेत्र में जाता है. इसलिये मैं चाहता हूं कि प्रदेश में समदृष्टि हो और सबको समानता के साथ इस न्याय के मंदिर में देखें.बहुत बहुत धन्यवाद

          डॉ.सीतासरन शर्मा(होशंगाबाद)सभापति महोदय, हमारे वरिष्ठ एवं विद्वान सदस्य श्री रामनिवास रावत जी ने इसकी शुरूआत की है. मैं बहुत बात नहीं करूंगा. मैं कम बोलूंगा. माननीय रावत जी ने जो विषय उठाये हैं उसका उत्तर तो माननीय वित्तमंत्री जी देंगे. दो तीन बातें कहना जरूरी हैं, क्योंकि वे वरिष्ठ सदस्य हैं. एक बात उन्होंने की कि पूरा बजट नहीं आया है. असल बात यह है कि यह जो मेन बजट आ चुका है उसमें से कुछ के लिये कमी रह गई है या कोई नये मद लिये गये हैं, उसके लिये अनुपूरक होता है, यह एक सामान्य प्रक्रिया है. अब आयेगा लेखानुदान तब लोकसभा वाली बात आयेगी, जो बात आपने कही थी कि लोक सभा के कारण, तो यह ना तो लेखानुदान है ना ही पूर्ण बजट है. यह पिछले बजट का ही अनुपूरक है जैसे हम कापी की सप्लीमेन्ट्री ले लेते हैं. सभापति जी किसी माननीय सदस्य जी ने श्वेत-पत्र की बात भी की, आय-व्ययक की बात भी की. कार्यसूची में जो आया है उसमें ही लिखा है कि आय-व्ययक जब प्रस्तुत किया जायेगा, जब लेखानुदान प्रस्तुत होगा उसके पहले. तो जो बात आपकी है, वह भी सरकार कर रही है. बजट पूरा हो या अनुपूरक हो मध्यप्रदेश की सरकार हमारे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारे वित्तमंत्री जी के कुशल वित्तीय प्रबंधन में निरंतर समाज की चिन्ता कर रही है. अभी हमारे माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि हमको नहीं मिला और आदरणीय रावत जी ने वह सूची पढ़ी, भैया हम 163 बैठे हैं, तो ज्‍यादा तो हमारी संख्‍या रहेगी बजट के अंदर. जनता ने आपको 66 सीट तो बैठायी है, हम क्‍या करें, हमारी गलती है क्‍या इसमें.  इसलिए लिस्‍ट जब आप देखोगे तो उसमें हम लोगों की सूची लंबी रहेगी. ये तो जनता ने किया है साहब और आपने अपने कर्मों का फल भुगता है. विषय के बाहर जाने का मेरा स्‍वभाव नहीं है, परंतु आप 10 साल रहे, तब आपने दस साल में जो कर्म किए तो कांग्रेस की 230 में से 38 सीट हो गई थी, अभी 15 महीने रहे तो कांग्रेस की सीट 110 में से 66 हो गई. अरे सुधरो भाई, हमारी तुलना मत करो, हम क्‍या करें उसमें. क्षमा चाहता हूं रावत जी.

          श्री रामनिवास रावत - क्षमा जैसे कोई बात नहीं है, सीटें कम ज्‍यादा हुई वह तो हकीकत है, अब क्‍यों हुई, लेकिन जो आप कह रहे हैं, उसको नहीं मानेंगे.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजय वर्गीय) - इसमें रामनिवास जी का कोई दोष नहीं है, दो बड़े नेताओं के झगड़े में हुआ है ये सब कुछ, वे उसमें क्‍या कर सकते थे.

          डॉ. सीतासरन शर्मा - रावत जी आप मंत्री थे, तब मैं विधायक था, तब भी आपकी सरकार मैंने देखी, अनुपूरक बजट वगैरह सब देखा, कर्जा तब भी था. मैं उस पर नहीं आऊंगा, क्‍योंकि वह अभी की बात नहीं है. बजट 18-19 हजार करोड़ रुपए का होता था.

          श्री रामनिवास रावत - 21 हजार करोड़, मात्र हर व्‍यक्ति 3500 रुपए का ऋण था और आज 50 हजार रुपए प्रति व्‍यक्ति ऋण है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा - बजट से ज्‍यादा कर्जा होता था, तब भी. सड़कें नहीं थीं, बिजली नहीं थी, अस्‍पताल नहीं थे, मेडिकल कॉलेज नहीं थे. अब यदि कर्जा ज्‍यादा है तो आप निकल जाइए सड़क पर और देखिए सड़कें बनी हैं कि नहीं, आप देखिए कि कितने मेडीकल कॉलेज बन रहे हैं, आप ये देखिए कि सीएम राइज स्‍कूल है.

          श्री दिनेश गुर्जर - टोल टैक्‍स भी तो लगते हैं, सड़क बनी है तो प्रदेश की जनता को लूटा भी तो जा रहा है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा - गड्ढों में चलते थे, गाडि़या खराब हो जाती थी.

          श्री दिनेश गुर्जर - हमारा निवेदन है कि आप ये बताइए कि आपने अस्‍पताल भवन बनवा दिए हैं, उनमें डॉक्‍टर नहीं है, दवा मिल नहीं रही, मरीज परेशान है, उस समय कांग्रेस पार्टी ने ही अस्‍पताल बनाए हैं, उद्योग बनाए हैं, आपके कार्यकाल में कितने उद्योग लगे हैं, ये बताए जरा.

          डॉ. सीतासरन शर्मा - ये क्‍या बोल रहे इनको रोकिए सभापति जी, न तो ये प्रश्‍नकाल है, न शून्‍यकाल है, न मैं मंत्री हूं कि इनकी बात का उत्‍तर दूं.

          श्री दिनेश गुर्जर - गलत बात बोलेंगे तो उस पर बोलना पड़ेगा.

          श्री रामनिवास रावत -  माननीय सभापति जी, जो सीएम राइज स्‍कूल खोले हैं, उसके लिए उनका समर्थन करता हूं, पर माननीय वरिष्‍ठ सदस्‍य ईमानदारी से बता दें कि उनके यहां जो सीएम राइज स्‍कूल हैं, उसमें फैकल्‍टी कितनी है, ईमानदारी से बता दें और उसका स्‍टे्टस क्‍या है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा - ईमानदारी से कह रहा हूं, आप विजिट कीजिए और देखिए सारी फैकल्‍टीज है और एक साल के अंदर बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है.

          सभापति जी, अनुपूरक में विकास के साथ सामाजिक न्‍याय, कमिटमेंट्स की जो गारंटी की बात डॉ. राजेन्‍द्र सिंह साहब ने भी कही और आज आदरणीय रावत जी ने भी कही, वह भी पूरी कर रहे हैं. जो वादे जनता से किए हैं, उनको भी पूरे करने का प्रावधान इस अनुपूरक बजट में है. अब मैं आता हूं, उन विषयों पर जो इसमें है, ऊर्जा, इनके टाइम में साढ़े चार हजार मेगावाट इनके टाइम में बनती थी और 6 हजार मेगावाट की खपत थी. बिजली गायब रहती थी, खेतों को पानी नहीं था, उद्योगों को पानी नहीं था और इसलिए इस प्रदेश में उद्योग आना बंद हो गये थे. अब 22 हजार मेगावाट से ज्‍यादा का उत्‍पादन हो रहा है, साढ़े 17 हजार की खपत है, हम सरप्‍लस बिजली बना रहे हैं, यह हमारी उपलब्धि है.

          सभापति महोदय, सौर ऊर्जा का इसमें नहीं है, पर सौर ऊर्जा से 5 हजार मेगावाट का हम उत्‍पादन कर रहे हैं और निरंतर बढ़ाने का काम कर रहे हैं. इन्‍होंने बिजली का कबाड़ा कर दिया था आपने तो बिजली कंपनियों को मदद करना भी जरूरी था, इसलिए 13 हजार 365 करोड़ रूपया उसके लिये है.

          श्री पंकज उपाध्‍याय(जौरा) -- पंडित जी थोड़ा क्षमा चाहते हुए एक बार आप हमारे मुरैना जिले का दौरा करें और देखें जरा कि बिजली कितनी आप यहां बता रहे हैं और कितनी मिल रही है. किसानों को न समय पर बिजली मिल पा रही है, आदमी अपने खेतों में पानी देना चाह रहा है, लेकिन सुबह से शाम बिजली के इंतजार में बैठा रहता है, वह लूटा जा रहा है केवल बिजली के नाम पर, इसलिये आप बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं और आप भ्रामक जानकारी देंगे तो कैसे चलेगा.

          सभापति महोदय -- पंकज जी, यह बहस का विषय नहीं है, माननीय सदस्‍य को बोलने दें, जब आपका समय आयेगा, तब आप बोलियेगा. डॉक्‍टर साहब आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री पंकज उपाध्‍याय -- पंडित जी थोड़ा निवेदन है मेरा आपसे, थोड़ा सा कम.

          सभापति महोदय -- पंडित जी यह बहस का विषय नहीं है, आप अपना समय आयेगा, तब बोलियेगा.

          डॉ.सीतासरन शर्मा -- अटल बिहारी ज्‍योति योजना के लिये 578 करोड़ रूपये. बिजली उत्‍पादन भी करना है और बिजली बचाना भी है और इसीलिये ऐसी व्‍यवस्‍थाएं जिससे की बिजली की बचत हो और सभापति महोदय पुराने लोगों ने कभी इस पर सोचा नहीं है. लोक स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा शिक्षा में अभी डॉक्‍टर्स की बात कर रहे थे. पांच मेडिकल कॉलेज थे,मेरा एडमीशन वर्ष 1967 मेडीकल कॉलेज में हुआ था, तब 6 मेडीकल कॉलेज थे, एक छत्‍तीसगढ़ में चला गया बचे 5 मेडीकल कॉलेज.

          श्री महेश परमार -- डॉक्‍टर साहब आप जिस कॉलेज में पढ़े, वह किन्‍होंने मेडीकल कॉलेज खोला था.

          डॉ.सीतासरन शर्मा -- कुल पांच मेडीकल कॉलेज थे, छटवा मेडीकल कॉलेज खोल देते भईया आप पच्‍चीस, तीस, चालिस साल सरकार में रहे. हमने तो पंद्रह साल में 5 मेडीकल कॉलेज से 24 पर ले आये, हमने 19 मेडीकल कॉलेज खोल दिये.

          श्री कैलाश कुशवाहा -- पांच हजार डॉक्‍टरों की कमी है, पद रिक्‍त पड़े हैं. पांच हजार डॉक्‍टर नहीं है.

          डॉ.सीतासरन शर्मा -- और अभी भी प्रक्रिया चालू है, सबके कॉलेज, स्‍कूल खुल गये, आपके टाईम पर कुछ नहीं था. (एक माननीय सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) भईया हमने भी पढ़ा है, डॉक्‍टर हिरालाल अलावा जी ने भी पढ़ा है. असंगठित क्षेत्र की भी चिंता नहीं की, असंगठित क्षेत्र के जनजाति के सेग्‍मेंट के लिये सवा करोड़ रूपये की व्‍यवस्‍था.

          सभापति महोदय, मैं लोक स्‍वास्‍थ्‍य की बात कर रहा था, आशा कार्यकर्ता श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता, इनके लिये 200 करोड़, 220 करोड़ रूपये नये मेडीकल कॉलेज के लिये. मैंने जैसा कहा कि निरंतर प्रक्रिया चालू है और अनुपूरक में भी 362 करोड़ रूपये प्रावधान कर रहे हैं. अस्‍पताल का उन्‍नयन करना है, जो मेडीकल कॉलेज के साथ ए‍सोसियेट होते हैं, ताकि स्‍टूडेंट्स ठीक से पढ़ सकें, उसके लिये 119 करोड़ रूपये, एक्जिस्टिंग मेडीकल कॉलेज में और व्‍यवस्‍थाएं करने के लिये 56 करोड़ रूपये और सुपर स्‍पेशिलिटी अस्‍पताल के लिये 38 करोड़ रूपये का प्रावधान अनुपूरक बजट में किया है.

          सभापति महोदय, महिला एवं बाल विकास में अभी सामाजिक न्‍याय की बात हो रही थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिये, अच्‍छा पोषण आहार की इनके समय तो कभी चिंता ही किसी ने नहीं की थी, 127 करोड़ रूपये पोषण आहार के लिये, आंगनबाड़ी सेवा योजना के लिये 619 करोड़ रूपये. मात्र वंदना योजना हमने चालू की थी, इनके समय थी ही नहीं. अब इनके पुराने समय के बाला बच्‍चन जी और रावत जी ही बचे हैं (हंसी) सब खेत रहे युद्ध के मैदान में (हंसी) क्‍या करें.

          श्री दिनेश गुर्जर -- पंडित जी आप भी बच गये, यह दुर्भाग्‍य है कि कांग्रेस ने परिवार में ही टिकिट दे दिया, वह बैठ गये, नहीं तो आप भी नहीं आ पाते.

          डॉ.सीतासरन शर्मा -- 175 करोड़ रूपये मात्र वंदना योजना के लिये. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिये 14.77 करोड़, लाड़ली लक्ष्‍मी योजना के लिये 759 करोड़, 15 महीने के लिये आप आये थे आपने इसमें से कुछ दिया था. योजना चालू भी हमने की और फिर आप लोगों ने कुछ दिया नहीं सरकार फिर से आ गई तो इनका भला हो गया. इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, रोजगार की बात कर रहे थे हमारे साथी, रोजगार किससे आयेगा. अधोसंरचना के लिये माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी मेन बजट में सबसे अधिक प्रावधान किया है, पिछले बजट में भी किया था, अभी भी किया है. अधोसंरचना से न केवल देश और प्रदेश का विकास होगा, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. 1825 करोड़ रूपया विभिन्‍न मार्गों के लिये दिया है, ग्रामीण सड़क आपके समय थी ही नहीं, अटल जी जब दिल्‍ली में आये तब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई और बाद में शिवराज जी ने मुख्‍यमंत्री सड़क योजना शुरू की है. आपने एक रूपया नहीं दिया दोनों ने. 1825 करोड़ रूपये की सड़कें अभी और जो हम कम्‍पनसेशन देंगे उसके लिये 400 करोड़. पंचायत विभाग की बात कर रहे थे रावत साहब, 569 करोड़ रूपया दिया है जनजाति सेगमेंट में, स्‍थानीय निकायों में 341 करोड़ अलग और स्‍थानीय निकाय के सामान्‍य सेगमेंट के लिये 1323 करोड़ रूपये, सामाजिक न्‍याय की चिंता की है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिये राशि दी गई है. जल संसाधन के मंत्री जी बैठे हैं, जो आप अ‍परिक्षित की बात कर रहे थे, यह सांकेतिक राशि है, स्‍वीकृत कर दी है, योजना स्‍वीकृत कर दी है और थोड़ी-बहुत नहीं की हैं 41-42 योजनायें हैं लघु सिंचाई की. इसी प्रकार से बहुत सी सड़कें भी स्‍वीकृत की हैं.

          श्री रामनिवास रावत--  माननीय सभापति महोदय, आपने अपरिक्षित मद की बात की, मैं अपरिक्षित मद की बात कर रहा था कि यह कौन सा मद है. इस पुस्‍तक में मैंने देखा आरक्षित और अनारक्षित, आरक्षित मद है राज्‍य आपदा मोचन निधि, इसका पैसा डायवर्ट करके आपने राशि दी है. राज्‍य क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि इसका पैसा डायवर्ट करके आपने राशि दी है. राज्‍य आपदा सामान्‍य निधि, अकाल राहत निधि, राजस्‍व आरक्षित निधि इस तरह की यह आरक्षित निधि है इसे डायवर्ट करके आप लोगों को पैसा दिया है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा-- फिर बजट आयेगा उसमें सारी राशियां फिर से आयेंगी तो अगले महीने है. 470 करोड़ रूपया एग्जिस्टिंग योजनाओं के लिये, 732 करोड़ नर्मदा घाटी विकास में. सभापति जी, वर्षों, सालों साल इस प्रदेश की जनता को पीने का पानी नहीं मिला, प्रधानमंत्री जी ने जल जीवन मिशन के माध्‍यम से घर-घर नल पहुंचाने की योजना बनाई, यह है सरकार काम करने वाली तो इसीलिये 20-20 साल टिक रहे हैं. इधर तो 15 महीने में ही मैदान साफ हो गया. जितने बचे थे इधर ही आते जा रहे हैं. सभापति महोदय, मेरे बहुत से साथियों को बोलना है इसलिये बहुत से मद मैंने छोड़ दिये हैं जिस पर वह अपनी बात रखेंगे, मैं बहुत लंबी बात नहीं करना चाहता और न ही अनुपूरक के बाहर जाना चाहता हूं, जब सामान्‍य बजट पर बात आयेगी तब जो माननीय सदस्‍यों ने, क्‍योंकि बहुत से सदस्‍यों ने तो वही बोला जैसा सामान्‍य बजट पर बोल रहे हैं तो उनसे भी मेरा अनुरोध है कि वह नियम पढ़कर के आयें ताकि हम सदन का समय बचा सकें. सभापति जी, मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि इस अनुपूरक बजट को सर्वसम्‍मति से पास करें. आपने समय दिया इसके लिये आपका आभार.

            श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) - माननीय सभापति महोदय, इस अनुपूरक बजट के समर्थन हेतु मैं खड़ा हुआ हूं और मैं बड़ी गंभीरता से सुन रहा था कि चर्चा की शुरुआत हुई कि कर्जा कितना हो गया ? कर्जा लेकर काम किस दिशा में किया वह  महत्वपूर्ण है. क्या कर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च हो रहा है, क्या कर्जा विकास के लिये खर्च हो रहा है, क्या कर्जा जन हितैषी योजनाओं के लिये खर्च हो रहा है, क्या कर्जा लेकर और अपनी आमदनी बढ़ाकर हम जनसुविधाएं बढ़ा रहे हैं ? मैं पढ़ रहा था कि जितना इनका पूरे साल का 2003 का बजट नहीं होता था उससे ज्यादा हमारा अनुपूरक बजट है और उससे भी काफी ज्यादा है और दस गुने से ज्यादा हमारा उस समय से अभी के आम बजट का आंकड़ा आता है. अंतर केवल बात की नहीं कर रहे. हम बात कर रहे हैं कि अगर पीने का पानी शुद्ध न मिले तो उसको 50 से 60 प्रतिशत बीमारियां बढ़ती हैं. शुद्ध पानी का अगर किसी ने सोचा तो वह केवल भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सोचा इनके दिमाग में भी यह बात नहीं आईं कि पानी जरूरत है. बिजली की  बात अगर मैं करूं तो वह बात बहुत अच्छे तरीके से हमारे डाक्टर साहब ने बता दी कि किसानी,खेती,व्यवसाय,बाजार,गांव, इन सबमें में जो सबसे पिछड़ा राज्य कहलाता था आज सबसे अग्रणी राज्यों, टॉप 5 में काउंटिंग में आना शुरू हो गया. मैं बात केवल बिजली,पानी की नहीं कर रहा हूं अगर मैं बात करूं सिंचाई के पानी की, नर्मदा के पानी का बंटवारा 1978 में हुआ था तब से लेकर 2006 तक उस पर कोई काम नहीं हुआ. आज अगर हमें डबल डिजिट की ग्रोथ कृषि में मिल रही है जिस पर  पूरी दुनियां वाले आकर रिसर्च करते हैं तो वह नर्मदा के पानी का उपयोग करते हुए जगह-जगह बांध पहुंचाकर पूरे एरिये में पानी पहुंचाने के कारण है. आज अगर मैं बात करूं उस पानी और सिंचाई पर हम कितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं और उसके कारण हमारी तरक्की हो रही है. चर्चा करें रोजगार और अन्य विषयों पर भी तो बिजली,पानी के साथ शिक्षा तो शिक्षा पर  भी चाहे स्कूल शिक्षा हो चाहे कालेज की शिक्षा हो उसमें रुचि बढ़ाना, उस पर बजट बढ़ाना तो विभाग की बात करूं तो बहुत बड़ी राशि हमने अलाट की और पूरा एक परिवर्तन किया. आज शिक्षा के कारण पूरी दुनियां में भारत का नाम तेजी से बढ़ रहा है और मुझे यहां कहते हुए कोई झिझक नहीं है कि एक प्रधानमंत्री था जिसने पापुलेशन को लाइबिलिटी बनाकर अपने सब नकारे काम के कारण, उन्होंने कह दिया कि  पापुलेशन के कारण देश की तरक्की नहीं हो सकती और एक प्रधानमंत्री आया जिसने पापुलेशन को असेट बनाकर काम करना शुरू कर दिया  तो आज पूरा देश दुनियां में वापस विश्व गुरू बनने की स्थिति में आया. बात सोच की है. बात विषय की है कि किस विषय के माध्यम से कैसे आपके मन में विकास की रचना है. मैं देख रहा था कि ऊर्जा जैसे विषय और ऊर्जा में भी ऐसी ऊर्जा नहीं जिसमें प्रदूषण और कार्बन फैले और भविष्य के लिये चिंता का विषय हो तो पहले ऊर्जा की तरक्की की. ऊर्जा में हम आगे बढ़े और फिर आज ग्रीन और क्लीन ऊर्जा की बात कर रहे हैं. आज अगर मध्यप्रदेश टाप 5 राज्यों में से एक राज्य आ गया वह इसलिये कि  ग्रीन ऊर्जा में हम सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. ऊर्जा के लिये 14124 करोड़ रुपये का  प्रावधान किया अलग-अलग मदों में वह सिर्फ इसलिये किया कि यहां के किसानों की बढ़ती हुई जरूरत. यहां के विद्यार्थियों को घर में पढ़ने के लिये 24 घंटे बिजली चाहिये तो वह उपलब्धता करने के लिये हम बात करें तो अगर बिजली ही उपलब्ध नहीं होगी तो कैसे विकसित प्रदेश बनेगा, कैसे शिक्षित होगा, कैसे घर में शांति रहेगी. यह बात अलग है कि कुछ लोग बड़े शहरों में रहते थे वह कुछ भी कमेंट कर देते थे. अगर मैं बात करूँ तो दूसरा सबसे बड़ा पीडब्‍ल्‍यूडी का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का फण्‍ड है. पीडब्‍ल्‍यूडी के डिफरेन्‍ट विभागों का मैं टोटल कर रहा था तो 2,385 करोड़ रुपये सड़कों के जाल के लिए डिफरेन्‍ट मदों के माध्‍यम से जोड़कर सड़कों का अलग तरह का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बनाया, तब जाकर उद्योग, बिजली, सड़क, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, एअरपोर्ट की जिस तेजी से कल्‍पना प्रधानमंत्री जी और राज्‍य सरकार मिलकर कर रहे हैं, उसके कारण आज मध्‍यप्रदेश की इंडस्‍ट्रीज़ की तरक्‍की के बारे में सोचा जा रहा है.

          सभापति महोदय, मैं देख रहा था कि शिक्षा विभाग में भी 2,135 करोड़ रुपये, यह कोई सामान्‍य बात नहीं है. इतना इनका शायद उस समय पूरे बजट में नहीं होता होगा, जितना आज ये अनुपूरक बजट के छोटे से विषय की व्‍यवस्‍था में है. केवल शिक्षा में, उच्‍च शिक्षा के साथ सीएम राइज स्‍कूल, पूरे प्रदेश का भारत में नक्‍शा बदलने की तैयारी करने के लिए यह प्रावधान किया गया है. मैं बात कर रहा था कि पीएचई, शुद्ध पीने के पानी के लिए 2,116 करोड़ रुपये का प्रावधान, केन्‍द्र सरकार का फण्‍ड अलग है. इतना पैसा हर घर तक शुद्ध पीने का पानी पहुँचाना सामान्‍य व्‍यक्‍ति के सोच के विषय नहीं थे, जो हमने किए हैं. जब हम पीने के पानी की, सिंचाई की, स्‍वास्‍थ्‍य की, शिक्षा की बात करते हैं तो 5 मेडिकल कॉलेज से आज 24 मेडिकल कॉलेज सरकार बना रही है. बात करते हैं कि डॉक्‍टर नहीं हैं, लेकिन डॉक्‍टर आते कहां से हैं. कभी सोचा. अपने गिराबान में, जब कोई आदमी एक उंगली सामने उठाता है, तीन उंगली उसकी तरफ आती है. प्रकृति का नियम है. 24 मेडिकल कॉलेज और अभी तो हमारे देश के प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री का सपना है हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुले, हर जिले में खुले, ताकि कभी भी किसी की भी पीड़ा न हो और प्रेवेन्‍टिव हेल्‍थकेयर पर, टेलीमेडिसिन पर, ऐसे विषयों पर आज चर्चा हो रही है और जिस तेजी से परिवर्तन आ रहा है, हम आज उस लाइन पर बात कर रहे हैं कि अब हमारे मेडिकल कॉलेजों में भी धीरे-धीरे हम कैसे और बेहतर करें, हम उस पर भी चिंता कर रहे हैं. सुपर स्‍पेशियलिटी सेंटर्स खोले जा रहे हैं. हम अगर बात करें तो रोबोटिक सर्जरी के बारे में सोच रहे हैं. हम बात कर रहे हैं तो एआई के माध्‍यम से हम उस दिशा में सोच रहे हैं कि बिना ह्युमन टच के कैसे ऑपरेशन करें, क्‍योंकि इन्‍फेक्‍शन मिनिमम तब हो पाए. इस दिशा में सोचने वाली सरकार जब सोचती है तब कुछ वर्षों में परिवर्तन सामने आता है. तब हम मध्‍यप्रदेश को टॉप 5 राज्‍यों में ले जाने के बारे में सोचते हैं और हम टॉप 5 में भी और ऊपर कैसे बढ़ें, उसकी रचना कर सकते हैं.

          सभापति महोदय, मैं देख रहा था कि केवल इतनी ही बातें नहीं, बड़े-बड़े शहरों और विषयों के लिए या व्‍यापारियों और किसानों के अलावा भी महिलाओं और आने वाली पीढ़ी के बारे में सरकार सोचती है. इस सरकार ने मैं देख रहा था कि विभिन्‍न मदों के माध्‍यम से 3,411 करोड़ 49 लाख रुपये महिला विकास में, चाहे हमारी आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की तरक्‍की की बात करें, चाहे हम आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में भोजन की बात करें, उसके पोषण की बात करें. हमने अलग-अलग मदों से हर वर्ग के विकास का काम किया है. ऐसे ही मोदी जी का वाक्‍य नहीं था कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास, सबका प्रयास, प्रयास भी करना पड़ेगा. बिना प्रयास के ये तीनों पहले वाक्‍य पूर्ण नहीं होते हैं. कहीं न कहीं उस दिशा में जब हम काम करते हैं तब जाकर मध्‍यप्रदेश स्‍वर्णिम मध्‍यप्रदेश बनने की हमारी रचना की आगे की पूर्ति होगी. मैं बात कर रहा था कि अलग-अलग मदों के माध्‍यम से, अलग-अलग विषयों के माध्‍यम से हम एक ऐसी रचना करें मध्‍यप्रदेश की कि जो भारत के हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी का सपना विश्‍वगुरु का, वह पुन: सबसे विकसित राष्‍ट्र बनाने में मध्‍यप्रदेश सबसे तेजी से और सबसे आगे कैसे बढ़े. उसी रचना को ध्‍यान में रखते हुए हम सभी मदों में, सभी महत्‍वपूर्ण बिन्‍दुओं को ध्‍यान में रखते हुए बात कर रहे हैं. कल मेरे कुछ मित्रों ने बहुत विषयों पर चर्चा की थी. मैं उन विषयों पर भी थोड़ी सी बात करना चाहूँगा कि कहीं न कहीं वे बात कर रहे थे कि हमने उद्यम क्रांति में क्‍या किया ? हमने सन्‍त रविदास स्‍वरोजगार योजना में क्‍या किया ? हमने भगवान बिरसा मुंडा स्‍वरोजगार योजना में क्‍या किया ? तो मैं आज सभी आंकड़े भी आपके ध्‍यान में, आपके माध्‍यम से हमारे मित्रों को बताना चाहता हूँ.

          सभापति महोदय, मुख्‍यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में आवेदन भले ही 73,575 आए लेकिन उसमें से 43,306 आवेदकों को ऋण मिला और उन्‍होंने ऋण लिया. मैं यह डिस्ट्रिब्‍यूशन की बात कर रहा हूँ. इसकी बात नहीं कर रहा हूँ कि कितने लोगों ने अप्‍लाय किया और कितने लोगों को ऋण मिला ? अगर मैं बात करूँ सन्‍त रविदास स्‍वरोजगार योजना में 7,402 लोगों के आवेदन आए, उसमें से कुल 1,518 आवेदन स्‍वीकृत हुए और जिन लोगों ने लोन उठाया है, वह 1,294 लोग थे. भगवान बिरसा मुण्‍डा स्‍वरोजगार योजना में कुल 9,362 लोगों के आवेदन पर 1,254 लोगों को मिला एवं इन तीन विभिन्‍न योजनाओं से कुल 44,854 परिवारों के एक नये जीवन की शुरूआत हुई है. मैं बात कर रहा था कि हमारे मित्र सबसे ज्‍यादा बात कर रहे थे, हमने अलग-अलग क्‍लस्‍टर्स के बारे में बात की. 8 क्‍लस्‍टर्स तो हमारे अलग-अलग जगह में, चाहे वह ग्राम भांग्‍या हो. इन्‍दौर में कुल मिलाकर निजी 6 क्‍लस्‍टर चालू हो गए हैं, फंक्‍शन में हैं, तीन सरकारी जमीन पर भी हुए हैं. हमने नीमच में 4 क्‍लस्‍टर्स दिए- केसरपुरा, सगराना, दारू एवं दुधवा. ऐसे ही उज्‍जैन में दिए, मुरैना में दिए, रायसेन में दिए, हरदा में अलग-अलग क्‍लस्‍टर्स के माध्‍यम से दिए हैं. यह केवल मध्‍यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जो एक दिन में 2,000 से ज्‍यादा एमएसएमई के उद्योग का भूमि पूजन मुख्‍यमंत्री जी से करवाया. हमने पूरे एशिया में रिकॉर्ड तोड़ा है. आप यदि डिस्ट्रिक्‍टवाईज भी चाहें तो मैं सूची पढ़कर सुना सकता हूँ.

          सभापति महोदय, लेकिन आज के विषय में मूल बात यह है कि क्‍या हमारा विकास समुचित हर वर्ग, हर दिशा और हर चीज को लेकर है ? क्‍या केवल ब्‍याज या उसके डर में हम भविष्‍य का विकास रोक दें ? हम पिछडे़ से पिछड़ा राज्‍य बन जाएं. क्‍या हम अगर विकास करेंगे ? इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर में पैसा लगाएंगे, तो जरूर हम अपने बजट में, भारत सरकार की गाईडलाईन के अनुमान से 3.5 प्रतिशत हमारी जीडीपी का लोन लेने के लिए, जो कहा है, हम उसी सीमा में लोन लेकर काम कर रहे हैं. मैं, हमारे माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई भी देना चाहूँगा, जिन्‍होंने  बजट के इस अनुपूरक को पेश किया, क्‍योंकि 5 बार पहले पूर्ण बजट वह पेश कर चुके हैं. इस अनुपूरक बजट में उन्‍होंने हर वर्ग, हर व्‍यक्ति के बारे में चिन्‍ता की है. इसी कारण इन्‍हीं सब विभिन्‍न योजनाओं के माध्‍यम से आज मध्‍यप्रदेश की एक अलग रचना हुई और हम तेजी से आगे बढ़ते जा रहे हैं. मैं अपनी तरफ से पुन: बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देना चाहता हूँ माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी को और माननीय मुख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में जिस तेजी से, उन्‍होंने एक समुचित, सर्वविकसित, सबके विकास को ध्‍यान में रखकर अनुपूरक बजट पेश किया है. आपने समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी (भीकनगांव)-  माननीय सभापति महोदय, मैं, अनुपूरक अनुमान में विभिन्‍न मांगों पर अपनी बात रख रही हूं. मैं भीकनगांव विधान सभा से चुनकर आयी हूं, वह पिछड़ा और आदिवासी क्षेत्र है. प्रमुख रूप से ऊर्जा विभाग में विद्युतीकरण के संबंध में अपनी बात रख रही हूं. यहां इतनी विकास की बातें हो रही हैं लेकिन विपक्ष द्वारा जो आईना दिखाया जा रहा है, उसे भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

          माननीय सभापति महोदय, मेरी विधान सभा के अंतर्गत आज भी करीब 200 मजरे-टोले ऐसे हैं, जहां पर बिजली नहीं है और आदिवासी परिवार बिना बिजली के निवास करते हैं और बिजली न होने से सिंचाई के साधनों के उपयोग हेतु डीज़ल ईंजन के माध्‍यम से मंहगी सिंचाई करते हैं और अपने परिवार का पालन करते हैं. मैं, चाहती हूं कि ऊर्जा विभाग में इन मजरे-टोलों के लिए भी बजट दिया जाये ताकि वहां आदिवासी परिवारों को पलायन नहीं करना पड़े.

          माननीय सभापति महोदय, पहाड़ी क्षेत्र में वन ग्राम हैं और वन ग्रामों में विकास के लिए आदिवासी उपयोजनाओं की राशि वहां पर देना आवश्‍यक है क्‍योंकि अभी हमारे सभी माननीय सदस्‍यों ने कहा है कि आदिवासी उपयोजना का पैसा अन्‍य विभागों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, यह सही नहीं है. मेरे क्षेत्रों में इन वन ग्रामों में यदि इन तालाबों- बारेवाल तालाब, कुड़ी तालाब, धुपा बुजुर्ग तालाब, मलगांव तालाब, तिततन्‍या तालाब एवं गाड़ग्‍याय बैराज को बनाया जाये, तो वहां सिंचाई के साधन उपलब्‍ध होंगे. इन्‍हें साध्‍यता देकर यदि राशि दी जाती है तो उन क्षेत्रों का विकास जरूर होगा.

          माननीय सभापति महोदय, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की बात करें तो हमें भवन तो आसानी से मिल जाते हैं लेकिन वहां पद पूर्ति नहीं के बराबर है. डॉक्‍टरों के अभाव में मरीजों को इधर से उधर भटकना पड़ता है. इसके अतिरिक्‍त स्‍टाफ नर्स और छोटे कर्मचारी आज भी उपलब्‍ध नहीं है, इसकी भी व्‍यवस्‍था की जाये.

          माननीय सभापति महोदय, शिक्षा के क्षेत्र में हमारे यहां आज भी कई स्‍कूल ऐसे हैं, जहां पर स्‍थाई शिक्षक नहीं हैं और अतिथि शिक्षकों के माध्‍यम से वहां बच्‍चों को पढ़ाया जाता है और उन शिक्षकों को भी तनख्‍़वाह विगत अक्‍टूबर माह से आज तक नहीं मिली है. यह भी व्‍यवस्‍था की जाये ताकि बच्‍चों को सुचारू रूप से शिक्षा मिले.

          ऐसा कहा गया था कि एकलव्‍य विद्यालय हर आदिवासी ब्‍लॉक में होंगे लेकिन मेरे क्षेत्र में केवल एक ही ब्‍लॉक में है और दूसरे ब्‍लॉक में विद्यालय का संचालन नहीं हो रहा है. 500 बालिकाओं और 250 बालकों हेतु एकलव्‍य विद्यालय का संचालन होता है, उसे मेरे क्षेत्र में भी संचालित किया जाये.

          माननीय सभापति महोदय, सिंचाई परियोजनायें, बहुत ही धीमी गति से बजट के अभाव में चल रही हैं. जिन ठेकेदार द्वारा इन योजनाओं का निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह धीमी गति से एवं गुणवत्‍ताविहीन है. किसानों के खेतों में जो पाईप लगाये जा रहे हैं, वे केवल एक फीट की गहराई पर लगाये जा रहे हैं, निश्चित ही वे उपयोगी नहीं हैं और आने वाले समय में काफी दिक्‍कत होगी.

          माननीय सभापति महोदय, मार्ग निर्माण के क्षेत्र में कहना चाहूंगी कि मेरे विधान सभा से जो एक हाईवे जा रहा है. नर्मदा जी का पुल जो कि सनावद और बड़वाह के बीच है, वहां पर क्षतिग्रस्‍त पुलिया होने से, भारी वाहन हमारी विधान सभा से होते हुए जाते हैं, जिससे पूरा हाईवे इतना क्षतिग्रस्‍त हो गया है कि वहां से आना-जाना दूभर हो गया है, इसे भी ठीक किया जाये.

          माननीय सभापति महोदय, मैं, अपनी लाड़ली बहनों के लिए कहना चाहूंगी कि आज ही मेरा विधान सभा प्रश्‍न लगा था, जिसका जवाब आया है और चुनाव के पहले बड़े-बड़े होर्डिंग्‍स् लगाये गए थे कि 18 से 21 वर्ष की लाड़ली बहनों को भी इस योजना में शामिल किया जायेगा. किंतु मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में स्‍पष्‍ट रूप से जवाब मिला कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. आप जो कहते हैं वैसा करना भी चाहिए. बहनों को आपने इस तरह से धोखे में रखकर, उनसे समर्थन ले लिया किंतु जब उनकी बारी आई उस योजना से हकाल दिया गया. आप उन बहनों को जरूर इस योजना में शामिल करें.

          माननीय सभापति महोदय, एक बात के लिए मैं, सरकार को धन्‍यवाद जरूर दूंगी कि आदिवासी उपयोजना का केंद्र से जो पैसा आया है, वह सीधा पंचायतों को दिया गया है. जो 89 आदिवासी ब्‍लॉक हैं, वहां 20 लाख रुपये तक के कार्य, प्रत्‍येक गांव से, सीधे पंचायतों के माध्‍यम से, विकास कार्यों के नाम पर प्रस्‍ताव लिये जायेंगे और विकास के काम होंगे. यह पहली बार हुआ है. हर बार जिले और प्रदेश स्‍तर से सीधे प्रस्‍ताव लिये जाते थे और उसके बाद राशि आती थी और वह राशि कब आती थी 4-5 वर्ष निकल जाते थे, पर उनकी राशि ही नहीं आती थी. किंतु यह पहली बार हुआ है कि पंचायतों से सीधे प्रस्‍ताव लेकर राशि पहले आई और फिर उसके प्रस्‍ताव लिये जा रहे हैं. इस तरह की जो सुविधा दी गई है मैं इसके लिए धन्‍यवाद भी करती हूं. सभा‍पति महोदय, चूं‍कि मेरा विधान सभा क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र है और पलायन की समस्‍या सबसे ज्‍यादा है. हर पंचायत में उनके रोजगार मूलक कोई भी काम शुरू नहीं किये गये हैं, मनरेगा के काम शुरू नहीं किये गये हैं तो इस बजट में रोजगार मूलक काम जरूर शुरू हों जिससे पलायन नहीं हो. हजारों की तादात में महाराष्‍ट्र, गुजरात और कई राज्‍यों में हमारे आम जन जाते हैं और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. यह बहुत ही बड़ी समस्‍या है इसको जरूर ध्‍यान में रखा जाए. बहुत सारी समस्‍याएं हैं किंतु मैं मेरी बात को यहीं समाप्‍त करती हूं आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय-- धन्‍यवाद बहन जी.

          डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा) -- सभापति महोदय, अनुपूरक बजट पर चर्चा हो रही है और यह जो अनुपूरक बजट आया है 30 हजार 265 करोड़ रुपए का आया है. इस बजट में मांग तो की गई है पर मांग का सदुपयोग सही तरीके से होना चाहिए वह नहीं किया गया है इसीलिए मैं विरोध करता हूं और मैं बताना चाहता हूं कि हमारे प्रदेश का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है और आय 2.25 लाख करोड़ रुपए है, ऋण 3.85 लाख करोड़ रुपए है. जब ऋण बढ़ता जा रहा है तो बजट जा कहां रहा है? इस पर ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है और इस पर ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है. मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध है किे बजट को प्रॉपर खर्च करते तो अनुपूरक बजट लाने की आवश्‍यकता ही नहीं पड़ती क्‍योंकि हम घर चलाते हैं, घर का बजट बनाते हैं और अगर कभी कोई घटना, दुर्घटना होती है, कोई बीमार हो जाता है फिर भी हमारे घर का बजट गड़बड़ाता नहीं है पर सरकार अनुपूरक बजट ला रही है तो यह जनता के ऊपर ही थोप रही है, जनता से ही इसका खर्चा लिया जाएगा इससे यह स्‍पष्‍ट होता है. मध्‍यप्रदेश में पांच साल में वेतन में, स्‍कॉलरशिप में, अनुदान के भुगतान में 162 करोड़ रुपए का घोटाला किया है. बजट का पैसा इस तरह से जा रहा है. इसके साथ ही हम देखें कि सरकार की अतिक्रमण से छुड़ाई हुई जमीनें कई जगह बेच दी गई हैं पर जिनको बेची गई है, सरकार के जो पट्ठे लोग हैं या सरकार के नुमाइंदे हैं उनके पट्ठे लोगों को दे दी गई है. उनसे पैसा वसूल नहीं किया गया है, उनसे किस्‍त नहीं ली गई है. इस कारण से भी हमारा खर्चा बढ़ता जा रहा है. यदि यह काम करेंगे, इनकी वसूली प्रॉपर होगी, भ्रष्‍टाचार रोकेंगे तो हमें यह अनुपूरक बजट लाने की जरूरत नहीं पडेगी. मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध है कि हम स्‍मार्ट सिटी की बात करते हैं, मेट्रो ट्रेन की बात करते हैं पर हमारे प्रदेश में आज अगर जाकर देखें तो हमारी अनुसूचित जनजाति का भाई जो पहाड़ी पर रहता है, जंगलों में रहता है उसने ट्रेन नहीं देखी है. उसको ट्रेन में तो बिठा दीजिए फिर मेट्रो ट्रेन की बात कीजिए तो ज्‍यादा अच्‍छा लगेगा. स्‍मार्ट सिटी की बात करते हैं स्‍मार्ट सिटी में कौन रह रहा है वहां एक करोड़ का फ्लेट लेकर कौन रह पाएगा. जो जंगलों में रहते हैं, अनुसूचित जनजाति के भाई जो गांव में रहते हैं, गलियों में रहते हैं वहां रोड नहीं है, उनको मकान बनाने के लिए आप 1 लाख 20 हजार रुपए देते हैं और उसमें उसका खर्चा नहीं चल पाता है, मकान बन नहीं पाता है बजट में फिजूल खर्ची करने की बजाए उसकी व्‍यवस्‍था करेंगे तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. मेरा आपसे अनुरोध है जैसा कि सखलेचा जी ने बताया कि हम रोबोटिक तकनीक की तरफ जा रहे हैं, एआई तकनीक की तरफ जा रहे हैं. पहले आप रोजगार तो दे दो हमारे लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है. पलायन करके लोग दूसरी जगह जा रहे हैं, दूसरे प्रदेशों में जा रहे हैं उनको रोजगार तो दे दें फिर रोबोटिक ले आना, फिर एआई तकनीक ले आना. पहले आप हमारे यहां की व्‍यवस्‍था तो कर दे. रोजगार तो मिल नहीं रहा आप दूसरी तकनीकों की बात कर रहे हैं, उसको लाने की बात कर रहे हैं. मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से यही अनुरोध है कि अनुपूरक बजट लाए हैं तो उसका सदुपयोग होना चाहिए, उसको कंट्रोल करने के लिए भी कोई संविधान बनाना चाहिए और उसे कंट्रोल करना चाहिए. अभी आपने देखा कि हरदा में फैक्‍ट्री में विस्‍फोट हो गया है. यह फैक्‍ट्री इतने सालों से चल रही थी पर अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. कल उस पर स्थगन प्रस्ताव भी आया उसके बाद कार्यवाही नहीं हुई. आप कार्यवाही करेंगे या नहीं करेंगे यह तो आगे दिखाई देगा, जांच की बात कर रहे हैं. वे 60 परिवार जिनके मकान टूट गए हैं, रहने लायक नहीं रहे हैं, उनके परिवार के सदस्य जल गए हैं उनको अनुदान दे देते तो ज्यादा अच्छा रहता. अनुपूरक बजट में उसका प्रावधान करते तो ज्यादा अच्छा रहता. हरदा से नेशनल हाइवे निकला है, नेशनल हाइवे में पूरे मध्यप्रदेश में शिकायत है. नेशनल हाइवे निकलता है तो सभी को फायदा मिलता है परन्तु जिनकी जमीनें उसमें चली गई हैं उनको ठीक से मुआवजा नहीं मिला है. जिनके मकान टूटे हैं उनको मकान का पैसा मिला है जमीन का पैसा नहीं मिला है. कहा गया कि वे सरकारी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे थे. वह गरीब आदमी है उसके पास जमीन होती तो वह सरकारी जमीन पर जाकर क्यों बसता. कोई 50 तो कोई 100 साल से रह रहा है. सरकार ने उनको पट्टे नहीं दिए थे, अब उसके कारण उसे पैसा नहीं मिला वह परेशान हो रहा है. सिर्फ मकान के पैसे देकर उसे रवाना कर दिया गया है. अतिक्रमण के नाम पर उसके घर पर बुल्डोजर चला दिया गया. मेरा कहना है कि आम आदमी, गरीब आदमी, मजदूर की व्यवस्था अनुपूरक बजट में करें तो ज्यादा अच्छा होगा. एमएलए रेस्ट हाउस, मंत्री के बंगले या किसी आफिस को सुसज्जित करने के बजाए गरीबों को अनुदान देंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा.

          सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूँ कि किसानों से 2700 रुपए क्विंटल के हिसाब से गेहूँ खरीदी करने की बात की थी. आप इस रेट पर गेहूँ क्यों नहीं खरीद रहे हैं. क्या उसका इसमें प्रावधान किया है. इसका प्रावधान करना चाहिए. धान खरीदी के लिए आपने 2100 रुपए की बात की थी. पूरी धान खरीद ली है उसका बीच का जो डिफरेंस है वह देने की बात करना चाहिए. आपने मनरेगा बंद कर रखा है. इससे गरीबों को रोजगार मिलता था इसको चालू करवाएं जिससे लोगों को रोजगार मिले.

          सभापति महोदय, हरदा के डिग्री कॉलेज में चार हजार बच्चे हैं और छोटी सी बिल्डिंग है, बिल्डिंग में व्यवस्था नहीं है उनकी व्यवस्था करें. शिक्षा रूपी चाबी हर ताले में लगती है और विकास के लिए काम आती है. कृषि महाविद्यालय, हरदा में खोलने की कई बार बात कर चुके हैं आज तक नहीं खोला गया है. उसका प्रावधान करना चाहिए. पसनगांव से गांगला होते हुए हंडिया रोड है, यह 15-20 साल पहले से स्वीकृत है. लोक निर्माण विभाग से स्वीकृत है आज तक यह रोड नहीं बना है. तीन-तीन बार राशि निकल गई है परन्तु आज तक रोड नहीं बना है. यह रोड बना देंगे तो बहुत अच्छा होगा इसका इसमें समायोजन करेंगे तो अच्छा होगा. इसके साथ ही हरदा से मगरदा रोड चलने लायक नहीं है.

2.04 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

          डॉ. रामकिशोर दोगने -- अनुपूरक बजट से उस रोड की व्यवस्था कर देंगे तो लोगों को सुविधा मिलेगी. 15 साल पहले हंडिया से उल्लास रोड बनना शुरु हुआ था जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाया है. यह लोक निर्माण विभाग की सड़क है इसे बनवाएं. भ्रष्टाचार में पैसा चला जाता है, जांच भी नहीं होती है, जांच होना चाहिए और रोड बनना चाहिए. अनुपूरक बजट में इसका प्रावधान करें. इसके साथ ही विधि महाविद्यालय, हरदा में स्वीकृत है. अधिकारियों की लापरवाही के कारण जमीन आवंटित नहीं हो पा रही है, फंड भी पड़ा हुआ है. इसके बाद भी जमीन आवंटित नहीं होने के कारण वह नहीं बन पा रहा है. मेरा सरकार से अनुरोध है कि जमीन आवंटित करा दें तो जो 9 करोड़ रुपए पड़ा हुआ है उससे वह विधि महाविद्यालय बन जाएगा और प्रारंभ हो जाएगा.

          अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां नर्मदा पुल है वह देवास से हमारे क्षेत्र को जोड़ता है वह पुल भी जर्जर हो रहा है. हालांकि फोर लेन पर बन रहा है उसको भी ठीक कर देंगे तो वह लोगों के उपयोग में आएगा. अनुपूरक बजट ऐसी आवश्यकता की चीजों पर उपयोग होगा तो उचित होगा. इससे सभी को लाभ मिलेगा. मैंने जो बातें बताई हैं उनका ध्यान रखकर यदि बजट में प्रावधान करेंगे तो सभी को लाभ होगा. आपने मुझे बोलने का मौका दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.                                   

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री हेमन्‍त खंडेलवाल जी, तीन मिनट में समाप्‍त करेंगे.

          श्री हेमन्‍त विजय खंडेलवाल (बैतूल) -- अध्‍यक्ष महोदय, पहले 5-5 मिनट था मेरा नंबर आते से ही 3 हो गया.

          अध्‍यक्ष महोदय -- पहले तीन मिनट तो करिये.

          श्री हेमन्‍त विजय खंडेलवाल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं अनुपूरक बजट का समर्थन करता हूं. मैं जगदीश देवडा जी को उनकी सूझ के लिये कि उन्‍होंने 28,655 करोड की जो मांग की है, उसके लिये धन्‍यवाद देना चाहूंगा. हमारा पूरा बजट अभी नहीं आया. पूरा बजट हमारा 3,14,000 करोड का पहले था. मैं कांग्रेस के आलोचना करने वाले साथियों को बताना चाहूंगा कि वर्ष 2003 में आपका बजट 23,000 करोड था. हमारा यह अनुपूरक बजट उसका मात्र 10 परसेंट आपके कम्‍पलीट बजट से ज्‍यादा है और इसलिये आप वह चिंता ना करें जो पूरे बजट की रहती है. मैं कांग्रेस के सदस्‍यों से एक बात और कहना चाहूंगा कि जब भी हम कम्‍पलीट बजट पर बहस करते हैं तो अनुपूरक बजट पर वह बातें ना करें. आप नियमावली का अध्‍ययन करें. नियम 156(2) में स्‍पष्‍ट है कि अनुपूरक बजट में वाद विवाद केवल उन्‍हीं विषयों पर रहना चाहिये जो विषय अनुपूरक अनुदान पर बताये गये हैं, मूल अनुदान या उससे संबंधित नीति पर कोई चर्चा नहीं होनी चाहिये. हमारे कांग्रेस के साथियों ने लगातार पूरे बजट की बात की जबकि उसकी कोई विषयवस्‍तु ही नहीं थी और नियम के अनुसार उस पर चर्चा करने की जरूरत ही नहीं थी. मैं जगदीश देवडा जी को इस बात के लिये धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आपने मेरे बैतूल जिले में लगभग 49 करोड रुपये की राशि पांचो विधान सभा में बराबर दी है, नहीं तो पूर्व की कांग्रेस सरकार में मेरे एक विधायक को छोडकर बाकी विधान सभा की राशि दी जाती थी. आप सबसे न्‍याय करते हैं इसलिये मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा. खनिज मद में भी आपने 100 करोड रुपये रखे. आज खनिज मद ऐसा है जिसकी चिंता विधायक लोग भी करते हैं क्‍योंकि हमारे जो काम हमारी निधि से नहीं होते वह हम माइनिंग मद से करते हैं और इसलिये आपने उसकी चिंता की इसके लिये मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा. ऊर्जा विभाग में आपने लगभग 13 हजार करोड रुपये का प्रावधान रखा. आज मोदी जी सोलर से हर घर को आत्‍मनिर्भर करना चाहते हैं आपने उसकी भी चिंता की. वर्ष 2003 में हमारा साढे चार हजार मेगावॉट का कुल उत्‍पादन था कांग्रेस के समय, जो आज 25 हजार मेगावॉट हो गया. आपका बजट और आगे हमारे उत्‍पादन को बढाएगा ऐसी मैं उम्‍मीद करता हूं. चिकित्‍सा शिक्षा विभाग में भी आपने भरपूर बजट दिया, मैं बजट की राशि पर नहीं जाउंगा. वर्ष 2003 में मात्र पांच मेडिकल कॉलेज थे और 620 सीटें मेडिकल की थीं. आज 2024 में 24 मेडिकल कॉलेज हैं और 3 हजार से ऊपर सीटें हैं और हमारे मोहन यादव जी का सपना है कि आने वाले समय में हर जिले में मेडिकल कॉलेज हो, बजट आपका उसी ओर इंगित कर रहा है. आप धन्‍यवाद के पात्र हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपने पीडब्‍ल्‍यूडी में ढाई हजार करोड का बजट दिया. मैं वित्‍तमंत्री जी को बताना चाहूंगा कि एक समय था जब खराब सडक के कारण सरकार ही गिर गई थी और इसलिये आप लगातार पीडब्‍ल्‍यूडी को सपोर्ट कर रहे हैं. अच्‍छी सडकें प्रदेश में बन रही हैं और राशि भी आपने भरपूर दी. स्‍कूल शिक्षा विभाग को भी आपने साढे तीन सौ करोड की राशि दी. कल्‍पना करिये आज से बीस साल पहले गांव के बच्‍चे जब स्‍कूल जाते थे तो दस-दस किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे. यदि उनके गांव में कोई स्‍कूल था तो वहां शिक्षक नहीं था. सीएम राइज एक ऐसी कल्‍पना है जब गरीब के घर के सामने बस आएगी उस बच्‍चे का भी आत्‍मविश्‍वास बढेगा, उसको भी प्राइवेट स्‍कूल जैसी शिक्षा मिलेगी. उसके स्‍कूल में भी अच्‍छे लैब, अच्‍छी लाइब्रेरी, अच्‍छा ग्रांउण्‍ड होगा. प्राइवेट स्‍कूल और सरकारी स्‍कूल का भेद खत्‍म होगा हमारी सरकार इस बात के लिये धन्‍यवाद की पात्र है कि हर व्‍यक्ति जिसमें क्षमता है वह अच्‍छी शिक्षा प्राप्‍त करे. उसके पिता के पास अगर प्राइवेट स्‍कूल का बजट नहीं है तो आपके स्‍कूल आने वाले समय में उस मापदंड के रहेंगे जो एक प्राइवेट और सरकारी के भेद को मिटाएंगे. मैं आपको इस प्रावधान के लिये भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपने पंचायत विभाग में भी 2,483 करोड का प्रावधान किया. हमारे गांव स्‍वच्‍छ बनेंगे, आवागमन अच्‍छा होगा और आज गांवों से जो शहर को जोडने वाली बात है प्रधानमंत्री सडक में अभी हमारे मंत्री जी ने नये प्रस्‍ताव मांगे हैं. मिसिंग रोड के मांगे हैं और हमारे बाजारों को जोडने वाली रोड के मांगे हैं, मैं समझता हूं कि प्रधान मंत्री सडकें और पंचायत का बजट हमारी उन जरूरतों को पूरा करेगा. सिंचाई विभाग के लिये भी मैं आपके बजट की राशि पर ध्‍यान नहीं देना चाहूंगा

          अध्‍यक्ष महोदय -- हेमन्‍त जी, पांच मिनट पूरे हो गये.

          श्री हेमन्‍त विजय खंडेलवाल -- अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट में खत्‍म करूंगा. आप वर्ष 2003 में साढ़े 7 हजार हेक्टेयर से आपने  सिंचाई का रकबा  45  लाख हेक्टेयर कर दिया. पीएचई विभाग को   आपने 2600 करोड़   के ऊपर का बजट  दिया. मैं  उस आदिवासी जिले का हूं, जहां पर वर्ष  2000 के पहले  आदिवासी परिवार  5-5 किलोमीटर से झरने का पानी लाते थे.  हमारे मोदी जी की कल्पना  हर घर तक नल पहुंचे,  उसके लिये सरकार  बजट  भी प्रावधान कर रही है और  उस अनुरुप काम भी  कर रही है. कल्पना करिये उस परिवार  की,  जिसका पूरा समय  पानी लाने  में जाता था, अब  उसके घर पर भी  नल आयेगा. हर गरीब का चेहरा खिलेगा,  उसके लिये हमारी सरकार, वित्त  मंत्री जी,  आप धन्यवाद के पात्र हैं.  मैं हर विभाग के लिये  हर क्षेत्र के लिये,  आपके द्वारा बजट देने के लिये  आपको  धन्यवाद दूंगा. अभी  तो पूरा बजट आया ही नहीं है.तब कांग्रेस की इतनी तकलीफ है, जब पूरा बजट आयेगा, तो उनके पास बात करने के लिये कोई विषय ही नहीं रहेगा.  मैं आपके इस बजट  प्रावधान का समर्थन करता हूं और उम्मीद करता हूं कि  वित्त  विभाग हर विभाग की चिंता करते हुए हमारे हर नागरिक के चेहरे पर  मुस्कान  लायेगा.  मैं  अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा, धन्यवाद.

          डॉ. हिरालाल अलावा (मनावर)--  अध्यक्ष महोदय,  मुझे अनुपूरक बजट पर  आपनी  बात रखने के लिये आपने मौका दिया,  मैं आपका धन्यवाद करता हूं.  मैंने  इस अनुपूरक बजट को पढ़ा और  सरकार की तरफ से  एक नारा बार-बार  दिया जा रहा है कि सबका साथ, सब का विकास और सबका विश्वास.  इस  अनुपूरक बजट में  28 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.  इस अनुपूरक बजट  में कांग्रेस पक्ष के विधानसभा क्षेत्रों  में एक भी रोड स्वीकृत नहीं किये गये हैं. यह लोकतंत्र है  और इस लोकतंत्र के मन्दिर  के भीतर प्रत्येक विधान सभा का विधायक साथी  लाखों जनता के माध्यम से चुनकर आता है और इस लोकतंत्र की यही खूबसूरती  है कि सबका ध्यान  रखा जायेगा. चाहे वह सत्तापक्ष  का हो,  चाहे विपक्ष का हो.  लेकिन इस  विधान सभा के भीतर हम महसूस कर रहे  हैं कि यहां पर तो सिर्फ सत्ता पक्ष का ही विकास किया जा रहा है.  विपक्ष  को बिलकुल अनदेखा  किया जा रहा है.  28 हजार करोड़ रुपये के बजट में  मनावर विधान सभा क्षेत्र से  मुझे एक भी रोड की स्वीकृति नहीं दी गई है.  मनावर विधान सभा क्षेत्र में मनावर शहर   बायपास के लिये हमने लम्बे  समय से  मांग  की सरकार से. मनावर  विधान सभा  क्षेत्र 4 स्टेट हाईवे  से जुड़ा हुआ है. आये दिन  औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण वहां पर  दुर्घटनाएं होती रहती हैं.  मुझे उममीद थी कि  इस अनुपूरक बजट  में  मनावर  विधान सभा के  मनावर शहर के लिये  बायपास की स्वीकृति  दी जायेगी. लेकिन मुझे  दुख इस बात का है कि  लम्बे समय  से संघर्ष करने के बावजूद भी सरकार ने  एक बायपास स्वीकृत  नहीं किया है.  हमारे विधान सभा क्षेत्र में  ट्रायबल  उमरबन ब्लाक है और वहां  पर काकड़दा,भादरा,लवाड़ी, सुराड़ी, आमसी  पाटला, खण्डलाई,टेमरिया और देवरा, यह पूरा एक आदिवासी क्षेत्र होने के   साथ साथ में सूखा  क्षेत्र है. इस क्षेत्र में  नहर के लिये चतुर्थ चरण के एक्सटेंशन  के लिये  मैंने पिछली बार भी सदन  में लगातार मांग की.  अनुपूरक बजट में  मुझे उम्मीद थी कि  आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिये,  उन किसानों के विकास के लिये  पानी की व्यवस्था सरकार करेगी, लेकिन  इस अनुपूरक बजट में,  उसका कुछ भी जिक्र नहीं है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे उम्‍मीद करते हैं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में कम से कम 250 आंगनवाड़ी केन्‍द्र ऐसे हैं जो भवनविहीन हैं. मुझे उम्‍मीद थी इस अनुपूरक बजट में कम से कम हमें 40-50 आंगनवाडि़यों की स्‍वीकृति मिलेगी.  लेकिन मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में एक रूपया भी सरकार खर्च नहीं करना चाहती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपसे उम्‍मीद करते हैं कि यह भेदभाव नहीं करें. जिन विधायकों को जनता ने चुना है, उनके ऐसा भेदभाव नहीं किया जाये. हम उम्‍मीद करते हैं आपकी अध्‍यक्षता में सभी विधायकों के साथ न्‍याय होगा. यही अपेक्षा करता हूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद

          श्री सुरेश राजे(डबरा) :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस अनुपूरक के समर्थन में और विपक्ष में इस समय बात चल रही है. पक्ष अपनी बात रख रहा है और विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिया और विशेषकर मुझे बोलने अवसर दिया, इसके लिये अध्‍यक्ष महोदय धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय, 2-3 चीजें हैं, अभी हमारे सम्‍मानित सदस्‍य बोल रहे थे कि बिजली के मामले में प्रदेश बहुत अग्रणी हो गया, सरप्‍लस बिजली हो गयी. मतलब हम बेचने की स्थिति में है. अगर हमारे प्रदेश बिजली बेचने की स्थिति में है तो ऐसी क्‍या स्थिति है कि हम किसानों को 10 घंटे की बिजली प्रदाय करने का कह कर हम उनको 6 घंटे की बिजली भी नहीं दे पा रहे है, यह बड़ा दुर्भाग्‍यपूर्ण है और सत्‍तापक्ष लगातार कह रहा है कि बिजली सरप्‍लस हो गयी है. जिस महान नेता अटल जी के नाम पर अटल ज्‍योति का नाम रखा गया उन गांवों में अटल ज्‍योति की जो बिजली है, अध्‍यक्ष जी आपने भी उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया है, जिस क्षेत्र से में आता हूं. उस क्षेत्र में न तो अटल ज्‍योति है और न किसान ज्‍योति है. दोनों की स्थिति बद से बदतर है. अब विषय आता है कि शिक्षा के क्षेत्र में हम बहुत आगे बढ़ गये हैं. हमने इतने विद्यालय खोल दिये, इतने कालेज खोल दिये सब खोल दिया. बहुत अच्‍छी बात है, यदि आपको लगता है कि आपने खोला है, इसके लिये धन्‍यवाद.

          लेकिन 20 वर्षों से लगातार यह सरकार मध्‍यप्रेश में काम कर रही है, एक वर्ष का कार्यकाल हम छोड़ दें तो 19 वर्षों में बैकलॉग के पद तक प्रदेश में नहीं भरे गये हैं. यह कैसी विडम्‍बना है. इस सरकार को और कितना समय चाहिये. इस पर भी सरकार को ध्‍यान देना चाहिये. जहां तक बात आती है कि आप विकसित भारत की बात कर रहे हैं तो उसमें विकसित होने में हमारा प्रदेश भी आता है. जहां एक ओर हम कह रहे हैं कि दलितों को, आदिवासियों को अब तो उसी में सभी वर्गों को शामिल कर लिया गया है. जहां 50 साल से 70 साल से, बल्कि यह जानकारी है कि 80-80 साल से जो लोग वहां काबिज थे और जो आदिवासी वर्ग वहां रह रहा है उनको आज तक पट्टे नहीं दिये गये हैं. एक चीज़ और कहकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. एक ओर सरकार 10-20 हजार का स्‍व-रोजगार के लिये कर्ज दे रही है. वहीं, यही सरकार रोजगार करने वालों को बेदखल कर रही है. इसका जीता-जागता उदाहरण है डबरा नगरपालिका में विगत 40 वर्षों से जो लोग पुल के नीचे बैठकर के अपना चार पहिये का ठेला लाकर के रोजगार करते थे, पकौड़े तलने का काम करते थे, चाय बनाने का काम करते थे, सब्जी बेचने का काम करते थे उन सबको बेरोजगार कर दिया है और यह कैसी नीति है, एक ओर तो कह रहे हैं कि हम स्‍व-रोजगार देंगे और जो खुद का रोजगार कर रहा है, यह सरकार उसको रोजगार भी करने नहीं दे रही है. मैं इतना ही चाहूंगा कि सरकार बड़े-बड़े काम करे हमें इसमें कोई गुरेज़ नहीं, अच्‍छी बात है. कम से कम जो सरकार का वचन था उसमें से एकाध पर तो ध्‍यान दे ले. अभी कहा था कि लाड़ली बहनों के फार्म भरवा दो, चुनाव से पहले कह दिया कि लाड़ली बहनें फार्म भरें. अब वह लाड़ली बहने हमारे आफिस के चक्‍कर लगा रही हैं. वह कहते हैं कि गैस सिलेण्डर का फार्म भरवाओ, गैस सिलेण्डर वाले के पास जाओ तो वह कहते थे कि साइट बंद हो गई. जब लाड़ली बहना की, प्रधानमंत्री आवास की बात करो तो वह कहते हैं कि साइट बंद हो गई. अध्यक्ष महोदय, अंतिम बात कहकर अपनी बात को विराम दूंगा. आपने जब लोकसभा चुनाव ग्वालियर क्षेत्र से लड़ा था तब वह समस्या थी. इसमें दिया गया है कि नामांतरण का हमने सरलीकरण कर दिया है, उस समय से लेकर डबरा विधान सभा के अंतर्गत जो नामांतरण बंद थे, आज भी नामांतरण बंद हैं. सरकार इस ओर भी ध्यान दे, यही मेरा निवेदन था. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री विजय चौरे (सौंसर) - अध्यक्ष महोदय, मैं अनुपूरक बजट के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. जब कैबिनेट की पहली बैठक हुई तो मुझे ऐसा लगा, मैं टीवी के पास टक-टकी लगाकर देख रहा था, मुझे ऐसा लगा कि मजदूर का बेटा है. प्रदेश का मुख्यमंत्री बना है. बहुत अच्छे निर्णय लेंगे. मजदूर का बेटा है, हमें इस बात की खुशी है. व्यक्तिगत रूप से भी मुझे खुशी हो रही है कि मजदूर का बेटा प्रदेश का मुख्यमंत्री बना है. मैंने सोचा कि मजदूरों के हितों की बात होगी. किसानों के हित की बात होगी.  परन्तु देखा तो लाऊड स्पीकर बंद कराओ, मांस मटन खुले में बिकना बंद कराओ, अच्छी बात है. यह बहुत अच्छा निर्णय है. इसका भी हम स्वागत करते हैं. सोचा था कि किसानों की बात होगी. परन्तु अनुपूरक बजट में किसानों की कोई बात नहीं है. आज इस देश की रीड की हड्डी हमारा किसान है. देश की अर्थव्यवस्था किसानों के भरोसे चल रही है. यूरिया की बोरी 50 किलो की थी, 45 किलो की हो गई है. अब तो सुना है कि 40 किलो की भी होने वाली है. परन्तु दाम नहीं घटे हैं. चिंता का विषय यह है कि मक्के को भाव नहीं, गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये देने की सरकार बात करती है. परन्तु आज सब खाली वायदे हैं, खोखले वायदे हैं. स्कूल की बात करते हैं. इनफ्रास्ट्रक्चर में तो आप बहुत बड़ी बड़ी बिल्डिंग बना रहे हैं. शिक्षा के स्तर की बात एक माननीय सदस्य अभी कर रहे थे. कह रहे थे कि शिक्षा के स्तर में हमने सीएम राइज स्कूल खोले हैं. मुझे यह बताइए कि 20 सालों में सबसे ज्यादा खराब हालत प्रदेश की कहीं हुई है तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हुई है. स्कूलों की हालत क्या हुई है? सरकारी स्कूल पहले बड़े अच्छे थे. वर्ष 1980, 1985, 1990 तक उसके बाद प्राइवेट स्कूल गाजर घास की तरह खुले हैं. आज प्राइवेट स्कूलों, कॉलेजों का जाल बिछ गया है. इसके कारण सरकारी स्कूलों की हालत खराब हो गई है. अध्यक्ष महोदय, मैं इसलिए कहना चाह रहा हूं कि सीएम राइज स्कूल खुल रहे हैं, बहुत अच्छी बात है. स्वागत करेंगे. सरकारें अच्छा काम करेंगी, हम प्रशंसा भी करेंगे. देश और प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो सबका उद्देश्य देश का विकास, प्रदेश का विकास, प्रगति और मानव कल्याण होता है. जहां आप अच्छा काम करेंगे हम प्रदेश सरकार की प्रशंसा भी करेंगे. परन्तु जहां पर आप गलत काम करेंगे, आइना दिखाने से भी पीछे नहीं हटेंगे. हमारे श्री खंडेलवाल जी जल जीवन मिशन की बात कर रहे थे. मैं आपको बता दूं कि जल जीवन मिशन की यह हालत है कि ठेकेदार काम छोड़कर भाग रहे हैं आधा काम कर दिये, उसके बाद में कहीं नाली खोदकर पड़ी है, एक एक साल से मेरी विधान सभा क्षेत्र में काम पूरे ठप्प पड़े हुए हैं. कागज पर काम हो रहे हैं, जमीन पर कुछ नहीं हो रहा है. जल जीवन मिशन की बात करें कि मोदी जी ने घर घर नल लगा दिया.

अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरे पिता स्वर्गीय श्री रैवनाथ चौरे जी, वर्ष 1980 में मंत्री हुआ करते थे, मुझे अच्छे से याद है. मैं भले ही छोटा था. परन्तु उस समय गांव गांव में टंकिया बनी थी और घर घर में नल जल योजना चालू की थी. 40 साल बाद मोदी जी को याद आई, लेकिन बहुत अच्छी बात है. उसका भी हम स्वागत करते हैं. परन्तु मैं इसलिए कहना चाह रहा हूं कि  आज स्वास्थ्य की क्या हालत है. स्वास्थ्य के लिए अनुपूरक बजट में कोई प्रावधान नहीं है. आज आप बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स बना रहे हैं. 100 बिस्तर का अस्पताल मेरे विधान सभा क्षेत्र में है. 32 डॉक्टरों के पद हैं लेकिन वहां पर 12 डॉक्टर काम कर रहे हैं. पैरामेडिकल स्टाफ आपका काम नहीं कर रहा है. मतलब यह बदतर स्थिति है कि गर्भवती महिलाओं को सीजर करने की जरूरत अगर पड़ी तो उसको छिंदवाड़ा या नागपुर रेफर करना पड़ता है. हम कहां की बात कर रहे हैं? हम विकसित भारत की बात करते हैं. किसान आज परेशान है. बेरोजगार, रोजगार के लिए तड़प रहा है. आज माताएं बहनें परेशान हैं और हम विकसित भारत की कल्पनाएं कर रहे हैं? अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से  इस बात को इसलिए कहना चाह रहा हूं कि इस अनुपूरक बजट में सौतेला व्यवहार हुआ है. कांग्रेस के विधायक हम गिनती के है. श्री रावत जी ने कहा कि 65 विधायक हैं. अगर आप 5-10 करोड़ रुपये भी दे देते, नहीं देते 15 करोड़ रुपये, 5-5 करोड़ रुपये की सड़कें देते, हम संतुष्ट होते. हम स्वागत करते. जब मंत्री जी उद्घाटन या भूमि पूजन करने आते तो हम उनको बहुत बड़ा हार भी पहनाते. परन्तु इस बात का दुख और चिंता है कि इस सरकार ने कांग्रेस के विधायकों के साथ सौतेला व्यवहार किया है. मैं इतना कहना चाहता हॅूं कि पूरे प्रदेश में बेरोजगारी चरम सीमा पर है. आज "सीखो कमाओ योजना" माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने चालू की थी, क्‍या हालत है उसकी. कोई बजट में प्रावधान है, कुछ नहीं है. गौ-माता की आप बातें करते हैं. गौ-शालाओं को लेकर बजट में क्‍या प्रावधान है. 20 रूपए में गाय का चारा नहीं आता. एक गाय के लिए कम से कम 100 रूपए का चारा होना चाहिए. यह परिस्‍थतियां हैं इस देश की. कत्‍लखाने के लिए हमारी गायें कटने जा रही हैं. भारतीय जनता पार्टी की सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए कहना चाह रहा हॅूं कि हम ऐसा कानून बनाएं, बजट में ऐसा प्रावधान लाएं कि हमारे देश की गौ-माताएं सड़क पर घूम रही हैं. उन्‍हें ट्रक वाले, बस वाले उड़ा रहें हैं. ट्रेनों से गायें कट रही हैं, पर यह चिन्‍ता किसी को नहीं है. मैं इतना ही निवेदन करना चाह रहा हॅूं कि बजट में सौतेला व्‍यवहार न हो. कांग्रेस और भाजपा को समान रूप से देखें. आपने मुझे बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री निलेश पुसाराम उइके (पांढुर्ना) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पांढुर्ना से आता हॅूं और अभी आपने चुनाव के पहले पांढुर्ना को नया जिला बनाया है इसके लिए मैं आपको बधाई भी देता हॅूं और आपके माध्‍यम से मैं कुछ नई मांगे नया जिला पांढुर्ना के लिए करना चाहता हॅूं. नया जिला पांढुर्ना तो बना दिया गया है लेकिन वहां अभी जिले के लिए संसाधन का बजट में कोई राशि का प्रावधान नहीं किया है. मेरा आपसे निवेदन है कि जब तक एक नये जिले के लिए आप संसाधन नहीं देंगे, तब तक हम नये जिले के विकास की परिकल्‍पना को पूर्ण नहीं कर पाएंगे. आपने नया जिला पांढुर्ना बनाया है, तो उसके लिए पर्याप्‍त राशि और संसाधन देने की कृपा करेंगे और मेरे क्षेत्र में स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, सिंचाई, सड़क के लिए बजट में इसके लिए कोई राशि का प्रावधान नहीं किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि पांढुर्ना जिले में काफी दिनों से ओवर ब्रिज की मांग क्षेत्र के लोगों के द्वारा और मेरे द्वारा विधानसभा में भी प्रश्‍न के माध्‍यम से मांग की गई है और ओवर ब्रिज के लिए बजट में राशि देने के लिए आपसे मांग करता हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह पांढुर्ना में कोरोना के समय से बड़ी ट्रेनों के स्‍टॉपेज को रोक दिया गया है. मेरा निवेदन है कि पांढुर्ना में सभी ट्रेनों का स्‍टॉपेज चालू कर दिया जाए, जिससे आने-जाने वालों को इसका फायदा होगा. हमारे आदिवासी क्षेत्र पाठई में महाविद्यालय के लिए काफी दिनों से मांग की जा रही है, उसके लिए भी बजट में राशि का प्रावधान किया जाए. नाननवाड़ी एकलव्‍य स्‍कूल यह हमारा आदिवासी क्षेत्र है यहां भी इन सारी चाजों के लिए, उत्‍कृष्‍ट छात्रावास के लिए मेरा आपसे निवेदन है कि बजट में राशि का प्रावधान किया जाए. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          एडवोकेट निर्मला सप्रे (बीना) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहती हॅूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया. आज मेरा सदन में बोलने का पहला दिन है तो मैं आज वर्ष 2023-24 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान की मांगों पर अपनी मांग रखना चाहती हॅूं जो कि 28 हजार 655 करोड़ 15 लाख 13 हजार142 रूपए की अनुपूरक राशि दी गई है लेकिन मैंने जो पुस्‍तिका पढ़ी है उसमें बीना विधानसभा के लिए अभी तक इसमें कुछ भी प्रावधान नहीं है, न ही इसमें कुछ राशि दी गई है तो मेरा आपसे निवेदन है चूंकि मैं बीना शहरी क्षेत्र की बात बताना चाहती हॅूं कि हमारा बीना शहरी क्षेत्र करीब डेढ़ लाख जनसंख्‍या की आबादी वाला शहर है और बीना विधानसभा में जेपी रिफायनरी और पॉवर ग्रिड जैसे बडे़-बडे़ प्‍लांट हैं. इसमें आवागमन के लिए ओवर ब्रिज तो है परन्‍तु रिंग रोड नहीं है, जिसके कारण जब हमारे बडे़-बडे़ वाहन रिफायनरी तक जाते हैं या पॉवर ग्रिड तक जाते हैं तो वह शहरी क्षेत्र से होकर निकलते हैं. उस समय कई बार ऐसा हुआ कि स्‍कूल के बच्‍चे उन वाहनों के नीचे आ जाते हैं जिससे उनकी मौत हो जाती है तो मेरा आपसे निवेदन है कि हमारे लिए इस बजट में, जो कि 28 करोड़ का बजट है तो इसमें हमारे बीना के लिए एक रिंग रोड की भी सुविधा दी जाए. दूसरी मेरी एक बात और है कि चूंकि हमारा बीना एक बहुत बड़ा जंक्‍शन है. आसपास के लोग भी वहां आते हैं लेकिन हमारे यहां अस्‍पताल अभी तक नहीं है. 35 बेड का अस्‍पताल है लेकिन अभी भी वहां 21 पद स्‍वीकृत हैं लेकिन अभी भी 8 डॉक्‍टर रहते हैं और बाकी जगहों पर चिकित्‍सा की सुविधा नहीं है. हमारा आपसे अनुरोध है कि वहां पर 100 बिस्तरों का अस्पताल हम लोगों को दिया जाये इस 28 करोड़ के बजट में. तीसरी हमारी यह मांग है कि बीना शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ है. अभी तक हमारे बीना में जितने भी बच्चे हैं जो उच्च स्तरीय पढ़ते हैं पीजीडीसी या बाहर के जो वह नौकरियों के लिये बाहर जाते हैं या स्पेशल कोर्स के लिये हमारे यहां के बच्चे सारे बाहर जाते हैं तो मेरा आपसे एक और अनुरोध है कि चूंकि बीना जंक्शन है. रिफायनरी, जे.पी.पावर प्लांट जैसे बड़े बड़े उद्योग हैं, वहां पर दूर से बहुत सारे अधिकारी तथा मजदूर आते हैं, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में बीना काफी पिछड़ा हुआ है. मेरा अध्यक्ष जी से निवेदन है कि वहां पर एक मेडिकल कॉलेज की भी मांग इस बजट में रखी जाये. मेरा निवेदन है कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों की विधान सभाएं हैं वहां पर तो 15-15 करोड़ के प्रस्ताव मांगे गये हैं, परन्तु बीना में पिछले 25 वर्षों के बाद वहां पर कांग्रेस पार्टी की सदस्या चुनकर आयी हूं. तो कहीं मेरे बीना विधान सभा के लोगों को यह न लगे कि हम लोगों ने कांग्रेस पार्टी का विधायक चुनकर विकास में अवरोध उत्पन्न किया है. तो मैं आपसे यह कहना चाहती हूं कि मैं कांग्रेस की विधायक खुद के लिये कुछ निधि नहीं मांग रही हूं. मेरा यह निवेदन है कि वहां की जनता का जो विकास होना चाहिये तो वह विकास रूक जाता है चूंकि आप हमारे अध्यक्ष जी हैं मैं आपसे विनम्र निवेदन करूंगी कि 28 करोड़ के इस बजट में बीना विधान सभा के लिये जो हमारी प्रमुख तीन मांगे हैं उनको भी सम्मिलित किया जाये. इतना कहकर अपनी वाणी को विराम देती हूं. आपने समय दिया आपका धन्यवाद.

          श्री आरिफ मसूद (भोपाल दक्षिण)अध्यक्ष महोदय, वैसे अनुपूरक है, कर्जे का बजट है. अब इस पर क्या बोलें ? लेकिन बार बार एक बात आ रही है 15 करोड़ की. अध्यक्ष महोदय, एक बात जानने चाहेंगे आसंदी से हमें संरक्षण मिलना चाहिये. आप मुझे जरूर संरक्षण देंगे. अगर जनता के साथ अगर भेदभाव होगा तो जनता का क्या कसूर है ? लोकतंत्र का तथा प्रजातंत्र का क्या होगा, यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो जायेगा ? भविष्य में दुनिया में हम लोग यह कहते हैं कि सबसे अच्छा लोकतंत्र तथा प्रजातंत्र कहीं देखना हो तो आओ भारत. जब हम कहते हैं कि आओ भारत देखो उस समय यह परिपाटी शुरू हो जायेगी कि जो पहली बार देखने को मिल रही है तो कहीं न कहीं अध्यक्ष महोदय यह बजट में ठीक नहीं है. मैं चाहता हूं कि आपको निश्चित रूप से इसमें हस्तक्षेप करना चाहिये. 15 करोड़ रूपये मुद्दा नहीं है. मुद्दा इस बात का है कि उस क्षेत्र में रहने वाली जनता इस देश की वासी है, प्रदेश की वासी है, वह उम्मीद करती है कि सब जगह पर सामान्य काम होना चाहिये. सड़क भी होनी चाहिये, बिजली भी होनी चाहिये. स्कूल के लिये बात हुई हम क्यों इस बजट का सपोर्ट करें कौन सा ऐसा सरकार ने काम किया है कि सरकार का हम धन्यवाद दें, कौन सा ऐसा काम कर दिया कि उसकी हम प्रशंसा करें. स्कूल के भवन हैं पिछली सरकार के समय से स्कूल भवन के लिये सभी लोगों ने एक सहमति बनायी कि जर्जर भवन हो रहे हैं खास तौर से आपके ग्वालियर चंबल संभाग से ही यह मामला उठा था. हम सबने कहा था कि देना चाहिये. पैसा दिया गया मरम्मत का, यह मरम्मत का पैसा भी लाडली बहना योजना में उपयोग कर लिया. आज हरदा जैसा हादसा जिसको हम लोग सब लोग पीड़ितों की तरफ देख रहे हैं. अब हम ऐसे ही मरम्मत के बजट को इधर से उधर विभागों में करते रहेंगे किसी विभाग का बजट किसी विभाग में अगर हम राजनीतिक फायदे के लिये यह सरकार सोचने लगेगी तो कहीं ना कहीं दोबारा घटनाएं ना हो जायें. उसके लिये हमें आज से ही सचेत होना पड़ेगा. माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी चले गये हैं वह कह रहे थे कि सबका साथ, सबका विकास वह बोलते तो बहुत अच्छा हैं, लगता भी बोलने में अच्छा है. कहीं अल्पसंख्यक कल्याण का इसमें जिक्र ही नहीं है. मदरसा बोर्ड के लिये मैं कई बार से कह रहा हूं कि उसकी जो स्वीकृत राशि है जो खुद प्रधानमंत्री जी ने दी है. स्वीकृत राशि का भी उल्लेख मुझे इसमें नजर नहीं आ रहा है. मैं चाहूंगा कि जब पूरक बजट आये तो कम से कम अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मेरी इस बात का ध्यान दे दें कि मध्यप्रदेश के जो अल्पसंख्यक वासी हैं वह चाहते हैं कि उनके साथ सबका साथ, सबका विकास का जो आपका नारा है उसको सही साबित करने का प्रयास करें. इस बजट में बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिसके लिये हमने सोचा था कि कहीं कहीं उनका उल्लेख होगा, लेकिन इसका उल्लेख कहीं पर भी नहीं हुआ. तो मैं इस बजट का विरोध करूंगा और उम्मीद करूंगा कि अगर पूरक बजट आये तो मध्‍यप्रदेश की पूरी की पूरी जनता के हिसाब से आए. बंटवारा, भेदभाव, आपस में अलग अलग विधान सभाओं के हिसाब से न आए और विशेष रूप से मेरा अनुरोध है, अध्‍यक्ष महोदय पिछले पांच साल हमने देख. अभी हम आपको देख रहे हैं. निश्चित रूप से कहीं न कहीं हमें यह अहसास हो रहा है कि आप बड़े सदन से आए हैं, उसकी गरिमा और आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला, लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि आप कम से कम ये करवा दें कि ये भेदभाव समाप्‍त हो जाए, जिस तरह से दूसरे विभागों या दूसरे विधायकों से अनुमोदन लिये गये हैं, कांग्रेस के विधायकों को भी उसमें शामिल किया जाए, धन्‍यवाद.

          श्री पन्‍नालाल शाक्‍य(गुना) - अध्‍यक्ष जी, सभी सभासदों को प्रणाम करुं, इससे पहले, मैं सर्वसम्‍मति से चुने हुए अपने अध्‍यक्ष जी के विषय में चार पक्तियों के साथ निवेदन कर रहा हूं..

                    बिरले लोग हुआ करते हैं, जिनसे कुर्सी सुशोभित होती है.

                    कुर्सी से चिपके जन, कुर्सी से शोभित होते हैं.

                    और हम सड़क पर चलने वाले हर डगर सुशोभित करते हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय उप मंत्री जी द्वारा जो अनुपूरक बजट पेश किया गया है, उसके समर्थन में मेरे कहने का तरीका भिन्‍न होगा, उसको अन्‍यथा न लें. मैं बहुत संक्षिप्‍त में बात करने की कोशिश करुंगा कि सबको समझ आ जाए.

          निवेदन इस बात का है कि सरकार चलाना और परिवार चलाना संभवत: एक सा होता है. आंकड़ेबाजी और खर्चा ये सब बातें मैं नहीं करूंगा, न ही मैं उन योजनाओं की भी बात करुंगा, किन्‍तु मैं एक बात जरुरी निवेदन करुंगा कि जैसे परिवार चलता है न, परिवार के मुखिया को भी जो चिन्‍ता होती है, वह उसके लड़के की चिन्‍ता करती है, वह उसके बेटी की चिन्‍ता करती है, वह उनके शिक्षा दीक्षा की भी चिन्‍ता करती है और वह पूरी पूरी कोशिश करता है, परिवार का मुखिया कि उसका लड़का भी ठीक व्‍यवस्थित हो जाए और लड़की को भी ससुराल अच्‍छी मिल जाए. अब उसमें  बजट में आंकड़े और विकास ये नहीं हुआ और वह नहीं हुआ, ये सब बातें आलोचनात्‍मक तो ठीक लग रही है, जब हम आलोचना कर रहे हैं तो, पर प्रदेश में कुछ दिख तो रहा है कि नहीं दिख रहा है कि सबके आंखों में चश्‍मा चढ़ा है, आलोचना का(...मेजों की थपथपाहट) थोड़ा ये बारीक बात समझनी चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय - पन्‍नालाल जी आप मेरी तरफ देखिए, उनसे मत पूछिए.

          श्री पन्‍नालाल शाक्‍य - जी अध्‍यक्ष जी, जो विकास हो रहा है, उसको आलोचना की दृष्टि से और आलोचना का चश्‍मा लगाकर नहीं देखना चाहिए, वास्‍तविक इच्‍छा के साथ उसको समझे और देखें, मुझे वह घटना भी याद है, जब लाइट आ रही है और लाइट जा रही है. सड़कों की स्थिति भी मुझे मालूम है कि गड्ढों में सड़क है और सड़क में गड्ढा है. तो बड़ा विचित्र मामला है ये. सबकी बातें नहीं सोचना चाहिए न इसकी आलोचनात्‍मक बात करनी चाहिए, किन्‍तु जो हो रहा है, उसका हमको पूरी तरह से समर्थन करना चाहिए.

          दूसरा निवेदन बजट के विषय में करना चाहूंगा कि पूर्व मुख्‍यमंत्री जी ने गुना में मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की घोषणा की थी, मैं माननीय उप मुख्‍यमंत्री और माननीय वित्‍तमंत्री जी से निवेदन करुंगा कि इन दोनों बिन्‍दुओं को बजट के क्रम में डालने की कृपा करें, जिससे हमारे गुना का भी नाम होगा और माननीय अध्‍यक्ष जी का हमारे ऊपर आशीर्वाद बना रहे. धन्‍यवाद.                                                          

        श्री भैरों सिंह ''बापू'' (सुसनेर) --  मां बगलामुखी के चरणों में नमन करते हुए आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे पहली बार अवसर मिला है और आपने बोलने का मौका दिया है, इसके लिये मैं आपका आभार व्‍यक्‍त करता हूं. इस बजट में करोड़ों रूपये का अनुपूरक बजट पेश किया है. किसानों के लिये जिस तरीके से 27 सौ रूपये क्विंटल धान का, गेहूं के लिये खरीदने का वादा माननीय मोदी जी की गारंटी के अनुसार किया गया था और आज साढे़ बाईस सौ रूपये किसान भाईयों के लिये जो सरकार ने किया है, यह एक वादा खिलाफी है, आपने स्‍टांप ड्यूटी की राशि पर भी  रोक लगा रखी है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरी विधानसभा के मामले में वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र के अंदर सबसे ज्‍यादा बिजली और ट्रांसफार्मर की समस्‍या है. मैं उम्‍मीद करूंगा कि इस अनुपूरक बजट में मेरी विधानसभा के अंदर ट्रांसफार्मर की व्‍यवस्‍था सुधारी जाये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस बजट के माध्‍यम से और आपके माध्‍यम से जिस तरीके से उज्‍जैन के अंदर महालोक बना, क्‍या मां बगलामुखी में महालोक बनाने की भी आपके माध्‍यम से मैं विनती करता हूं. इस बजट के माध्‍यम से आज मां बगलामुखी में पूरे हिंदुस्‍तान की आस्‍था है और वहां पर आज तक सरकार की तरफ से कोई भी ऐसी योजना वहां पर नहीं लाई गई है. मैं अध्‍यक्ष महोदय के माध्‍यम से माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि आपके मंदसौर जिले में एक चंबल की पुल है जिसका विगत चार वर्षों से छ: बार उसका टेंडर हो चुका है, टेंडर लगता है और आज तक वह पुलिया नहीं बन पाई, क्‍यों नहीं इस बजट से आप उस पुलिया को बनवाते हैं, जो मंदसौर को भोपाल को सीधा जोड़ती है. यह आपके जिले का मंदसौर जिले का है.

           माननीय अध्‍यक्ष महोदय के माध्‍यम से मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि सबसे ज्‍यादा गौमाता के नाम पर हम वोट मांगते हैं, लेकिन गौशालाओं का पैसा विगत वर्षों से आज तक बाकी है. इस बजट के माध्‍यम से आगर जिले की ही नहीं अपितु मध्‍यप्रदेश के अंदर भी जहां पर भी गौशालाओं का पैसा बाकी है उनको पूर्ण किया जाये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सुसनेर क्षेत्र में कुंडालिया डेम से सिंचाई की बहुत बड़ी एक व्‍यवस्‍था है. 60 प्रतिशत किसान कुंडालिया डेम से सिंचाई के लिये व्‍यवस्‍था जुड़ चुकी है, लेकिन 30 प्रतिशत मेरा क्षेत्र बचा है, चाहे स्‍वेज क्षेत्र हो, चाहे परिसीमन क्षेत्र हो, क्‍योंकि मेरी विधानसभा में दो जिले लगते हैं तो शाजापुर जिला पूरा कुंडालिया डेम से छूट चुका है, तो मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय के माध्‍यम से मैं उम्‍मीद करूंगा कि मेरे क्षेत्र के किसानों को जो कुंडालिया डेम से जो वंचित रखे गये हैं, उनको जोड़ा जाये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में एक भी रोड इस अनुपूरक बजट के अंदर नहीं जोड़ी गई है. एक गौ अभ्‍यारण्‍य सालरिया जो सुसनेर के अंदर आता है, वहां पर 76 रूपये प्रति गाय के हिसाब से सरकार टेंडर के हिसाब से पैसा दे रही है, आज और भी मध्‍यप्रदेश के अंदर मेरे आगर जिले के अंदर और भी गौशालाएं हैं. जहां पर मिनीमम 20 रूपये का रेट और वह भी गौशाला में सरकार नहीं दे पाती है. मैं उम्‍मीद करूंगा कि अगर 76 रूपये गाय के हिसाब से हम गौ अभ्‍यारण्‍य सेलरी जो पूरे एशिया का सबसे बड़ा गौ अभ्‍यारण्‍य है, सरकार दे रही है तो दूसरी गौशालाओं में कम से कम 50 रूपये प्रति गाय के हिसाब से तो देना चाहिये. आज गायों की स्थिति सबसे ज्‍यादा मालवा के क्षेत्र में बिगड़ी हुई है चाहे उज्‍जैन हो, आगर हो, मंदसौर हो जहां आये दिन गाय के बछड़े मेन रोड पर मरे हुये पड़े मिलते हैं. अगर इस बजट के माध्‍यम से गौशालाओं को पैसा मिल जायेगा तो गायों का भला होगा. अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, मैं आपको धन्‍यवाद अर्पित करता हूं.

          श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी)--  आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे यहां आज सिस्‍टम में जिस चीज की लड़ाई चल रही है चाहे वह पक्ष हो चाहे विपक्ष हो, लेकिन मुद्दे की बात तो यह है कि शिक्षा विशेष महत्‍वपूर्ण है और अभी हम क्षेत्र में जा रहे हैं तो कहीं न कहीं स्‍कूलों की दुर्दशा बहुत बुरी है. मैं अध्‍यक्ष महोदय से निवेदन करता हूं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी तक संदेश पहुंचाना चाह रहा हूं कि जो भी सरकारी हमारे कर्मचारी अधिकारी हैं, सभी नेता हमारे सभी प्रतिनिधि चाहे वह सरपंच से लेकर विधायक, सांसद जी तक हों, चाहे सरकारी योजनाओं के ठेकेदार हों, मैं निवेदन करता हूं कि सभी के बच्‍चे सरकारी स्‍कूलों में पढ़ें जिससे हमारे सरकारी स्‍कूलों की दशा भी सुधरेगी और हमारी शिक्षा भी सुधरेगी. हमारे बच्‍चे और ठेकेदारों के बच्‍चे और अधिकारियों के बच्‍चे तो अच्‍छे स्‍कूलों में प्राइवेट में पढ़ाते हैं, लेकिन गरीब बच्‍चों का क्‍या होगा, अगर हमारे बच्‍चे उनके साथ पढ़ेंगे तो शिक्षा में बेहतर सुधार होगा, मैं विशेष निवेदन करना चाह रहा हूं. इसके अलावा विशेषकर के युवाओं का भविष्‍य, युवाओं के भविष्‍य पर बिलकुल ध्‍यान नहीं दिया जा रहा, हमारा युवा बेरोजगारी के अलावा नशे की ओर जा रहा है और नशे भी कई प्रकार के चल रहे हैं तो हमें इस पर विशेष ध्‍यान देना चाहिये. जब हम नशे की शिकायत करते हैं तो नशा बेचने वालों को न पकड़ते हुये खरोदने वालों को पकड़ा जा रहा है तो अगर नशा ही बंद हो जायेगा तो खरीदेंगे कहां से. हमारे युवाओं का भविष्‍य और युवाओं के परिवारों का भविष्‍य खतरे में है इसका विशेष ध्‍यान रखा जाये. इसके अलावा मैं एक बात और कहना चाह रहा हूं कि हमारे प्रदेश की धरोहर जो भी है हमारे क्षेत्र में फारेस्‍ट का 70 प्रतिशत क्षेत्र हैं, लेकिन लगभग 10 हजार बीघा जमीन फारेस्‍ट के पेड़ काटकर खेती की जमीन बना ली गई है, यह काम हमारे नेताओं ने खड़े होकर कराया है, इस पर भी विशेष ध्‍यान दिया जाये. मैं इसी के साथ एक बात और कहना  चाहता हूं कि हमारे आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय से कि हमारा क्षेत्र आपका पूर्व संसदीय क्षेत्र भी रहा है तो मैं निवेदन करता हूं कि विकास काफी पिछड़ा हुआ है और विधायकों से भेदभाव न करते हुये समान रूप से विकास के लिये आगे योगदान दें. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक (परासिया)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बाद में नाम जुड़वाया, पहले बोलने का मेरा नहीं था पर कुछ चीजें हैं जिस तरह से हमारे पक्ष के सदस्‍यों ने जो अपनी बात रखी है मैं समझता हूं कि आपके अध्‍यक्ष बनने के बाद हम सब लोगों को बहुत सारी उम्‍मीदें आपसे जुड़ी हुई हैं. मेरा कभी आपसे सीधा संपर्क नहीं रहा न ही कभी आपसे मेरी सीधी वार्ता हुई है पर जिस तरह से आपके बारे में जो मुझे जानकारी प्राप्‍त हुई है कि आप एक अच्‍छे सोचे, समझे और सुलझे व्‍यक्तित्‍व हैं और निश्चित रूप से जिस आसन पर आप बैठे हैं तो मुझे पूरी उम्‍मीद है कि आप न्‍यायसंगत पूरी बात करेंगे. आपने सुना होगा कि यह अनुपूरक बजट के संबंध में हमारे सदस्‍यों की जो वेदना थी, जिस तरह से जो भेदभाव किया गया है बजट के अंदर में क्‍या यह उचित है, आप इस बारे में जरूर मंथन करें, चिंतन करें. मेरा आपसे यही आग्रह है कि आने वाले पूरक बजट की जब बात आये तो उस पूरक बजट में कहीं न कहीं आपका हस्‍तक्षेप भी होना बहुत आवश्‍यक है, क्‍योंकि जिस तरह से हम इस बात के लिये बोल रहे हैं कि हमें बजट नहीं दिया जा रहा है, मेरा यह तीसरा कार्यकाल है आदरणीय अध्‍यक्ष जी और मैंने देखा है कि पिछले दो कार्यकाल में भी इसी तरह से मेरे क्षेत्र के साथ भेदभाव हुआ, बहुत सारी चीज हम लोग चाहते हैं क्षेत्र में काम करने के लिये मगर हमको मौका नहीं मिल पाता क्योंकि बजट में प्रावधान नहीं होता और खास तौर से मैं देख रहा हूं कि  छिन्दवाड़ा जिले में जितने बजट का प्रावधान होता था वह धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है. मेरे छिन्दवाड़ा जिले का जो मेडिकल कालेज बना है उसमें 1465 करोड़ रुपये का बजट था 2019 में उसमें कटौती कर जैसे ही कांग्रेस की सरकार गिरी उसको 700 करोड़ का बजट कर दिया गया. आज भी उसके लिये प्रावधान नहीं है. यह जो कालेज बन रहा था या यूनिवर्सिटी बन रही थी. यह एग्रीकल्चर कालेज है, हार्टीकल्चर कालेज है. यह कोई कांग्रेस के लिए नहीं बन रहा है यह बन रहा था तो सारे लोगों को उसमें सुविधा मिलती.सभी लोग इसमें पढ़ाई करते चाहे वह पक्ष का हो चाहे विपक्ष का हो लेकिन यह चीजें जो सदन में आ रही हैं कहीं न कहीं हम सबके लिए चिंता का विषय है कि किस तरीके से सदन चलेगा अगर इस तरीके से हमारे साथ में भेदभाव करेगा तो कैसे चलेगा. जब चुनाव होता है तो राजनीतिक दल के आधार पर चुनाव होते हैं मगर जब सरकार बनती है तो प्रदेश की जनता की सरकार होती है तो क्या हमारे क्षेत्र में जनता नहीं रहती. क्या हमारे क्षेत्र में आवश्यकता नहीं है बजट की. मेरे क्षेत्र में 100 बिस्तर का अस्पताल बना. 14 करोड़ रुपये का अस्पताल बन गया मगर उसमें 1.77 करोड़ रुपये का प्रावधान था उपकरण के लिए, आज तक मुझे उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं. मैं कई बार बोल चुका हूं कि मेरा क्षेत्र किसान क्षेत्र है.कुछ कोयला खान का क्षेत्र है. वहां पर जो डैम बनने चाहिये उनके लिये बजट का प्रावधान नहीं आ पा रहा. सड़कों का प्रावधान नहीं आ पा रहा तो मेरा अध्यक्ष जी आपसे आग्रह है. मैं ज्यादा अपनी बात नहीं कहूंगा,बहुत सारी उम्मीदें हमें आपसे हैं कि आप इंसाफ करेंगे न्याय करेंगे और आने वाले समय में हमारे सबके लिए बजट जोड़ेंगे और जो 15 करोड़ रुपये की बात बार-बार आ रही है तो निश्चित रूप से आप संज्ञान में लेकर कहीं न कहीं कोई ऐसी व्यवस्था बनाएं ताकि हम लोगों को भी इस राशि का लाभ मिले और हमारे क्षेत्र में काम हो और अंत में एक बात और जरूर कहूंगा. मैंने आपको एक पत्र लिखा था. बजट में हम लोग बार-बार लड़ रहे हैं कुछ नहीं मिल पा रहा है तो कम से कम आपके नेतृत्व में हमारी विधायक निधि बढ़ा दी जाए आने वाले अनुपूरक बजट में 5 करोड़ की कर दी जाए और 1 करोड़ रुपये अनुदान राशि दी जाए ताकि हम लोग कुछ उससे काम करा सकें. धन्यवाद अध्यक्ष जी.

          अध्यक्ष महोदय - वित्त मंत्री जी सुन रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष जी, वित्त मंत्री जी सुन रहे हैं यह तो आपने कह दिया यह और कह दें कि चिंतन करें और क्रियान्वयन की तरफ कदम बढ़ाएं.

          अध्यक्ष महोदय - उतना ही बोलना ठीक है जितना सुना जा सके.

          श्री दिलीप सिंह परिहार(नीमच) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं और अनुपूरक बजट का समर्थन करने के लिये खड़ा हुआ हूं. इस अनुपूरक बजट में  28 हजार 661 करोड़ रुपये का जो बजट प्रस्तुत किया है उसका मैं इसलिये भी धन्यवाद दूंगा कि जैसे शरीर को चलाने के लिये नसों की आवश्यकता होती है जिसमें रक्त दौड़ता है वैसे ही देश को चलाने के लिये सड़कों की आवश्यकता होती है और वह सड़कें पूरे देश का विकास करती हैं और मैं इस अनुपूरक बजट के लिए वित्त मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि नीमच जो जिला स्थान है लंबे समय से सड़क से वंचित था तो जिले स्थान की सड़क को आपने फोर लेन बनाया इस बजट में स्वीकृत किया इसके लिये मैं नीमच की जनता की ओर से आपको धन्यवाद देता हूं और आपने गौण खनिज की राशि में भी एक अद्भुत परिवर्तन किया है और जो 100 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है. मुझे याद है अध्यक्ष महोदय, जब आप केन्द्र में मंत्री थे तो मान्यवर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साहब और आप आए थे जहां ममतामयी मॉं भादवा माता का स्थान है उस भादवा माता के यहां पानी अमृत समान है. यदि किसी को लकवा मार जाता है. जो लोग कंधे पर बैठकर आते हैं पैदल घर जाते हैं. उस भादवा माता के प्रांगण में जो भादवा माता  के कारीडोर का उस समय भूमि पूजन किया था वह आज पूरा ऊंचाईयों की ओर जा रहा है. इसमें गौण खनिज की राशि भी लगी है मैं इसके लिये भी आपको धन्यवाद देता हूं क्योंकि जैसे महाकाल लोक सजा है वैसे ही भादवा माता का लोक नीमच में सजा है. निश्चित ही पशु पालन के संबंध में अभी कई वक्ताओं ने चर्चा की. पशुओं के लिए हम सब जानते हैं जो गौ माता है भैंस है जो हिन्दू को दूध पिलाती है मुसलमान को दूध पिलाती है बच्चे,वृद्ध को दूध पिलाती है वह गौ माताएं पूर्व के कालखण्ड में ज्यादा काटी जाती थीं क्योंकि मैं विश्व हिन्दू परिषद् में काम करता था. गौ माता को बचाकर गौशालाओं में भेजा करता था.आज गौशालाओं का निर्माण पंचायत विभाग द्वारा गांव-गांव में किया जा रहा है.

          श्री दिनेश गुर्जर - सड़कों पर एक्सीडेंट में दुर्घटनाओं में बहुत सी गौमाताएं खत्म हो रही हैं और किसान पूरी रात चौकीदारी कर रहा है. अपनी फसलों की सुरक्षा नहीं कर पा रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, विधान सभा में एक ही बैठक होती है. अलग-अलग ग्रुपों में बैठक होनी शुरू हो गई तो सदन की कार्यवाही में दिक्‍कत हो जाएगी.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- निश्‍चित ही आज गौशालाएं खुल रही हैं. गौमाता के घास के लिए इस अनुपूरक बजट में पैसे में वृद्धि की गई है. कुछ प्रावधान किया गया है. डेयरी के लिए प्रावधान किया गया है. निश्‍चित ही इससे किसान की भी आय बढ़ेगी और किसान की सिंचाई के लिए भी जल सरंचनाओं के लिए इस बजट में प्रावधान किया गया है. शिक्षा के पावन केन्‍द्र, हमारे यहां सीएम राइज स्‍कूल, पीएम श्री स्‍कूल शुरू किए गए हैं. मैं इस अवसर पर ज्‍यादा न बोलते हुए यही कहूँगा कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया क्‍योंकि समय की कमी है. इस बजट में जो प्रावधान किया गया है, उसमें कुछ सड़कें भी आई हैं, तालाब भी आए हैं, स्‍कूल भी आए हैं, 119 करोड़ रुपये का अलग प्रावधान किया है पंचायत विभाग के माध्‍यम से मांगलिक भवन, सामुदायिक भवन एवं डोम के लिए भी राशि स्‍वीकृत की है. पुन: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको धन्‍यवाद देता हूँ, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, 2 मिनट में मैंने अपनी बात रखी, पुन: वित्‍त मंत्री जी और मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद. भारत माता की जय.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दो मिनट नहीं, पूरे पांच मिनट दिए हैं.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे (अटेर) -- माननीय अध्‍यक्ष जी, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहूँगा. सबसे पहले मैं यह कहना चाहूँगा अध्‍यक्ष जी कि जब भी विपक्ष के लोग बोलते हैं तो उस पर निश्‍चित ही सारे सत्‍ता पक्ष के लोग छोटी-छोटी कमियां निकालते हैं, टोकते हैं, हम सुधार भी करते हैं, हम सीखते भी हैं. लेकिन जो मूल प्रश्‍न हम लोग उठाते हैं, जिस विषय पर बात होती है, उसके उत्‍तर से भाग जाते हैं. सही उत्‍तर पर नहीं आते. बाकी सब चीजों पर चर्चा होती है, दिल्‍ली तक चले जाएंगे. पूरे विश्‍व की बात हो जाएगी. लेकिन प्रश्‍न नहीं आता. अध्‍यक्ष जी, जैसे कल भी जब हरदा के विषय पर चर्चा हुई तो आखरी में नेता प्रतिपक्ष जी ने और हम सभी लोगों ने भी,  हमारी मूल भावना थी, हमने यह मांग की थी कि इस प्रकरण की न्‍यायिक जांच होनी चाहिए. या तो भाजपा के नेता यह कह दें कि उनको न्‍यायालय पर भरोसा नहीं है या न्‍यायाधीशों पर भरोसा नहीं है तो इस मांग को हम कोई बात नहीं, फिर हम अगली बार से नहीं मांगेंगे. यदि न्‍यायालय जांच पर भी भरोसा नहीं है तो फिर कौन सी जांच होगी. अध्‍यक्ष जी, मैं विषय पर ही आ रहा हूँ. (सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा बैठे-बैठे टोकने पर) मुझे मालूम है आप टोकने के लिए तैयार हैं, लेकिन जो मूल प्रश्‍न होगा ना, उसका उत्‍तर नहीं देंगे आप, देखिएगा अध्‍यक्ष जी. टोक लीजिए, ऐसे ही आप मुझे भूलाते रहो, लेकिन मैं लिखकर लाया हूँ, भूलूंगा नहीं.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं यही कह रहा था कि जो मूल प्रश्‍न है, जो मूल भावना है हमारी विपक्ष की, कम से कम उसका उत्‍तर जरूर आए पटल पर, क्‍योंकि क्षेत्र की जनता भी देख रही है और वहां हम यह बोलकर आते हैं कि हम सदन में आपकी लड़ाई लड़ने जा रहे हैं और सदन में उसका उत्‍तर नहीं मिलता तो वे लोग जवाब भी मांगते हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, आज का जो ये पूरा अनुपूरक बजट है, इसको अगर मोटे रूप से, मोटे स्‍वरूप से देखा जाए तो ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मालवा प्रदेश का बजट आ रहा है, यह मध्‍यप्रदेश का बजट नहीं प्रतीत हो रहा है. उज्‍जैन, मालवा के लिए अलग से बजट का एलोकेशन पूरा का पूरा उधर ही कर दिया है. ऐसा लग रहा है एक नया प्रदेश बनाने की ओर यह बजट जा रहा है. ग्‍वालियर, चंबल संभाग, अन्‍य भी संभाग है, मुझे लगता है माननीय वित्‍त मंत्री जी, जो हमारे उप मुख्‍यमंत्री भी हैं, उनको भी यह जानकारी है. तो जब आप बजट का एलोकेशन करें माननीय, तो पूरे प्रदेश का ख्‍याल रखना चाहिए. जितना बजट एलोकेशन एक क्षेत्र में हो रहा है, उतना बाकी में भी होना चाहिए, समानता के रूप में होना चाहिए.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, वर्ष 2023-24 का द्वितीय अनुपूरक बजट यह है. टोटल जो बजट पटल पर स्‍वीकृत करने के लिए लाया है वह लगभग 28,655 करोड़ रुपये का है. मैं इस द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्‍ताव का विरोध कर रहा हूँ, विरोध क्‍यों कर रहा हूँ, यह भी आपको बताना चाहूँगा. ऐसा नहीं है कि बीजेपी ने इसको लाया है तो मैं घर से कसम खाकर आया हूँ कि मैं इसका विरोध करके ही घर जाऊंगा, तभी खाना हजम होगा, नहीं, ऐसा नहीं है. मुझे उसमें ऐसा लगा कि कुछ चीजें गलत हैं और कुछ चीजों में सुधार हो सकता है. मैंने करीब ये मोटी-मोटी किताबें, करीब 8-10 किलो की किताबें थीं, मैं चार्टर्ड एकाउंटेंट के साथ बैठा, आंकड़े का खेल समझने की कोशिश की, उन्‍होंने कुछ सिखाया, मैंने सीखा भी. काफी कुछ समझने के बाद मैंने इसमें कुछ आंकड़े निकाले. वर्तमान वित्‍त वर्ष जो चल रहा है, जिसमें कि मैं समझता हूँ कि अभी लगभग डेढ़ माह से ज्‍यादा बकाया है. वर्ष 2023-24 के करंट फाइनेंशियल ईयर में जो कुल बजट एलोकेशन हुआ था, वह 3,22,623 करोड़ रुपये (एप्रोक्‍स.) है, जिसके अगेंस्‍ट में जो खर्च हुआ, वह 1,85,818 करोड़ रुपये है. इसका मतलब यह है कि बाकी बजट शेष है. कुल मिलाकर जो आपने बजट एलोकेट करवाया, अभी वित्‍तीय वर्ष समाप्‍त नहीं हुआ है, अभी समय बाकी है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कुल खर्च कर पाए हैं 57 प्रतिशत. 43 percent of the total budget allocated is still pending to be spent in various departments. तो मैं यह पूछना चाहता हूँ माननीय अध्‍यक्ष जी जब हमारे पास 1,37,000 करोड़ रुपये लगभग अभी बाकी है और यह आंकड़ा जो है, मैंने यहीं की किताबों से निकाला है. जब 43 percent of the total budget is available  तो हम नये बजट की बात क्‍यों कर रहे हैं ? आप 28,650 करोड़ रुपये का नया बजट मांग रहे हैं. वर्तमान में 1,37,000 करोड़ रुपये लगभग अभी बाकी है. यदि हम मोटा-मोटा देखें तो करीब 5 गुना से ज्‍यादा बकाया है. माननीय वित्‍त मंत्री जी के पास 5 गुना बजट है. आपके पास 5 गुना बजट रखा हुआ है. आप उसका 1/5 उधार लेने जा रहे हैं, उधार की जरूरत ही नहीं है. सिर्फ यह हो सकता है कि वह अलग-अलग मदों में है, तो उसको एप्रोप्रिएशन करके सही मद में लाकर उपयोग किया जा सकता है. माननीय अध्‍यक्ष जी, इस बजट की आवश्‍यकता नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं जो फिगर्स बोल रहा हूँ, मैं यह आपको उपलब्‍ध करवाऊँगा, यदि आप चाहेंगे. तो इतना बकाया होते हुए भी इसकी आवश्‍यकता क्‍या है ? या तो ऐसा तो है नहीं कि मार्च आया है, तो हमें बजट लेना ही लेना है. ऐसा कोई नियम नहीं है. अगर हमारे पास बजट है, तो हम उसका पहले उपयोग तो कर लें. मैं अगले विषय पर आना चाहूँगा जो कैग की रिपोर्ट सन् 2022-2023 की है, इस रिपोर्ट में राजस्‍व मद में लगभग 35,500 करोड़ रुपये लैप्‍स हो गए हैं, यह पिछले वर्ष का है. माननीय अध्‍यक्ष जी, जो प्रदेश के विकास के लिए कर्जा लिया था, उसमें से 35,500 करोड़ रुपये लैप्‍स हो गया. यह सरकार की सफलता है, मैं सफलता कह रहा हूँ, लेकिन यह कायदे में विफलता है. आप इसको सफलता मत मान लीजियेगा. ऐसे ही जो पूंजीगत मद है, कैपिटल एक्‍सपेंडिचर में पिछले वर्ष लगभग 14,980 करोड़ रुपये लैप्‍स हो गया. मैंने यह आंकड़ा कैग की रिपोर्ट से लिया है.     

          अध्‍यक्ष महोदय - हेमन्‍त जी, आप एक मिनट बैठिये.

 

3.03 बजे                                    अध्‍यक्षीय घोषणा

अशासकीय कार्य लिये जाने विषयक्

          अध्‍यक्ष महोदय - मध्‍यप्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 23 के अनुसार शुक्रवार की बैठक के अंतिम 2.30 घण्‍टे अशासकीय कार्य के लिए नियत हैं, परन्‍तु आज कार्यसूची में उ‍ल्‍लेखित राज्‍यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्‍ताव पर एक घण्‍टा चर्चा होने के पश्‍चात् अशासकीय कार्य लिया जायेगा. मैं समझता हूँ कि सदन इससे सहमत है. 

(सदन द्वारा सहमति व्‍यक्‍त की गई)

3.04 बजे      

           वर्ष 2023-2024 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान की मांगों पर मतदान (क्रमश:) 

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बारे में दो-तीन उदाहरण दे रहा हूं. जैसे कि पीएचई विभाग.

          श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी) - माननीय अध्‍यक्ष जी, मुझे ऐसा लग रहा है कि सम्‍माननीय सदस्‍य सी.ए. पर ज्‍यादा रिलाय कर रहे हैं. बजट इकोनॉमिस्‍ट का काम होता है. इसलिए जो  इनके आंकड़े हैं, वह कहीं न कहीं गड़बड़ा रहे हैं.  

          खेल एवं युवा कल्‍याण मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग) - अध्‍यक्ष महोदय, पता यही करना है कि हेमन्‍त किस चार्टर्ड एकाउन्‍टेंट से मिला है ? आप उसका नाम जरूर बता देना. 

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - जी. मेरे आंकड़े, जो मैं आपको दे रहा हूँ. आप मेरी बात को ध्‍यान से नहीं सुनते हैं. मैंने आपको बोला है कि यह जो आंकड़े मैंने सीए के साथ बैठकर निकाले हैं, लेकिन इन्‍हीं बुक्‍स से निकाले हैं. जो बुक आपने पटल पर रखी, जो कैग की रिपोर्ट आपने रखी है, यह आंकड़े निकाले इन्‍हीं बुक्‍स में से हैं. सीए ने अपने घर से नहीं दिए हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप लोगों के बीच अच्‍छी आत्‍मीयता है.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - वह उनका कार्य है, वह पूरा करेंगे. अच्‍छी बात है. विश्‍वास भैया ने भी बोला. मैं आपको सीए का बता दूँगा. आपको फिर अपना सीए बदलना पड़ जायेगा. बहुत होशियार सीए है, भोपाल के टॉपर भी रहे हैं. He is a brilliant CA.  आपको मैं जरूर मिलवाऊंगा भी, आप अगर चाहेंगे तो.

          श्री विश्‍वास सारंग - यही देखना पड़ेगा कि वह टॉपर कैसे हो पाया ?

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - वह व्‍यापम वाले टॉपर नहीं निकलेंगे.

          श्री आरिफ मसूद - मैं वही कहने वाला था. व्‍यापम वाला नहीं है, बेफिक्र रहो.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - टॉपर वाले टॉपर निकलेंगे. आप सलाह कीजियेगा.

          श्री विश्‍वास सारंग - अगली बार तुम सलाह लो तो हमसे पूछकर लेना.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - नहीं, विश्‍वास भैया. मैं अभी आपको अपना आइडल नहीं मानता हूँ. मैं आपसे सलाह नहीं लूँगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -माननीय मंत्री जी, हमारे पास समय कम है, इसलिए टोका-टोकी में समय बर्बाद न हो. यह ध्‍यान रखें.

          श्री विश्‍वास सारंग - जी, अध्‍यक्ष जी.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारेमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, दो-तीन उदाहरण दूंगा जहां फण्‍ड लैप्‍स हुआ है. PHE की विभागीय संपत्तियों के संधारण में कुल 667 लाख के विरूद्ध मात्र 140 लाख का व्‍यय हुआ, बाकी पूरा पैसा लैप्‍स हो गया. पशुपालन विभाग में मुख्‍यमंत्री पशुपालन विकास योजना में 53 करोड़ के विरूद्ध मात्र 21 करोड़ रुपये व्‍यय हुए. ऐसी ही एक बड़ी गंभीर बात है, जब कोविड काल चल रहा था, कोविड-19 का समय चल रहा था, उस समय भी 61 करोड़ रुपये के विरूद्ध मात्र 16 करोड़ रुपये का व्‍यय हुआ. मैंने यहां दो-तीन उदाहरण रखे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो अनुपूरक अनुदान है, इसमें मैंने एक चीज़ और देखी और उस पर गौर किया कि इसमें ई-विधान का भी प्रावधान किया गया है. मैंने जब इस पर रिसर्च किया तो मैंने पाया कि देश में सर्वप्रथम हिमाचल प्रदेश की सरकार द्वारा यह लाया गया था. यह बहुत ही अच्‍छा concept है. ई-विधान से विधान सभा का modernization होगा. एक हाईटेक-मॉर्डन विधान सभा विकसित होगी. मैंने इसके कुछ वीडियो भी देखे, तो पाया कि हिमाचल प्रदेश की विधान सभा में जब सदस्‍यगण बैठते हैं तो उनके सम्‍मुख स्‍क्रीन पर सारी चीजें आ जाती हैं. उनको हर बार किताब लेने, प्रश्‍नों के उत्‍तर लेने के लिए कहीं नहीं जाना पड़ता है. हर चीज़ आपके सामने    हाईटेक- मॉर्डन तरीके से उपलब्‍ध हो जाती है. इससे काम बहुत ही आसान हो जाता है. लेकिन मेरी आशा एक और यह भी है, साथ ही मुझे विश्‍वास भी है, जिस तरह से आज सदन की शुरूआत भी हुई, ऐसा न हो कि प्रश्‍नों के उत्‍तर में विभाग से लिखा आये कि "जानकारी एकत्रित की जा रही है." केवल यह पढ़ने के लिए सदस्‍य यहां न आयें. आज कैलाश जी ने बताया कि अध्‍यक्ष महोदय ने बहुत ही अच्‍छी पहल की है कि जो प्रश्‍न थे और जिनके उत्‍तर या तो अपूर्ण थे या अप्राप्‍त थे, ऐसे प्रश्‍न लगभग 800 हैं और उनका उत्‍तर आप सारे सदस्‍यों को, जो माननीय अभी सदन के सदस्‍य हैं और भूतपूर्व सदस्‍यों को भी पहुंचाया जाये. इस हेतु मैं, आपको अपने ह्दय से और अंतरात्‍मा से धन्‍यवाद देता हूं. 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ ही मेरी प्रार्थना है कि इसी प्रकार जो लंबित आश्‍वासन हैं, जिनका भी आंकड़ा लगभग-लगभग 1500 का है. हम इस सदन को लोकतंत्र का मंदिर कहते हैं और यहां जब हम कोई आश्‍वासन दे रहे हैं तो वह एक तरीके से किसी मंदिर के अंदर कही गई बात है. हम एक तरीके से, हमने जो शपथ ली है, उसके समक्ष अपनी बात कह रहे हैं और ऐसे 1500 आश्‍वासन लंबित हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस ओर भी मैं, आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं. इन सभी लंबित आश्‍वासनों की पूर्ति की जाये. (XX)

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है. मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि इस तरह की विधान सभा की व्‍यवस्‍था जिस पर अध्‍यक्ष जी का विशेषाधिकार है, उस पर सदन में चर्चा नहीं होनी चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मैं देख लूंगा.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारेमैं, केवल ये विषय अध्‍यक्ष जी के संज्ञान में डाल रहा हूं. अध्‍यक्ष महोदय, यदि आपको उचित न लगे तो मैं नहीं बोलूंगा. मैं, अपने सदन की ही चिंता कर रहा हूं. मेरा किसी व्‍यक्ति विशेष से विरोध नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  सामान्‍य तौर पर हम यहां विधान सभा के विषय में चर्चा नहीं कर रहे हैं.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारेमेरा केवल इतना कहना है कि विधान सभा में भी एक Second Line विकसित होनी चाहिए. जो रिक्‍त पद हैं, चाहे वे विधान सभा के अंदर हों, चाहे विधान सभा के बाहर हों. मैं समझता हूं कि आप भी मेरी इस भावना से सहमत होंगे कि सारे रिक्‍त पद भरे जाने चाहिए.

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XX :  आदेशानुसार विलोपित.

 

          अध्‍यक्ष महोदय-  अब आप विषय पर आ जायें.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारेमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी का बहुमत है, निश्चित रूप से बजट तो वे पास करवा ही लेंगे. हां की जीत हुई, सभी हां कह देंगे लेकिन यदि आप तर्क से बजट पास करें तो मैं, यह पूछना चाहता हूं कि जब हमारे पास 5 गुना बजट रखा हुआ है तो हम पहले उसका उपयोग करके, फिर नया बजट पास करवायें. इस अनुपूरक बजट की आवश्‍यकता ही कहां है ? हमारे पास 1 लाख 37 हजार करोड़ रुपये बकाया है. यह आंकड़ा इन्‍हीं किताबों (विधान सभा से संबंधित पुस्‍तकों को प्रदर्शित करते हुए) से लिया हुआ है तो फिर इस 28 हजार 650 करोड़ रुपये की आवश्‍यकता नहीं है इसलिए मैं, इस बजट का नीतिगत विरोध करता हूं, धन्‍यवाद.

          श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केवल जो मंत्री यहां उपस्थित हैं उन्‍हीं के विभागों की चर्चा की जाए. जो नहीं हैं उन्‍हें आवश्‍यकता नहीं है. यह मान्‍य किया जाए. सभी मंत्रियों को उपस्थित रहना चाहिए.

          श्री बाला बच्‍चन-- जो यहां उपस्थित है तो फिर इधर की भी हो जाए.

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- आपकी सारी आलोचना निरस्‍त हो जाएगी.

          उप मुख्‍यमंत्री (वित्‍त) (श्री जगदीश देवड़ा)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, द्वितीय अनुपूरक पर सदन में आज माननीय सदस्‍यों ने चर्चा की माननीय रामनिवास रावत जी, अभय कुमार मिश्रा जी, माननीय भूरेलाल जी, डॉ. सीतासरन शर्मा जी, माननीय ओमप्रकाश सखलेचा जी, श्रीमती झूमा सोलंकी जी, डॉ. रामकिशोर दोगने जी, माननीय हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल जी, माननीय डॉक्‍टर हिरालाल अलावा जी, माननीय सुरेश राजे जी, माननीय विजय रेवनाथ चौरे जी, माननीय निलेश पुसाराम उईके जी, माननीय श्रीमती निर्मला सप्रे जी, माननीय आतिफ आरिफ अकील भाई, माननीय पन्‍नालाल शाक्‍य जी, माननीय भैरो सिंह जी बापू, माननीय कैलाश कुशवाह जी, माननीय सोहनलाल बाल्‍मीक जी, माननीय दिलीप सिंह परिहार जी, माननीय हेमन्‍त कटारे जी मैं सभी माननीय सदस्‍यों को धन्‍यवाद देना चाहूंगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह द्वितीय अनुपूरक बजट आज यहां प्रस्‍तुत हुआ जिस पर आज चर्चा हुई. संविधान में व्‍यवस्‍था है और आपके सानिध्‍य में मैंने भी काम किया है  मुझे लगता है कि मैं भी करीब आठवां चुनाव लड़ा हूं. मैं लंबे समय से यह देख रहा हूं कि संवैधानिक व्‍यवस्‍था है कि मुख्‍य बजट आता है तो अनुच्‍छेद 202 में प्रावधान है फिर प्रथम अनुपूरक आता है, द्वितीय अनुपूरक आता है, तृतीय अनुपूरक आता है, अनुच्‍छेद 205 में प्रावधान है. यह प्रक्रिया है और यह हर बजट सत्र के बाद होता है आवश्‍यकता होती है, परिस्थिति ऐसी आती है कि योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रथम अनुपूरक, द्वितीय अनुपूरक और कुछ नई योजनाओं के लिए कुछ योजनाएं चालू हैं उनको आगे बढ़ाने के लिए जब सारी व्‍यवस्‍थाएं बहुत लंबे समय से चल रही हैं और सदन के सभी माननीय सदस्‍य बहुत ही वरिष्‍ठ सदस्‍य भी हैं सब जानते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनता बहुत विश्‍वास के साथ चुनकर सरकार बनाती है, अटूट विश्‍वास करके बैठाती है कि जिनको हम बैठा रहे हैं वह काम करेंगे और उसी विश्‍वास पर सरकार को भी खरा उतरना चाहिए, लेकिन मुझे कभी-कभी विचार भी आता है कि कभी कोई सरकार रहती है, कभी कोई सरकार रहती है, लेकिन जो भी सरकार बने वह जनता के लिए काम करे विकास के काम करे. गरीब लोगों के लिए कल्‍याणकारी योजनाएं बनाएं तो किसी पर एहसान नहीं है यह उस सरकार का राजधर्म है, यह उसकी ड्यूटी है, उस सरकार का कर्तव्‍य है. तेरा तुझको अर्पण क्‍या लागे मेरा. यह जनता का पैसा जनता के लिए लगाना, लेकिन वह ईमानदारी से लगे यह मुझे लगता है कि जब मध्यप्रदेश की सरकार बनी और जब-जब सरकार बनी. मैं सन् 1990 से विधायक हूँ. आदरणीय कैलाश जी है, आप भी मेरे बड़े भाई हैं, आपके साथ मुझे काम करने का अवसर मिला. सभी साथी हैं मैं कोई आलोचना की बात नहीं कर रहा हूँ. उस समय भी मुख्य बजट आया, उस समय भी अनुपूरक बजट आए, प्रथम आए, द्वितीय आए, तृतीय आए. इस प्रदेश की स्थिति वर्ष 2003 के पहले की क्या थी. हम लोग मंदसौर से आते थे तो 10 घंटे लगते थे और जाने में भी 10 घंटे लगते थे. पूरे मध्यप्रदेश का यही हाल था, या तो वह अस्पताल में भर्ती हो जाता था.

          श्री बाला बच्चन -- माननीय वित्त मंत्री जी यह कितने का बजट है. द्वितीय अनुपूरक बजट कितने का है. 20 साल पहले की आप बात कर रहे हैं हम आज की बात सुनना चाहते हैं. अभी हमने सदन में जो बोला हम उसके बारे में सुनना चाहते हैं.

          श्री जगदीश देवड़ा -- बाला बच्चन जी मैं इसीलिए कह रहा हूँ.

          श्री बाला बच्चन -- आपने स्टार्ट किया है, हम चाहते हैं कि सरकार बजट के रूप में उपलब्धियों की बात तो रखे. आप तो 20 साल पहले की बात पर चले गए.

          श्री जगदीश देवड़ा -- बाला बच्चन जी मैं वही फर्क बता रहा हूँ. उस समय भी सरकार थी, बजट था, आप भी अनुपूरक बजट लाते थे. बजट लाते क्यों हैं.

          श्री बाला बच्चन -- अभी हमने जो बोला उस पर बोलें.

          श्री जगदीश देवड़ा -- बजट लाते क्यों हैं, इसीलिए तो बजट लाते हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं सदन में बहुत विनम्र प्रार्थना के साथ कह रहा हूँ. मुझे भी 34 साल हो गए हैं. इस मध्यप्रदेश की स्थिति क्या थी. बिजली की क्या स्थिति थी, सड़कों की क्या स्थिति थी, सिंचाई योजनाओं की क्या स्थिति थी. अब यदि मैं आंकड़ा बताऊंगा कि वर्ष 2003 के पहले कितने हेक्टयर में सिंचाई होती थी और अब कितनी होती है, सिंचाई मंत्री जी बैठे हैं. तब से अब तक सिंचाई 8 गुना बढ़ गई है. गाँधी सागर बाँध बहुत पहले से बना है लेकिन आपने उससे पानी लाने की कोशिश नहीं की, उसका पानी खेतों में पहुंचाने की कोशिश नहीं की.

          अध्यक्ष महोदय, यह दुर्भाग्य है जो काम इस सरकार में हुए यदि यही काम आप उस समय करते तो शायद यह राशि आज किसी और काम में उपयोग होती और प्रदेश आज और आगे होता. इस प्रदेश को बीमारू राज्य से विकसित राज्य में तो हमने लाकर खड़ा किया है.

          श्री रामनिवास रावत -- गाँधी सागर बाँध तो मोदी जी ने बनाया होगा.

          श्री जगदीश देवड़ा -- मोदी जी ने नहीं बनाया, आपने बनाया है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- सिंचाई का रकबा बता दूँ कि वर्ष 2003-2004 में कितना था.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- गाँधी सागर आपने बनाया, मना नहीं कर रहे हैं परन्तु उस पानी का उपयोग हमने किया. आपने वहां के गेस्ट हाउस का उपयोग किया.

          श्री रामनिवास रावत -- चंबल जाकर देखो जो खुद करते हैं वो आरोप लगा रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- वित्त मंत्री जी को बोलने दीजिए.

          श्री अभय कुमार मिश्रा -- 3300 करोड़ रुपए का कर्ज था आज 44000 रुपए का  है. मनी इनफ्लेशन देखिए. उस समय मुद्रा की क्या कीमत थी आज क्या कीमत है. कितने गुना 20 वर्षों में परिवर्तन आया है उसको देखने का प्रयास करें.

          अध्यक्ष महोदय -- आपका नंबर बोलने के लिए आएगा.

          श्री जगदीश देवड़ा -- आपने उस समय पूछा था कि यह परीक्षित मद में उन कार्यों को शामिल किया जाता है जिनकी सक्षम प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी हैं. अपरीक्षित मद में उन कार्यों को शामिल किया जाता है जिनकी सक्षम प्रशासकीय स्वीकृतियां देना अभी शेष है. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का माह जुलाई तक के मानदेय का भुगतान सामान्य योजना से किया गया जिसकी प्रतिपूर्ति हेतु वित्त विभाग द्वारा प्रत्यायोजित अधिकार के तहत स्वीकृति दी गई. महालेखाकार के माध्यम से लेखों में समायोजन की कार्यवाही की जा रही है. ऋण से संबंधित, राज्‍य सरकार द्वारा जो ऋण लिया जाता है उस संबंध में आपने पूछा तो अनुच्‍छेद 293(3) के अंतर्गत भारत सरकार से अनुमति प्राप्‍त कर लिया जाता है और एफआरवीएम अधिनियम के अंतर्गत वित्‍तीय संकेतक निर्धारित हैं. राज्‍य सरकार इन वित्‍तीय संकेतकों की सीमाओं को ध्‍यान में रखता है. राज्‍य सरकार इस संबंध में एफआरवीएम के प्रावधान के अंतर्गत पटल पर छमाही एवं वार्षिक प्रतिवेदन भी प्रस्‍तुत करती है. राज्‍य शासन द्वारा लिया गया ऋण सीमाओं के भीतर है और जब भी बात होती है, चाहे वह मेन बजट हो फिर चाहे वह अनुपूरक बजट आए, हमेशा एक बात आती है कि कर्जा लिया, कर्जा लिया. हां कर्जा लिया. आपने कर्जे का कहा. हां, कर्जा लिया लेकिन घी नहीं पिया.

          श्री अभय कुमार मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय, घर भरा. कर्जा लेकर अपना घर भरा.

          श्री बाला बच्‍चन -- कर्जा लिया परंतु घी भी पिया. मतलब कर्जा लेकर घी पिया सरकार स्‍वीकार कर रही है.

          श्री जगदीश देवडा -- अध्‍यक्ष महोदय, आप कह रहे थे ना, मैं बता दूं आपको कि 31 मार्च, 2023 की स्थिति में 3 लाख, 31 हजार, 651 करोड का कर्जा कोई संकोच नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत -- परीक्षित निधि कौन सी होती है ? परीक्षित निधि और आरक्षित निधि कौन सी होती है ?

          श्री जगदीश देवडा -- अगर सरकार ने कर्जा लिया है तो कर्जा समय पर दे रहे हैं. रामनिवास जी, समय पर सरकार कर्जा भी चुका रही है, ब्‍याज भी दे रही है और कर्जा लेकर आपने तो मुझे लगता है कभी मैंने तो नहीं सुना कि कांग्रेस ने कर्जा लेकर कभी कोई सडक बनाई, तालाब बनाये, स्‍टाप डेम बनाये, कोई नहर बनाई, कहीं पर मेडिकल कॉलेज, कहीं गवर्नमेंट कॉलेज मैंने तो नहीं सुना कभी. कर्जा लिया तो कहां गया और बजट का पैसा भी आपने कहां खर्च किया ? जो काम इस मध्‍यप्रदेश में आज विकास के दिखाई दे रहे हैं और जितनी जनकल्‍याणकारी योजनाएं दिखाई दे रही हैं वह सब भारतीय जनता पार्टी की सरकार में भारतीय जनता पार्टी सरकार के हमारे यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के सक्षम नेतृत्‍व में अभी भी सरकार चल रही है और सारे काम ...

          एक माननीय सदस्‍य -- शिवराज जी का नाम तो ले लो.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- थोडा धैर्य रखो उनका नाम भी लेंगे.

          श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, जब रावत जी बोल रहे थे तो हम लोगों ने बहुत एकाग्रता के साथ सुना था. वित्‍त मंत्री जी का जवाब है थोडा आ जाने देंगे तो ठीक रहेगा.

          श्री जगदीश देवडा -- अध्‍यक्ष महोदय, यह जो द्वितीय अनुपूरक लाये हैं इसमें कुछ नई योजनाओं का हमने प्रावधान किया है. प्रदेश के किसानों को स्‍थाई कृषि पम्‍प लगाने के लिये मुख्‍यमंत्री कृषक मित्र योजना प्रारंभ की है. प्रदेश के नागरिकों को गंभीर बीमारी की स्थिति में तत्‍काल चिकित्‍सा उपलब्‍ध कराने के लिये मुख्‍यमंत्री एयर एम्‍बुलेंस सेवा इसको भी हम शुरू कर रहे हैं. प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्‍तार तथा इस वर्ग के कल्‍याण के अधिक अवसर सुनिश्चित करने के लिये प्रधानमंत्री जनमन योजना भी प्रारंभ हो रही है. उसमें बहुत सारे काम हैं मैं पूरी सूची पढूंगा तो बहुत लंबी सूची है.

          श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि आपने एयर एम्‍बुलेंस की बात की है, यह किन-किन शहरों से प्रारंभ कर रहे हैं ? यह स्‍पष्‍ट हो जाए. ग्‍वालियर में, मुरैना में बीमार हो गया तो ग्‍वालियर एयरपोर्ट है भोपाल थोडे आएगा दिल्‍ली जाने के लिये ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- रामनिवास जी, वित्‍तमंत्री जी का जवाब पूरा आ जाने दीजिये.

          श्री रामनिवास रावत -- मैं इसलिये पूछ रहा हूं कि एयर एम्‍बुलेंस किन-किन शहरों से चालू होगी ?

          श्री तुलसीराम सिलावट --  जहां एयरपोर्ट होगा कहीं भी जा सकते हैं.

          श्री जगदीश देवडा -- अध्‍यक्ष महोदय, दुग्‍ध उत्‍पादन के प्रोत्‍साहन के लिये मुख्‍यमंत्री सहकारी दुग्‍ध उत्‍पादक प्रोत्‍साहन योजना भी प्रारंभ हो रही है. उत्‍कृष्‍ठ उच्‍च शिक्षा की उपलब्‍धता के लिये प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्‍सीलेंस योजना भी प्रारंभ कर रहे हैं. प्रदेश के धार्मिक स्‍थलों पर सुविधाजनक पहुंच के लिये मुख्‍यमंत्री हेली पर्यटन सेवाएं प्रस्‍ताव में सम्मिलित है. यह भी द्वितीय अनुपूरक में सारी चीजें सम्मिलित की हैं और यह जो जनमन योजना है, माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा विशेष पिछडी जनजाति वर्ग के जीवन स्‍तर को बेहतर करने के लिये एक महत्‍वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जनमन योजना को लागू किया है. इस योजना में आवास उपलब्‍ध कराए जाएंगे. संबंधित क्षेत्र में सडकों का निर्माण किया जाएगा. हर घर नल जल पहुंचाया जाएगा. आंगन वाडी केन्‍द्रों का निर्माण होगा. बहुउद्देशीय केन्‍द्रों का निर्माण होगा. विद्यार्थियों के लिये छात्रावास सुविधाओं का विस्‍तार किया जाएगा. इस वर्ग की बसाहटों में बिजली के प्रदाय के कार्य किये जाएंगे. विशेष पिछडी जनजाति वर्ग के लिये विशिष्‍ट रूप से योजना लागू कर सरकार ने संवेदनशीलता का परिचय दिया. यह सब काम हैं.  अभी हमारे विपक्ष के साथी बोल रहे थे कि पक्षपात हो रहा है.  मुझे नहीं लगता है. भाजपा की सरकार में चाहे  वह दिल्ली में यशस्वी  प्रधानमंत्री  जी  की बात हो, चाहे फिर वह  प्रदेश की बात हो.  सबके लिये..

          श्री अभय कुमार मिश्रा-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी बहुत भले व्यक्ति हैं.  हम लोग जानते हैं इतने सालों में.  आप कैसे ऐसा सोच लिये.  आपसे तो यह उम्मीद नहीं थी.

          श्री जगदीश देवड़ा-- आप कह  रहे हैं कि आयुष्मान कार्ड बना. उसमें क्या भेदभाव है. कोई जातिगत भेदभाव है.  कोई गरीब, अमीर देखकर किया गया है.

          श्री अभय कुमार मिश्रा-- अध्यक्ष महोदय, यह पार्टीगत है.

          श्री जगदीश देवड़ा-- सारी योजनाएं चाहे वह गैस के चूल्हे के कनेक्शन की बात  हो,  आयुष्मान कार्ड की बात हो, किसान सम्मान निधि की बात हो,  उसमें कहां भेदभाव है.  मुझे नहीं लगता है कि कोई कांग्रेस, बीजेपी कहीं देखा हो.कहीं किसी वर्ग विशेष  की बात की हो. यह सारे ही वर्गों के लिये  है.  जैसा अभी  कैलाश जी ने कहा था कि  सबका साथ, सबका विकास.  तो सबको साथ लेकर के चल रही है सरकार. सरकार ने यह भेदभाव नहीं किया है. चाहे दिल्ली की सरकार हो, चाहे प्रदेश की सरकार हो, हम सब काम  सबके लिये कर रहे हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक-- आप जो कह रहे हैं, यह नीति है. यह नीति के तहत  में सबको लाभ मिलेगा.

          श्री जगदीश देवड़ा-- अध्यक्ष महोदय, यह हेमन्त कटारे जी  ने  जो  कहा, स्वयं  जो आंकड़े   बताये, मालूम नहीं  किस अभिलेख से लिये  इन्होंने,  पता नहीं, भगवान जाने. 

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -- मैं आपको उपलब्ध करवा दूंगा.

          श्री जगदीश देवड़ा--वास्तविकता  यह है कि  वित्तीय वर्ष   2023-24 में   जनवरी,  2024 तक रुपये 2 लाख 2 हजार 893 करोड़ का व्यय हो चुका है,  जो कि कुल बजट का लगभग  64 प्रतिशत है. पता नहीं आपने आंकड़े कहां से लिये हैं.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -- मंत्री जी, मैं आपको उपलब्ध करवा दूंगा. एक चीज गौर करने की बात है.  36 परसेंट जो बजट बचा है,  जो कि आप जो बजट मांग रहे हैं,  उससे वह कई गुना ज्यादा है. तो यह चीज खुद  उप मुख्यमंत्री जी ने स्वीकार की है.  तो अब फिर बजट की आवश्यकता क्या है, यह भी बता दें और एक चीज और पूछना चाहूंगा कि  आप उधार तो ले रहे हैं,  उसको वापस कैसे करेंगे.  वह जरुर बताइयेगा.

          श्री जगदीश देवड़ा-- अध्यक्ष महोदय, बहुत विस्तार से  मैं नहीं बोल रहा हूं, हमारे दल के सदस्यों ने  काफी  विस्तार से  मध्यप्रदेश  सरकार ने क्या क्या काम किये हैं,  उनके बारे में प्रकाश डाला है और  अभी आने वाला  जो बजट   2024-25 का आयेगा,  वह मुख्य बजट आयेगा.  उसमें सभी विभागों की  मांगों पर चर्चा होगी.  निश्चित रुप से विस्तार से  उस समय बात करेंगे आपसे,  लेकिन सारे काम इस मध्यप्रदेश की  धरती पर अगर आपको जो विकास दिखाई दे रहा है, वह सब भारतीय जनता  पार्टी  की सरकार में दिखाई  दे रहा है.  यह आलोचना की दृष्टि से नहीं है.  मुझे लगता है कि  आप लोगों को विचलित   होने की आवश्यकता नहीं है.  इसमें हमारी कृपा नहीं है,  मैंने पहले ही कहा है कि  तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा. कोई सरकार अगर काम कर रही है विकास के  तो किसी के ऊपर अहसान  नहीं कर रही है.

          श्री रामनिवास रावत-- जो भी होता है, वह आपकी कृपा से होता है. हरदा  काण्ड भी आपकी कृपा से  हुआ है.

          श्री बाला बच्चन--  हम  विचलित नहीं हो रहे हैं.  हमारा निवेदन यह है कि  आपने स्वीकार किया है कि   अभी तक 64 परसेंट  ही आपका बजट खर्च  हुआ है.  टाइम बचा है 10 प्रतिशत.  10 प्रतिशत समय में  बचा हुआ  36 परसेंट बजट खर्च कर लेंगे. यह बतायें आप.

          श्री जगदीश देवड़ा-- सब हो जायेगा. कर लेंगे.

          श्री बाला बच्चन -- हम लोग विचिलत  नहीं हो रहे हैं.  आप जिसके लिये एलोकेट करते हैं बजट,  वह कहां खर्च होता है.  एक हेड से दूसरे हेड  में  खर्च कर रहे हैं आप.  अभी हमारे रामनिवास रावत जी ने  जो  बोला,हमारे विधायकगण ने बोला,  उसकी पुष्टि हो रही है, वह  मेच हो रहा है.  आपके पास  36 परसेंट बजट खर्च करने के लिये डेढ़ महीना बचा है.  आप बताइये कैसे खर्च करेंगे.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे--  36 प्रतिशत  जो बजट बचा है,  कृपया एक बार  राशि के रुप में बताइये.

          श्री जगदीश देवड़ा-- कटारे जी,  यह सब तो आप चिंता  कर रहे हैं,  लेकिन आप जरा  अपने  अपनी गिरेबान  में सब झांक कर तो देखें कि  आपने इस मध्यप्रदेश को  कहां खड़ा  किया था.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे--   मेरा अधिकार है यह जानने का.  एक बार आप फिगर बता दीजिये.

          श्री जगदीश देवड़ा-- आपने मध्यप्रदेश को कहां खड़ा किया.  अब आप कह रहे हैं, सीएम राइज स्कूल  का बता रहे हैं.  वहां पर स्टाफ नहीं है.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे--   36 परसेंट का फिगर   बता दीजिये.  सदन में इसका फिगर बता दीजिये.  फिगर कितना है.  अध्यक्ष जी  को  भी पता लग जाये कि कितना बकाया है.  यह फिगर हम  प्लीज जानना चाहेंगे.

          श्री जगदीश देवड़ा-- हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि  सीएम राइज स्कूल में भी स्टाफ पूरा होगा  और आप कह रहे हैं कि  अस्पतालों में डॉक्टर  नहीं हैं, तो कहां डॉक्टर नहीं हैं.  आपने मेडिकल कालेज खोले नहीं.  डॉक्टर कहां से होंगे. 

            श्री मनोज पटेल:-यह प्रश्‍नकाल नहीं है.

          श्री जगदीश देवड़ा:- आपने मेडिकल कॉलेज खोले नहीं. डॉक्‍टर्स कहां से होंगे सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज तो कहां से डाक्‍टर निकलेंगे. आपने कोशिश ही नहीं की. आप अपनी बात को, बजाए ढंकने के.. (व्‍यवधान).. यह बजट आपने पूरा पढ़ा है. मुझे पता है कि रामनिवास रावत जी ने पूरे आंकड़े सहित बताया है और भी सदस्‍यों ने बात की, लेकिन मैं तो यह कह रहा हूं कि यह द्वितीय अनुपूरक बजट है.

          श्री बाला बच्‍चन:- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो खुद ने अभी जाना. हमने तो पढ़ा है कि 28 हजार, 655 करोड, 15 लाख,13 हजार, 142 रूपये का बजट है. मैंने खुद ने अभी आपसे जानना चाहा था कि एक-ड़ेढ महीने में आप 36 प्रतिशत बचा हुआ बजट अलोकेट किया उसको खर्च कैसे करोगे आपने अभी तक तो किया नहीं बाद में कैसे खर्च करेंगे. आप उस पर आइये.

          अध्‍यक्ष महोदय:- बाला बच्‍चन जी, आप वित्‍त मंत्री जी को बोलने तो दीजिये. वह जवाब देना चाहते हैं तो आपको वेट तो करना पड़़ेगा.

          श्री जगदीश देवड़ा:- बाला बच्‍चन जी, आप कह रहे हैं कि कैसे खर्च करेंगे. आप भी कहीं नहीं जा रहे हो, हम भी यहीं हैं. हम बता देंगे कि कहां खर्च कर रहे हैं. हम आपको बतायेंगे, ना आप कहीं जा रहे हैं, ना ही हम जा रहे हैं. ..(व्‍यवधान).. आप कह रहे थे कि विश्‍वास.     

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे:- आप 36 प्रतिशत की राशि तो बता दीजिये कि कितनी होती है.

          श्री जगदीश देवड़ा:- मैं आपको बता दूंगा. 31 मार्च, 2023 की स्थिति में 3 लाख,31 हजार, 651 करोड़ रूपये का कर्जा, कोई संकोच नहीं है. अगर सरकार ने कर्जा लिया है तो समय पर कर्जा दे रहे हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय):- मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है.

          अध्‍यक्ष महोदय:- कैलाश जी आप एक मिनट बैठ जाइये. मेरा अनुरोध है कि यह प्रश्‍नकाल नहीं है. आपने प्रश्‍न उठाया है, वित्‍त मंत्री जी का उत्‍तर समाप्‍त हो जाये और उसके बाद आपका जवाब नहीं आये तो आप एक बार पूछ सकते हैं कि मैंने यह पूछा था. अब आप बीच-बीच में कहेंगे कि अभी जवाब दो, कुछ भी दो. उनको भाषण तो पूरा करने दो. हां, कैलाश जी आप कुछ बोल रहे थे.

           श्री कैलाश विजयवर्गीय:- अध्‍यक्ष महोदय, आपने निर्देश दे दिये. मैं वही कह रहा था कि साधारण-साधारण प्रक्रिया यह होती है कि माननीय सदस्‍य ने कुछ कहा है तो माननीय मंत्री जी जवाब दे रहे हैं. हर बार इंटरप्‍शन और डिस्‍ट्रक्‍शन में अंतर है. यह डिस्‍टर्ब कर रहे हैं. इंटरप्‍शन कर सकते हैं, हम सम्‍मान करेंगे यदि इंटरप्‍ट करेंगे तो. परंतु आप डिस्‍टर्ब कर रहे हैं. वित्‍त मंत्री जी भाषण दे रहे हैं तो उसको आप पूरा सुन लीजिये. उसके बाद आपको ऐसा लगे तो बाद में भी सत्र चलने वाला है. अभी तीन दिन हम यहीं हैं. इसके बाद फिर चर्चा होने वाली है. राज्‍यपाल के अभिभाषण में आप इसको फिर से उठा सकते हैं. हमें अभी बहुत सारे चर्चा के अवसर हैं, जहां पर हम सरकार को घेर सकते हैं. पर वित्‍त मंत्री जी का जवाब आने देना चाहिये और आप यह निर्देश करें, प्‍लीज.

          अध्‍यक्ष महोदय:- अब नहीं करेंगे.

          श्री जगदीश देवड़ा:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही निवेदन कर रहा
था कि द्वितीय अनुपूरक यह कोई मुख्‍य बजट नहीं है. यह द्वितीय अनुपूरक है और इसमें जैसे आवश्‍यकता होती तो उस दृष्टि से योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिये
,नयी योजनाओं के लिये है, यह कोई मुख्‍य बजट नहीं है. उसके बारे में हमने सब बता दिया है और आपने सबको पुस्‍तक दी है, उसमें सारी बातें हैं. लेकिन जैसा मैं कह रहा था कि जनता थर्मामीटर है. जनता यह अच्‍छे से निर्णय करती है कि कौन हमारा काम कर रहा है कि कौन अच्‍छा, कौन बुरा. यह निर्णय प्रजातंत्र में बहुत साफ होता है;

          अध्‍यक्ष महोदय, चाहे हम इस पक्ष के हों, चाहे उस पक्ष के हों. जनता ने जो निर्णय दे दिया उसको स्‍वीकार करना चाहिये. उसको स्‍वीकार करो. द्वितीय अनुपूरक में क्‍या प्रावधान किये. नयी योजनाएं सम्मिलित की, मैंने उस पर प्रकाश डाला.

          अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने सी.एम. राईज स्‍कूल का इन्‍होंने सवाल उठाया था. सी.एम.राईज़ इतनी बेहतरीन योजना है. आपके क्षेत्र में भी वह बने हैं, आप उसको देखो, उसकी गुणवत्‍ता देखो, उसके भवन की उसके स्‍टॉफ की, स्‍टॉफ आयेगा और धीरे-धीरे उसमें स्‍टॉफ भी पूरा हो रहा है. नलजल योजना का, आवास का, सारा जितना आप कह रहे हैं लाड़ली लक्ष्मी योजना, कोई योजना बंद भी नहीं होगी. मैं इस सदन में कह रहा हूं योजना कोई हम बंद नहीं करेंगे, योजना चालू होगी. (मेजों की थपथपाहट)  आपने लाड़ली बहना के बारे में भी कहा. आपने चिंता व्यक्त की. मैं यहां सदन में कह रहा हूं कि कोई योजना हम बंद नहीं करेंगे. योजना बराबर चालू होगी और यह संकल्प पत्र भी अगर है तो कोई 4 महीने, 5 महीने के लिए है क्या?संकल्प पत्र किसी दल का, कोई सरकार का है तो वह 5 वर्ष के लिए है. इन सारी बातों को हम पूरा करेंगे. हम जनता के लिए जवाबदेह हैं. निश्चित रूप से हम पूरा करेंगे. बहुत सारी बातें विपक्ष ने कही हैं.

          अध्यक्ष महोदय - आपको लेखानुदान पर भी बोलना पड़ेगा.

श्री जगदीश देवड़ा - जी हां. सभी विभागों में द्वितीय अनुपूरक में हमने प्रावधान किये हैं. हमारे माननीय सदस्यों ने भी बहुत सारी बातों को विस्तार से रखा, मैं उसकी पुनरावृत्ति नहीं करूंगा. विपक्ष के साथियों ने जो सारगर्भित सुझाव दिये हैं, इसी सदन में कोशिश करेंगे कि उन समस्याओं का भी, उन बातों का भी हम गंभीरता से विचार करके समाधान करेंगे. जो आप चाह रहे हैं श्री कटारे जी हैं और भी सदस्य जो चाह रहे हैं, इसी सदन में हम उन बातों का जवाब भी देंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन के सभी माननीय सदस्यों से मैं अनुरोध करूंगा कि प्रस्तुत किये गये द्वितीय अनुपूरक अनुमान को सर्वसम्मति से पारित करें.

श्री आरिफ मसूद (भोपाल मध्य) - अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न मैंने पूछा था, एक बात मैंने उठाई थी और सभी सदस्यों ने उठाई, वित्तमंत्री जी ने उसका जवाब स्पष्ट नहीं दिया. क्या वित्तमंत्री जी यह बताएंगे कि जो 15 करोड़ रुपये की बात है, विपक्ष के सदस्यों को उसमें शामिल नहीं किया गया, क्या ऐसा हुआ है?

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि -

                               अनुपूरक मांगों का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

3.36 बजे                   मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 ( क्रमांक 4 सन् 2024)

 

उप मुख्यमंत्री  (वित्त) (श्री जगदीश देवड़ा) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 का पुरःस्थापन करता हूं.

श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, इसकी कापी मिलना चाहिए, विनियोग पर आप चर्चा नियत करते हैं. एक दिन पहले कापी मिलना चाहिए. आज मिली है तो कल चर्चा के लिए आना चाहिए. हमने विनियोग विधेयक देखा नहीं. विनियोग विधेयक हमारे पास में उपलब्ध नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - वैसे कार्यमंत्रणा में बात हो गई थी.

श्री रामनिवास रावत - ठीक है. जो आपका आदेश है. लेकिन मैं नियमों की बात कर रहा था.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

अध्यक्ष महोदय - अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

प्रश्न यह है कि खण्ड 2,3 तथा अनुसूची इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 2, 3 तथा अनुसूची इस विधेयक के अंग बने.

प्रश्न यह है कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

 

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक के अंग बने.

श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 पारित किया जाए.

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 पारित किया जाए.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2024 पारित किया जाए.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ

 विधेयक पारित हुआ.

 

         

          श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, विधेयक की कॉपी तो कम से कम निर्देशित कर दीजिए कि सदस्‍यों को दी जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- लेकिन यह आगे से ध्‍यान रखना पडे़गा. मुझे लगता है कि अलमारी में जाकर आप लोगों ने टेबल ऑफिस में देखा नहीं होगा.

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कॉपी उपलब्‍ध होना चाहिए. दूसरा इस पर भी अगर किसी एमएलए को पॉर्टिसिपेशन करना हो, तो वह कर सकते हैं. इसमें बोलने का प्रावधान है. लेकिन देखिए अभी टेबल पर वह कॉपी उपलब्‍ध नहीं है. हम आगे के लिए संज्ञान में लाना चाहते हैं.

          श्री सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, विनियोग में बोलने का प्रावधान नहीं है.

          श्री बाला बच्‍चन -- क्‍या हम इसके पहले बोले हैं ? आप भी अध्‍यक्ष थे, जब हम बोले थे.

          श्री सीतासरन शर्मा -- नहीं, नहीं. नहीं बोले होंगे दादा.

          श्री बाला बच्‍चन -- हो सकता है आपने हमको अनुमति दी होगी, लेकिन आप आसंदी पर थे और हम बोले हों.

          अध्‍यक्ष महोदय -- संसदीय कार्यमंत्री जी, इस बात का आगे से विशेष ध्‍यान रखा जाए कि जो प्रपत्र पहले से सदस्‍यों को मिलना चाहिए, वह तत्‍समय मिले, यह सरकार सुनिश्‍चित करे.

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)  -- निश्‍चित रूप से अध्‍यक्ष महोदय जी और मैं निवेदन करना चाहता हॅूं कि सूचना विभाग में पटल पर सभी के खानों में भी उपलब्‍ध है, जाकर देख सकते हैं.

          श्री बाला बच्‍चन -- विनियोग वाली कॉपी नहीं है.

 

 

 

3.43 बजे

राज्‍यपाल के अभिभाषण पर श्री रामनिवास रावत, सदस्‍य द्वारा दिनांक 7 फरवरी, 2024 को प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव पर चर्चा का पुनर्ग्रहण

 

        श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण किसी भी सरकार का एक दृष्‍टिपत्र होता है, एक आईना होता है कि सरकार क्‍या करने जा रही है. इसके कुछ दिन पहले अभिभाषण प्रस्‍तुत किया गया और आज फिर अभिभाषण प्रस्‍तुत किया गया है. लगभग वही बातें हैं वही काम और इधर-उधर करके बातें की गई हैं. सबसे पहले अमृत महोत्‍सव की बात की गई है. मध्‍यप्रदेश विधानसभा की समृद्ध परम्‍पराओं और सशक्‍त कार्यप्रणाली की बात की गई है और यह सदन लोकतंत्र का मंदिर है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि मैंने पिछली विधानसभा में जो ध्‍यान आकर्षित कराया था. आपने उस नियम को समाप्‍त कर दिया. निश्‍चित रूप से इस सिस्‍टम को मजबूत करने में एक महत्‍वपूर्ण कदम है. इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हॅूं और मेरी इच्‍छा है कि हम अपने इस लोकतंत्र के मंदिर को मजबूत कराने के लिए पिछली पंद्रहवीं विधानसभा में लगभग 1 हजार प्रश्‍न ऐसे रह गए थे, जिनके उत्‍तर नहीं आए. वे उत्‍तर सदस्‍यों को नहीं मिले. इसके लिए मैं एक व्‍यवस्‍था और चाहता हॅूं. जिस तरह से नियम-267 (क) शून्‍यकाल की सूचनाओं के उत्‍तर अगले विधानसभा के सत्र के प्रथम दिन तक मिल जाना चाहिए, ऐसी व्‍यवस्‍था नियमों में है. इसी तरह से प्रश्‍नों के मामले में भी एक नियम और जुड़ जाए कि प्रश्‍नों के उत्‍तर सरकार की तरफ से आवश्‍यक रूप से अगली विधानसभा सत्र के प्रथम दिन में पटल पर आ जाए और सदस्‍यों को मिल जाए, जिससे उनका उपयोग किया जा सके और इसी के साथ-साथ हम प्रश्‍न पूछते हैं सरकार अपना जवाब देती है.  

          आश्वासन के संबंध में कहना चाहूंगा कि अभी तक लगभग 3 हजार आश्वासन लंबित हैं. मैं चाहता हूं कि सरकार जब भी बोले, जिम्मेवारी से बोले और इस तरह से अपने उत्तर दें कि वही कामों के लिये उत्तर दिया जाना चाहिये जो काम हो सकें. आश्वासन लंबित ना रहें. सरकार के द्वारा दिये गये आश्वासन की पूर्णता बहुत आवश्यक है. तो इसके लिये भी कोई नियम और शर्तें निर्धारित करने का मैं निवेदन करता हूं. पहले ध्यानाकर्षण भी देते थे. पहले यह व्यवस्था थी कि जितने भी ध्यानाकर्षण हैं वह सदन में प्रस्तुत किये जाते थे तथा सभी जवाब के लिये जाते थे. शायद कुछ समय से ऐसी परम्परा बना दी गई है कि जो आप स्वीकृत करते हैं वही जवाब के लिये जाते हैं. अगर पहले की तरह सभी जवाब के लिये जाने लगें तो निश्चित रूप से हमारे सदन की गरिमा बढ़ेगी, विधायिका की भी गरिमा बढ़ेगी. इससे केवल विधायिका की ही गरिमा नहीं बढ़ती इससे प्रशासन में माननीय मंत्री जी के विभाग में क्या चल रहा है, यह जानकारी भी मिलती है. उससे सुशासन में कसावट लाने में भी उनकी महती भूमिका रहती है. दूसरा जो पैरा है भगवान राम की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा के बारे में कहा गया है. भगवान राम की जहां तक बात है. राम सनातन हैं, राम सत्य है, राम त्रेता युग से पहले से थे, आज भी हैं, हमेशा रहेंगे. राम की परिकल्पना और विकसित भारत की संकल्पना की बात आपने कही है. क्या भेदभाव से राम राज्य की स्थापना होगी. राम राज्य के बारे में सभी जानते हैं. राम जी के राज्य की जो संकल्पना थी आदरणीय विजयवर्गीय जी दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥ सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥ रामराज्य में किसी को कष्ट भी नहीं होता था. देबि पुजि पद कमल तुम्हारे...सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे राम राज्य वो राज्य था जिसमें अल्प मृत्यु भी नहीं होती थी. पिता को कभी बेटे का कंधा नहीं देना पड़ता था. वहां इस तरह की भावना थी. आज हम राम राज्य की कल्पना कर रहे हैं. हम जितना गरीबों के लिये कर सकते हैं उतना शायद वही सर्वोच्च होगा. राम राज्य में यह भी कहा गया है कि देश को राजा अथवा शासक को राज्य की खुशहाली का जिम्मेदार माना जाता रहा है. इसके विपरीत यदि राज्य में कहीं कोई बदहाली है तो उसका उत्तरदायी भी राजा होता है. आपने राम राज्य की कल्पना की, राम राज्य में यह व्यवस्था थी कि कोई अच्छा हो रहा है वह भी उनके खाते में आता है. जो कुछ बेकार भी हो रहा है. अगर प्रकृति भी प्रकोप करती है तो राजा का उसमें उत्तरदायित्व रहता है. क्या आपने हरदा की जिम्मेवारी ली, क्या आपने हरदा काण्ड के बारे में आपने कहा क्या कि आप उसकी जांच करवा कर दोषियों पर कार्यवाही करेंगे ? आप राम राज्य की कल्पना की बात करते हो. आपने शपथ ली कि किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे. इसके बाद भी आप बीजेपी के विधायकों को 15-15 करोड़ रूपये देने की बात करते हो. मुझे बड़ा कष्ट होता है. आप अभी विजयपुर दौरे पर गये. आपने भी बताया होगा किसी कार्यकर्ता को आपने पोस्ट भी डाली कि आपके विजयपुर क्षेत्र के दो काम आपके प्रस्ताव के सम्मिलित कर लिये गये हैं. लेकिन जब हमने बजट देखा तो वही काम के लिये केवल सांसदों के प्रस्ताव लिये जाते हैं. अब आप इस पद पर आ गये हैं इसलिये आपके दोनों काम इस बजट में सम्मिलित नहीं किये गये हैं. यह एक दुर्भाग्य की बात है कि यही भेदभाव है, यही राम राज्य है ? इसी तरह से आप लोग राम राज्य की परिकल्पना करोगे ? बडे़ दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि भगवान राम का आप जिस तरह से उपयोग कर रहे हो बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है.   

          अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं बात करुंगा, बजट के चौथे नंबर पर दिया है भारत की अर्थव्‍यवस्‍था पर हाल ही में जारी रिपोर्ट विगत लगभग 10 वर्ष में आर्थिक प्रगति और सामाजिक उत्‍थान की नई ऊंचाइयों को छूने में मिली. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये पूरा का पूरा पैरा भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में है, मध्‍यप्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में नहीं है. इस तरह से पहले भी कहा था कि ये राज्‍य का बजट है, राज्‍यपाल का अभिभाषण है, राज्‍य की विधान सभा में इसका वाचन किया जा रहा है. मुझे ऐसा लगा रहा है कि ये क्‍या संघीय ढांचे पर हमला तो नहीं किया जा रहा है, क्‍या राज्‍य के महत्‍व को तो समाप्‍त करने का काम नहीं किया जा रहा है, क्‍या संवैधानिक ढांचे को समाप्‍त करने का काम तो नहीं किया जा रहा है, ये क्‍या केन्‍द्र से ही सब चलाना चाहते हैं, इसमें केन्‍द्र की ही सारी बातें आई हैं, केन्‍द्र की बातें आएगी तो केन्‍द्र की चर्चा करेंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने भारत की अर्थव्‍यवस्‍था, विकासदर और भारत की नामांकनों की बात की है. यदि भारत की बात करेंगे तो भारत का मानव विकास प्रतिवेदन दिया हुआ है कि सबसे ज्‍यादा आत्‍महत्‍याएं भारत में होती हैं और वर्ष 2020 से 22 में भारत में आत्‍महत्‍याओं में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है. कुल 1.7 लाख से अधिक मामले आए हैं जो वर्ष 2020 से 21 की तुलना में 4.2 प्रतिशत वृद्धि थी, चिन्‍ताजनक वृद्धि का दर्शाते हैं. आत्‍म हत्‍या की दर 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसकी गणना प्रति लाख जनसंख्‍या पर आत्‍महत्‍याओं की संख्‍या के रूप में की जाती है, ये स्थिति पूरे भारत की है, यदि भारत की बात करेंगे तो. प्रदेश के आंकड़ों की बात करेंगे, ऋणग्रस्‍तता, बेरोजगारी और पेशेवर मुद्दे से आमजन परेशान है. इस तरह से ये पूरे भारत की स्थिति है. अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अब बढ़ते अपराधों में भारत के साथ साथ अब मध्‍यप्रदेश में भी प्रथम स्‍थान पर है.

          अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या ये संघीय ढांचे को बचाने के लिए संघीय ढांचे पर प्रहार तो नहीं है, हमें ऐसा लगता है. आगे दिया गया है कि मध्‍यप्रदेश है या वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट, या अमृतकाल का बजट है. प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत का संकल्‍प, उन्‍हीं का संकल्‍प है, आपका संकल्‍प नहीं है, आपका कोई योगदान नहीं है, आपकी कोई जिम्‍मेदारी नहीं है कि आप प्रदेश के लिए कुछ करना चाहते है? प्रदेश के विकास का संकल्‍प लें, प्रदेश का विकास होगा तो मोदी के भारत का तो अपने आप ही विकास हो जाएगा, लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य की बातों को यहां आना चाहिए और इन्‍होंने मोदी का संकल्‍प लिया है, गरीबों के लिए, युवाओं के लिए, किसानों के लिए और महिलाओं के लिए ये मोदी जी की गारंटी है, संकल्‍प लिया है कि इनको आगे बढ़ाएंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या हम यह नहीं कह सकते कि युवाओं को 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किसने किया था? मोदी जी ने किया था कि नहीं किया था, अगर मोदी जी ने किया तो वह गारंटी उनकी असत्‍य में तब्‍दील हो गई, किसानों की दोगुना आय करने का वादा किया था कि नहीं किया था, आप भी थे उस समय सदन में.

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल - गारंटी दी और पूरी हुई.

          श्री रामनिवास रावत - हुई, तो लागत कितनी बढ़ी, अगर आप ये कह रहे तो मुझे कुछ कहने की आवश्‍यकता नहीं है. किसानों की आय दोगुनी करने की गारंटी दी थी, जो नहीं हुई, ये भी मोदी का सबसे बड़ा झूठ था.

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल - इसके लिए बहस करने को तैयार है.

          श्री रामनिवास रावत - आज लागत कितनी बढ़ गई, जो खाद का कट्टा डीएपी.

          श्री उमाकांत शर्मा - मैं प्रतिपक्ष के नेता और सदन से निवेदन करता हूं, आज कांग्रेस के महान नेता नरसिम्‍हा राव जी को नरेन्‍द्र मोदी जी ने भारत रत्‍न प्रदान किया है, विभूषित किया है. हम सबको मिलकर चरण सिंह के लिए भारत रत्‍न देने के लिए, नरसिम्‍हा राव जी को भारत रत्‍न देने के लिए धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पारित करना चाहिए और कांग्रेंस को प्रस्‍ताव रखना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय - बस उमाकांत जी, जानकारी के लिए धन्‍यवाद.

          श्री रामनिवास रावत - हो गया पंडित जी, आप थे नहीं. अध्‍यक्ष महोदय, महिलाओं की बात आई महिलाओं के लिए इस प्रदेश में आप जो बैठे हैं, आप जीते हैं, लाड़ली बहनाओं का योगदान अधिक है.

          अध्‍यक्ष महोदय - रामनिवास जी, थोड़ा संक्षेप इसलिए करना पड़ेगा कि ये कल से चल रहा है, आज मैक्जिमम् करना है, इसमें सी.एम. का जवाब भी होगा.

          श्री रामनिवास रावत - जी, अध्‍यक्ष जी, जल्‍दी कर लेता हूं. उन गरीब लाड़ली बहनाओं के साथ धोखा किया है कि नहीं किया, आज मेरे प्रश्‍न में था आपने तीन हजार रुपए देने का वादा किया, आपने स्‍वीकार किया है कि हां लेकिन देंगे नहीं न ही विचार है, तो ये भी उन लाड़ली बहनाओं के साथ धोखा है, असत्‍य है, फरेब है आपका, आपने उनसे असत्‍य बोलकर वोट लिये हैं .

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश के ही मुख्‍यमंत्री ने, प्रदेश की ही सरकार ने दो लाख प्रतिवर्ष रोजगार देने का वादा किया था. मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में रोजगार के मामले में शून्‍य की स्थिति है, जो रोजगार कार्यालयों में दर्ज हैं, लगभग 34 लाख लोगों के नाम अंकित हैं, उनमें से पिछले पांच वर्षों में एक भी व्‍यक्ति को रोजगार सहकारिता में और शासकीय विभागों में नहीं दिया गया है और जो परीक्षाएं इससे हटकर कराई हैं, उन परीक्षाओं में आज तक उनके परिणाम नहीं निकले हैं. चाहे पटवारी परीक्षा का परिणाम हो, पहले तो जगह ही नहीं निकलती हैं, जगह निकलती हैं, तो परीक्षाएं नहीं होती हैं, परीक्षाएं होती हैं, तो परिणाम नहीं निकलते हैं, परिणाम निकल गया, इंटरव्‍यू भी हो गया तो पता लगता है कि इंटरव्‍यू का परिणाम आये, तब तक यह आ जाता है कि फलानी परीक्षा के, फलाने पेपर में बेईमानी हुई और सारी परीक्षाएं निरस्‍त हो गईं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह हो क्‍या रहा है, यह तो मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसा हो क्‍यों रहा है और युवाओं के साथ युवाओं के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ क्‍यों की जा रही है? इसी के साथ-साथ माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो यह भी कहूंगा कि किसी भी वर्ग के साथ न्‍याय नहीं किया जा रहा है, चाहे एस.सी. का हो, चाहे एस.टी. का हो चाहे ओ.बी.सी का हो, जिस तरह से अनुसूचित जनजाति विकास का पैसा डायवर्ट करके महिला बाल विकास में दे दिया, उसी तरह से ओ.बी.सी. के संबंध में कहूंगा मेरे पास एक विज्ञापन है, सभी मेडीकल कॉलेज में पूर्णकालिक डीन की नियुक्ति, इस तरह से यह एक विज्ञापन जारी हुआ है और इसमें सीधी भर्ती के पद है, यह अभी जारी हुआ है, चिकित्‍सा शिक्षा विभाग के अधीन मध्‍यप्रदेश के विभिन्‍न चिकित्‍सा महाविद्यालयों में अधिष्‍ठाता के पद पर नियुक्ति हेतु विज्ञापन, दिनांक- 06/02/2024 को यह जारी हुआ है, इसमें 12 पद हैं.

 

3.57 बजे     {सभापति महोदय (श्री लखन घनघोरिया) पीठासीन हुए}

          संसदीय कार्यमंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- राम जी गये और लखन जी आ गये(हंसी)

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय सभापति महोदय, इसमें 12 पद हैं, 12 पद सीधी भर्ती के हैं और रोस्‍टर भी दिया हुआ है. इसमें 12 पद हैं और सीधी भर्ती के पद हैं, इनमें रोस्‍टर लागू होना चाहिये, इसमें तीन पद एस.टी. के हैं, तीन पद एस.सी. के हैं और अनाराक्षित पद 12 हैं, इसमें ओ.बी.सी. गायब है और ओ.बी.सी. गायब ही नहीं है, इसमें अगर ओ.बी.सी. एलीजेबल भी होगा तो उसको सामान्‍य में ट्रीट नहीं किया जायेगा. यह पूरे प्रदेश के ओ.बी.सी.चिकित्‍सकों के साथ अन्‍याय है, इस तरह का अन्‍याय और इस तरह का काम सरकार कर रही है कि उन्‍होंने ओ.बी.सी. को गायब ही कर दिया है. मैं नहीं समझता हूं कि यह कोई प्रमोशन के पद तो है नहीं, यह सीधी भर्ती के पद हैं, रोस्‍टर आपका इसके हिसाब से बनना चाहिए और यह पूरा विज्ञापन है. माननीय सभापति महोदय, यदि आप कहें  तो मैं पटल रख दूं. यह पूरे प्रदेश के ओ.बी.सी. वर्ग का अपमान है, इसी तरह से सारे पदों में ओ.बी.सी. के नाम पर भर्तियों को रोक रहे हैं और यह भर्ती कर रहे हैं, ओ.बी.सी. के साथ अन्‍याय किया जा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, आपने गारंटी दी थी, आपने कहा था कि युवाओं को हम रोजगार देंगे, युवाओं को रोजगार तो दिया नहीं. आपने कर्मचारियों के लिये घोषणा की थी, संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलेगा, आपने दिया क्‍या?. श्री कैलाश विजयवर्गीय जी चले गये, सुनने से कोई फायदा नहीं इसलिये(हंसी)

          श्री उमाकांत शर्मा -- अरे विजयवर्गीय जी कैलाश में हमेशा स्‍थापित रहेंगे.

          श्री रामनिवास रावत -- अब आप बैठ जाईये.

          सभापति महोदय -- श्री उमाकांत जी बैठ जायें.

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय सभापति महोदय, नेशनल पेंशन स्‍कीम का लाभ सभी को दिया जायेगा, नियमित पदों पर भर्ती में 50 प्रतिशत रिजर्वेशन संविदा  कर्मचारियों के लिये किया जायेगा, संविदा कल्‍चर खत्‍म करके सबको नियमित किया जायेगा. यह सब बड़ी-बड़ी बातें, अनुकंपा नियुक्ति भी यह सब बड़ी बड़ी बातें कर्मचारियों के बीच में कहीं, संविदा कर्मचारियों के बीच में कहीं और दैनिक वेतन भोगियों के बीच में कहीं, लेकिन आज बजट आया, अभिभाषण आया, एक भी बात की चर्चा, एक भी बात का उल्‍लेख आपने नहीं किया है, इससे बड़ा असत्‍य और क्‍या हो सकता है.                 

            माननीय सभापति महोदय, इसमें दिया हुआ है कि विगत 9 वर्षों में मध्‍यप्रदेश के 2 करोड़ 30 लाख लोग गरीबी से बाहर आये हैं, अब इसको मैं क्‍या मानूं. आप लोगों से भी कह रहा हूं, आप भी सोचें इसको क्‍या मानोगे. 5 करोड़ 35 लाख लोगों को आप अन्‍न योजना के तहत खाद्यान्‍न दे रहे हो, यह मोदी जी की स्‍पीच में है और पिछले राज्‍यपाल के अभिभाषण में है, 2 करोड़ को आप बाहर ला रहे हो, 5 और 2 सात तो यही हो गये साढ़े सात, फिर ऐसे कितने हैं जो गरीब नहीं है, आपके पूरे के पूरे गरीब थे क्‍या, यह कितना बड़ा असत्‍य है. माननीय सभापति महोदय, गरीबी निरंतर गरीबी बढ़ती जा रही है, अमीरी निरंतर अमीरी बढ़ती जा रही है, इन्‍होंने अर्थव्‍यवस्‍था को बिलकुल बिगाड़ दिया है. पूरे प्रदेश का 90 प्रतिशत धन केवल 10 प्रतिशत लोगों के पास है और 90 प्रतिशत लोग आज भी गरीब हैं. माननीय सभापति महोदय, अतिथि विद्वानों के बारे में इन्‍होंने कहा था कि हम उनको आरक्षण देंगे और आगे जो भर्ती होगी उसमें भी आरक्षण प्रदान करेंगे. माननीय सभापति महोदय, खिलाडि़यों का एक बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है, प्रदेश के खिलाड़ी प्रदेश छोड़कर भाग रहे हैं, क्‍यों भाग रहे हैं, 96 खिलाडि़यों ने मध्‍यप्रदेश छोड़ दिया, क्‍यों छोड़ दिया क्‍योंकि पहले जो रोजगार की गारंटी खिलाडि़यों को दी जाती थी वह गारंटी देना खत्‍म कर दिया. आप केवल लगे हैं प्रदेश में दारू बिकवाने में, प्रदेश में जुंआ सट्टा चलवाने में, प्रदेश में अवैध खनन करवाने में और उनको संरक्षण देने में लगे हुये हैं. माननीय सभापति महोदय, आज  जितने भी नेशनल हाइवे हैं और जितने भी स्‍टेट हाइवे हैं सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है एक रिट में यह दिनांक 04.10.2023 को दिया है प्रदेश के मुख्‍य सचिव, प्रमुख सचिव, वाणिज्‍यकर आबकारी आयुक्‍त और कई कलेक्‍टरों को नोटिस जारी किये हैं कि आपके यहां जितने भी नेशनल हाइवे हैं वहां शराब की दुकानें चल रही हैं इन्‍हें बंद कराया जाये, प्रदेश सरकार के लोग जवाब नहीं दे रहे हैं जिससे दुर्घटनायें हो रही हैं, निरंतर एक्‍सीडेंट हो रहे हैं, यह बड़ी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है. प्रदेश में मेरे ही प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया था कि बेरोजगारों की संख्‍या निरंतर बढ़ती जा रही है और कई विषय ऐसे हैं, सभी लोगों ने अपनी-अपनी बात कही है. बढ़ते अपराध चिंता का विषय है, महिला अपराध प्रतिदिन 9 महिलाओं के साथ बलात्‍कार हो रहा है, प्रदेश अपराधों के लिये जाना जाता है और अपने यहां यह स्‍वास्‍थ की ही बात कर रहे थे कि भाजपा के आने के पहले इस प्रदेश में कुछ था ही नहीं. न तो सिंचाई थी, न स्‍कूल थे. मैं समझता हूं कि जितने भी लोग पढ़कर आये होंगे...

          सभापति महोदय--  माननीय रावत जी, 25 लोग हैं, थोड़ा जल्‍दी करें.

          श्री रामनिवास रावत--  चलो मैं खत्‍म कर देता हूं. महंगाई की तरफ जरूर जाना चाहूंगा. माननीय प्रहलाद जी बैठे हुये हैं और तुलसी तो उस समय इधर ही थे. वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री भाषण दिया करते थे तो स्‍पष्‍ट कहते थे, उस समय मुद्रा की वेल्‍यू हुआ करती थी एक डॉलर के 63 रूपये और उन्‍होंने स्‍पष्‍ट कहा था कि जो देश का मुखिया, जो राष्‍ट्र का मुखिया अपनी मुद्रा की कीमत को बहनों और भाईयों अपनी मुद्रा की कीमत को स्थिर नहीं रख सके क्‍या उसको रहने का अधिकार है और सब बोलते थे नहीं. आज प्रहलाद भाई मुद्रा की कीमत क्‍या है, एक डॉलर के 84 रूपये हो गये, यह भी मोदी का सबसे बड़ा असत्‍य था और आज उनको क्‍या कहें, प्रधानमंत्री हैं देश के, सम्‍मानीय हैं, लेकिन कम से कम उन्‍होंने जिन चीजों को कहा उन्‍हीं चीजों का आत्‍मावलोकन कर लें और महंगाई कम करने का कहा, रोजगार देने का कहा, मुद्रा स्थिर रखने का कहा, देश में खुशहाली लाने का कहा,भ्रष्टाचार मिटाने को कहा आज भ्रष्टाचार चरम पर है. भ्रष्टाचार के मामले में भी आज प्रदेश चौथे या पांचवें नंबर पर है. माननीय सभापति महोदय, गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये देने को कहा वह नहीं किया. आपने समय दिया उसके लिये धन्यवाद और आशा करता हूं कि सत्ता पक्ष के सदस्य भी कुछ बातें जो विपक्ष की हैं उन पर उन्हें भी सहमत होना चाहिये. जिस तरह से हमने विनियोग विधेयक की बातें मान लीं उसी तरह से आपसे भी अनुरोध करेंगे कि किसानों को 2700 रुपये क्विंटल गेहूं और 3100 रुपये क्विंटल धान खरीदेंगे. धन्यवाद.

          श्री फूल सिंह बरैया(भाण्डेर) - माननीय सभापति महोदय, माननीय राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के विरोध में मैं खड़ा हूआ हूं. पूरा भाषण तो उन्होंने नहीं पढ़ा था लेकिन लिखा हुआ भाषण है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत लोकतंत्र की माता है और यह सदन लोकतंत्र का मंदिर है. यह सत्य है लेकिन संविधान को कहां छोड़ देते हैं. संविधान और संविधान निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर का नाम उन्होंने नहीं लिया कि दरअसल वे क्या हैं. संविधान और बाबा साहेब अम्बेडकर से बी.जे.पी. की सरकार को नफरत क्यों है. इसके बारे में भी उन्हें बताना चाहिये. आगे इसमें पिछड़ा वर्ग जो मध्यप्रदेश में 50 परसेंट है. इसकी बात इस सदन में कभी नहीं हुई. सिर्फ बाबा साहेब अम्बेडकर का फोटो लगाने से ही काम नहीं चलेगा लेकिन इस सदन से जहां से लोकतंत्र चलता है. आप लोग तो यह भी कहते हैं कि वे दलितों के नेता हैं. क्या संविधान अकेले एस.सी.,एस.टी. के लिये ही लिखा है. वह संविधान पूरे देश के लिये लिखा है. सभी वर्गों के लिये लिखा है और सभी वर्गों के लिये लिखा है तभी आप टाई,सूट पहने हुए हैं. मैं कहना चाहूंगा कि पिछड़े वर्ग की चर्चा इसमें कभी नहीं हुई कि पिछड़े वर्ग का विकास होना चाहिये या नहीं होना चाहिये. भारतीय संविधान भाग-16,अऩुच्छेद-340 में लिखा है. बाबा साहेब अम्बेडकर ने अपनी कलम से लिखा है जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी. जब तक यह कानून लागू नहीं होगा. देश का  लोकतंत्र कभी मजबूत नहीं होने वाला है. यह फार्मेल्टी है चलती रहेगी लेकिन देश का लोकतंत्र मजबूत होने वाला नहीं है.

          डॉ.सीतासरन शर्मा - यह संविधान में कहां लिखा हुआ है.

          श्री फूल सिंह बरैया - संविधान की थीम में लिखा हुआ है.(xx)

          श्री उमाकांत शर्मा - (xx)       

            (..व्यवधान..)

          सभापति महोदय - आप लोग कृपया बैठें. इसको रिकार्ड न करें.

          श्री फूल सिंह बरैया -  (xx)    

            श्री उमाकांत शर्मा -  (xx)

            सभापति महोदय - कृपया बैठ जाएं. यह कुछ नहीं लिखा जायेगा.

            श्री उमाकांत शर्मा - बाबा साहेब का उदाहरण देने का इनको कोई अधिकार नहीं है.

          श्री फूलसिंह बरैया -- गाय की जिंदगी बचाने की चर्चा इस पूरे अभिभाषण में नहीं है. सड़कों पर गाय मर रही है. गाय के कारण किसान मर रहा है और गाय सड़कों पर मर रही है. इसकी हत्‍या की जिम्‍मेदारी कौन लेगा, इसकी हत्‍या की जिम्‍मेदारी सरकार की है. यही नहीं, बेरोजगारी राज्‍य का नहीं, देश का बड़ा विषय है, बेरोजगारी के विषय में कोई चर्चा अभिभाषण में नहीं है. बेरोजगारी के अलावा महंगाई एक बहुत बड़ा विषय है, महंगाई के ऊपर इस अभिभाषण में कोई चर्चा नहीं है. यही नहीं, किसान के विषय हैं, जो आपके मेनीफेस्‍टो में थे, 3100 रुपये में धान खरीदी, 2700 रुपये में गेहूँ खरीदी, यह नहीं हो रहा है. यही नहीं, गैस सिलेण्‍डर 450 रुपये, इसकी इसमें कोई चर्चा नहीं है. उसको बड़ी होशियारी से इन्‍होंने गुमराह करके कहा है कि पात्र बहनों के लिए है. पात्र बहनें कौन सी हैं. यही नहीं, घर का सपना साकार हो रहा है. हम लोग क्षेत्र में जाते हैं तो क्षेत्र में लोग हमको कहते हैं कि हमें रहने को जगह नहीं है, हमें प्‍लॉट दिया जाए. यही नहीं, बिजली एक बड़ा संकट हो गया है. यह सरकार के षड्यंत्र के कारण है. ट्रांसफार्मर फूंक देते हैं और कहते हैं, तुम हमको वोट दो तो तुम्‍हारा रात में ही रख देंगे. ये ट्रांसफार्मर की राजनीति हो रही है. इसमें ट्रांसफार्मर के ऊपर कोई चर्चा नहीं है. कानून-व्‍यववस्‍था, कानून-व्‍यवस्‍था इतनी फेल है कि इनके थानों में चले जाइये, बिना पैसे के गरीब लुटकर के वहां से नहीं आ रहा है. यही नहीं, इसमें एक बहुत बड़ी चर्चा है कि अनुसूचित जनजाति के भाई-बहनों के लिए इन्‍होंने क्‍या कहा, मालूम है, मदिरा निर्माण का हैरीटेज बना दिया है. मदिरा निर्माण का मतलब है, मदिरा निर्माण तो वे वैसे करते थे, लेकिन अब खुले में मदिरा निर्माण होगा यानि ट्राइब की महिला, पुरुष, इनकी जिंदगी बर्बाद करने का सरकार का एक बड़ा षड्यंत्र है. 78 प्रतिशत महिलाओं के बारे में कहा गया है कि इनके खाते खुले हैं, पर क्‍या उन खातों में पैसे डले हैं, इसकी कोई चर्चा नहीं है. इसमें कहा गया है कि 2 करोड़ 30 लाख लोग गरीबी की रेखा से बाहर हो गए हैं. मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि बीपीएल की सूची से नाम काटे जा रहे हैं और जिनके नाम जुड़ना है, उनके नाम जोड़ने से मना कर देते हैं. यही नहीं, गरीबी, अगर वास्‍तव में गरीबी को हटाना चाहते हो तो इनका क्‍या षड्यंत्र का नारा है, गरीबी हटाना होता है बराबर, गरीबों को ही हटा दो, यह इसका मतलब है. गरीबी बढ़ी है, गरीबी कैसे बढ़ी है, यह मैं आपको बताना चाहता हूँ कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जो इसमें वित्‍तीय व्‍यवस्‍थाएं थीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वित्‍तीय विकास की जो व्‍यवस्‍था थी, अंतव्‍यवसायी योजना, रानी दुर्गावती योजना, पवनपुत्र योजना, ये सारी योजनाएं इन्‍होंने खत्‍म कर दी हैं. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जो लोग हैं, उनको सब्‍सिडी वाली कोई भी योजना अभी नहीं बची है. जो योजना है, इसमें सब्‍सिडी नहीं देते हैं. औद्योगिक भूखण्‍डों में इनको कोई आरक्षण नहीं है. इनको शांत करने के लिए क्‍या कहा जाता है, मालूम है, अरे, हम तो संत रविदास स्‍मारक बना रहे हैं. संत रविदास स्‍मारक और सामुदायिक भवन का निर्माण कर रहे हैं. मध्‍यप्रदेश में 30 जिले अनुसूचित जाति बाहुल्‍य जिले हैं, ऐसा ये बोलते हैं और उसमें असत्‍य की कहानी क्‍या है कि 30 जिले आप छोड़िए, एक बात सुन लीजिए रविदास जी के नाम की कि 30 जिलों में ये बनाएंगे कि नहीं बनाएंगे, वह तो छोड़िए, मुख्‍यमंत्री जी ने 26 जनवरी, 2009 को उज्‍जैन में घोषणा की थी, क्‍या घोषणा की थी कि महू में बाबा साहेब आम्‍बेडकर स्‍मारक जिस तर्ज पर बना है, उसी तर्ज पर हम उज्‍जैन के क्षेत्र में रविदास स्‍मारक बनाएंगे और मैं आपको कहना चाहता हूँ कि असत्‍य का कितना बड़ा पुलिन्‍दा है इनका, ऐसी बातें भाषण में लिखवा देते हैं और राज्‍यपाल महोदय के मुँह से बुलवा रहे हैं. उसमें क्‍या लिखा हुआ है कि ये सारे काम हम कर रहे हैं, जबकि उज्‍जैन के मामले में महू की तर्ज पर बनने वाला रविदास स्‍मारक 15 वर्ष हो गए हैं, एक इंच स्‍मारक नहीं बना है और अध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं है, मैं आपसे इस बात को कहना चाहता हूँ कि...(व्‍यवधान)...

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) - अध्‍यक्ष महोदय, सागर में बन रहा है, इनके संज्ञान के लिए बोल रहा हूँ.

          श्री फूल सिंह बरैया - उज्‍जैन में बन गया क्‍या ? वहां एक इंच भी काम नहीं हुआ है, 15 वर्ष हो गए हैं.

          राज्‍यमंत्री, वन (श्री दिलीप अहिरवार) - बरैया जी, आप थोड़ा यह बता दीजिये कि बाबा साहेब अम्‍बेडकर की महू में जो मूर्ति बनवाई है, वह किसने बनवाई है.   

          श्री फूल सिंह बरैया - अध्‍यक्ष महोदय, इन 15 वर्षों में एक इंच भी निर्माण नहीं हुआ है. राज्‍यपाल महोदय जी के अभिभाषण में यह असत्‍य बातें लिखवाकर इस तरह से प्रचारित करते हैं, इन वर्गों को फंसाते हैं. लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि जो हमारे महापुरुषों का अपमान करते हैं, हम उस अपमान को सहन नहीं करेंगे. आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच) - माननीय सभापति महोदय, मैं राज्‍यपाल जी के अभिभाषण की सत्‍यता व्‍यक्‍त करने के लिए खड़ा हुआ हूँ. मैं अभिभाषण का समर्थन करता हूँ और हृदय की गहराइयों से मान्‍यवर राज्‍यपाल जी को धन्‍यवाद देता हूँ. यह निश्चित ही बड़ी प्रसन्‍नता की बात है कि जिस राम राज्‍य की कल्‍पना भाषण में की गई है, वह राम राज्‍य के लिए अभी कई लोगों ने कई प्रकार की बातें की हैं. हम सब जानते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी थे, जो राम को काल्‍पनिक बताया करते थे, राम सेतु को काल्‍पनिक बताया करते थे, न्‍यायालय में जाया करते थे. मगर हम सब देखते हैं कि राम नाम की अद्भुत गरिमा, पानी पर पत्‍थर तैरे, झुका समुन्‍दर सेतु बनाया और राम जी का मंदिर बना है, तो निश्चित ही यह देश राम का है, परिवेश राम का है. जन्‍मभूमि पर मंदिर बने, यह आदेश भी प्रभु श्री राम का है. दिनांक 5 अगस्‍त को न्‍यायालय के निर्णय के बाद, एक देवपुरुष आया, जिसने अयोध्‍या में प्रभु श्री राम का भूमिपूजन किया. आज वहां भव्‍य मंदिर बना है, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्‍ठा वहां हुई है, तो पूरा देश राममय हुआ है. श्री राम के जीवन से सबको प्रेरणा लेना चाहिए, राम का जीवन हमारे देश का एक आदर्श है. इसलिए हम देख रहे हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने आज ''सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और सबका प्रयास'' से भारत का सर्वांगीण विकास करने का संकल्‍प लिया है. मैं तो उस समय एक कार सेवक के रूप में वहां गया हुआ व्‍यक्ति था, जब सरयू का पानी वहां लाल हो गया था. हम जब गए थे, तब हमने यह देखा था कि उस समय जिस प्रकार की बातें होती थीं, लोग भगवा के लिए लोगों को डण्‍डे मारा करते थे, आज हर घर पर भगवा फहरा हुआ है, राम जी का झण्‍डा फहरा हुआ है, यह राम जी का ही कमाल है और श्री राम के कमाल को कोई नकार नहीं सकता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, यह देश राम का है, परिवेश राम का है. हम सब जानते हैं और आज राम राज्‍य आया है. राम राज्‍य में सब सुखी हैं, सबको साथ लेकर चलने की कल्‍पना यदि किसी ने की है तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी और प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने की है. उन्‍होंने कहा है कि मध्‍यप्रदेश की धरती पर जहां भगवान राम के चरण पड़े हैं, वहां राम पथ बनाया जायेगा. यह भगवान राम और कृष्‍ण का देश है, जहां-जहां कृष्‍ण ने अपने पग रखे हैं, वहां-वहां भी लीलाएं होंगी और उन स्‍थानों को भी संवारा जायेगा. हम दूर क्‍यों जाएं ? यह महाकाल की नगरी जहां पर शिक्षा प्राप्‍त करने के लिए भगवान कृष्‍ण आए, सुदामा आए, उन्‍होंने शिक्षा प्राप्‍त की. आज मैकाले की शिक्षा प्रणाली की वजह से भारत की संस्‍कृति पर प्रहार हुआ है. हम वापिस से सीएम राइज स्‍कूल या पीएम श्री के माध्‍यम से उन बच्‍चों को वह शिक्षा दे रहे हैं, जो भारतमाता की माटी के साथ जुड़ें. हम सब जानते हैं कि देश में एक नरेन्‍द्र वह था, जो कहा करता था कि मेरे साहसी युवकों और युवतियों यह विश्‍वास रखो कि आप ही सब कुछ हो, महान् कार्य करने के लिए इस धरती पर आए हो कि अगर वज्र भी गिरे तो निडर होकर खड़े हो जाना. सफलता आपके कदम चूमेगी. आज सफलता भारत के हर व्‍यक्ति के कदम चूम रही है. भारत का मान आज पूरे विश्‍व में बढ़ रहा है. मैं इसके लिए आप लोगों को बहुत साधुवाद देता हूँ. देश के प्रधानमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ. हमने वह 10 वर्षों देखे हैं और यह 10 वर्षों भी देखे हैं, इन 10 वर्षों के कार्यकाल में आज भारत आर्थिक दृष्टि से पांचवें स्‍थान पर आया है और वह इसीलिए आया है कि हमारी नीति भी साफ है और हमारी नीयत भी साफ है. आज हमारे प्रधानमंत्री जी का गांव चलो अभियान हो या देश को खुशहाल बनाने का मामला हो, उसमें हमारी सरकार आगे रही. अभी हमारे कांग्रेसी बंधु कह रहे थे कि गरीबों के लिए काम नहीं किया. हमने गरीबों, सवर्णों, ओबीसी सभी के लिए काम किया है. हम सभी को साथ लेकर चलने की योजना बनाते हैं. राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में आया है कि हमने सभी की उन्‍नति करने का काम किया है. हमारी सरकार समाज के सभी वर्गों के लिए योजनायें बनाती है और सरकार की योजनाओं के माध्‍यम से समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे हुए व्‍यक्ति को उसका लाभ पहुंचाती है.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे पंडित दीन दयाल जी कहते थे कि "चलो जलायें दीप वहां, जहां अभी-भी अंधेरा है." अभी हमारा जो अंतरिम बजट आया है, राज्‍यपाल जी का अभिभाषण आया है, यह प्रदेश की दशा और दिशा बता रहा है. देश को पुन: विश्‍वगुरू के स्‍थान पर ले जाने का काम कर रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, किसानों को उनकी सम्‍मान निधि लगातार मिल रही है. पहले गरीब किसान की सुध लेने वाला कोई नहीं था. किसानों को प्रधानमंत्री जी एवं मुख्‍यमंत्री जी की ओर से जो राशि मिलती है, ऐसा पहले कभी किसी ने नहीं सोचा था. किसानों की फसल समर्थन मूल्‍य पर खरीदी जा रही है.

          माननीय सभापति महोदय, देश के लिए बलिदान होने वाले शूरवीरों और जीवन में विधान के प्रति, भावी पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए, "वीर भारत संग्रहालय" की स्‍थापना का निर्णय, एक अभूतपूर्व निर्णय है. हम सभी जानते हैं कि मैं, जिस परिवार से आता हूं, हमारे पूर्वज सिंधिया जी के समय उत्‍तरप्रदेश से चलकर मध्‍यप्रदेश आये थे. हमारे पूर्वजों को अंग्रेजों ने फांसी के फंदे पर चढ़ाया था लेकिन उनका कोई स्‍मरण नहीं करता था. मैंने पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज जी से एक पुस्‍तक का विमोचन करवाया था. आज देश के प्रधानमंत्री जी, जिन्‍होंने देश के लिए बलिदान दिया है, उनके इतिहास को पढ़ रहे हैं और पाठ्यक्रमों में लागू कर रहे हैं. इतिहास वीरों का पढ़ा जाता है न कि कायरों का.

          माननीय सभापति महोदय, सड़कों का जाल प्रदेश में फैला है. लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण हो रहा है. 24 सड़कों की परियोजनायें लगातार चल रही हैं.

          माननीय सभापति महोदय, गरीब मजदूर जो इंदौर की हुकुमचंद मिल के श्रमिक जो लंबे समय से मांग कर रहे थे, उन्‍हें आज प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में 224 करोड़ रुपये का भुगतान हो रहा है, इसके लिए सरकार साधुवाद की पात्र है.

          माननीय सभापति महोदय, वर्तमान में अमृतकाल चल रहा है. हम आजादी के 75 वर्ष पूरे कर रहे हैं, इसमें हमने किसी की बुराई नहीं की है और अंतरिम बजट के रूप में दूरदर्शी, सर्वस्‍पर्शी, सर्वव्‍यापी बजट का प्रावधान, राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में उल्‍लेखित हुआ है. प्रधानमंत्री जी ने जिस विकसित भारत की कल्‍पना की है, उसके लिए हम गांव-गांव जा रहे हैं. विकसित भारत में हम जातिवाद से ऊपर उठकर सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और सबके प्रयास से भारत को आज हम पुन: विश्‍वगुरू बनाने की ओर ले जा रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि हम सभी जातियों को भूलकर, जो महिला है, देश की आधी आबादी है, उसे आगे बढ़ाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं. राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में महिलाओं का भी उल्‍लेख किया है. प्रधानमंत्री जी बहनों को स्‍व-सहायता समूहों के माध्‍यम से लखपति बना रहे हैं. हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने प्रदेश की बहनों के लिए बनी, लाड़ली बहना की योजना आज लगातार चालू है. ऐसी कोई बहन नहीं है जिसके खाते में पैसा न गया हो. हमने बेटी के पांव पूजे, हमने कहा बेटी को आने दो. बीच के कालखण्‍ड में बेटियों की संख्‍या कम हो गई थी.

          माननीय सभापति महोदय, गौ-माता जो पूर्व में इधर-उधर घूमती थी, उनके लिए हमने गौ-शालाओं की व्‍यवस्‍था की है, वहां उनके चारे-पानी की व्‍यवस्‍था की है. हमने गौ-माता के संरक्षण की योजना लगातार बनाई है. माननीय सभापति महोदय, आज मध्‍यप्रदेश में महिलाओं को नौकरी में हमने पुलिस में 33 प्रतिशत का आरक्षण दिया है, शिक्षा में 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया है, राजनीति में भी 50 प्रतिशत का आरक्षण देकर हमने बहनों का सम्‍मान बढ़ाया है. मुस्लिम बहनों को तीन तलाक कहकर छोड़ दिया जाता था आज तीन तलाक में मुस्लिम बहनों का भी सम्‍मान करने का काम किया है. निश्चित ही जब इस देश की मात्र शक्ति सक्षम होगी तो यह प्रदेश भी सक्षम होगा और यह देश भी सक्षम होगा. युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए देश के प्रधानमंत्री जी और प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी लगे हुए हैं. मान्‍यवर ओमप्रकाश सखलेचा जी ने अभी बताया था कि एमएसएमई के माध्‍यम से हमने उद्योग खोले हैं. नीमच में औद्योगिक क्षेत्र में कई उद्योग खुले हैं जिनमें 100-100, 200-200 बेरोजगारों को रोजगार मिला है. देश के प्रधानमंत्री जी आज रोजगार वालों को रोजगार के लिए लोन दे रहे हैं उसमें 33 प्रतिशत की सब्सिडी दे रहे हैं. मैं युवाओं से आह्वान करूंगा कि नौकरी के पीछे न भागते हुए वह भी उद्योग लगाएं. 10 लोगों को नौकरी पर रखने का काम करें तभी तो यह देश आगे बढ़ेगा. निश्चित ही आज युवाओं को चांस मिल रहे हैं. युवा हर क्षेत्र में चांद पर जा रहा है, हमारे वैज्ञानिक चांद पर पहुंचे हैं. मैं इसके लिए भी धन्‍यवाद दूंगा क्‍योंकि उनको पीठ थपथपाने वाले हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी दु:ख में सुख में सबके साथ खड़े रहते हैं और उन्‍होंने लोगों के दिलों को जीता है. लोग बार-बार कहते हैं कि इसमें मोदी जी का ही गुणगान है. देश के प्रधानमंत्री जी मोदी जी हैं उन्‍होंने गरीबी मिटाई है, गरीबों को आवास दिया है, जो गरीब इलाज के लिए इधर, उधर भटकता था उसकी जेब में पांच लाख रुपए का आयुष्‍मान कार्ड रखा है. उसे अपने जेवर गिरवी नहीं रखना पड़ रहे हैं, उसे अपनी जमीन गिरवी नहीं रखना पड़ रही है. वो जाता है पांच लाख रुपए का इलाज करवाकर आता है और घर पर रहता है. गरीब की थाली आज खाली नहीं है. 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्‍क अन्‍न दिया जा रहा है. जब गरीब के पेट में अन्‍न जाता है जब उसकी बेटी का विवाह होता है तो वह दुआ देता है और मैं अक्‍सर कहता हूं कि

                          ''क्‍या मार सकेगी मौत उसे, औरो के लिए जो जीता है

                            मिलता है जहां का प्‍यार उसे जो गरीब के आंसू पीता है''

यह भारतीय जनता पार्टी गरीबों के आंसू पीने वाली पार्टी है जो कि डबल इंजन की सरकार है. मैं इस बात का गवाह हूं कि नीमज जो कि अभी अंतिम छोर में है यदि हमारे वहां संत रविदास भवन बन रहा है, 50 लाख रुपए आए हैं तो उसको मैं नकार नहीं सकता हूं. मैं जब वर्ष 2003 में शुरू में जी‍तकर आया था तो मैं 18 घंटे में नीमच से भोपाल आया था और आज में साढ़े पांच घंटे में नीमच से भोपाल आता हूं. सड़कों का जाल गांव में भी फैला है, शहरों में भी फैला है, दिल्‍ली, मुम्‍बई कॉरीडोर जैसी सड़कें बनी हैं तो आज पानी का भी संचय हो रहा है. हर घर में नल लगाए जा रहे हैं. पहले हम जाते थे तो बहनें हैण्‍डपम्‍प चलाती थीं, कुएं पर सिर पर बर्तन रखकर लाती थीं. जल जीवन मिशन में आज घर-घर में नल लग रहे हैं. यदि राज्‍यपाल जी इसे भाषण में कह रहे हैं तो क्‍या बुराई कर रहे हैं. पानीदार प्रधानमंत्री जी हैं, पानीदार मुख्‍यमंत्री जी हैं. पानी की व्‍यवस्‍था हर जनता के लिए कर रहे हैं. शुद्ध पानी मिल रहा है, किसान को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है. जो हमारे यहां से गांधी सागर का पानी, नर्मदा जी का पानी कच्‍छ में चला जाता था, गांधी सागर का पानी राजस्‍थान जाता था और अब नीमच और मंदसौर जिले के लोग पानी के लिए तरसते थे. वित्‍त मंत्री जी बैठे हुए हैं उन्‍हें धन्‍यवाद दूंगा कि बड़े-बड़े पाईप डालकर आज मंदसौर में पानी आया कल नीमच में पानी जा रहा है, नीमच के हर खेत में किसान को पानी देने की व्‍यवस्‍था राज्‍यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण में कही है तो तारीफ तो करना ही पड़ेगी. कोई कितना भी, कुछ भी कह ले मुझे वह दिन याद है जब चारागाह की जमीन हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री जी ने बांट दी थी. अब गाय कहां चरने जाए. जो लोग बता कर रहे हैं उनको यह बात भी करना चाहिए कि चारागाह की जमीन बांटने का पाप पूर्व मुख्‍यमंत्री जी ने किया था. मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं क्‍योंकि उन्‍होंने तो हमसे भी कहा था कि चंदा भी खा जाओगे, राम का मंदिर भी नहीं बनाओगे. हमने चंदा भी नहीं खाया और राम का मंदिर भी बनाया है तो हम उस समय भी घर-घर गए थे. सवा रुपया दे दो भैया राम जी के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्‍थर तेरे नाम का. आज राम के घर में जिन-जिन ने भी सहयोग किया है उनका पत्‍थर लगा है. आज राम राज की कल्‍पना यदि देश में हो रही है तो वह अद्भुत कल्‍पना है. निश्चित ही हम आने वाले समय में देख रहे हैं कि अभी तेंदूपत्‍ता संग्राहक जो गरीब है उसकी कोई चिंता नहीं करता था आज उनके लिए चार हजार रुपए प्रति बोरा के मान से मानधन बढ़ाया है. इसके लिए भी मैं राज्‍यपाल जी, मुख्‍यमंत्री जी, वित्‍त मंत्री जी और हमारी सरकार को धन्‍यवाद देता हूं कि वह हर गरीब की चिंता कर रही है. कोई स्‍कूल में जाय तो ड्रेस मिले, पुस्‍तक मिले, मध्‍याह्न भोजन मिले.

          सभापति महोदय -- दिलीप सिंह जी अभी 24 लोग और हैं.

           दिलीप सिंह परिहार  -- सभापति महोदय, बोलने के लिए बहुत कुछ है. यह राज्यपाल जी का पुलिंदा नहीं है यह सत्य का पुलिंदा है जो मध्यप्रदेश को मजबूत बनाएगा देश को पुन: शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाएगा. अगर प्रदेश की सरकारों का मान बढ़ता है तो देश का मान बढ़ता है. कांग्रेस ने गरीबों की चिन्ता नहीं की हमारी सरकार दलित, आदिवासियों के साथ खड़ी थी. पेसा एक्ट हमने लागू किया है. माता सबरी के जूठे बैर भगवान राम ने खाए थे. ऐसे ही आज हमारे यहां महामहिम राष्ट्रपति जी बनी हुई हैं. यह भी देश के प्रधानमंत्री मोदी जी की कल्पना है. अगले पांच सालों में न्यू मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं. नीमच संसदीय क्षेत्र में नीमच, जावरा, मंदसौर में तीन-तीन मेडिकल कॉलेज खुले हैं. अब यहां से डॉक्टर बनेंगे और गरीबों का इलाज भी होगा. आने वाला समय बहुत अच्छा समय है. मोदी जी कह रहे हैं कि अच्छा अनुकूल समय है प्रदेश आगे बढ़ेगा तो देश आगे बढ़ेगा इसलिए प्रदेशों में प्रधानमंत्री जी पैसा भेज रहे हैं. इसीलिए मोदी जी का नाम आता है. मोदी जी का नाम आता है तो कई के सीने पर साँप लोटते हैं, साँप नहीं लोटना चाहिए बल्कि खुश होना चाहिए कि एक ऐसा देवतुल्य प्रधानमंत्री आया है जिसकी वाहवाही भारत की धरती पर भी हो रही है और विश्व की धरती पर भी हो रही है.

          सभापति महोदय, यह जो राज्यपाल जी का अभिभाषण है यह प्रदेश के विकास के लिए नींव का पत्थर सिद्ध हो रहा है इसलिए किसी को चिंता करने की जरुरत नहीं है. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए मैं आपको बहुत धन्यवाद देता हूँ.

          श्री अभय कुमार मिश्रा (सेमरिया) -- माननीय सभापति महोदय, अब आज हम भी देखते हैं कि हम कितना बोल सकते हैं. हमें थोड़ा सा रियाज करने का अवसर मिलेगा. हमें लगता है कि कहीं हम विधान सभा में थियेटर शो तो नहीं करते हैं. रटी रटाई बात आती है. एक ही बात आती है एक ही बात जाती है. यह जीभ की जलेगी और समय के साथ पिछले का नाम लेंगे, उसका समय बीत गया तो उसका नाम ही न लेंगे, नया नाम लेंगे. पूरा का पूरा थिएटर शो है. मैं इस अभिभाषण का न विरोध करता हूँ न समर्थन करता हूँ. जो बातें मुझे उचित लगेंगी मैं वही कहूंगा. माननीय राज्यपाल जी सयाने आदमी हैं, इतने बुजर्ग, वरिष्ठ, भले आदमी हैं. उनको लाकर कुछ भी पढ़वा देते हैं फिर हम लोग उन्हीं का नाम ले-लेकर कोसते रहते हैं, यह हमें अच्छा नहीं लगता है. यहां कम से कम 10 चीजें हैं जो पिछले वाले में 21.12.2023 में बोला गया है. जैसे सीएम राइज, लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाउड स्पीकर, संबल योजना, लोक सेवा गारंटी, डबल इंजन, रामपथ गमन, तेंदूपत्ता. यह सब 12-15 वही चीजें दोहरा दी गई हैं. उन्होंने एक बहुत अच्छी बात कही कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है. यह गाँधी का देश है और यहां के 75-80 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं यह बात सही है. भारत की स्वतंत्रता से लेकर अभी तक के कालखण्ड में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या भाजपा की सरकार रही हो. मुख्य रुप से जो मौका एक ही पार्टी को मिला और हमारे एक ही मुख्यमंत्री 18 वर्ष तक रहे. एक लाड़ली लक्ष्मी हुई और फिर उसकी जो बच्ची हुई वह भी अब शादीशुदा हो गई उसकी भी बच्ची लाड़ली लक्ष्मी हो गई. वह भी मजदूरी कर रही थी उसकी बच्ची भी मजदूरी कर रही है. एग्रीकल्चर बेस्ड एकोनॉमी को हम स्थापित नहीं कर सके. हमने तुष्टीकरण की राजनीति तो की, हमने लोगों को छोटे-छोटे पॉकेट्स दिए, छोटी-छोटी योजनाएं बनाईं. उनकी गरीबी, अशिक्षा का कह सकते हैं दुरुपयोग किया, लाभ उठाया कह सकते हैं या यह कहें कि मदद की. उनकी कमजोरी के चलते देश यहां तक चला आया. जो मूल चीज थी जैसे गांवों में नवाचार होता, कहीं हल्दी की खेती होती, कहीं गुड़ बनता, कहीं मक्का बनता, कहीं आलू से संबंधित स्माल स्केल इंडस्ट्री लगती. उसमें कुछ सब्सिडी दी जाती, उन्हें बिजली में कुछ सब्सिडी दी जाती, कुछ मंडी टैक्स में छूट दी जाती. इस तरह से यदि हमने विकास किया होता तो निश्चित रुप से चीजें बदल जातीं. हम आपको एक उदाहरण दे रहे हैं हमारे यहां गुहिया गांव में प्रदीप कुमार मिश्रा हैं उन्होंने सहकारी बैंक से 1 लाख 25 हजार रुपए लोन लिया था. इसे मैं पटल पर रख रहा हूँ. यह उन्होंने वर्ष 1999 में लिया था. 1 लाख 25 हजार में से उन्होंने 55 हजार रुपए तक जमा भी कर दिया है. अभी इनके ऊपर जो उधारी है वह ब्याज जोड़कर 31 लाख 90 हजार 690 रुपए की है. इसमें इनको छूट देने के बाद 18,66,469 रुपये जमा करने हैं और यह व्‍यक्ति तडप रहा है कि बैंक वालों ने यह कर दिया. अब यह हमारी स्थिति है. हमारे यहां पिछले 3 वर्ष पहले मेरी विधान सभा क्षेत्र में पटना निवासी बृहस्‍पति साहू आत्‍महत्‍या कर लिये थे. जब 12 महीने की कांग्रेस की नई-नई सरकार बनी थी 15 दिन हुये थे, तो हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री जी माननीय शिवराज जी वहां गये थे और खूब फफककर रो पडे थे और जो वह फफककर रोकर आये हैं वह परिवार आज भी फफक रहा है. हमारे अंबा के निवासी विश्‍वकर्मा परिवार जो यहां पर भोपाल में आपने देखा होगा तीन लोग सूदखोरों के कारण मर गये थे. उन सूदखोरों पर कुछ भी नहीं हुआ.

 

 

4.36 बजे                  {अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

            अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हूं कुछ मोटी-मोटी बातें हैं, जल मिशन योजना हमारे यहां चल रही है. सबके यहां एक प्रॉब्‍लम होगी, आप लोग बोल नहीं रहे हैं, ध्‍यान नहीं आ रहा है, जल मिशन योजना में जो पाइप की खुदाई हो रही है, तो हमारी सडकों का जो शोल्‍डर है वह शोल्‍डर भी वह खोद रहे हैं. हमारी रोडों की मजबूती तब रहती है जब शोल्‍डर से उसको सपोर्ट रहता है. अगर शोल्‍डर कमजोर हो जाए तो लोड पडेगा जिससे रोड बाहर आ जाएगा. पानी आएगा, नहीं आएगा इस बात की ग्‍यारंटी नहीं है, कब आएगा, लेकिन पूरे अंतिम किनारे से परमिशन होती है. एक तो परमिशन नहीं ली है और अगर ली भी होगी तो अंतिम किनारे से उसको खोदे जाने का नियम है जो बीच से हो रही है. अगर यहां विधान सभा के माध्‍यम से यह चीजें हो जातीं तो हमारा थोडा सा काम ठीक हो जाता. एक चीज बच जाती कि हमारी राज्‍य सरकार का आर्थिक नुकसान नहीं होता.

          अध्‍यक्ष महोदय, आवारा पशु और गौमाता की बहुत बडी समस्‍या हमारे यहां हैं. तमाम उतने गौशाला नहीं हैं. कहां पर भेजें, पूरा किसान सुबह से एक ही चीज करता है और एक्‍सीडेंट में मारे जा रहे हैं. मैं आपका ध्‍यान इस ओर आकृष्‍ट करूंगा कि कोटे में हर वर्ष, हर माह खाद्य का आवंटन बदल जाता है, तो खाद्य का आवंटन क्‍यों बदलता है ? गरीबी रेखा के नाम पर कि गरीबी रेखा में अगर बदलाव होगा तो हम आवंटन बदल देंगे. वह आवंटन आता है विक्रीत दिनांक के दो महीने बाद, गांव के किसान को, गांव के निवासी को मालूम ही नहीं है कि इस महीने कितना आवंटन आना है और पता लगा कि कल आ रहा है, परसों आ रहा है, दो महीने खाद्यान्‍न नहीं बंट रहा, तीसरे महीने जब आवंटन आया तो जो मनमर्जी हुआ दे दिया, बीच का एक दो किलो एक दो महीने का गायब हो गया. अगर यह वाला खेल न हो तो आटा और आटा की मिल नहीं चल सकतीं. उनकी वेनेलिटी ही नहीं बनेगी. इसी तरह हमारे यहां जो धान सडा दिया जाता है जानबूझकर उपार्जन केन्‍द्रों में और वह फैक्‍ट्रियों को बहुत सस्‍ते दाम पर दे दिया जाता है तो उसकी भी हम बचत कर सकते हैं. कल आपने जो राज्‍य खाद्य आयोग की रिपोर्ट दी है उसमें बहुत सारे आंगन वाडी भवन, पंचायत भवन नहीं बने हैं तो उनको बनाया जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा मैं यह कह रहा हूं कि आपका ध्‍यान रेस हैण्‍ड के उत्‍खनन पर है लेकिन पत्‍थर पर नहीं है. हमारे यहां लाइम स्‍टोन का बहुत अवैध उत्‍खनन है. वह महंगा लाइम स्‍टोन है जिसका उपयोग सीमेंट के लिये किया जाता है, जिसकी रॉयल्‍टी भी ज्‍यादा है. लेकिन उससे गिट्टी बन रही है. दो तीन माइंस ही स्‍वीकृत हैं बाकी सब अवैध चल रहा है, तो एक तो रॉयल्‍टी का नुकसान, दूसरा उसके लिये डिटोनेटर कहां से आ रहा है ? जो लाइसेंस होल्‍डर हैं वह दाएं बाएं से अपना ही डिटोनेटर दे देते हैं, तो आगे चलकर हरदा जैसे कांड की पुनरावृत्ति हो जाएगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, एक और बात बता रहा हूं कि एसएएफ की जो भर्ती होती है जो सुरक्षा कर्मी गार्ड हैं, हमारे यहां अधिकारी कहना नहीं चाहिए, परंतु जो हमारे नये-नये अधिकारी आते हैं, छोटे अधिकारी आते हैं, वह अपने डेकोरम के लिये बंगलों में सजाए हैं. उनको सुरक्षा गार्ड दिया जा रहा है और विधायक हमारा घूम रहा है कि एक सुरक्षा गार्ड हमको मिल जाए. जिसको मिलना चाहिये उसे नहीं मिल पा रहा है. इसी तरह हमारे पुनर्घनत्‍वीकरण में जमीनों की अल्‍टा-पल्‍टी का जो खेल है तो यह कि राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में लोक परिसंपत्ति विभाग का जिक्र किया गया है और बताया गया है कि इसमें हमें काफी लाभ हुआ है, उनके अभिभाषण में यह बात बिल्‍कुल सत्‍य लिखी है और यह लाभ हुआ है. जब हम देख रहे हैं कि उसमें लाभ हो रहा है तो बराबर में हम लोक परिसंपत्ति विभाग को क्‍यों चला रहे हैं जिसमें बहुत कम दर आ रही है और हम जमीन कौडियों के भाव लुटा रहे हैं ? हमारे रीवा, सिंगरौली, शहडोल में एक बहुत बडा शराब घोटाला हुआ. तीन महीने तक फर्जी बैंक ग्‍यारंटी के आधार पर उठाव देते रहे. वह मामला दबा हुआ है, उसमें कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. आखिर तीन महीने तक जब फर्जी बैंक ग्‍यारंटी को मान लिया गया और बाद में चुपचाप उसको बदलवा भी लिया गया तो उसके आधार पर कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई ? हमारे सेमरिया नगर पंचायत में दूध बेचने वाले यादव, सब्‍जी बेचने वाले कुशवाहा, ट्रक चलाने वाले चालकों से बाजार बैठकी के नाम पर इतनी मारपीट होती है. मै अगर जीता हूं, तो सिर्फ  इसी कारण से जीता हूं.  हम  नगर पंचायत से  2900 वोट  की लीड  लेकर  निकले  और उसी से हम  730 वोट से  जीत गये.  तो मात्र यही कारण था कि पूरे नगर पंचायत के लोग जो त्रस्त थे, उन्होंने हमें  एक तरफा वोट किया और इस उम्मीद के साथ  किया कि  यह लूट,मारपीट  बंद होगी. वहां हो क्या रहा है  कि   वहां विभागीय  बैठकी हो रही है.  शासन का एक नियम आया है कि..

          अध्यक्ष महोदय-- अभय जी,  आपका अशासकीय संकल्प भी आने वाला है.  समय का भी ध्यान रखना पड़ेगा ना.

          श्री अभय कुमार मिश्रा--  अध्यक्ष महोदय, एक मिनट. तिमाही या छमाही  वसूली  होनी है, तो वहां प्रायवेट गुण्डों के माध्यम से,  कर्मचारी  हैं नहीं,  उनसे इतनी ज्यादा मारपीट करके  वसूली  की जा रही है और प्रभारी  सीएमओ को,  उसमें हम प्रश्न भी लगा रहे हैं,  चिल्ला भी रहे हैं, तमाम अर्जी भी दे रहे हैं. कोई सुनने वाला नहीं है. कम से कम हमारे डॉ. मोहन यादव साहब  हैं,  तो अब  दूध वाले यादव  तो न मारे जायें,  उनकी तो रक्षा हो जाये, सब्जी वाले कुशवाह तो न मारे जायें,  इतना आपसे निवेदन है.  मैं इसके लिये आपको धन्यवाद कहता हूं, आपने हमें समय दिया, धन्यवाद.

          श्री सिद्धार्थ तिवारी (त्यौंथर)-- अध्यक्ष महोदय,  चूंकि मैं पहली बार  बोल रहा हूं,  लोकतंत्र  के इस मन्दिर को प्रणाम करता हूं.  आसंदी पर बैठे  इतने अनुभवशील हमारे  अध्यक्ष महोदय, आसंदी को प्रणाम करता हूं,  आपको भी प्रणाम करता हूं.  मेरे लिये थोड़ा भावुक पल भी है,  मैं आज तीसरी पीढ़ी   इस हाउस में हूं और यहां  आपकी सेवा करने का मुझे मौका मिल रहा है,  इसके लिये मैं अपने क्षेत्र की जनता   त्यौंथर का भी धन्यवाद  ज्ञापित करता हूं.  हम भारत  मां की आजादी  के  अमृत काल में हैं.  हम इतने भाग्यशाली हैं कि हमें  नरेन्द्र मोदी जी जैसे प्रधानमंत्री मिले हैं, जिन्होंने  5 साल  के संघर्ष के बाद  राम लला को एक भव्य मन्दिर  में स्थापित किया. जिस उत्सव को भारत  ने ही  नहीं, पूरे विश्व ने राम लला के इस उत्सव  को मनाया.  हम  हम सब भाग्यशाली हैं,  मैं इस अपनी पीढ़ी में  अपने आपको भाग्यशाली समझता हूं कि हम इस पीढ़ी में पैदा हुए हैं कि हमें यह दृश्य देखने का मौका मिला  है.  500 साल के    बाद  न केवल  राम लला को  टेण्ट  से  बाहर निकाल करके  एक भव्य मन्दिर में रखा,  बल्कि  नरेन्द्र मोदी जी ने  एक सच्चे राम सेवक के रुप में  7 करोड़ गरीब परिवारों को  भी मढ़ई से निकाल करके पक्के मकान में रखा है. कुछ लोग राम की बात करने  पर यह कह रहे थे कि प्रवचन चल रहा है,  उनके ज्ञान के लिये मैं महात्मा गांधी  जी को यहां पर कोट  करके यह कह दूं और यह बता दूं  कि गांधी जी ने  कहा था कि यह जो कहते हैं कि  राजनीति में  धर्म  की जगह नहीं है,  वह न  तो धर्म को जानते हैं, न तो राजनीति को समझते हैं. यह मैं नहीं कह रहा हूं,  यह महात्मा गांधी जी ने कहा था. हमारे कुछ मित्रों को  जहां आपत्ति है  राम के  नाम से, उनको  यह बता दूं.  मैं  इस राज्यपाल जी के अभिभाषण   के समर्थन में यहां पर बोल रहा हूं  और मुझे गर्व है कि  इसमें हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी ने राम वन गमन पथ पर तीर्थ स्थान,  उसको एक तीर्थ स्थल  के रुप  में विकसित करने का जो एक प्लान बनाया है और जो विकास चालू हो रहा है,  मैं उसके लिये उनको बधाई देता हूं, इस सरकार को बधाई देता हूं  और जो राम के नाम को प्रवचन  बोलते हैं,  एक बार पुनः उनको बताना चाहता हूं कि राम  के उस पथ पर  जाकर के साइंटिफिक स्टडी करें  और देखें कि उस पथ पर  किस तरह की  खनिज सम्पदा  उपलब्ध है. वे  राम के चरणों  की  वैल्यू को समझ जायेंगे,  चूंकि साइंटिफिक  शब्द ज्यादा  इस्तेमाल  करना उनको  आता है.  हमारे कुछ कांग्रेसी मित्र  कम्पेरिजन कर रहे थे  वर्ष 2003 से  2023 का.  उनको भी बता दूं मैं, आंकड़ों का शौक है उनको,  इसलिये बता दूं.  2003 में जब उस मय की तत्कालीन  सरकार गई थी. पर केपिटा इन्‍कम मात्र 11 हजार रूपये प्रदेश की थी. आज जब 2023 खत्‍म हुआ और जब हमारी नयी सरकार आयी है तो वह परकेपिटा इन्‍कम बढ़कर 1 लाख, 21 हजार रूपये हो गयी है. जिनको परसेंटेज में बात करने की आदत है, वह समझ लें कि 1100 प्रतिशत बढ़ी है, 11 गुना आमदनी बढ़ी है तो जो हमारे वित्‍त मंत्री जी से सवाल पूछा जा रहा था कि सरकार ने यह कर्ज क्‍यों लिया ? सरकार ने यह कर्ज 11 गुना आमदनी बढ़ाने के लिये लिया और यह कई गुना और आगे जाकर बढ़ेगी.  उनको मित्रों को यह भी बता दूं कि उस समय के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी ने यह बयान पब्लिकली दिया था, आज भी टी.व्‍ही पर उपलब्‍ध होगा. आप जाकर के उसको सुन लें, देख लें कि काम करने से सरकारें नहीं आती हैं तो हमने उसको गलत साबित कर दिया और दिखा दिया कि काम करने से बार-बार सरकारें आती हैं और इसलिये 163 सीट भारतीय जनता पार्टी को मिली है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रोजगार की बातें होती हैं. मैं वेदों को यहां पर कोट करके बोलूंगा. हमारे वेदों में लिखा है कि तीन तरह के रोजगार होते हैं. उसमें सर्वोपरि रोजगार होता है, यहां हमारे सभी माननीय सदस्‍य जानते हैं कि सर्वोपरि रोजगार उसमें खेती होती है. दूसरे नंबर पर होता है स्‍व-रोजगार और तीसरे नंबर पर होती है, नौकरी. भारत में मैकॉले जब आये थे, अंग्रजों ने जब यहां पर लार्ड मैकॉले को भेजा था तो उन्‍होंने नौकर बनाने की ही पद्धति भारत में चालू की थी. दुभार्ग्‍य यह है कि रोजगार सिर्फ नौकरी के रूप में हमारे कांग्रेसी मित्र देखते हैं. शायद मैकॉले की थ्‍योरी से ही चलना इनको पसंद है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रधानमंत्री आदरणीय जी ने याचक की, नौकरी मांगने वाले की मानसिकता से हटाकर के स्‍व-रोजगार की मानसिकता लायी और नौकरी देने वाले हमारे युवा कैसे बनें, इस पर उन्‍होंने काम किया. मुझे गर्व है डॉ. मोहन यादव जी पर.

          श्री रामनिवास रावत:- अध्‍यक्ष जी, आसंदी पर सभापति जी नहीं बैठे हैं. उनको आप बता दें कि आसंदी पर माननीय अध्‍यक्ष महोदय बैठे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय:- वह पहली बार सदन में बोल रहे हैं तो हमको उनको प्रोत्‍साहित करना चाहिये.

          श्री सिद्धार्थ तिवारी:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको चूंकि मैंने दो-तीन चीजें कोट की हैं तो गुस्‍सा आना तो स्‍वाभाविक हैं, इनको और भी बातों का गुस्‍सा है. हमारे प्रधान मंत्री जी नौकरी मांगने वाले से, नौकरी देने वाला इस देश के युवक को बनाना चाहते हैं और हमारे मुख्‍य मंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने इसकी पहल मुरैना से की है और एक झटके में पांच हजार करोड़ रूपये के लोन लोगों को दिये हैं. मेरे जिले में भी उस दिन 324 करोड़ रूपये के लोन मिले हैं, स्‍व-रोजगार के लिये. करंसी जो शब्‍द है वह करंट से निकला हुआ हुआ है, पैसे का मतलब है कि पैसे का करंट. जब पैसा आयेगा और उसका फ्लो होगा तो उससे इकानॉमी इंप्रूव होगी. पहली बार मैंने देखा है कि मेरे रीवा जिले में 324 करोड़ रूपये एक बार में आये हैं. आप समझ सकते हैं. आदरणीय हमारे सखलेचा जी बता रहे थे कि किस तरह से इकानॉमी जिले की डेव्‍हलप होगी तो प्रदेश की होगी और देश की होगी, यह पूरा एक खाका हमारी सरकार ने तैयार किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के कर-कमलों से अभिभाषण में सोलर एनर्जी का जिक्र किया गया है और किस तरह से 11 गुना सोलर एनर्जी डेव्‍हलप हो रही है और यह हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी के सपने के अनुरूप है, जो कि हर घर में एक सोलर रूफ टॉप होना, उनका सपना है. जिससे की न केवल बिजली मुफ्त होगी, बिजली का उपभोक्‍ता बिजली को उद्योगों को बेच भी सकेगा. माननीय रावत जी इसको कहते हैं, वीज़न. जो 2003 में नहीं था. मुफ्त बिजली ली नहीं, मिलना भी नहीं थी.

          अध्‍यक्ष महोदय, संत शिरोमणि संत रविदास जी की बात अभिभाषण में की गयी और मुझे गर्व है कि तीस जिलों में उनके मंदिर और उनके स्‍थल बन रहे हैं. हमारे मैहर में मंदिर साढ़े तीन करोड़ रूपये से बनकर के तैयार भी हो गया, दु:ख इस बात का है और इस बात पर हमारे कुछ विधायकगण बोल रहे थे, नाराजगी भी थी, खीज़ भी थी.

क्योंकि उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री जो 15 महीने की सरकार थी, संत रविदास के नाम पर बात तो बहुत की, लेकिन एक भी काम संत रविदास के नाम पर नहीं हुआ, इसकी शायद खीज़ है, इसलिए जब यह बोला जाता है तो हमारे माननीय विधायक नाराज़ हो जाते हैं. आदरणीय मुख्यमंत्री जी को इस पहल के लिए मैं बधाई देना चाहता हूं और इस सरकार को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने रीवा को एक एयरपोर्ट दिया, जिससे न केवल विंध्य का विकास होगा, विंध्य के पर्यटन का विकास होगा, यह हमारा वाणिज्य भी बढ़ेगा, बिजनेस बढ़ेगा, मैं बहुत बहुत बधाई देता हूं और धन्यवाद प्रेषित करता हूं कि विंध्य को एयरपोर्ट मिला. मुझे पूरा भरोसा है कि इस अभिभाषण के बाद जब हमारी सरकार अपने काम लागू करेगी तो वर्ष 2047 का जो विकसित भारत का सपना हमारे प्रधानमंत्री ने संजोया है, हम सब उसके हिस्से हैं और मध्यप्रदेश ही नहीं भारत वर्ष 2047 में  एक महान विकसित देश बनेगा. जय हिन्द, आपने जो बोलने का समय दिया, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

          श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व) - अध्यक्ष महोदय, मैं महामहिम राज्यपाल जी के अभिभाषण के कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. किसी विद्वान ने लिखा है कि किसी व्यक्ति की तारीफ करके बड़ी से बड़ी बेवकूफी कराई जा सकती है, इसलिए मैं तारीफ नहीं करूंगा क्योंकि मुझे बेवकूफी नहीं करवाना है. हमारे विद्वान सदस्य बार-बार प्रवचन की बात कर रहे थे, संभवतः वर्ष 2003 में अपने पूर्वजों, जो सत्ता में बैठे थे, उनकी नाकामी को भी वह बता रहे होंगे. आपकी जगह आसंदी में वर्ष 2003 में अध्यक्ष महोदय.

श्री सिद्धार्थ तिवारी - अध्यक्ष महोदय, उसका खामियाजा उस सरकार का, न केवल उनको भोगना पड़ा था जाकर लोगों के बीच में बल्कि आप सबको भोगना पड़ा था. 32 का नम्बर याद होगा.

श्री लखन घनघोरिया - तीसरी पीढ़ी है. दादा ने जमीन खरीदी, पिता ने मकान बनाया और स्वयं ने रंग रोगन कर दिया और कहते हो कि तुमने किया क्या है. तीसरी पीढ़ी है. अध्यक्ष महोदय, किसी शायर ने लिखा है कि - "चिरागों का घराना चल रहा है, हवा से रिश्ता निभाना चल रहा है, नये-नये किरदार आ गये मगर, नाटक वही पुराना चल रहा है. " यह नये किरदार अभी हम सुन रहे थे. विरासत के साथ खिलवाड़ कैसे होता है, प्रवचन, उपदेश एक चलन बन गया है. अभी पिछली बार भी, पिछले कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव में उपदेश से प्रारंभ हुआ. अभी भी हुआ, खैर जैसी मर्जी, जैसा करना आप कर सकते हैं. बहुत छोटी-छोटी बात है. एक कहावत है कि - "अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गये, सबके दाता राम." वाह! अध्यक्ष महोदय, हम सब सनातन में पैदा हुए और फर्क, गर्व करते हैं और उतनी ही आस्था, शिद्दत, निष्ठा, भक्ति के साथ हम सारी चीजों को मानते भी हैं और उसका प्रत्यक्ष उदाहरण भी है. हमारा खुद का नाम लखन है. (मेजों की थपथपाहट) हमारे स्वर्गीय भाई का नाम रघुवीर था. हमारे एक स्वर्गीय भाई का नाम भरत था. इसका मतलब सीधा सीधा हैकि हमारे पूर्वज भगवान राम को अपना आराध्य मानते थे, मानते हैं. तभी तो नाम रखे. हम सनातन में पैदा हुए हैं लेकिन सनातन भाजपा में पैदा नहीं हुआ. इस सत्‍य को भी मानना पडे़गा. बड़ी विचित्र बात है हमारे धर्माचार्य धर्मों के प्रति अभिमत देते हैं. धर्मप्रेमी धर्म की उस प्रतिबद्धता को भी मानते हैं जो धर्म को मानते हैं. आप न मानें, आपकी मर्जी. आप धर्माचार्यों से बडे़ हो जाएं, आपकी मर्जी. लेकिन दोष यदि यहां दे रहे हैं तो धर्माचार्यों को भी तो देकर बताएं. चारों पीठ के धर्माचार्यों को देकर बताएं. स्‍वामी शंकराचार्य अभिमुक्‍तानंद जी ने बहुत स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा है कि हमने 17 दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में जिरह की है. उन्‍होंने चैलेंज किया कि हमने 17 दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में जिरह की है. कौन-कौन आया, कौन वकील था, कौन शामिल हुआ, आकर हमसे बात करे और 4 दिन सुप्रीम कोर्ट में जिरह की है. एक पीठ के शंकराचार्य कह रहे हैं, यह धर्म की बात वे करेंगे. बड़ी विचित्र बात है. शर्म की बात को गर्व की बात बताकर हम धर्मतंत्र को जनतंत्र के ऊपर हावी कर रहे हैं. बड़ी विचित्र बात है. इतिहास सब चीज का है. हम अपनी उपलब्‍धियां बताएं, लेकिन इस तरीके का कटाक्ष, यह बड़ी विचित्र मानसिकता है. फिर वही बात आ जाती है सनातन किसी से पैदा नहीं हुआ, जो राम को लाएं हैं हम उनको लाएंगे. राम को भला कोई ला सकता है. राम अवतरित हुए. राम प्रकट हुए. वे भगवान श्रीहरि के अवतार थे.

          श्री मनोज निर्भयसिंह पटेल -- लखन जी, राम अवतरित नहीं हुए. कांग्रेस ने शपथ पत्र दिया था कि राम काल्‍पनिक हैं. क्‍या इस बात को तो स्‍वीकार करेंगे आप? राम काल्‍पनिक हैं यह तो स्‍वीकार करेंगे आप ?...(व्‍यवधान)..

          श्री सिद्धार्थ तिवारी "राज"-- राम काल्‍पनिक हैं. रामसेतु काल्‍पनिक है. आपके नेता राहुल गांधी ने बोला है.

          श्री मनोज निर्भयसिंह पटेल -- इतनी देर से आप राम-राम के ऊपर, सनातन के ऊपर बोल रहे हैं आप राम-राम कर रहे हैं. तो यह शपथ पत्र. ..(व्‍यवधान)....

          श्री लखन घनघोरिया -- हम जो बोल रहे हैं, आप हमारी बात हमसे करो...(व्‍यवधान)...

          श्री महेश परमार -- माननीय अध्‍यक्ष जी, यही तो आप लोगों को कष्‍ट है...(व्‍यवधान)...

          श्री सिद्धार्थ तिवारी "राज"-- राम काल्‍पनिक है यह शपथ पत्र दिया था या नहीं. साफ-साफ जवाब दे दें...(व्‍यवधान)..

          श्री महेश परमार -- यही पीड़ा है आपको, यही तकलीफ है आपको...(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- लखन जी, आप अपनी बात को पूरा कीजिए.

          श्री लखन घनघोरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, यदि इस प्रकार से ये बोलेंगे कि शपथ पत्र किसने दिया. अब तो एक वीडियो यह चल रहा है कि माता सीता को किसने क्‍या कहा और आज मुख्‍य पद पर बैठे हैं. कहेंगे, स्‍पष्‍टीकरण देंगे आप ? माता सीता के बारे में जो कहा गया, क्‍या उस पर स्‍पष्‍टीकरण देंगे ? माता सीता को सती की जगह विधवा कहने वाला एक वीडियो उज्‍जैन का चल रहा है सब सदन में है उसके बावजूद किसने कहा, जानकारी ले लीजिए. जैसे आपका ज्ञान नहीं है वैसे हमको नहीं मालूम है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- लखन जी, आप विषय पर आइए.

          श्री मनोज निर्भयसिंह पटेल -- ऑन रिकॉर्ड है...(व्‍यवधान)..

          श्री लखन घनघोरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, ऑन रिकॉर्ड है वीडियो.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मनोज जी..

          श्री लखन घनघोरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, अमृतकाल है कि भ्रष्‍टाचार का जाल है. नौकरी में अकाल है. महंगाई बनी जंजाल है और अमृतकाल है.वाह. व्यापम के बाद में शिवराज सरकार में पटवारी परीक्षा का घोटाला हुआ. माननीय मुख्यमंत्री जी को हम धन्यवाद भी देंगे. कम से कम इसमें रोक लगी थी उसको हटाने का काम किया है. कम से कम 9 हजार युवाओं की भर्ती का रास्ता तो साफ हुआ. लेकिन हम फिर आकर के वहीं खड़े हैं. इस घोटाले में जब एक ही कॉलेज के सेन्टर में सात केन्डीडेट थे एक ही कॉलेज के थे, एक ही सेन्टर के, उसकी जांच चली इतना बड़ा घोटाला, लेकिन सब दोषियों को क्लीन चिट दे दी गई. यह भ्रष्टाचार का जाल नहीं है. हम देखकर सो रहे हैं, हम सो रहे हैं और कोई हिलाकर के जगाये तो क्या जग जायेंगे? लेकिन हम सोने का नाटक कर रहे हैं तो कोई नहीं जगा सकता है और यह चल रहा है सरकार में. रिजल्ट के बाद पटवारी की भर्ती में जो रोक हटाई है उसके लिये हम धन्यवाद तो देते हैं, लेकिन जो क्लीन चिट दी गई घोटाले बाजों को उसके लिये जरूर हम विरोध करते हैं. इसके साथ साथ किसी भी दोषी के ऊपर कोई कार्यवाही ना होना, यह सरकार की मंशा को प्रदर्शित करता है.

          अध्यक्ष महोदय, देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक विकास की बात कही गई है. विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई है इन 10 वर्षों में. लेकिन इन 10 वर्षों में देश के ऊपर कर्जा कितना हुआ है. 10 वर्ष पहले 56 लाख करोड़ रूपये कर्ज था. आज की स्थिति में 205 लाख करोड़ रूपये कर्ज हो गया है. 10 सालों में 205 लाख करोड़ मतलब हर व्यक्ति के ऊपर 1 लाख 50 हजार का कर्ज, यह केन्द्र सरकार की स्थिति है. चूंकि बजट में पूरा केन्द्र के ऊपर कहा गया, इसलिये यह बातें कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय, 9 साल में गरीबों के कल्याण एवं उत्थान के प्रयास में 2 करोड़ 30 लाख प्रदेश में 2 करोड़ 30 लाख लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आये हैं, यह बड़ी विचित्र बात है, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है. बहुआयामी गरीबी क्या है ? 2 करोड़ 30 लाख में 80 करोड़ लोगों को जब हम राशन बांट रहे हैं पूरे देश में, यह आबादी का कितना प्रतिशत है ? पूरे देश की आबादी का 80 करोड़, फिर हम क्यों यह फर्जी आंकड़े दे रहे हैं ? बिल्कुल वैसा ही राज्यपाल का अभिभाषण जैसे किसी गाड़ी में हम बैठे हों और उसमें जीपीएस सिस्टम लग जाये तो वहीं भटकते रहें, घुटियाते रहें. बिल्कुल वैसा ही है, वही सारी बातें, वही सारी चीजें.

          अध्यक्ष महोदय, इसके साथ साथ सीएम राइज स्कूल सब बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं. 55 हजार शिक्षक के पद रिक्त हैं. 1 लाख 80 हजार बच्चों के एडमिशन इसलिये केंसिल हो गये क्योंकि वह फीस नहीं भर पाये बड़ी विकट स्थिति थी कोरोना काल की. हम पीठ तो खूब थपथपा रहे हैं. इसके साथ साथ 3 लाख करोड़ की बात हमारे संकल्प पत्र में कही गई है जनजाति विकास के लिये तीन लाख करोड़ कहां हो रहे, छात्रवृत्ति मिल नहीं रही, हमारे मंत्री महोदय ने स्‍वीकार किया, जनजाति के बच्‍चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही. पोर्टल खराब है, सामाजिक सुरक्षा से लेकर, विधवा पेंशन से लेकर, विकलांग से लेकर, जितनी पेंशन है पांच प्रकार की, पांचों प्रकार की पेंशनों पर कम से कम 6-6, 8-8 महीने लोगों को इंतजार करना पड़ता है, उसके बाद हम पीठ थपथपा रहे हैं. कई बातें बड़ी विचित्र है, बड़ी अजीब बातें लगती है कि हम सच्‍चाई पर बात सुनना भी पसंद नहीं करते, करना तो दूर है. महंगाई गजब की है, भ्रष्‍टाचार गजब का है,

                   नींद, ख्‍वाब, उम्‍मीदें, नींद, ख्‍वाब उम्‍मीदें, सब महंगी,

                   वाह साहब इतना भी सस्‍तापन अच्‍छा नहीं है.

          सारी चीजें महंगी हैं, नींद अच्‍छे से नहीं ले पा रहे, ख्‍वाब नहीं देख पा रहे, उम्‍मीदें नहीं कर पे रहे, लोगों को रोजगार नहीं है.

          बैठ जाइए प्रभु बैठ जाइए, आप विद्वान है(श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल जी के खड़े होने पर) इसके बाद बोल लेना.

          श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल - अब कांग्रेस का ख्‍वाब देखने का समय गया, लखन जी, आप अब कहां ख्‍वाब देखने की बात कर रहे.

          अध्‍यक्ष महोदय - मनोज जी बैठ जाइए. लखन जी आप पूरा करो.

          श्री लखन घनघोरिया - दो के पहले भी न 70-80 थे फिर दो में आए फिर अब किया, ये तो वक्‍त बताएगा.

                   सूरज की सल्‍तनत भी शाम को छिन जाती है,

                   और सुबह चांद-तारों की हैसियत खत्‍म हो जाती है..

          दौर है ये प्‍यारे, दौर का इंतजार करो. (...व्‍यवधान)

          श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल - ख्‍वाब की बात कर रहा हूं बाकी कुछ नहीं, ख्‍वाब कहां देख रहे हो, गया आपका दौर.

          श्री सतीश मालवीय - आप लोग अब दिन में ख्‍वाब मत देखिए.

          अध्‍यक्ष महोदय - लखन जी पूरा करें.

          श्री लखन घनघोरिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ साथ कोई भी ऐसा वर्ग नहीं है, जो अपने आप को छला और ठगा महसूस न कर रहा हो. आर्थिक दशाएं छिन्‍न-भिन्‍न हैं, सारी चीजें सबको मालूम है, लोक सभा चुनाव के बाद के क्‍या हालात बनना है देश के, ये भी सबको मालूम है. आप लाड़ली बहनों को सिर्फ लोक सभा तक चाह रहे थे, क्‍योंकि आप उसको जीत का आधार मानते ही नहीं हो. आप गारंटी का आधार मानते हैं, माननीय मोदी जी की गारंटी को और जब मोदी जी की गारंटी सबका आधार है तो बहुत स्‍पष्‍ट है, जो होना है वह सामने है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपसे इस बात के लिए आग्रह करना चाहता हूं कि प्रदेश की आर्थिक दशा की भी सारी स्थितियां बड़ी साफ है. प्रदेश का कर्जा भी बड़ा स्‍पष्‍ट है, अभी अनुपूरक में भी सबने बहुत सी बातें कह दी. हमारे जबलपुर से विद्वान साथी प्रहलाद भाई भी बैठे हैं, माननीय राकेश सिंह जी भी बैठे हैं. हमेशा एक उपेक्षा का दंश रहा है और हम उम्‍मीद करते हैं कि हमारे जबलपुर के इस उपेक्षा के दंश को, क्‍योंकि जिसको देखो वह उज्‍जैन की बात कर रहा है, हमारी भी मजबूरी है, हम जबलपुर की बात कर रहे हैं.

          लोक निर्माण विभाग मंत्री(श्री राकेश सिंह) - अध्‍यक्ष महोदय, मैं मित्र की इस बात का विरोध करता हूं. जबलपुर की उपेक्षा की बात होते आई है. आजादी से लेकर और लगभग मध्‍यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने तक. आज जबलपुर की उपेक्षा की बात नहीं होती, क्‍योंकि जबलपुर में, मध्‍यप्रदेश नहीं, दस राज्‍यों में नहीं है इतना बड़ा फ्लाय ओवर बन रहा है. देश की दूसरी सबसे बड़ी रिंग रोड वहां पर बन रही है देश का पहला ज्‍योलॉजिकल पार्क वहां पर बन रहा है, लगभग साढ़े चार सौ करोड़ रूपये की लागत का एयरपोर्ट बनकर तैयार हो चुका है, जिसका कभी भी लोकार्पण हो जायेगा, इसके अलावा जबलपुर में अभी जो हो रहा है, उसके पहले किसी ने कभी उसकी कल्‍पना भी नहीं की गई, तो अपने मित्र से मेरी इतनी अपेक्षा है कि कम से कम इन बातों की सराहना करके बाकी और क्‍या अपेक्षा है, उसके बारे में अपनी बात कहें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- लखन जी दरअसल दोनों वजनदार मंत्रियों को और प्रोत्‍साहित कर रहे हैं.

          श्री लखन घनघोरिया -- शायद अपन यह समझ रहे हों कि वर्ष 2014 के पहले जबलपुर ही नहीं था(हंसी) या देश ही नहीं था, प्रदेश नहीं था.

          श्री राकेश सिंह -- जबलपुर था, जिसको मध्‍यप्रदेश का सबसे बड़ा गांव कहा जाता था, वह जबलपुर था. मीडिया कहता था, मध्‍यप्रदेश का सबसे बड़ा गांव जबलपुर, आज जबलपुर महानगर की श्रेणी में है. मेरे मित्र की बातों में इतना ही मुझे जोड़ना है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब प्रश्‍नोत्‍तर समाप्‍त करें और लखन जी अपना उद्बोधन समाप्‍त करें.

          श्री लखन घनघोरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया, इसके लिये धन्‍यवाद. नहीं हाईकोर्ट भी शायद वर्ष 2014 के बाद बना है(हंसी), आर्डिनेंश फैक्ट्रियां भी वर्ष 2014 के बाद आईं.

          श्री राकेश सिंह -- हाईकोर्ट तब मिला, जब जबलपुर राजधानी बनने से चूक गया, जबलपुर को राजधानी नहीं बनाया गया, उसके एवज में हाईकोर्ट मिला, तो वहां पर जबलपुर की अनदेखी हुई थी.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब विषय समाप्‍त करें, सदन को आगे बढ़ने दीजिये.   राज्‍यपाल जी के कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा 12 तारीख को भी जारी रहेगी. 12 तारीख को 4 बजे सी.एम.रिप्‍लाई करेंगे, उससे पहले यह चर्चा पूर्ण करना होगी.

           मेरा पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों के माननीय नेताओं से अनुरोध है, श्री हेमंत जी यहां बैठे हुए हैं, प्रहलाद जी संसदीय कार्यमंत्री जी को अवगत करावें कि कुल मिलाकर जितने सदस्‍य हैं, सामान्‍य तौर पर हमें यह कोशिश करना चाहिए की अपने दल के ज्‍यादा से ज्‍यादा सदस्‍य बोल पायें, तो जो सदस्‍य अनुपूरक पर बोल चुके हैं, वह अब दूसरे पर छोड़ेंगे. मैं संख्‍या कम करने के लिये नहीं बोल रहा हूं,यह सुझाव दोनों पक्षों को दे रहा हूं तो दूसरे लोग और नये लोगों को ज्‍यादा मौका मिल जायेगा. मैंने इसे इस दृष्टि से देखा कि दोहराव हो रहा है, तो थोड़ा इस दिशा में चिंता करेंगे तो ठीक रहेगा.

 

 

5.12                                                     अध्‍यक्षीय घोषणा

          अध्‍यक्ष महोदय -- अशासकीय संकल्‍प क्रमांक -1 श्री संतोष बरकड़े और अशासकीय संकल्‍प क्रमांक-2 श्री सुदेश राय माननीय सदस्‍यों का अनुरोध था कि आज वे उपस्थित नहीं रहेंगे. अत: अगले अशासकीय कार्य के दिन उनको शामिल किया जायेगा.

5.13 बजे                                                अशासकीय संकल्‍प

(3)  रीवा जिले के विधान सभा क्षेत्र सेमरिया में नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया की कई वर्ष पूर्व घोषित राष्ट्रीय राजमार्ग सतना-सेमरिया एवं सेमरिया बायपास (रिंगरोड) होकर सिरमौर-डभौरा मार्ग का निर्माण किया जाना.

 

श्री अभय कुमार मिश्रा (सेमरिया) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह संकल्‍प प्रस्‍तुत करता हूं कि

''सदन का यह मत है कि रीवा जिले के विधानसभा क्षेत्र सेमरिया में नेशनल हाईवे अर्थारिटी ऑफ इण्डिया की कई वर्ष पूर्व घोषित राष्ट्रीय राजमार्ग सतना-सेमरिया एवं सेमरिया बायपास (रिंगरोड) होकर सिरमौर-डभौरा मार्ग का निर्माण किया जाये. ''

अध्‍यक्ष महोदय -- संकल्‍प प्रस्‍तुत हुआ.

            श्री अभय कुमार मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय मैं आपका संरक्षण चाहता हूं. मैं वर्ष 2008 से 2013 में एम.एल.ए. था, उसके बाद वर्ष 2013 से 2018 का कार्यकाल आया था, उस दौरान नीलम अभय मिश्रा विधायक थीं और गणेश सिंह साहब सतना से सांसद थे. मैंने जैसा कि निवेदन किया कि इसको नया नेशनल हाईवे घोषित किया गया. स्‍वतंत्रता से पहले वर्ष 1853 में जब लार्ड डलहौजी ने पी.डब्‍ल्‍यू.डी. की स्‍थापना की और देश स्‍वतंत्र हुआ. हमारे यहां महाराजा गुलाब सिंह थे, उस जमाने में मध्‍यप्रदेश के जो 18 -19 राजमार्ग थे, उसमें सबसे पुराने राजमार्गों में एक रीवा-सेमरिया, मानिकपुर राजमार्ग था, रीवा- सेमरिया से उत्‍तरप्रदेश का यह मानिकपुर तक तब पक्‍का मार्ग नहीं बना हुआ था. जंगली टाईप का मार्ग था तो सीधे लोग मानिकपुर जाया करते थे, हमारे महाराजा गुलाब सिंह की मानिकपुर में  खकरी थी तो रीवा के लोग कुछ हमारे सेमरिया के लोग ज्‍यादातर मानिकपुर और सतना का बाजार करते थे और रीवा करते थे. इसके बाद वह मार्ग अपने स्‍तर पर बनाया गया, आज की डेट में वह अच्‍छा खासा मार्ग है, फिर 3 साल पहले जब हमने बताया वर्ष 2013 से 2018 के बीच में प्रस्‍ताव हुआ, प्रयास हुआ और उसको राष्‍ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया गया और यह फेसबुक है माननीय गणेश सिंह जी सांसद का इसके बुलेटिन लगे, इसी बुलेटिन में नीलम मिश्रा चुनाव नहीं लड़ीं, हमसे पूर्व के.पी. त्रिपाठी जी थे, उनको जनता ने वोट भी किया और वह चुनाव भी जीते, सतना में भी इसका काफी वह रहा, इसमें लिखा है कि सतना से इलाहाबाद के लिये नया राष्‍ट्रीय राजमार्ग बनेगा माननीय गणेश सिंह जी की आई डी से, भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्री माननीय श्री नितिन गडकरी जी ने कई राष्‍ट्रीय राजमार्गों की स्‍वीकृति मेरे आग्रह पर प्रदान की. गणेश सिंह साहब ने लिखा है, दमोह से हटा, अमानगंज, नागौद, सतना बाया सेमरिया, जवा शंकरगढ़, इलाहाबाद, सिरमौर यही जिस मार्ग की मैं बात कर रहा हूं, राष्‍ट्रीय राजमार्ग की स्‍वीकृति दे दी गई है. इसी तरह अयोध्‍या से चित्रकूट जो नया राष्‍ट्रीय राजमार्ग घोषित हुआ है उसे मैंने चित्रकूट से सतना, मैहर तक बढ़ाये जाने के लिये प्रस्‍ताव दिया था जिसकी स्‍वीकृति मिल चुकी है. इन सभी के टेंडर भी जारी हो चुके हैं, वे लिखते हैं  अभी सतना जिले में 2 राष्‍ट्रीय राजमार्ग पहला एन.एच.7 बेला से झुकेही और दूसरा एन.एच. 75 बेला से वमीठा, छतरपुर है, अब इनके अलावा नये राष्‍ट्रीय राजमार्ग सतना जिले को एक नई सौगात के रूप में मिला है और जिसे टेंडर की स्‍वीकृति के लिये मैंने भेजा था उसे भी स्‍वीकृति दे दी गई है, जल्‍दी ही इसका काम शुरू होने वाला है. इसके बाद यह ठंडे बस्‍ते में चला गया. एक और बात है यह जो सेमरिया से मानिकपुर की मैं बात करता हूं तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार का मैं सदस्‍य था, भारतीय जनता पार्टी की सरकार की मदद से हमने सेमरिया की रिंग रोड बनवाई थी तब सेमरिया से रिंग रोड बनाकर जो ट्रक शहर से निकलते थे कस्‍बे से कई बच्‍चे एक्‍सीडेंट में मारे जाते थे, आधी रिंग रोड बन गई है फिर इसके बाद मुझे नहीं मालूम किसके प्रयास से हुआ, मैंने नहीं कराया था. सेमरिया से मानिकपुर की एक एन्‍युटी टोल का एक टेण्‍डर 39 करोड़ रूपये का लगा जिसमें रीवा पास कंपनी ने उस काम को लिया और आप यकीन करिये कि उसके जैसी रोड आपको पूरे मध्‍यप्रदेश में नहीं मिलेगी उस पर डामर का एक पेंच नहीं लगा है क्‍योंकि लोग चले ही नहीं, उसमें 5 करोड़ 4 लाख रूपये ठेकेदार को हर वर्ष एन्‍युटी मिल रही है और टोल का अलग से काम है, टोल का उसमें नाममात्र का इसलिये नहीं है क्‍योंकि आगे जाकर जंगल में वह रोड ब्रेक हो जाता है, मुश्किल से 12 किलोमीटर है, आगे मानिकपुर है, यू.पी. स्‍टेट है और इधर यह सेमरिया, मानिकपुर वही जंगल में आकर खत्‍म हो जाती है, पहले मानिकपुर तक थी बाद में जंगल हो गया, प्रयास की कमी थी. माननीय मंत्री महोदय से भी मैंने निवेदन किया है कि इंटर स्‍टेट कनेक्टिविटी में अगर दोनों सरकारें वह कर देंगी तो वह मार्ग हमारा जुड़ जायेगा तो मानिकपुर से कनेक्‍ट हो जायेगा तो हमारा क्षेत्र और डेव्‍हलप हो जायेगा और दूसरा यह जो जैसा अभी हमने आपको पढ़कर सुनाया यह आपकी घोषणा में है एनएच इसका नया राष्‍ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया गया है, इसका आपने हमें नहीं दिया मगर मुझे प्राप्‍त हो गया है. एनएचएआई को जो भेजा गया था उन्‍होंने जो उत्‍तर दिया है दो राज्‍यों को जोड़ने वाली सड़क सतना, सेमरिया, सिरमौर, जवा शंकरगढ़ फोरलेन चौड़ीकरण हेतु डीपीआर निर्माण का कार्य पिछड़ा क्षेत्र धार्मिक पर्यटन स्‍थल की परियोजना के तहत बेकवर्ड एरिया रिलीजेशन टूरिस्‍ट प्‍लेस में बनाये गये कार्यालय कटनी, कटनी में चूंकि एनएचएआई का ऑफिस लगता है पीआईयू के अधीन डीपीआर तैयार कराये जाने हेतु स्‍वीकृत किया गया था और डीपीआर एल.एन. मालवीय कंपनी द्वारा इसका तैयार कराया जा चुका था, कम से कम 3 या 4 वर्ष पूर्व हो गया, किंतु भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आदेशानुसार मतलब एनएचएआई के आदेशानुसार उक्‍त डीपीआर को यथास्थिति में ही क्षेत्रीय कार्यालय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भोपाल. यह भी मिनिस्ट्री आफ सरफेस एण्ड ट्रांसपोर्ट के तीन विभाग हैं. एक है नार्थ ईस्ट के लिये  एनएचएआई, डी.सी.एल. और एक है मिनिस्ट्री जो पूरे देश में है जिसका एक कार्यालय हमारे भोपाल में लगता है जिसमें हमारे स्टेट गवर्नमेंट के आफीसर चीफ इंजीनियर हैं और उनको डिजर्व करते हैं आर.ओ.,दिल्ली. यह तो हमारे लिए और सरल है तो इनको यह राशि हस्तांतरित कर दी गई है. यह रोड हस्तांतरित कर दी गई है भोपाल के निर्देशानुसार और इसमें लिखा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र भोपाल के साथ दिनांक 21 जून,2019 को हुए त्रिपक्षीय अनुबंध के माध्यम से इस मार्ग को हस्तांतरित किया जा चुका है. अत: उक्त मार्ग की अद्यतन स्थिति तथा निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी क्षेत्रीय कार्यालय,सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय,भोपाल के माध्यम से मुख्य अभियंता मध्यप्रदेश शासन,लोक निर्माण विभाग,राष्ट्रीय राजमार्ग,परिक्षेत्र भोपाल से प्राप्त किया जाना उचित होगा. यह एनएचएआई का प्राप्त हो गया. शायद हमारी कोशिश में कमी रही, यहीं बगल में था. यहां से भी इसकी क्लियरिटी सदन को मिल जाती. अब मेरा निवेदन यह है कि यह समय गुजर जायेगा. हर चीज गुजर जाती है. जो कल था वह आज नहीं है. जो आज है वह कल नहीं रहेगा. हो सकता है हम कल विधायक रहें न रहें. कोई और रहे लेकिन आपका संरक्षण मिल जाता और यह नेक काम हो जाता. पूरे देश में रोडें बन रही हैं. इस रोड से हमारा चित्रकूट कनेक्ट हो रहा है. इस रोड से हमारा यू.पी.मानिकपुर कनेक्ट हो रहा है. सबसे पुराना राजमार्ग है.आपकी कृपा मिल जाती और दोनों स्टेट कनेक्टिविटी की बात करके दोनों स्टेट के माध्यम से माननीय मंत्री महोदय अगर थोड़ा प्रयास कर देंगे तो हमारा यह मार्ग बन जायेगा तो हमारे रीवा जिले का यह कोना जो थोड़ा पिछड़ा हुआ सा है. यू.पी. और एम.पी. का बार्डर है. इसमें विकास की गति तेजी से बढ़ जायेगी. यह मेरा मंत्री जी आपसे आग्रह है.

          लोक निर्माण मंत्री ( श्री राकेश  सिंह ) - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने क्योंकि वे एक जागरूक जनप्रतिनिधि हैं तो उन्होंने अपनी बात बहुत जिम्मेदारी के साथ रखी है और वास्तव में यह जागरूकता ही विकास के कार्यों को गति प्रदान करती है लेकिन हमारी अपनी मांग और वस्तुस्थिति यदि दोनों में तालमेल हो जाए तो ऐसे कामों को गति मिल जाती है. बहुत अच्छे से विस्तार से माननीय सदस्य ने अपनी बात रखी है मैं उसी क्रम में अपनी बात रखना चाहूंगा. वस्तुस्थिति उसमें यह है कि सतना-सिमरिया-डभौरा मार्ग यह पूर्व से ही निर्मित है जिसमें सतना से सिमरिया एमडीआर है यानि मुख्य जिला मार्ग है और इसकी लंबाई है 25 कि.मी.,उसी की कंटीन्यूटी में उसके पश्चात् स्टेट हाईवे 24 लग जाता है जिसकी लंबाई 17 कि.मी. है और इसकी चौड़ाई 5.50 मीटर है और यह काफी अच्छी स्थिति में है फिर सिमरिया रिंग रोड के नाम से जो माननीय सदस्य ने अपनी बात कही है उसकी लंबाई 9 कि.मी. है जिस पर वह रिंग रोड के निर्माण की बात कर रहे हैं उसमें 2.70 कि.मी. यह स्टेट हाईवे नंबर 14 का हिस्सा है और जिसका निर्माण मध्यप्रदेश रोड डेव्लहपमेंट कार्पोरेशन के द्वारा पहले ही किया जा चुका है और वह अच्छी स्थिति में है और जो शेष बचता है 6.30 कि.मी.,वह सड़क का हिस्सा नहीं है दरअसल वहां सड़क है ही नहीं. वह ग्रीन फील्ड है. जहां सड़क ही नहीं है वहां हम सभी जानते हैं कि अगर वहां सड़क निर्माण की बात हो तो भू-अर्जन से लेकर और बहुत सारी बातें उसके सामने आती है.फिजिबिलिटी की बात सामने आती है. फिर इसके आगे से जो सिमरिया से जो हरदुआ मार्ग है वह एस.एच.14 का हिस्सा है. यह 4 कि.मी. लंबा है और इसकी चौड़ाई भी 5.50 मीटर है जो बहुत अच्छी स्थिति में है. फिर हरदुआ से अतरैला यह भी स्टेट हाईवे 52 का हिस्सा है जो 40 कि.मी. लंबा है और इसकी चौड़ाई 5.50 मीटर है. अतरैला से डभौरा नेशनल हाईवे 135-बी है. यह 20 कि.मी. लंबा है.5.50 मीटर चौड़ाई है और अच्छी स्थिति में है और यह जो नेशनल हाईवे है यह सिरमौर से डभौरा जो 38 कि.मी. है. ये उसी का एक हिस्‍सा है, जो केन्‍द्र सरकार की अपग्रेडेशन योजना है, उसके टूल एंड विथ पेव्‍ड शोल्‍डर में ये शामिल हो चुकी है और एनएच के द्वारा भारत सरकार ने एनुअल प्‍लान वर्ष 2023-24 में प्री-कंस्‍ट्रक्‍शन एक्‍टिविटी, जिसके अंतर्गत भू-अर्जन, फॉरेस्‍ट लैंड डाइवर्सन और इस तरह की बाकी गतिविधियां आती हैं, उसके लिए 87 करोड़ रुपये की राशि भी स्‍वीकृत कर दी है. इसी प्रकार सतना-सेमरिया, सिरमौर और डभौरा, जिसकी लंबाई कुल मिलाकर 106 किलोमीटर है, यह हम कहें तो यह बहुत अच्‍छी स्‍थिति की सड़क है. यहां पर भी 5.50 मीटर की चौड़ाई है, वहां पर जो ट्रैफिक का घनत्‍व है, हम जानते हैं कि अगर किसी भी रोड को अपग्रेड करना हो, नेशनल हाईवे में या उसकी चौड़ाई बढ़ाना हो तो उसके लिए यातायात के घनत्‍व को देखा जाता है क्‍योंकि इण्‍डियन रोड कांग्रेस का जो कोड है 731980, उसके प्रावधानों के अनुसार जो 7 मीटर चौड़ाई की रोड अगर कोई बनना है तो उसके लिए पैंसेजर कार यूनिट प्रतिदिन 5 हजार से 10 हजार होना चाहिए. वर्तमान में इस मार्ग पर जो यातायात का घनत्‍व है यानि पैसेंजर कार यूनिट है, वह प्रतिदिन केवल 3 हजार से 4 हजार के बीच में है. इसलिए इससे स्‍थिति स्‍पष्‍ट हो जाती है.

          अध्‍यक्षम महोदय, इनका दूसरा संकल्‍प है नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्‍डिया अंतर्गत सेमरिया से उत्‍तर प्रदेश के जंगल से होकर मानिकपुर शहर को जोड़ने वाले मार्ग के निर्माण की, जो इन्‍होंने अभी मांग की है. अध्‍यक्ष महोदय, यह जो मार्ग है, यह उत्‍तर प्रदेश के जंगल से होकर मानिकपुर शहर को जोड़ने वाला मार्ग है, जिसमें मध्‍यप्रदेश के अंतर्गत सेमरिया से मेनहा तक, यहां तक मध्‍यप्रदेश की सीमा है और ये कुल मिलाकर जो हमारा राज्‍य राजमार्ग है क्रमांक 14, इसकी लंबाई भी 10 किलोमीटर है और चौड़ाई 7.00 मीटर है और यह भी बहुत अच्‍छी स्‍थिति में है. माननीय सदस्‍य ने मेनहा से मानिकपुर तक के सड़क के निर्माण की जो मांग की है तो मेनहा से जो मानिकपुर का हिस्‍सा है, वह मध्‍यप्रदेश के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, वह उत्‍तर प्रदेश के हिस्‍से की सड़क है और उसमें भी वन क्षेत्र है और इसलिए मध्‍यप्रदेश सरकार चाहे भी तो भी वहां किसी तरह की कोई योजना नहीं बना सकती. लेकिन माननीय सदस्‍य की अपनी चिंता है, क्षेत्र में विकास के निर्माण को लेकर जागरूकता है तो हम ये उनको आश्‍वस्‍त कर सकते हैं कि उत्‍तर प्रदेश सरकार को मध्‍यप्रदेश सरकार एक अनुरोध पत्र लिखेगी और जिसमें इसका आग्रह करेगी कि भविष्‍य में अपने प्‍लान में उसको जोड़कर वहां पर सड़क का निर्माण करे. पहले भी जिस रिंग रोड की बात उन्‍होंने की है, जिसके बारे में विस्‍तार से अभी मैंने जानकारी दी है, वहां पर चूँकि सड़क ही नहीं है और इसलिए एक बार उसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट हम बुला लेंगे, सरकार बुला लेगी, विभाग बुलवा लेगा और उसके आधार पर जो आगे की कार्ययोजना होगी, उसके बारे में माननीय सदस्‍य को अवगत कराएंगे. मुझे लगता है कि ये वस्‍तुस्‍थिति है और माननीय सदस्‍य वरिष्‍ठ हैं, यहां की व्‍यवस्‍था,  कार्यवाही और परंपरा, इन तीनों को जानते हैं, इसलिए मेरा आग्रह है कि मैंने विस्‍तार से आपकी बात का उत्‍तर दिया है, यह अशासकीय संकल्‍प है तो साथ में मेरा निवेदन भी है कि इस संकल्‍प को आप वापस लेकर सहयोग प्रदान करें.

          श्री अभय कुमार मिश्रा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने अशासकीय संकल्‍प क्‍यों लगाया. अगर हमारी राज्‍य सरकार का मामला होता तो हम दूसरे प्‍लेटफॉर्म पर जाते, अशासकीय संकल्‍प इसीलिए लगाया क्‍योंकि यह उत्‍तर प्रदेश और मध्‍यप्रदेश के बीच का एक मामला है, जिसमें दो राज्‍य शामिल है और दूसरा जो हमने अशासकीय संकल्‍प लगाया, उसमें आपने जो फिजिबिलिटी टेस्‍ट की बात की है कि इतना ट्रैफिक होना चाहिए, तभी हम कर पायेंगे. यहां पर थोड़ी सी चूक हो रही है. ये इंटर स्‍टेट कनेक्‍टिविटी प्‍लान, जो एनएचएआई का भारत सरकार ने, माननीय मोदी जी की सरकार ने पूरे देश में किया है, यह उसके अंतर्गत लिया गया है. इंटर स्‍टेट कनेक्‍टिविटी, इसके लिए नहीं कि ट्राफिक का संचालन कितना है, दो राज्‍यों को जोड़ना है, इसका अंतिम उद्देश्‍य शंकरगढ़ पहुँचना है, यूपी के शंकरगढ़ से यह घोषित राजमार्ग है. आपको उन्‍होंने बाकी जानकारी भी दी है. बाकी सब चीजें सही हैं, पर उसका जो कारण बता रहे हैं कि फिजिबिलिटी टेस्‍ट, यह हमारी प्रैक्‍टिस में है, हम अगर मध्‍यप्रदेश में कोई रोड बनाते हैं या कुछ करते हैं, उससे संबंधित है, जैसे सेमरिया से मानिकपुर रोड बनी, एन्‍युटी में बनी, एन्‍युटी टोल के रोड में बनी, उस समय आपकी राज्‍य सरकार ने एक योजना बनाई कि हमको जितने स्‍टेट हाइवे हैं, उनको पहले कैडर में लेना है. आपने उसको उठाकर ले लिया, एन्‍युटी टोल में लगा दिया.आप 5 करोड़ 4 लाख रुपये हर वर्ष कांट्रेक्‍टर को दे रहे हैं. यूपी बॉर्डर तक बना दिया है. 

          अध्‍यक्ष महोदय - अभय मिश्रा जी, आप संकल्‍प के पक्ष में पूरी बात प्रस्‍तुत कर चुके हैं.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता था कि हम यह ध्‍यान नहीं दे पाये कि यह रोड मानिकपुर के जंगल में जाकर खत्‍म हो जाती है.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी ने आपको अनुरोध किया है कि आप संकल्‍प वापस ले लें.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - मैं दो निवेदन करना चाहता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय - क्‍या आप संकल्‍प वापस लेने को तैयार हैं ?

          श्री अभय कुमार मिश्रा - अध्‍यक्ष महोदय, मैं बस दो निवेदन कर लूँ फिर जैसा आप आदेश करेंगे. मैं यह कह रहा हूँ कि एक तो यूपी गवर्नमेंट से रिक्‍वेस्‍ट करके, आपके माध्‍यम से उनकी सहमति लेकर दोनों सरकारों के माध्‍यम से चूंकि जंगल उन्‍हीं के क्षेत्र में 6 किलोमीटर या 9 किलोमीटर का है. यदि इसमें आप कृपा कर दें तो हमारे सेमरिया का भला हो जाये. दूसरा, जो यह इन्‍टर स्‍टेट कनेक्टिविटी के माध्‍यम से सब कुछ कम्‍पलीट रखा हुआ है, मोर्थ में है. आपके भोपाल के कार्यालय में आज अभी हमने 4 बजे के लगभग पता लगा लिया, लेकिन मैं थोड़ा लेट हो गया. मैं वहां से डॉक्‍यूमेंट्स नहीं निकलवा पाया, तो आप मेरा संकल्‍प वापस नहीं करवाइये, आपके थोड़ा हाथ लगा देने से केन्‍द्र सरकार के पैसे से भी हमारा मार्ग बन जायेगा तो मैं यह चाहता हूँ कि आपका संरक्षण मिल जाये. आपका आश्‍वासन मिल जाये. आप इसको स्‍वीकार कर लें और हमारा काम हो जायेगा. अगर यह भी नहीं हो सकता तो कम से कम वह रिंग रोड, जहां शहर में एक्‍सीडेंट हो रहे हैं, तो उसके लिए 6 किलोमीटर दे दीजिये. जो 15 करोड़ रुपये सबको दे रहे हो, उसी से कुछ दे दीजिये तो रिंग रोड वहां तक आकर मिल जाये, तो कम से कम एक्‍सीडेंट से तो बच जाएं. बस 6 किलोमीटर रोड की मांग है.

          श्री राकेश सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य के दोनों अशासकीय संकल्‍प के बिन्‍दु पर बहुत विस्‍तार से मैंने अपनी बात रखी है और माननीय सदस्‍य भी उस बात को समझ रहे हैं. उन्‍होंने खुद इस बात को स्‍वीकार किया है कि जहां वह मांग कर रहे हैं, संकल्‍प क्रमांक 2 में, वह जंगल से होकर जाने वाला उत्‍तर प्रदेश का रास्‍ता है, उत्‍तर प्रदेश की सम्‍पत्ति है. जहां मध्‍यप्रदेश सरकार अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकती है. पहले वाले मार्ग के बारे में जिस रिंग रोड के निर्माण की बात उन्‍होंने अपने अशासकीय संकल्‍प के बारे में की है, मैंने उसके बारे में भी वस्‍तु स्थिति बताई है कि वहां पर अभी सड़क है ही नहीं और इसीलिए यह सामान्‍य कार्य प्रक्रिया है. सरकार में कोई भी हो, हम सभी जानते हैं.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - भू-अर्जन हो चुका है, मुआवजा बंट चुका है.

          श्री राकेश सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, जब इस तरह की स्थिति कोई होती है तो पहले सर्वे या फिजिबिलिटी रिपोर्ट बुलवाई जाती है, उसके आधार पर ही उसके निर्णय होते हैं. मैंने दोनों ही बातें आपको कही हैं कि हम फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी बुलवाएंगे यानि सर्वे भी कराएंगे और साथ में, उत्‍तर प्रदेश सरकार को अनुरोध भी लिखेंगे. आपकी अपनी जागरूकता के कारण, आपकी अपनी चिंता के कारण और इसीलिए मेरा आपसे आग्रह है कि परंपरा का पालन करते हुए कृपया आप अपना संकल्‍प वापस ले लें.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - अध्‍यक्ष महोदय, मैं सेमरिया मानिकपुर मार्ग के लिए अपना संकल्‍प वापस लेता हूँ. सेमरिया मानिकपुर मार्ग जो जंगल से जाने वाला था, क्‍योंकि उस पर आपकी कृपा चाहिए और उत्‍तर प्रदेश राज्‍य सरकार में आपकी कृपा के माध्‍यम से वह मार्ग बनेगा. लेकिन मैं जो पहले से घोषित है, जिसको मैं पढ़ा हूँ और जिसमें मुझे मालूम है कि मोर्थ में टेण्‍डर होना ही है. वह केन्‍द्र सरकार का है, वह अपने आप हो ही जाना है तो मैं इस पाप का भागीदार क्‍यों बनूं कि मेरे क्षेत्र के लोग कहें कि आपने प्रयास नहीं किया. आपका बहुमत है. अध्‍यक्ष महोदय जी, आपकी कृपा मुझे प्राप्‍त हो पाती है कि नहीं हो पाती. लेकिन मैं उस संकल्‍प को आपके पास रखता हूँ और निवेदन करता हूँ कि उसको मैं वापस नहीं ले रहा हूँ. उस पर आप कुछ निर्णय कर दें.

          अध्‍यक्ष महोदय - अभय जी, अब मैं आपसे जो सरकार का आग्रह है, उसे दोहराता हूँ. क्‍या माननीय सदस्‍य इस संकल्‍प को वापस लेने के पक्ष में हैं ?  आप 'हां' या '' में जवाब दें.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - अध्‍यक्ष महोदय, जो सेमरिया मानिकपुर है, उसका 'हां' और जो बाकी सिरमौर-डभौरा शंकरगढ़ है, उसका '' है.  

          श्री राकेश सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह एक ही संकल्‍प के दोनों बिन्‍दु हैं और इसीलिए या तो दोनों पर एक ही स्थिति बनेगी अथवा नहीं बनेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय - संकल्‍प एक ही है.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - दोनों अलग-अलग हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - वह अलग-अलग नहीं हैं. यदि संकल्‍प अलग होता तो संकल्‍प का नम्‍बर बदल जाता. एक ही संकल्‍प है. आप अगर वापस लेने को तैयार नहीं हैं, तो मैं मतदान के लिए सदन से आग्रह करता हूँ.

          श्री अभय कुमार मिश्रा - मैं संकल्‍प वापस लेने के लिये तैयार नहीं हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय - सदन का यह मत है कि रीवा जिले के विधान सभा क्षेत्र सेमरिया में नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया की कई वर्ष पूर्व घोषित राष्‍ट्रीय राजमार्ग सतना-सेमरिया एवं सेमरिया बायपास (रिंगरोड) होकर सिरमौर-डभौरा मार्ग का निर्माण किया जाये.

संकल्‍प अस्‍वीकृत हुआ.

          अध्‍यक्ष महोदय--  विधानसभा की कार्यवाही सोमवार दिनांक 12 फरवरी, 2024 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित.

            अपराह्न 5.35 बजे विधानसभा की कार्यवाही सोमवार, दिनांक 12 फरवरी, 2024 ( 23 माघ, शक संवत् 1945 ) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित की गई.

 

भोपाल :                                                                           अवधेश प्रताप  सिंह

दिनांक- 9 फरवरी, 2024                                                          प्रमुख सचिव

                                                                                 मध्‍यप्रदेश विधान सभा